नर्मदे हर 🙏मैं नर्मदा पुत्र प्रशांत, आपका स्वागत करता हूँ ।
अमरकंटक से उत्पन्न हो कर पश्चिम में 1312 km का अंतर बहकर यह पवित्र धारा अरब सागर में विलीन हो जाती है ।प्रलय में भी जिनका विनाश नहीं होता ऐसी ये पाप-नाशिनी नदी के तट पर सैंकड़ो वर्षों से अनगिनत भक्तों ने माँ रेवा की परिक्रमा की है । भौतिक स्वरूप से माँ को स्वच्छ करते करते हम अपने मन में बह रही विचार-धारा को भी निर्मल करें और आत्म-उत्थान करें । हम जब भी तट, तटवर्ती मंदिरों तथा तीर्थो के दर्शन के लिए जाएँ या पवित्र-जल में स्नान करें तब भी किसी प्रकार की अशुद्धि या कचरा ना फैलाएँ ।
आईए हम सब उमारूद्रांगसंभूता माँ नर्मदा के स्वच्छता अभियान को अपना दायित्व मानकर इसे साकार करने में सहायता करें ।

राम राम इंडिया को सहयोग के लिए हमें संपर्क करें:
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कोई भी राशी भेजने से आप नाम सूचित करें तो हमे बहुत अच्छा लगेगा जी 🙏



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ब्रह्मचर्य: केवल संयम नहीं, बल्कि आत्म-शक्ति का मार्ग
​ब्रह्मचर्य अक्सर गलत समझा जाता है। यह केवल शारीरिक संयम नहीं है, बल्कि अपनी मानसिक और शारीरिक ऊर्जा को आध्यात्मिक प्रगति और आत्म-साक्षात्कार के लिए एक चैनल देना है।
​ब्रह्मचर्य का अभ्यास करने के लाभ:
​मानसिक स्पष्टता: विचार अधिक केंद्रित और स्पष्ट होते हैं।
​शारीरिक ऊर्जा: बढ़ी हुई जीवन शक्ति और सहनशक्ति।
​आध्यात्मिक जागृति: ऊर्जा का ऊर्ध्वगामी प्रवाह।
​ब्रह्मचर्य का अभ्यास जागरूकता और उद्देश्य के साथ करें। यह स्वयं पर विजय प्राप्त करने और अपनी उच्चतम क्षमता तक पहुँचने की एक पवित्र यात्रा है।

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2 weeks ago | [YT] | 92

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नर्मदे हर 🙏

2 weeks ago | [YT] | 10

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हम अक्सर माँ नर्मदा की आरती करते हैं, उनसे आशीर्वाद मांगते हैं, लेकिन क्या हम उनके प्रति अपना कर्तव्य निभा रहे हैं? आज नर्मदा जी प्रदूषण और प्लास्टिक की वजह से कराह रही हैं।

सिर्फ पूजा करना काफी नहीं है, माँ की गरिमा को बचाना भी हमारा धर्म है। 🙏🌊
​आज हमारी जीवनदायिनी माँ नर्मदा प्रदूषण और प्लास्टिक के बोझ तले दबी हुई हैं। क्या हम केवल हाथ जोड़कर खड़े रहेंगे या उनके अस्तित्व को बचाने के लिए कदम उठाएंगे?
​राम राम इंडिया ग्रुप का संकल्प है: स्वच्छ, निर्मल और अविरल नर्मदा!
​आइए, हम सब मिलकर ये 4 प्रतिज्ञाएं लें:
​🚫 प्लास्टिक मुक्त घाट: घाटों पर पॉलीथिन का उपयोग पूरी तरह बंद करें।
​🌸 सही विसर्जन: पूजन सामग्री को केवल निर्धारित कुंडों में ही डालें।
​🗣️ आवाज उठाएं: गंदगी फैलाने वालों को रोकें और सफाई की मांग करें।
​💧 रसायन मुक्त जल: नदी में साबुन, शैम्पू या केमिकल वाला पानी न मिलने दें।

​राम राम इंडिया ग्रुप की ओर से हम एक विशेष मुहीम शुरू कर रहे हैं ताकि हमारी आस्था की यह धारा कल भी उतनी ही शुद्ध रहे जितनी आज है।
​हमारा लक्ष्य:
​घाटों को पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त बनाना।
​मूर्तियों और फूलों का सही विसर्जन सुनिश्चित करना।
​जल को रसायनों से बचाना।
​याद रखें, माँ सुरक्षित रहेगी, तभी हमारा भविष्य सुरक्षित रहेगा।
​निवेदक: राम राम इंडिया ग्रुप 🇮🇳

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2 weeks ago | [YT] | 73

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ब्रह्मचर्य की शुरुआत करना केवल शारीरिक संयम नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक अनुशासन की यात्रा है। इसकी शुरुआत धीरे-धीरे और सही समझ के साथ करनी चाहिए।
​यहाँ कुछ व्यावहारिक कदम दिए गए हैं जो आपकी मदद कर सकते हैं:
​1. संकल्प और स्पष्ट उद्देश्य (Purpose)
​सबसे पहले खुद से पूछें कि आप ब्रह्मचर्य का पालन क्यों करना चाहते हैं? चाहे वह शारीरिक शक्ति के लिए हो, मानसिक स्पष्टता के लिए या आध्यात्मिक प्रगति के लिए—एक ठोस उद्देश्य आपको मुश्किल समय में भटकने से बचाएगा।
​2. आहार और दिनचर्या (Diet and Routine)
​सात्विक भोजन: 'जैसा अन्न, वैसा मन'। अधिक मिर्च-मसाले, तला-भुना और तामसिक भोजन (जैसे मांस, अंडा) कामोत्तेजना बढ़ा सकते हैं। हल्का और ताजा भोजन मन को शांत रखने में मदद करता है।
​ब्रह्म मुहूर्त: सुबह जल्दी (4:00 - 5:30 बजे) उठने की आदत डालें। इस समय ऊर्जा सात्विक होती है, जो आत्म-नियंत्रण में सहायक है।
​3. पांच इंद्रियों पर नियंत्रण (Sense Control)
​डिजिटल डिटॉक्स: अश्लील सामग्री, उत्तेजक फिल्में या सोशल मीडिया रील्स से बचें। जो आप देखते और सुनते हैं, वही आपके विचारों का बीज बनता है।
​कुसंगति का त्याग: ऐसे मित्रों या वातावरण से दूर रहें जहाँ केवल कामुकता या भोग-विलास की बातें होती हों।
​4. शारीरिक और मानसिक व्यायाम
​योग और प्राणायाम: 'अश्विनी मुद्रा', 'मूलबंध' और 'शीर्षासन' (किसी विशेषज्ञ की देखरेख में) वीर्य शक्ति को ऊर्ध्वगामी (ऊपर की ओर) ले जाने में सहायक होते हैं। 'अनुलोम-विलोम' मन को शांत करता है।
​कसरत: अपनी ऊर्जा को रचनात्मक दिशा देने के लिए जिम, दौड़ना या खेलकूद का सहारा लें।
​5. स्वाध्याय और सत्संग
​महापुरुषों की जीवनियां पढ़ें और आध्यात्मिक ग्रंथों का अध्ययन करें। स्वामी विवेकानंद या दयानंद सरस्वती के विचार ब्रह्मचर्य की शक्ति को समझने में बहुत प्रेरणादायक हो सकते हैं।
​महत्वपूर्ण सुझाव:
​एकदम पूर्णता (Perfection) की उम्मीद न करें: अगर कभी मन भटक जाए या असफलता मिले, तो हार न मानें। यह एक अभ्यास है। खुद को दोषी महसूस कराने के बजाय अगले ही पल से फिर से शुरुआत करें।
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2 weeks ago | [YT] | 106

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नर्मदा की स्वच्छता: हमारा संकल्प, हमारी जिम्मेदारी
​नर्मदा नदी केवल एक जलधारा नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, जीवन रेखा और भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। पोस्टर में स्पष्ट रूप से दो दृश्यों की तुलना की गई है: एक तरफ प्रदूषण से मरती नदी और दूसरी तरफ जनभागीदारी से खिलखिलाता स्वच्छ घाट। यह चित्र हमें याद दिलाता है कि यदि हमने समय रहते अपनी आदतों में सुधार नहीं किया, तो हम अपनी सबसे मूल्यवान विरासत खो देंगे।

​प्लास्टिक कचरे का त्याग: प्लास्टिक कभी नष्ट नहीं होता। यह पानी के प्रवाह को रोकता है और जलीय जीवों के लिए जानलेवा साबित होता है। नदी में कचरा डालना अपनी ही जीवन रेखा को जहर देने जैसा है।

​मूर्तियों का सही विसर्जन: धार्मिक आस्था का सम्मान जरूरी है, लेकिन इसके लिए नदी को प्रदूषित करना उचित नहीं। पोस्टर कृत्रिम कुंडों के उपयोग की सलाह देता है, ताकि नदी का पानी रसायनों से बचा रहे।

​साबुन और केमिकल पर रोक: घाटों पर नहाते समय साबुन या कपड़े धोते समय डिटर्जेंट का उपयोग पानी के ऑक्सीजन स्तर को कम कर देता है, जिससे पानी पीने योग्य नहीं रह जाता।

​प्रदूषण नियंत्रण में भागीदारी: औद्योगिक कचरा और गंदा पानी सीधे नदी में मिलना एक गंभीर समस्या है। इसके खिलाफ आवाज उठाना और जागरूक नागरिक बनना समय की मांग है।

स्वच्छता कोई एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। जैसा कि पोस्टर में आह्वान किया गया है— "हम सब मिलकर संकल्प लें"—तभी हम आने वाली पीढ़ियों को एक 'निर्मल नर्मदा' सौंप पाएंगे।

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​"नर्मदा की धारा हो निर्मल, यही है हमारा उज्ज्वल कल।"

2 weeks ago | [YT] | 131

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ब्रह्मचर्य के मुख्य आयाम
​ब्रह्मचर्य केवल शरीर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मन और विचारों का भी अनुशासन है। इसके तीन मुख्य रूप हैं:
​शारीरिक अनुशासन: अपनी इन्द्रियों (Senses) पर नियंत्रण रखना। इसमें केवल यौन संयम ही नहीं, बल्कि सात्विक भोजन करना, नियमित दिनचर्या का पालन करना और शरीर की ऊर्जा को व्यर्थ के कार्यों में नष्ट होने से बचाना शामिल है।
​मानसिक अनुशासन: विचारों में पवित्रता रखना। क्रोध, लोभ, ईर्ष्या और वासना जैसे नकारात्मक विचारों से दूर रहकर मन को शांत और एकाग्र रखना मानसिक ब्रह्मचर्य है।
​आध्यात्मिक अनुशासन: सत्य का पालन करना, स्वाध्याय (अच्छे ग्रंथों का अध्ययन) करना और अपना ध्यान ईश्वर या अपने उच्च लक्ष्यों की ओर केंद्रित करना।
​भारतीय आश्रम व्यवस्था में ब्रह्मचर्य
​प्राचीन भारतीय समाज में जीवन को चार आश्रमों (चरणों) में बांटा गया था, जिनमें ब्रह्मचर्य आश्रम सबसे पहला था। यह जन्म से लेकर लगभग 25 वर्ष की आयु तक का समय माना जाता था।
​यह वह चरण था जब व्यक्ति गुरुकुल में रहकर शिक्षा ग्रहण करता था, अनुशासन सीखता था, और भविष्य के जीवन (गृहस्थ आश्रम) के लिए खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाता था। इस दौरान उसका पूरा ध्यान केवल ज्ञान प्राप्ति और चरित्र निर्माण पर होता था।
​ब्रह्मचर्य पालन के लाभ
​योग और आयुर्वेद के अनुसार, जो व्यक्ति अपने जीवन में ब्रह्मचर्य (संयम और अनुशासन) का पालन करता है, उसे कई लाभ मिलते हैं:
​उच्च मानसिक एकाग्रता: ऊर्जा के संचय से स्मरण शक्ति और फोकस में वृद्धि होती है।
​शारीरिक बल और ओज: शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और चेहरे पर एक विशेष चमक (ओज) आती है।
​भावनात्मक स्थिरता: इन्द्रियों पर नियंत्रण होने से मन शांत रहता है और तनाव कम होता है।
​आत्मिक शांति: व्यक्ति अपने जीवन के लक्ष्यों को स्पष्ट रूप से देख पाता है और उन्हें हासिल करने के लिए दृढ़ संकल्पित होता है।
​संक्षेप में, ब्रह्मचर्य जीवन की बिखरी हुई ऊर्जा को समेटकर उसे एक बड़े और सकारात्मक लक्ष्य की ओर मोड़ने की कला है।

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2 weeks ago | [YT] | 117