जय गुरुदेव
यह चैनल साधना और ज्ञान से सम्बन्धित सभी तरह के ज्ञान के लिए बनाया गया है। मे अपनी तरफ से सम्पूर्ण कोसिस करुंगा की सरल से सरल साधनाओं की विधि व ज्ञान दे सकू। अगर आप सही तरह से नियमो का पालन करते हुए साधनाएं करते है तो सफलता आपको जरूर मिलेगी। किसी भी प्रकार की लाभ हानि या सफलता असफलता के लिए आप खुद जिम्मेदार होंगे, चैनल या चैनल से सम्बन्धित कोई भी व्यक्ति जिम्मेदार नहीं होगा। यहां पर सिद्ध मंत्रो का संपूर्ण संग्रह है फिर भी अगर कोई भी गलती मुझसे हो तो मुझे क्षमा करें
धन्यवाद
INSTAGRAM : Instagram.com/gurudev8997


Jai Gurudev

क्या आपके जीवन में भी कोई ऐसा व्यक्ति है…
जो चुपचाप नहीं बैठता?
जो आपकी बुराई करता है,
धमकी देता है,
डराने की कोशिश करता है,
या ऐसा लगता है जैसे वो कसम खा चुका है
👉 “मैं इसे बर्बाद करके ही मानूंगा…”

कभी-कभी शत्रु सामने नहीं होता,
लेकिन उसकी जीभ, उसकी सोच और उसकी नीयत
दिन-रात आपको घेर कर रखती है।

❓ क्या शत्रु की वाणी को रोका जा सकता है?
❓ क्या उसकी बुद्धि को निष्क्रिय किया जा सकता है?
❓ क्या बिना किसी नुकसान के
सिर्फ साधना से
खुद को पूरी तरह सुरक्षित किया जा सकता है?

बहुत से साधक ये सवाल
सालों से मन में दबाए बैठे हैं…
डर के साथ, चुप्पी के साथ।

👉 मैं जल्द ही एक वीडियो लेकर आ रहा हूँ
जिसमें ऐसी साधना बताई जाएगी
जो केवल 8 दिनों में
शत्रु की नकारात्मक शक्ति से
साधक को मुक्त करने में सक्षम है।

यह कोई कहानी नहीं…
यह वही ज्ञान है
जिसे अब तक खुलकर नहीं बताया गया।

🔔 अगर आप चाहते हैं कि
जैसे ही वीडियो आए
आप उसे सबसे पहले देखें,
तो अभी चैनल को Subscribe कर लें
और इंतज़ार करें…

क्योंकि
जब ये वीडियो आएगा,
तो बहुत से सवालों के जवाब
अपने आप मिल जाएंगे।

जय गुरुदेव 🙏

10 hours ago | [YT] | 5

Jai Gurudev

आपने सब कुछ किया — मंत्र
विधि
नियम
अनुशासन

लेकिन जो चाहिए था…
वो कभी सामने नहीं आया।

और फिर आपने खुद को ही दोष देना शुरू कर दिया।

“शायद मुझमें ही कमी है…”
“शायद मैं इसके लायक नहीं हूँ…”

पर अगर मैं आपसे कहूँ — गलती साधना में नहीं थी।
गलती उस जगह थी,
जहाँ आज तक किसी ने आपको देखने नहीं दिया।

एक वीडियो बहुत जल्द आ रहा है
जो साधना नहीं सिखाएगा
बल्कि बताएगा —

👉 अनुभव क्यों नहीं होते
👉 और कुछ लोगों को बिना साधना के क्यों हो जाते हैं

अगर आप साधक हैं
या कभी दिल से कुछ पाना चाहते थे…

तो इस चैनल को सब्सक्राइब कर लीजिए।
क्योंकि ये वीडियो
सिर्फ देखने के लिए नहीं…
महसूस करने के लिए है।

4 days ago | [YT] | 21

Jai Gurudev

क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है…

बिना वजह किसी का ख्याल आना,
किसी चेहरे में खो जाना,
और ये महसूस होना कि
कोई अदृश्य शक्ति आपको अपनी ओर खींच रही है?

आज जंगल की उस गहराई से
एक ऐसा रहस्य बाहर आने वाला है
जिसे अब तक सिर्फ
चुने हुए साधक ही जानते थे।

ये कोई सामान्य वीडियो नहीं होगी…
ये एक अनुभव होगा।

अगर ये पोस्ट आपको दिख रही है
तो समझ लीजिए —
ये संयोग नहीं है।

🔔 वीडियो बहुत जल्द आ रही है
और जो इसे सबसे पहले देखेगा
वही असली बात समझ पाएगा।

इस चैनल से जुड़े रहिए
क्योंकि यहाँ वो बताया जाता है
जो बाहर नहीं मिलता 🔱

5 days ago | [YT] | 18

Jai Gurudev

ये पोस्ट अगर आपकी नज़र में आ गई है
तो इसे सिर्फ इत्तेफाक मत समझिए।

बहुत लोग अप्सरा साधना खोजते हैं…
लेकिन सुगंध मोदिनी
सिर्फ कुछ लोगों को ही स्वीकार करती है।

आने वाली वीडियो में
वो सब बताया जाएगा
जो आज तक खुलकर नहीं बताया गया —

🔹 सही संकल्प
🔹 सुरक्षा घेरा
🔹 अप्सरा के दर्शन का संकेत
🔹 और सबसे ज़रूरी —
जब वो सामने आए तो क्या करें

अगर आपके मन में हल्की-सी भी
खिंचाव महसूस हो रही है…

तो समझ जाइए
ये वीडियो आपका इंतज़ार कर रही है।

⏳ वीडियो बहुत जल्द आ रही है
सब्सक्राइब करके तैयार रहिए।

6 days ago | [YT] | 37

Jai Gurudev

कभी ऐसा लगा है कि
आप बोल रहे हैं… लेकिन कोई सुन नहीं रहा?
आप समझा रहे हैं… लेकिन कोई मान नहीं रहा?

कुछ रिश्तों में
शब्द काम नहीं करते,
वहाँ ऊर्जा काम करती है।

इस वीडियो में बताई गई साधना
सिर्फ लौंग से है —
और सिर्फ एक दिन की।

⚠️ अधूरी जानकारी खतरनाक हो सकती है
इसलिए इसे पूरा देखना जरूरी है।

👉 वीडियो अब चैनल पर है।

1 week ago | [YT] | 12

Jai Gurudev

आध्यात्मिकता की राह पर चलकर खुद को मानते हैं बाकियों से बेहतर, तो जान लीजिए कि अध्यात्म आपको खास नहीं बल्कि सामान्य बनाता है I

अध्यात्म हरेक व्यक्ति के जीवन में कुछ खास विशेषताएं जोड़ता है जिससे कई लोगों को ऐसा महसूस होने लगता है कि वो बाकियों से बेहतर और सर्वश्रेष्ठ हैं। क्या वाकई में ऐसा है या फिर ऐसा सोचकर आप अध्यात्म के मूल उद्देश्य से भटक रहे हैं? क्या वाकई में अध्यात्म की राह पर चलकर आप खास बन जाते हैं,

क्या आप भी सोचते हैं कि अगर आप आध्यात्मिक हैं, तो खास हैं?

एक वक्त ऐसा था जब कुछ खास स्वभाव, प्रकृति अथवा वर्ग के लोग ही आध्यात्मिक होते थे या अध्यात्म का अभ्यास करते थे और उनका समाज में काफी सम्मान होता था क्योंकि लोगों का सोचना था कि अध्यात्मिक व्यक्ति आत्मज्ञानी होते हैं और वो सबका मार्गदर्शन कर सकते हैं। आज के दौर में आध्यात्मिक होना उतना सीमित नहीं रहा जितना पहले था और आज अध्यात्म हर दौर की तुलना में अधिक लोकप्रिय है। लेकिन एक चीज है जो अब तक नहीं बदली है और वह है ऐसे लोगों का खुद को खास और आत्मज्ञानी महसूस करने की मानसिकता। तो, सवाल यह है कि क्या वाकई में आपका आध्यात्मिक होना आपको खास बनाता है?

अध्यात्म आपको खास नहीं, बल्कि सामान्य बनाता है
अध्यात्म आपको खास नहीं, बल्कि सामान्य और इस जगत के लिए नगण्य बनाने का प्रयास करता है। वह आपको इस भौतिक जगत की मोह-माया, दुःख-तकलीफ से दूर कर खुद से आपका परिचय करवाता है। अध्यात्म का उद्देश्य ही है कि आप इस मनोविकार से दूर हों कि आप खास हैं, लेकिन अगर फिर भी आप खास बनने की दौड़ में शामिल हैं, तो आप अध्यात्म का नहीं बल्कि किसी और चीज का अभ्यास कर रहे हैं। जो लोग अध्यात्म में इस मानसिकता के साथ आगे बढ़ते हैं, वो अंत में आध्यात्मिक अहंकार का शिकार हो जाते हैं और वहां उनकी आध्यात्मिक यात्रा रुक जाती है और आत्मज्ञान नष्ट होने लगता है।
इसे 'जागरूक' एवं 'चेतनामयी' कहना ठीक है I

खास होने का अर्थ है कि आपके पास कुछ ऐसा हो, जो किसी के पास नहीं। अध्यात्म की यात्रा अंतहीन है, ऐसे में आप कैसे तय करेंगे कि आप कहां पहुँचकर यह महसूस कर सकते हैं कि जो आपके पास है, वो किसी के पास नहीं। अध्यात्म आपको एक अलग स्वभाव, लक्ष्य एवं पथ जरूर देता है लेकिन इसे 'खास' कहना सही नहीं होगा, बल्कि इसे 'जागरूक' एवं 'चेतनामयी' कहना ठीक है। हां, इस संदर्भ में आप जरूर खास हैं, अगर आपको पता है कि आपको क्या चाहिए और आपको उसे पाने का तरीका भी पता है। ये स्पष्ट सोच आपको आध्यात्मिक विकास देगी लेकिन यह सोचना की आप खास हैं, आपको बस पृथक बना देगी । अब आप खुद से यह सवाल पूछकर देखिए कि क्या आपने आध्यात्मिक होना इसलिए चुना था कि आप एक खास रेस में भाग ले सकें? आपको अपना जवाब खुद ही मिल जाएगा।
आप अध्यात्म के मूल लक्ष्य से अभी कोसों दूर हैं I

कुछ आध्यात्मिक अभ्यास कर अथवा केवल कुछ छोटे-मोटे लक्ष्यों को हासिल कर संतुष्ट हो जाना या ये समझ लेना कि आप बाकियों से ऊपर और ज्ञानी बन चुके हैं, यह दर्शाता है कि आप अध्यात्म के मूल लक्ष्य से अभी कोसों दूर हैं। अध्यात्म आपके मन से इन्हीं मनोविकारों को दूर करने का प्रयास है, जबकि आप तो उन्हीं मनोविकारों का शिकार हो रहे। अध्यात्म आपको आपकी अपनी आत्मा से परिचय करा रहा और बता रहा कि अब तक तुमने जो भी इस भौतिक संसार में कमाया है, वो सब मिथ्या है, वो तुम्हारा असली जीवन, असली सफलता नहीं... इसलिए विनम्र बनो, कृतज्ञ बनो! जबकि आप दूसरों को यह बताने के लिए आतुर हैं कि आपने क्या पाया, आप कैसे खास हैं और कैसे अलग हैं! तो अब सवाल यह है कि क्या आप वाकई अध्यात्म की राह पर हैं? खुद सोचिये, जवाब आपको जरूर मिल जाएगा!

जय गुरुदेव

1 month ago | [YT] | 27

Jai Gurudev

यदि आप गुरु के पवित्र होठों से निकलने वाले अमरत्व के आध्यात्मिक अमृत का पान करना चाहते हैं, तो आपको नम्रता और नम्रता का अवतार बनना होगा। मन की निचली प्रकृति को पूरी तरह से पुनर्जीवित किया जाना चाहिए। साधक अपने गुरु से कहता है, मैं योग का अभ्यास करना चाहता हूँ। मैं निर्विकल्प समाधि में प्रवेश करना चाहता हूं। मैं आपके चरणों में बैठना चाहता हूं. मैंने खुद को आपके हवाले कर दिया है।”

परन्तु वह अपने निम्न स्वभाव और आदतों, पुराने चरित्र, व्यवहार और आचरण को बदलना नहीं चाहता।
किसी को अपने व्यक्तिगत अहंकार, पूर्वकल्पित धारणाओं, पालतू विचारों और पूर्वाग्रहों और स्वार्थी हितों को छोड़ देना चाहिए। ये सभी किसी के गुरु की शिक्षाओं और निर्देशों को पूरा करने के रास्ते में आते हैं। अपने गुरु के सामने अपने हृदय के रहस्य उजागर करें। जितना अधिक आप ऐसा करेंगे, वह पाप और प्रलोभन के विरुद्ध संघर्ष में आपकी सहायता करेगा।

गुरु की कृपा चाहने से पहले साधक को उसका पात्र होना चाहिए। दैवीय कृपा की आपूर्ति तभी होती है जब वह इसे प्राप्त करने के योग्य होता है। गुरु की कृपा उन लोगों पर होती है जो उनके प्रति अत्यंत विनम्र और वफादार महसूस करते हैं। श्रद्धा विश्वास है और गुरु पर भरोसा है। विश्वास बिना किसी साक्ष्य या सबूत के, गवाही या अधिकार के माध्यम से उपदेशक द्वारा घोषित की गई बातों की सत्यता का दृढ़ विश्वास है। जिस शिष्य को गुरु पर विश्वास होता है वह न तो तर्क करता है, न सोचता है, न तर्क करता है और न ही विचार करता है। वह बस आज्ञापालन करता है, आज्ञापालन करता है और आज्ञापालन करता है।

जय गुरुदेव

2 months ago | [YT] | 15

Jai Gurudev

गुरु के लिए कोई भी शिष्य छोटा बड़ा नहीं होता। सभी शिष्य को एक समान शिक्षा, संस्कार, ज्ञान, विद्या, एक ही मंत्र देते हैं तथा सभी शिष्य पर गुरु एक समान प्यार ममता लुटाते हैं। लेकिन हां, किसी शिष्य में धारण शक्ति अधिक होती है। जिससे गुरु कि कही हुई बातें या गुरु ज्ञान, विद्या को अपने मनोमस्तिस्क में जल्द बिठा लेता है।उनकी स्मरण शक्ति तेज होती है। तथा शिष्य कि इच्छा शक्ति, लगन शक्ति, उत्सुकता शक्ति के ऊपर निर्भर करता है। तेज बुध्दि होने के कारण वैसे शिष्य बहुत जल्द आगे बढ़ जाते है। शिष्य कि ध्यान धारणा, मेहनत लगन और उत्सुकता हि आगे बढ़ाते हैं। हम सब प्रथम कक्षा के विद्यार्थी हैं। गुरु किसी भी शिष्य के प्रति भेदभाव नहीं करते। गुरु के लिए सभी शिष्यों का एक महत्वपूर्ण अलग अलग स्थान होता है। गुरु के लिए सभी शिष्य कोहिनूर हीरा से बढ़कर है। गुरु शिष्यों कि मनोदशा तथा उनकी इच्छा ,भावनाओं को अपने तपोबल शक्ति से पढ़ लेते हैं ।उसी के अनुसार गुरु शिष्यों के लिए गुरु सेवा हेतु पृथक पृथक कार्य चुनती है। हर शिष्यों कि मन कि अलग अलग चाह होती है। कोई शिष्य प्रति दिन चार माला जप करते हैं ,तो कोई दस, कोई एक सौ आठ माला करते हैं। कितनों शिष्य के पास उनके आर्थिक, सामाजिक, पारिवारिक, व्यावसायिक शारिरिक परिस्थितियों के कारण मंत्र माला जप करने के लिए समय भी नहीं निकाल पाते। तो उसका कर्म फल कैसा होगा। वैसे शिष्य को चलते फिरते उठते बैठते जैसा भी हो गुरु मंत्र माला जप करना चाहिए। जैसे जिसका कर्म वैसे उसका फल
जय गुरुदेव

2 months ago | [YT] | 17

Jai Gurudev

कई बार हम गुरु मंत्र तो ले लेते हैं परन्तु श्रद्धा व् विश्वास के अभाव में मन्त्र का नियमित जप इत्यादि नहीं करते हैं. आजकल यह एक सामान्य बात दिख पड़ती हैं. अगर आपके साथ भी ऐसा हुआ है तो जो मार्ग गुरु कृपा से मुझे प्राप्त हुआ है वो यहाँ कहता हूँ.हमारा मन वहीं जाता व् टिकता हैं जहाँ लाभ दिख पड़े या कुछ रस व् स्वाद हो. इसलिए आपको गुरु मंत्र की महीमा सम्बन्धी बातें व् लेख खूब अवश्य पढने चाहियें ताकि आपका अन्तर मन उसके लाभों की बातों में मुग्ध होकर जप के लिए प्रेरित होने लगे. देखना धीरे धीरे ऐसा रस आने लगेगा चाह कर गुरु मन्त्र आपसे नहीं छुटेगा.

“गुरु की स्थूल मूर्ती उनका शरीर है और सूक्ष्म मूर्ती मंत्र है. मंत्र में गुरु और ईश्वर दोनों विराजमान हैं. यदि तुम मन्त्र को संभालोगे तो गुरु कृपा, ईश्वर कृपा तुम्हे सम्भालेगी. गुरु का शरीर तो केवल वाह्य माध्यम है. गुरु मंत्र ह्रदय में सदा गूंजता रहे, एक छण के लिए उसका वियोग न हो बस, यही तुम्हारे पास रक्षा का कवच है. आजकल प्रचार के युग में लोग गुरुमंत्र को छोड़कर बहुत सी विद्याएँ सीखनें के चक्कर में अपने लक्ष्य से भटक जातें हैं. ये सब माया है. अरे ! गुरु मन्त्र तुम्हारा सर्वोपरि है.’मन्त्राणाम अचिन्त्य शक्तिः’ जितनी कोई कल्पना नहीं कर सकता उतनी शक्ति मंत्र में रहती है. इतनी बड़ी शक्ति तुम्हारे पास हैं और उसका तुम अनादर कर रहे हो !

गुरुमन्त्र तुम्हारे पास है, फिर भी दरिद्र हो क्योंकि गुरु का कहना नहीं मानते,
जय गुरुदेव ❤️❤️

2 months ago | [YT] | 15

Jai Gurudev

धन प्राप्ति के लिए सिद्ध पैरेड पत्थर
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9 months ago | [YT] | 14