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1 month ago | [YT] | 1

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हिंदी पत्रकारिता दिवस 2026
लोकतंत्र की आत्मा और जनचेतना की सशक्त आवाज़

जब-जब समाज को सच की जरूरत पड़ी है, तब-तब पत्रकारिता ने अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए जनता और सत्ता के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य किया है। भारत में हिंदी पत्रकारिता का इतिहास केवल समाचारों के प्रकाशन का इतिहास नहीं है, बल्कि यह जनजागरण, सामाजिक परिवर्तन, राष्ट्रीय चेतना और लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना की गौरवशाली गाथा भी है। प्रत्येक वर्ष 30 मई को हिंदी पत्रकारिता दिवस मनाया जाता है। यह दिन हिंदी भाषा के पहले समाचार पत्र ‘उदन्त मार्तण्ड’ के प्रकाशन की स्मृति में समर्पित है, जिसने भारतीय पत्रकारिता के इतिहास में एक नए युग का सूत्रपात किया था।

3 months ago | [YT] | 1

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लू के थपेड़ों के बीच जीवन...
मई का महीना अपना रौद्र रुप के अंतिम सप्ताह में चल रहे हैं और जून का महीना आने वाले हैं। सूरज मानो आसमान से आग बरसा रहा हो। धरती तवे की तरह तप रही है और हवाओं में ऐसी जलन घुल चुकी है कि सांस लेना तक कठिन लगने लगा है। गांव की पगडंडियां सुनसान थीं। दोपहर होते-होते ऐसा लगता मानो पूरा गांव किसी अदृश्य भय से घरों में कैद हो गया हो। पेड़ों की पत्तियां धूल और गर्मी से झुलस चुकी थीं। कुएं का पानी भी गर्म हो गया था। दूर खेतों में सूखी मिट्टी की दरारें किसानों की टूटी उम्मीदों जैसी दिखाई दे रही थीं।

3 months ago | [YT] | 2

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दीवारों की कान, परछाई की शान

विनोद कुमार झा

पुराने शहर की तंग गलियों के बीचों-बीच एक विशाल हवेली खड़ी थी। उसकी ऊंची दीवारें, लकड़ी के पुराने दरवाजे और खिड़कियों पर जमी धूल मानो बीते समय की कहानियां अपने भीतर छुपाए बैठी थीं। लोग उसे “श्याम निवास” के नाम से जानते थे। मगर मोहल्ले में उसकी एक और पहचान थी “वो हवेली जिसकी दीवारों के भी कान हैं।”

3 months ago | [YT] | 4

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जय श्रीराम

3 months ago | [YT] | 1

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ससुराल बना खजाना

3 months ago | [YT] | 1

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मेघनाद और लक्ष्मण युद्ध

3 months ago | [YT] | 4

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बीते दिनों की यादें

3 months ago | [YT] | 1

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#old @ is@gold

3 months ago | [YT] | 3

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पुरुषोत्तम मास : नाम सबसे शुभ, फिर भी शुभ कार्यों में विराम क्यों?

3 months ago | [YT] | 1