Samrat Chaturvedi


नमस्कार, जय हिन्द, जय श्री राम

मै आपका दोस्त साथी मित्र यानि सम्राट चतुर्वेदी

आपको बताते हुए हमे बहुत ख़ुशी हो रही है की, इस चेनल में आपको RSS, BAJARANG DAL, ABVP, VHP, DURGA VAHINI के साथ साथ ऐसे ही और तमाम प्रकार के संगठन के बारे में जानकारी मिलेगी जो अपने हिंदुस्तान और सनातन धर्म को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे है |

इस चेन्नल को उदेश्य हिन्दू समाज एवं हिन्दू समाज के लिए कार्य कर रहे सगठनों के बारे में जानकारी प्रदान करना है, जिससे लोगो को इनके बारे में जागरूक हो सके और इनसे जुड़कर अपने सनातन धर्म और हिंदुस्तान को आगे बढ़ा सके |

हमे आशा है की, आप भी हमारे इस मुहीम में, हमारा साथ देंगे |

चलते चलते बस यही कहना चाहूँगा, की गर्व से कहो की हम हिन्दू है.....................|

अगर आप हमसे कोई बात करना चाहते है या कोई सवाल पूछना चाहते है तो, आप हमे मेसेज कर सकते है |
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Samrat Chaturvedi

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1 year ago | [YT] | 38

Samrat Chaturvedi

राममंदिर में स्थापित मूर्ति सामान्य नही है,उसमे वर्णित सभी अवतारों के नाम के साथ क्रमानुसार जानकारी प्रदत्त की गई है, जो बाल रूप के मूर्ति को भव्यता एवं दिव्यता प्रदान करता है 🚩🚩🙏

1 year ago | [YT] | 35

Samrat Chaturvedi

भगवामय हुआ DU
ABVP ने दर्ज कराई शानदार जीत 🏆
विजय भव: 🚩🚩

जय श्री राम 🚩🙏

#ABVP
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2 years ago | [YT] | 54

Samrat Chaturvedi

यूपी के अंबेडकरनगर में मनचलों ने खींचा था छात्रा का दुपट्टा, हो गई थी मौत, अब यूपी पुलिस ने एनकाउंटर में आरोपी शाहबाज और फैसल के पैर में गोली मारी है

ये योगी जी का आज का यूपी है,' जनाब' यहां न्याय दर दर की ठोकर नही खाता बल्कि तत्काल और तुरंत न्याय प्रदान किया जाता है 🚩🙏

जय श्री राम 🚩🙏

2 years ago | [YT] | 24

Samrat Chaturvedi

क्या कांग्रेस हिंदू विरोधी पार्टी है ?

2 years ago | [YT] | 8

Samrat Chaturvedi

साष्टांग प्रणाम का जीवन में महत्त्व 🙏

वैसे आजकल पैरों को हल्का सा स्पर्श कर लोग चरण स्पर्श की औपचारिकता पूरी कर लेते हैं।

कभी-कभी पैरों को स्पर्श किए बिना ही चरण स्पर्श पूरा कर लिया जाता है। मंदिर में जाकर भगवान की मूर्ति के सामने माथा टेकने में भी आजकल लोग कोताही बरतते हैं। खैर ये तो सब मॉडर्न तकनीक हैं, लेकिन कभी आपने उन लोगों को देखा है जो जमीन पर पूरा लेटकर माथा टेकते हैं, इसे साष्टांग दंडवत प्रणाम कहा जाता है।

यह एक आसन है जिसमें शरीर का हर भाग जमीन के साथ स्पर्श करता है, बहुत से लोगों को यह आसन आउटडेटेड लग सकता है लेकिन यह आसन इस बात का प्रतीक है व्यक्ति अपना अहंकार छोड़ चुका है। इस आसन के जरिए आप ईश्वर को यह बताते हैं कि आप उसे मदद के लिए पुकार रहे हैं। यह आसन आपको ईश्वर की शरण में ले जाता है।

इस तरह का आसन सामान्य तौर पर पुरुषों द्वारा ही किया जाता है। क्या आप जानते हैं शास्त्रों के अनुसार स्त्रियों को यह आसन करने की मनाही है, जानना चाहते हैं क्यों? हिन्दू शास्त्रों के अनुसार स्त्री का गर्भ और उसके वक्ष कभी जमीन से स्पर्श नहीं होने चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि उसका गर्भ एक जीवन को सहेजकर रखता है और वक्ष उस जीवन को पोषण देते हैं। इसलिए यह आसन स्त्रियों को नहीं करना चाहिए।

धार्मिक दृष्टिकोण के अलावा साष्टांग प्रणाम करने के स्वास्थ्य लाभ भी बहुत ज्यादा हैं। ऐसा करने से आपकी मांसपेशियां पूरी तरह खुल जाती हैं और उन्हें मजबूती भी मिलती है।

🍁साष्टांग प्रणाम 🍁

पद्भ्यां कराभ्यां जानुभ्यामुरसा शिरस्तथा।
मनसा वचसा दृष्टया प्रणामोऽष्टाङ्ग मुच्यते॥

हाथ, पैर, घुटने, छाती, मस्तक, मन, वचन, और दृष्टि इन आठ अंगों से किया हुआ प्रणाम अष्टांग नमस्कार कहा जाता है। साष्टांग आसन में शरीर के आठ अंग ज़मीन का स्पर्श करते हैं अत: इसे ‘साष्टांग प्रणाम’ कहते हैं। इस आसन में ज़मीन का स्पर्श करने वाले अंग ठोढ़ी, छाती, दोनो हाथ, दोनों घुटने और पैर हैं। आसन के क्रम में इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि पेट ज़मीन का स्पर्श नहीं करे। विशेष नमस्कार मन, वचन और शरीर से हो सकता है।

शारीरिक नमस्कार के छः भेद हैं-
🔸 केवल सिर झुकाना।
🔸 केवल हाथ जोड़ना।
🔸 सिर झुकाना और हाथ जोड़ना।
🔸 हाथ जोड़ना और दोनों घुटने झुकाना।
🔸 हाथ जोड़ना, दोनों घुटने झुकाना और सिर झुकाना।
🔸 दंडवत प्रणाम जिसमें आठ अंग (दो हाथ, दो घुटने, दो पैर, माथा और वक्ष) पृथ्वी से लगते हैं। और जिसे ‘साष्टांग प्रणाम’ भी कहा जाता है।

प्रणाम करना भक्ति का २५वां अंग है। इस प्रणाम में सर्वतो भावेन आत्मसमर्पण की भावना है। इसमें भक्त अपने को नितांत असहाय जानकार अपने शरीर इन्द्रिय मन को भगवान् के अर्पण कर देता है। जब शरीर को इसी अवस्था में मुंह के बल भूमि पर लिटा दिया जाए तो इसे ‘साष्टांग प्रणाम’ कहते हैं।
शरीर की इस मुद्रा में शरीर के छ: अंगों का भूमि से सीधा स्पर्श होता है अर्थात् शरीर मे स्थित छ: महामर्मो का स्पर्श भूमि से हो जाता है जिन्हें वास्तुशास्त्र में "षण्महांति" या "छ: महामर्म" स्थान मानाजाता है। ये अंग वास्तुपुरुष के महामर्म इसलिए कहे जाते हैं क्योंकि ये शरीर (प्लॉट) के अतिसंवेदनशील अंग होते हैं।

योगशास्त्र में इन्हीं छ: अंगों में षड्चक्रों को लिया जाता है। षड्चक्रों का भूमि से स्पर्श होना इन चक्रों की सक्रियता और समन्वित एकाग्रता को इंगित करता है।

प्रणाम की मुद्रा में व्यक्ति सभी इंद्रियों (पाँच ज्ञानेंद्रियाँ और पाँचों कर्मेद्रियाँ) को कछुए की भाँति समेटकर अपने श्रद्धेय को समर्पित होता है। उसे ऎसा आभास होता है कि अब आत्म निवेदन और मौन श्रद्धा के अतिरिक्त उसे कुछ नहीं करना।

इसे विपरीत श्रद्धेय जब अपने प्रेय (दंडवत प्रणाम करने वाला) को दंडवत मुद्रा में देखता है तो स्वत: ही उसके मनोविकार या किसी भी प्रकार की दूषित मानसिकता धुल जाती है और उसके पास रह जाता है केवल त्याग, बलिदान या अर्पण। यहाँ पर श्रेय और प्रेय दोनों ही पराकाष्ठा का समन्वय ‘साष्टांग प्रणाम’ के माध्यम से किया गया है।

जय श्री राम, जय श्री हनुमान, जय गोविंदा, जय सनातन संस्कृति 🙏

2 years ago | [YT] | 22

Samrat Chaturvedi

|| हिंदी || हिंदू || हिन्दुस्तान || 🚩
इसलिए है...मेरा भारत महान 🚩🙏

#hindidiwas
#samratchaturvedi

2 years ago (edited) | [YT] | 58

Samrat Chaturvedi

हम सबके मार्गदर्शक.. हिंदू हृदय सम्राट आरएसएस सरसंघ चालक आदरणीय मोहन भागवत जी को जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं 🙏 श्री राम की कृपा आप पर बनी रहे और आप राष्ट्र चिंतन और हिंदू हित के सतत् कार्य करते रहे 🙏🚩
#आरएसएस
#RSS
#SAMRATCHATURVEDI

2 years ago (edited) | [YT] | 65

Samrat Chaturvedi

यह 15 मंत्र जो हर हिंदू को सीखना और बच्चों को सिखाना चाहिए।

1. Mahadev

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे,
सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ,
उर्वारुकमिव बन्धनान्,
मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् !!

2. Shri Ganesha

वक्रतुंड महाकाय,
सूर्य कोटि समप्रभ
निर्विघ्नम कुरू मे देव,
सर्वकार्येषु सर्वदा !!

3. Shri hari Vishnu

मङ्गलम् भगवान विष्णुः,
मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः,
मङ्गलाय तनो हरिः॥

4. Shri Brahma ji

ॐ नमस्ते परमं ब्रह्मा,
नमस्ते परमात्ने ।
निर्गुणाय नमस्तुभ्यं,
सदुयाय नमो नम:।।

5. Shri Krishna

वसुदेवसुतं देवं,
कंसचाणूरमर्दनम्।
देवकी परमानन्दं,
कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम।

6. Shri Ram

श्री रामाय रामभद्राय,
रामचन्द्राय वेधसे ।
रघुनाथाय नाथाय,
सीताया पतये नमः !

7. Maa Durga

ॐ जयंती मंगला काली,
भद्रकाली कपालिनी ।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री,
स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु‍ते।।

8. Maa Mahalakshmi

ॐ सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो,
धन धान्यः सुतान्वितः ।
मनुष्यो मत्प्रसादेन,
भविष्यति न संशयःॐ ।

9. Maa Saraswathi

ॐ सरस्वति नमस्तुभ्यं,
वरदे कामरूपिणि।
विद्यारम्भं करिष्यामि,
सिद्धिर्भवतु मे सदा ।।

10. Maa Mahakali

ॐ क्रीं क्रीं क्रीं,
हलीं ह्रीं खं स्फोटय,
क्रीं क्रीं क्रीं फट !!

11. Hanuman ji

मनोजवं मारुततुल्यवेगं,
जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं,
श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥

12. Shri Shanidev

ॐ नीलांजनसमाभासं,
रविपुत्रं यमाग्रजम ।
छायामार्तण्डसम्भूतं,
तं नमामि शनैश्चरम् ||

13. Shri Kartikeya

ॐ शारवाना-भावाया नम:,
ज्ञानशक्तिधरा स्कंदा ,
वल्लीईकल्याणा सुंदरा।
देवसेना मन: कांता,
कार्तिकेया नामोस्तुते ।

14. Kaal Bhairav ji

ॐ ह्रीं वां बटुकाये,
क्षौं क्षौं आपदुद्धाराणाये,
कुरु कुरु बटुकाये,
ह्रीं बटुकाये स्वाहा।

15. Gayatri Mantra

ॐ भूर्भुवः स्वः,
तत्सवितुर्वरेण्यम्
भर्गो देवस्य धीमहि
धियो यो नः प्रचोदयात् ॥

परिवार और बच्चों को भी सिखायें ।।

जय श्री राम| || राधे राधे - जय श्री कृष्णा 🙏

2 years ago | [YT] | 15