Shyam Premi (Rajputana 8412)

श्याम के नाम से ही अब मेरी पहचान हो गयी। रोती हुईं आँखो को तेरा दीदार चाहिए मेरे बाबा मेरे सवारियाँ हमें तो बस जीवन भर तेरी चौखट और तेरा प्यार चाहिए।


कोई नही है मेरी फिक्र करने वाला फिर भी बेफिक्र रहता हूँ, बस एक है मेरे ऊपर जान छिडकने वाला जिसे मैं बाबा श्याम कहता हूँ।

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