“In order to achieve our goals our method must be as clean as our ultimate result.” Former President Rajendra Prasad was born today in 1884 and has the unique position of not only serving two tenures as India’s President but also as the first of the newly minted Independent India. Dr. Rajendra Prasad a freedom fighter, lawyer and teacher is still remembered for his unwavering dedication to his duty and his country. #FirstPresidentOfIndia #DrRajendraPrasad
जला अस्थियाँ बारी-बारी चिटकाई जिनमें चिंगारी, जो चढ़ गये पुण्यवेदी पर लिए बिना गर्दन का मोल कलम, आज उनकी जय बोल।
पीकर जिनकी लाल शिखाएँ उगल रही सौ लपट दिशाएं, जिनके सिंहनाद से सहमी धरती रही अभी तक डोल कलम, आज उनकी जय बोल। (दिनकर) माँ भारती को परतंत्रता की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए केवल 19 वर्ष की आयु में अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर शहीद खुदीराम बोस जी की जयंती पर शत-शत नमन।
आपका साहस और बलिदान सदैव देश की नई पीढ़ियों को प्रेरणा देते रहेंगे।🙏
1) ऊँ श्री विष्णवे नम: 2) ऊँ श्री परमात्मने नम: 3) ऊँ श्री विराट पुरुषाय नम: 4) ऊँ श्री क्षेत्र क्षेत्राज्ञाय नम:) ऊँ श्री केशवाय नम: 6) ऊँ श्री पुरुषोत्तमाय नम: 7) ऊँ श्री ईश्वराय नम: 8) ऊँ श्री हृषीकेशाय नम: 9) ऊँ श्री पद्मनाभाय नम: 10) ऊँ श्री विश्वकर्मणे नम: 11) ऊँ श्री कृष्णाय नम:12) ऊँ श्री प्रजापतये नम: 13) ऊँ श्री हिरण्यगर्भाय नम: 14) ऊँ श्री सुरेशाय नम: 15) ऊँ श्री सर्वदर्शनाय नम: 16) ऊँ श्री सर्वेश्वराय नम: 17) ऊँ श्री अच्युताय नम:18) ऊँ श्री वासुदेवाय नम: 19) ऊँ श्री पुण्डरीक्षाय नम: 20) ऊँ श्री नर-नारायणा नम: 21) ऊँ श्री जनार्दनाय नम: 22) ऊँ श्री लोकाध्यक्षाय नम: 23) ऊँ श्री चतुर्भुजाय नम: 24) ऊँ श्री धर्माध्यक्षाय नम:25) ऊँ श्री उपेन्द्राय नम: 26) ऊँ श्री माधवाय नम: 27) ऊँ श्री महाबलाय नम: 28) ऊँ श्री गोविन्दाय नम: 29) ऊँ श्री प्रजापतये नम: 30) ऊँ श्री विश्वातमने नम: 31) ऊँ श्री सहस्त्राक्षाय नम:32) ऊँ श्री नारायणाय नम: 33) ऊँ श्री सिद्ध संकल्पयाय नम: 34) ऊँ श्री महेन्द्राय नम: 35) ऊँ श्री वामनाय नम: 36) ऊँ श्री अनन्तजिते नम: 37) ऊँ श्री महीधराय नम: 38) ऊँ श्री गरुडध्वजाय नम:39) ऊँ श्री लक्ष्मीपतये नम: 40) ऊँ श्री दामोदराय नम: 41) ऊँ श्री कमलापतये नम: 42) ऊँ श्री परमेश्वराय नम: 43) ऊँ श्री धनेश्वराय नम: 44) ऊँ श्री मुकुन्दाय नम: 45) ऊँ श्री आनन्दाय नम: 46) ऊँ श्री सत्यधर्माय नम:47) ऊँ श्री उपेन्द्राय नम: 48) ऊँ श्री चक्रगदाधराय नम: 49) ऊँ श्री भगवते नम: 50) ऊँ श्री शान्तिदाय नम: 51) ऊँ श्री गोपतये नम: 52) ऊँ श्री श्रीपतये नम: 53) ऊँ श्री श्रीहरये नम:54) ऊँ श्री श्रीरघुनाथाय नम: 55) ऊँ श्री कपिलेश्वराय नम: 56) ऊँ श्री वाराहय नम: 57) ऊँ श्री नरसिंहाय नम: 58) ऊँ श्री रामाय नम: 59) ऊँ श्री हयग्रीवाय नम: 60) ऊँ श्री शोकनाशनाय नम: 61) ऊँ श्री विशुद्धात्मने नम:62) ऊँ श्री केश्वाय नम: 63) ऊँ श्री धनंजाय नम: 64) ऊँ श्री ब्राह्मणप्रियाय नम: 65) ऊँ श्री श्री यदुश्रेष्ठाय नम: 66) ऊँ श्री लोकनाथाय नम: 67) ऊँ श्री भक्तवत्सलाय नम: 68) ऊँ श्री चतुर्मूर्तये नम: 69) ऊँ श्री एकपदे नम:70) ऊँ श्री सुलोचनाय नम: 71) ऊँ श्री सर्वतोमुखाय नम: 72) ऊँ श्री सप्तवाहनाय नम: 73) ऊँ श्री वंशवर्धनाय नम: 74) ऊँ श्री योगिनेय नम: 75) ऊँ श्री धनुर्धराय नम: 76) ऊँ श्री प्रीतिवर्धनाय नम:77) ऊँ श्री प्रीतिवर्धनाय नम: 78) ऊँ श्री अक्रूराय नम: 79) ऊँ श्री दु:स्वपननाशनाय नम: 80) ऊँ श्री भूभवे नम: 81) ऊँ श्री प्राणदाय नम: 82) ऊँ श्री देवकी नन्दनाय नम: 83) ऊँ श्री शंख भृते नम:84) ऊँ श्री सुरेशाय नम: 85) ऊँ श्री कमलनयनाय नम: 86) ऊँ श्री जगतगुरूवे नम: 87) ऊँ श्री सनातन नम: 88) ऊँ श्री सच्चिदानन्दाय नम: 89) ऊँ श्री द्वारकानाथाय नम: 90) ऊँ श्री दानवेन्द्र विनाशकाय नम: 91) ऊँ श्री दयानिधि नम:92) ऊँ श्री एकातम्ने नम: 93) ऊँ श्री शत्रुजिते नम: 94) ऊँ श्री घनश्यामाय नम: 95) ऊँ श्री लोकाध्यक्षाय नम: 96) ऊँ श्री जरा-मरण-वर्जिताय नम: 97) ऊँ श्री सर्वयज्ञफलप्रदाय नम: 98) ऊँ श्री विराटपुरुषाय नम:99) ऊँ श्री यशोदानन्दनयाय नम: 100) ऊँ श्री परमधार्मिकाय नम: 101) ऊँ श्री गरुडध्वजाय नम: 102) ऊँ श्री प्रभवे नम: 103) ऊँ श्री लक्ष्मीकान्ताजाय नम: 104) ऊँ श्री गगनसदृश्यमाय नम: 105) ऊँ श्री वामनाय नम: 106) ऊँ श्री हंसाय नम: 107) ऊँ श्री वयासाय नम: 108) ऊँ श्री प्रकटाय नम:
विभिन्न कार्यों को करते समय भगवान के विभिन्न नामों का स्मरण
विभिन्न रुचि, प्रकृति और संस्कारों के मनुष्यों के लिए भगवान ने स्वयं को अनेक नामों से व्यक्त किया है—ब्रह्म, परमात्मा, भगवान, ब्रह्मा, विष्णु, शिव, नारायण, हरि, दुर्गा, काली, तारा, अन्नपूर्णा, गॉड, इन्द्र, चन्द्र, वायु, वरुण, सूर्य, अग्नि, प्रजापति–ये सब उन्हीं के नाम हैं। प्रत्येक नाम का अर्थ वह परमात्मा ही है। यों तो प्रभु के अनन्त नाम हैं परन्तु उनका एक नाम है–‘अनामी’।सचमुच उनका कोई एक नाम नहीं है, इसलिए जिस नाम से आप पुकारेंगे, उसी नाम से वह बोल उठेगें क्योंकि वह अंतस्तल की परा वाणी के भी प्रकाशक हैं। पुराणों में मनुष्य को विभिन्न कार्यों को करते समय भगवान के अलग-अलग नाम-स्मरण करने के लिए कहा गया है, जैसे–
1)सोकर उठते ही ‘विष्णु’ का स्मरण करें–उत्तिष्ठन् कीर्तयेद् विष्णुम् । 2)निद्राकाल में मनुष्य ‘माधव’ व ‘पद्मनाभ’ का स्मरण करे–प्रस्वपन् माधवं नर: ।
3)स्नान, देवार्चन, हवन, प्रणाम तथा प्रदक्षिणा करते समय मनुष्य को ‘वासुदेव’ नाम का जप करना चाहिए–कीर्तयेद् भगवन्नाम वासुदेवेति तत्पर: ।
4)भोजन करते समय ‘गोविन्द’ व ‘जनार्दन’ का स्मरण करें–भोजने चैव गोविन्दं ।
5)औषधि-सेवन करते समय ‘अच्युत’, ‘अमृत’ व ‘विष्णु’ नामों का जप करना चाहिए । 6)संतान की प्राप्ति के लिए भक्तिपूर्वक ‘जगत्पति’ (जगदीश या जगन्नाथ) की स्तुति करने वाला कभी दु:खी नहीं होता–जगत्पतिमपत्यार्थं स्तुवन् भक्त्या न सीदति ।
7)विद्यार्थी को प्रतिदिन ‘पुरुषोत्तम’ नाम का स्मरण करना चाहिए ।
8)सभी प्रकार की नेत्र बाधाओं में नित्य-निरन्तर ‘केशव’ तथा ‘पुण्डरीकाक्ष’ नामों का जप करना चाहिए । 9)जल को पार करते समय भगवान ‘कूर्म’ (कच्छप), ‘वराह’ अथवा ‘मत्स्य’ का स्मरण करना चाहिए–कूर्मं वराहं मत्स्यं वा जलप्रतरणे स्मरेत् ।
10)कही आग लग गयी हो उसकी शान्ति के लिए ‘भ्राजिष्णु’ इस नाम का लगातार जप करना चाहिए । घर या गांव में आग लग जाने पर ‘जलशायी’ का स्मरण करना चाहिए–अग्निदाहे समुत्पन्ने संस्मरेज्जलशायिनम् ।
11)अत्यन्त घोर अंधकार में डाकू तथा शत्रुओं की संभावना होने पर मनुष्य को बारम्बार ‘नरसिंह’ नाम का स्मरण करना चाहिए 12)‘गरुणध्वज’ नाम के बारम्बार स्मरण से मनुष्य से सर्पविष का प्रभाव दूर हो जाता है ।
13)युद्ध के लिए जाते समय ‘अपराजित’ नाम का स्मरण करना चाहिए–संग्रामाभिमुखे गच्छन् संस्मरेदपराजितम् ।
14)सम्पूर्ण अरिष्टों के निवारण के लिए सदा ‘विशोक’ नाम का जप करना चाहिए–अरिष्टेषु ह्यशेषेषु विशोकं च सदा जपेत् ।
15)बंधन में पड़ा हुआ मनुष्य नित्य ही’ दामोदर’ नाम का जप करे–दामोदरं बन्धगतो नित्यमेव जपेन्नर: । 16)भय-नाश के लिए ‘हृषीकेश’ नाम का स्मरण करना चाहिए–हृषीकेशं भयेषु च ।
17)सब प्रकार के अभ्युदय के लिए ‘श्रीश’ व ’श्रीपति’ नाम का बार-बार उच्चारण करना चाहिए–श्रीशं सर्वाभ्युदयिके कर्मण्याशु प्रकीर्तयेत् ।
18)धन-धान्यादि की स्थापना के समय मनुष्य को श्रद्धापूर्वक ‘अनन्त’ व ‘अच्युत’ इन नामों का स्मरण करना चाहिए ।
19)परदेश जाते समय या परदेश में रहते समय कल्याण चाहने वाले व्यक्ति को ‘चक्री’ (चक्रपाणि), ‘गदी’ (गदाधर), ‘शांर्गी’ (शांर्गधर) तथा ‘खंगी’ (खंगधर)–इन नामों का स्मरण करना चाहिए । 20)मांगलिक कार्यों में मंगलकारी ‘श्रीविष्णु’ का स्मरण करें–मंगल्यं मंगले विष्णुं मंगल्येषु च कीर्तयेत् ।
21)युद्ध के समय युद्धार्थी मनुष्य ‘बलभद्र’ का स्मरण करे–बलभद्रं तु युद्धार्थी ।
22)खेती के आरम्भ में किसान ‘हलायुध’ का स्मरण करे–कृष्यारम्भे हलायुधम् ।
23)व्यापार करने वाले वैश्य ‘उत्तारण’ का चिन्तन करें व अभ्युदय की इच्छा रखने वाला ‘राम’ का स्मरण करे–उत्तारणं वणिज्यार्थी राममभ्युदये नृप । 24)अभीष्ट कामना की सिद्धि के लिए ‘काम’, ‘कामप्रद’, ‘कान्त’, ‘कामपाल’, ‘हरि’, ‘आनन्द’ और‘माधव’–इन नामों का जप करना चाहिए–काम: कामप्रद: कान्त: कामपालस्तथा हरि: । आनन्दो माधवश्चैव कामसंसिद्धये जपेत् ।।
25)शत्रुओं पर विजय पाने की इच्छा वाले लोगों को ‘राम’, ‘परशुराम’, ‘नृसिंह’, ‘विष्णु’ तथा ‘विक्रम’ इन भगवन्नामों का जप करना चाहिए ।
26)स्वेच्छा या परइच्छावश किसी निर्जन स्थान में पहुंचने पर, आंधी-तूफान, अग्नि (दावानल), अगाध जलराशि में फंसने पर जब प्राण संकट में हों तो बुद्धिमान मनुष्य को ‘वासुदेव’ नाम का जप करना चाहिए । 27)समस्त व्यवहारों में सदा मनुष्य ‘अजित’, ‘अधिप’, ‘सर्व’ तथा ‘सर्वेश्वर’–इन नामों का स्मरण करे ।
28)हर समय मानव ‘मधुसूदन’ का चिन्तन करें।
29)आर्त, दु:खी, शिथिल व घोर वन में सिंह आदि से भयभीत मनुष्य को ‘नारायण’ नाम का स्मरण करना चाहिए —
आर्ता विषण्णा: शिथिलाश्च भीता, घोरेषु च व्याघ्रादिषु वर्तमाना: । संकीर्त्य नारायण शब्दमात्रं, विमुक्तदु:खा: सुखिनो भवन्ति ।। (पाण्डव-गीता)श्रीमद्भागवत (३।९।१५) में ब्रह्माजी कहते हैं– ‘जो लोग प्राण जाते समय आपके अवतार, गुण और कर्मों को बताने वाले देवकीनन्दन, भक्तवत्सल, गोवर्धनधारी आदि नामों का विवश होकर भी उच्चारण करते हैं, वे अनेक जन्मों के पापों से अमृत ब्रह्मपद को प्राप्त करते हैं ।’
जैसे आग बुझा देने के लिए जल और अन्धकार को नष्ट कर देने के लिए सूर्योदय समर्थ है, उसी प्रकार कलियुग की पापराशि का शमन में ‘श्रीहरि’ और ‘गोविन्द’ नाम का कीर्तन समर्थ है ।
श्रीमद्भागवत (१२।१२।४६) के अनुसार– ‘जो मनुष्य गिरते-पड़ते, फिसलते, दु:ख भोगते अथवा छींकते समय विवशता से भी ऊंचे स्वर में ‘हरये नम:’ बोल उठता है, वह सब पापों से मुक्त हो जाता है ।’भगवत्प्राप्ति के लिए-
पुरानन को पार नहिं बेदन को अंत नहिं, बानी तो अपार कहाँ-कहाँ चित्त दीजिए। लाखन की एक कहूँ, कहूँ एक करोड़न की, बही को सार एक रामनाम लीजिए ।।
भगवान के सभी नाम समान महत्त्व रखते हैं, किसी भी नाम में ऊंच-नीच का भाव नहीं रखना चाहिए क्योंकि भगवान के नाम मनुष्य के पथ-प्रदर्शक, प्रकाश-स्तम्भ, अपार शक्ति-सम्पन्न और भवसागर से पार उतारने वाले हैं।
!! जय श्री हरि विष्णु !!श्रीहरि विष्णु ॐ नमोस्तुते ओम् नमो भगवते वासुदेवाय नमः✨️🙏💥🌼🌸
"Today, we celebrate #ConstitutionDay, honoring the adoption of the Indian Constitution on November 26, 1949. Let’s reaffirm our commitment to the values of justice, liberty, equality, and fraternity enshrined in it. We reaffirm our commitment to uphold and cherish the values enshrined in our Constitution for a brighter and inclusive future.
Modi Govt weeds out 5.8 cr Fake ration cards through digital verification. Benefits of PM Garib Kalyan Yojna (FREE Ration) was getting into wrong hands via fake ration cards. 99.8% beneficiaries of are now digitally verified.
भारत ने बनाया रिकॉर्ड!पहली बार एक दिन में 5 लाख से ज्यादा लोगों ने घरेलू विमानों में किया सफर!भारत में पहली बार एक दिन में घरेलू हवाई यात्रियों की तादाद 5 लाख के पार हो गई, जो एक नया रिकॉर्ड है।यह त्योहारी और शादी के मौसम में यात्रा की मजबूत डिमांड को दिखाता है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, 17 नवंबर को भारतीय आसमान ने एक ऐतिहासिक मील का पत्थर देखा, जब एक ही दिन में 5,05,412 यात्रियों ने डोमेस्टिक उड़ान भरी, जो पहली बार 5 लाख का आंकड़ा पार कर गया।
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“In order to achieve our goals our method must be as clean as our ultimate result.”
Former President Rajendra Prasad was born today in 1884 and has the unique position of not only serving two tenures as India’s President but also as the first of the newly minted Independent India. Dr. Rajendra Prasad a freedom fighter, lawyer and teacher is still remembered for his unwavering dedication to his duty and his country.
#FirstPresidentOfIndia
#DrRajendraPrasad
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Gorakhpur Express
जला अस्थियाँ बारी-बारी
चिटकाई जिनमें चिंगारी,
जो चढ़ गये पुण्यवेदी पर
लिए बिना गर्दन का मोल
कलम, आज उनकी जय बोल।
पीकर जिनकी लाल शिखाएँ
उगल रही सौ लपट दिशाएं,
जिनके सिंहनाद से सहमी
धरती रही अभी तक डोल
कलम, आज उनकी जय बोल।
(दिनकर)
माँ भारती को परतंत्रता की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए केवल 19 वर्ष की आयु में अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर शहीद खुदीराम बोस जी की जयंती पर शत-शत नमन।
आपका साहस और बलिदान सदैव देश की नई पीढ़ियों को प्रेरणा देते रहेंगे।🙏
#KhudiramBose
#khudirambose
#खुदीरामबोस
#freedomfighter #IndianIndependenceMovement
@kayasthaVimarsh
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Gorakhpur Express
भगवान विष्णु✨️🙏💥🌸🌼 के 108 नाम.....!!
1) ऊँ श्री विष्णवे नम:
2) ऊँ श्री परमात्मने नम:
3) ऊँ श्री विराट पुरुषाय नम:
4) ऊँ श्री क्षेत्र क्षेत्राज्ञाय नम:) ऊँ श्री केशवाय नम:
6) ऊँ श्री पुरुषोत्तमाय नम:
7) ऊँ श्री ईश्वराय नम:
8) ऊँ श्री हृषीकेशाय नम:
9) ऊँ श्री पद्मनाभाय नम:
10) ऊँ श्री विश्वकर्मणे नम:
11) ऊँ श्री कृष्णाय नम:12) ऊँ श्री प्रजापतये नम:
13) ऊँ श्री हिरण्यगर्भाय नम:
14) ऊँ श्री सुरेशाय नम:
15) ऊँ श्री सर्वदर्शनाय नम:
16) ऊँ श्री सर्वेश्वराय नम:
17) ऊँ श्री अच्युताय नम:18) ऊँ श्री वासुदेवाय नम:
19) ऊँ श्री पुण्डरीक्षाय नम:
20) ऊँ श्री नर-नारायणा नम:
21) ऊँ श्री जनार्दनाय नम:
22) ऊँ श्री लोकाध्यक्षाय नम:
23) ऊँ श्री चतुर्भुजाय नम:
24) ऊँ श्री धर्माध्यक्षाय नम:25) ऊँ श्री उपेन्द्राय नम:
26) ऊँ श्री माधवाय नम:
27) ऊँ श्री महाबलाय नम:
28) ऊँ श्री गोविन्दाय नम:
29) ऊँ श्री प्रजापतये नम:
30) ऊँ श्री विश्वातमने नम:
31) ऊँ श्री सहस्त्राक्षाय नम:32) ऊँ श्री नारायणाय नम:
33) ऊँ श्री सिद्ध संकल्पयाय नम:
34) ऊँ श्री महेन्द्राय नम:
35) ऊँ श्री वामनाय नम:
36) ऊँ श्री अनन्तजिते नम:
37) ऊँ श्री महीधराय नम:
38) ऊँ श्री गरुडध्वजाय नम:39) ऊँ श्री लक्ष्मीपतये नम:
40) ऊँ श्री दामोदराय नम:
41) ऊँ श्री कमलापतये नम:
42) ऊँ श्री परमेश्वराय नम:
43) ऊँ श्री धनेश्वराय नम:
44) ऊँ श्री मुकुन्दाय नम:
45) ऊँ श्री आनन्दाय नम:
46) ऊँ श्री सत्यधर्माय नम:47) ऊँ श्री उपेन्द्राय नम:
48) ऊँ श्री चक्रगदाधराय नम:
49) ऊँ श्री भगवते नम:
50) ऊँ श्री शान्तिदाय नम:
51) ऊँ श्री गोपतये नम:
52) ऊँ श्री श्रीपतये नम:
53) ऊँ श्री श्रीहरये नम:54) ऊँ श्री श्रीरघुनाथाय नम:
55) ऊँ श्री कपिलेश्वराय नम:
56) ऊँ श्री वाराहय नम:
57) ऊँ श्री नरसिंहाय नम:
58) ऊँ श्री रामाय नम:
59) ऊँ श्री हयग्रीवाय नम:
60) ऊँ श्री शोकनाशनाय नम:
61) ऊँ श्री विशुद्धात्मने नम:62) ऊँ श्री केश्वाय नम:
63) ऊँ श्री धनंजाय नम:
64) ऊँ श्री ब्राह्मणप्रियाय नम:
65) ऊँ श्री श्री यदुश्रेष्ठाय नम:
66) ऊँ श्री लोकनाथाय नम:
67) ऊँ श्री भक्तवत्सलाय नम:
68) ऊँ श्री चतुर्मूर्तये नम:
69) ऊँ श्री एकपदे नम:70) ऊँ श्री सुलोचनाय नम:
71) ऊँ श्री सर्वतोमुखाय नम:
72) ऊँ श्री सप्तवाहनाय नम:
73) ऊँ श्री वंशवर्धनाय नम:
74) ऊँ श्री योगिनेय नम:
75) ऊँ श्री धनुर्धराय नम:
76) ऊँ श्री प्रीतिवर्धनाय नम:77) ऊँ श्री प्रीतिवर्धनाय नम:
78) ऊँ श्री अक्रूराय नम:
79) ऊँ श्री दु:स्वपननाशनाय नम:
80) ऊँ श्री भूभवे नम:
81) ऊँ श्री प्राणदाय नम:
82) ऊँ श्री देवकी नन्दनाय नम:
83) ऊँ श्री शंख भृते नम:84) ऊँ श्री सुरेशाय नम:
85) ऊँ श्री कमलनयनाय नम:
86) ऊँ श्री जगतगुरूवे नम:
87) ऊँ श्री सनातन नम:
88) ऊँ श्री सच्चिदानन्दाय नम:
89) ऊँ श्री द्वारकानाथाय नम:
90) ऊँ श्री दानवेन्द्र विनाशकाय नम:
91) ऊँ श्री दयानिधि नम:92) ऊँ श्री एकातम्ने नम:
93) ऊँ श्री शत्रुजिते नम:
94) ऊँ श्री घनश्यामाय नम:
95) ऊँ श्री लोकाध्यक्षाय नम:
96) ऊँ श्री जरा-मरण-वर्जिताय नम:
97) ऊँ श्री सर्वयज्ञफलप्रदाय नम:
98) ऊँ श्री विराटपुरुषाय नम:99) ऊँ श्री यशोदानन्दनयाय नम:
100) ऊँ श्री परमधार्मिकाय नम:
101) ऊँ श्री गरुडध्वजाय नम:
102) ऊँ श्री प्रभवे नम:
103) ऊँ श्री लक्ष्मीकान्ताजाय नम:
104) ऊँ श्री गगनसदृश्यमाय नम:
105) ऊँ श्री वामनाय नम:
106) ऊँ श्री हंसाय नम:
107) ऊँ श्री वयासाय नम:
108) ऊँ श्री प्रकटाय नम:
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विभिन्न कार्यों को करते समय भगवान के विभिन्न नामों का स्मरण
विभिन्न रुचि, प्रकृति और संस्कारों के मनुष्यों के लिए भगवान ने स्वयं को अनेक नामों से व्यक्त किया है—ब्रह्म, परमात्मा, भगवान, ब्रह्मा, विष्णु, शिव, नारायण, हरि, दुर्गा, काली, तारा, अन्नपूर्णा, गॉड, इन्द्र, चन्द्र, वायु, वरुण, सूर्य, अग्नि, प्रजापति–ये सब उन्हीं के नाम हैं। प्रत्येक नाम का अर्थ वह परमात्मा ही है। यों तो प्रभु के अनन्त नाम हैं परन्तु उनका एक नाम है–‘अनामी’।सचमुच उनका कोई एक नाम नहीं है, इसलिए जिस नाम से आप पुकारेंगे, उसी नाम से वह बोल उठेगें क्योंकि वह अंतस्तल की परा वाणी के भी प्रकाशक हैं। पुराणों में मनुष्य को विभिन्न कार्यों को करते समय भगवान के अलग-अलग नाम-स्मरण करने के लिए कहा गया है, जैसे–
1)सोकर उठते ही ‘विष्णु’ का स्मरण करें–उत्तिष्ठन् कीर्तयेद् विष्णुम् ।
2)निद्राकाल में मनुष्य ‘माधव’ व ‘पद्मनाभ’ का स्मरण करे–प्रस्वपन् माधवं नर: ।
3)स्नान, देवार्चन, हवन, प्रणाम तथा प्रदक्षिणा करते समय मनुष्य को ‘वासुदेव’ नाम का जप करना चाहिए–कीर्तयेद् भगवन्नाम वासुदेवेति तत्पर: ।
4)भोजन करते समय ‘गोविन्द’ व ‘जनार्दन’ का स्मरण करें–भोजने चैव गोविन्दं ।
5)औषधि-सेवन करते समय ‘अच्युत’, ‘अमृत’ व ‘विष्णु’ नामों का जप करना चाहिए ।
6)संतान की प्राप्ति के लिए भक्तिपूर्वक ‘जगत्पति’ (जगदीश या जगन्नाथ) की स्तुति करने वाला कभी दु:खी नहीं होता–जगत्पतिमपत्यार्थं स्तुवन् भक्त्या न सीदति ।
7)विद्यार्थी को प्रतिदिन ‘पुरुषोत्तम’ नाम का स्मरण करना चाहिए ।
8)सभी प्रकार की नेत्र बाधाओं में नित्य-निरन्तर ‘केशव’ तथा ‘पुण्डरीकाक्ष’ नामों का जप करना चाहिए ।
9)जल को पार करते समय भगवान ‘कूर्म’ (कच्छप), ‘वराह’ अथवा ‘मत्स्य’ का स्मरण करना चाहिए–कूर्मं वराहं मत्स्यं वा जलप्रतरणे स्मरेत् ।
10)कही आग लग गयी हो उसकी शान्ति के लिए ‘भ्राजिष्णु’ इस नाम का लगातार जप करना चाहिए । घर या गांव में आग लग जाने पर ‘जलशायी’ का स्मरण करना चाहिए–अग्निदाहे समुत्पन्ने संस्मरेज्जलशायिनम् ।
11)अत्यन्त घोर अंधकार में डाकू तथा शत्रुओं की संभावना होने पर मनुष्य को बारम्बार ‘नरसिंह’ नाम का स्मरण करना चाहिए
12)‘गरुणध्वज’ नाम के बारम्बार स्मरण से मनुष्य से सर्पविष का प्रभाव दूर हो जाता है ।
13)युद्ध के लिए जाते समय ‘अपराजित’ नाम का स्मरण करना चाहिए–संग्रामाभिमुखे गच्छन् संस्मरेदपराजितम् ।
14)सम्पूर्ण अरिष्टों के निवारण के लिए सदा ‘विशोक’ नाम का जप करना चाहिए–अरिष्टेषु ह्यशेषेषु विशोकं च सदा जपेत् ।
15)बंधन में पड़ा हुआ मनुष्य नित्य ही’ दामोदर’ नाम का जप करे–दामोदरं बन्धगतो नित्यमेव जपेन्नर: ।
16)भय-नाश के लिए ‘हृषीकेश’ नाम का स्मरण करना चाहिए–हृषीकेशं भयेषु च ।
17)सब प्रकार के अभ्युदय के लिए ‘श्रीश’ व ’श्रीपति’ नाम का बार-बार उच्चारण करना चाहिए–श्रीशं सर्वाभ्युदयिके कर्मण्याशु प्रकीर्तयेत् ।
18)धन-धान्यादि की स्थापना के समय मनुष्य को श्रद्धापूर्वक ‘अनन्त’ व ‘अच्युत’ इन नामों का स्मरण करना चाहिए ।
19)परदेश जाते समय या परदेश में रहते समय कल्याण चाहने वाले व्यक्ति को ‘चक्री’ (चक्रपाणि), ‘गदी’ (गदाधर), ‘शांर्गी’ (शांर्गधर) तथा ‘खंगी’ (खंगधर)–इन नामों का स्मरण करना चाहिए ।
20)मांगलिक कार्यों में मंगलकारी ‘श्रीविष्णु’ का स्मरण करें–मंगल्यं मंगले विष्णुं मंगल्येषु च कीर्तयेत् ।
21)युद्ध के समय युद्धार्थी मनुष्य ‘बलभद्र’ का स्मरण करे–बलभद्रं तु युद्धार्थी ।
22)खेती के आरम्भ में किसान ‘हलायुध’ का स्मरण करे–कृष्यारम्भे हलायुधम् ।
23)व्यापार करने वाले वैश्य ‘उत्तारण’ का चिन्तन करें व अभ्युदय की इच्छा रखने वाला ‘राम’ का स्मरण करे–उत्तारणं वणिज्यार्थी राममभ्युदये नृप ।
24)अभीष्ट कामना की सिद्धि के लिए ‘काम’, ‘कामप्रद’, ‘कान्त’, ‘कामपाल’, ‘हरि’, ‘आनन्द’ और‘माधव’–इन नामों का जप करना चाहिए–काम: कामप्रद: कान्त: कामपालस्तथा हरि: । आनन्दो माधवश्चैव कामसंसिद्धये जपेत् ।।
25)शत्रुओं पर विजय पाने की इच्छा वाले लोगों को ‘राम’, ‘परशुराम’, ‘नृसिंह’, ‘विष्णु’ तथा ‘विक्रम’ इन भगवन्नामों का जप करना चाहिए ।
26)स्वेच्छा या परइच्छावश किसी निर्जन स्थान में पहुंचने पर, आंधी-तूफान, अग्नि (दावानल), अगाध जलराशि में फंसने पर जब प्राण संकट में हों तो बुद्धिमान मनुष्य को ‘वासुदेव’ नाम का जप करना चाहिए ।
27)समस्त व्यवहारों में सदा मनुष्य ‘अजित’, ‘अधिप’, ‘सर्व’ तथा ‘सर्वेश्वर’–इन नामों का स्मरण करे ।
28)हर समय मानव ‘मधुसूदन’ का चिन्तन करें।
29)आर्त, दु:खी, शिथिल व घोर वन में सिंह आदि से भयभीत मनुष्य को ‘नारायण’ नाम का स्मरण करना चाहिए —
आर्ता विषण्णा: शिथिलाश्च भीता,
घोरेषु च व्याघ्रादिषु वर्तमाना: ।
संकीर्त्य नारायण शब्दमात्रं,
विमुक्तदु:खा: सुखिनो भवन्ति ।। (पाण्डव-गीता)श्रीमद्भागवत (३।९।१५) में ब्रह्माजी कहते हैं– ‘जो लोग प्राण जाते समय आपके अवतार, गुण और कर्मों को बताने वाले देवकीनन्दन, भक्तवत्सल, गोवर्धनधारी आदि नामों का विवश होकर भी उच्चारण करते हैं, वे अनेक जन्मों के पापों से अमृत ब्रह्मपद को प्राप्त करते हैं ।’
जैसे आग बुझा देने के लिए जल और अन्धकार को नष्ट कर देने के लिए सूर्योदय समर्थ है, उसी प्रकार कलियुग की पापराशि का शमन में ‘श्रीहरि’ और ‘गोविन्द’ नाम का कीर्तन समर्थ है ।
श्रीमद्भागवत (१२।१२।४६) के अनुसार– ‘जो मनुष्य गिरते-पड़ते, फिसलते, दु:ख भोगते अथवा छींकते समय विवशता से भी ऊंचे स्वर में ‘हरये नम:’ बोल उठता है, वह सब पापों से मुक्त हो जाता है ।’भगवत्प्राप्ति के लिए-
पुरानन को पार नहिं बेदन को अंत नहिं,
बानी तो अपार कहाँ-कहाँ चित्त दीजिए।
लाखन की एक कहूँ, कहूँ एक करोड़न की,
बही को सार एक रामनाम लीजिए ।।
भगवान के सभी नाम समान महत्त्व रखते हैं, किसी भी नाम में ऊंच-नीच का भाव नहीं रखना चाहिए क्योंकि भगवान के नाम मनुष्य के पथ-प्रदर्शक, प्रकाश-स्तम्भ, अपार शक्ति-सम्पन्न और भवसागर से पार उतारने वाले हैं।
!! जय श्री हरि विष्णु !!श्रीहरि विष्णु ॐ नमोस्तुते
ओम् नमो भगवते वासुदेवाय नमः✨️🙏💥🌼🌸
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Gorakhpur Express
"Today, we celebrate #ConstitutionDay, honoring the adoption of the Indian Constitution on November 26, 1949. Let’s reaffirm our commitment to the values of justice, liberty, equality, and fraternity enshrined in it. We reaffirm our commitment to uphold and cherish the values enshrined in our Constitution for a brighter and inclusive future.
#NationalConstitutionDay
26November
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Gorakhpur Express
Indian Americans are the most successful people in the US.
1 year ago | [YT] | 0
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Gorakhpur Express
आठवें वेतन आयोग की मांग पर फैसला शीघ्र -
इसके पूर्व 2014 में हुआ था सातवें वेतन आयोग का गठन-
1 year ago | [YT] | 0
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Gorakhpur Express
Modi Govt weeds out 5.8 cr Fake ration cards through digital verification.
Benefits of PM Garib Kalyan Yojna (FREE Ration) was getting into wrong hands via fake ration cards.
99.8% beneficiaries of are now digitally verified.
1 year ago | [YT] | 0
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Gorakhpur Express
भारत ने बनाया रिकॉर्ड!पहली बार एक दिन में 5 लाख से ज्यादा लोगों ने घरेलू विमानों में किया सफर!भारत में पहली बार एक दिन में घरेलू हवाई यात्रियों की तादाद 5 लाख के पार हो गई, जो एक नया रिकॉर्ड है।यह त्योहारी और शादी के मौसम में यात्रा की मजबूत डिमांड को दिखाता है।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, 17 नवंबर को भारतीय आसमान ने एक ऐतिहासिक मील का पत्थर देखा, जब एक ही दिन में 5,05,412 यात्रियों ने डोमेस्टिक उड़ान भरी, जो पहली बार 5 लाख का आंकड़ा पार कर गया।
#Civilaviation #domesticairpassenger #Record
1 year ago | [YT] | 0
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Gorakhpur Express
"सर्वोदय योजना " का प्रस्ताव किसके द्वारा रखा गया था-
1 year ago | [YT] | 0
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