LEGAL EYES by Adv. Mukta Rashmi


Hi, everyone! Welcome to my YouTube channel LEGAL EYES with ADV M R where I am sharing something new which is useful in daily life.

Friend,
Self awareness is the only key to success in human life. We often spend our life trying to prove ourselves in the absence of knowledge. A large section of the society is still unfamiliar with the legal awareness related to their rights and duties. As a result, our relationship, personal productivity or should we say that our overall personality is getting compromised.
Legal awareness and legal literacy are
the base of any effort toward legal empowerment. Knowledge of legal provisions and procedures will empower people to demand justice, accountability and effective remedies at all levels.
As an Advocate, for this aim , I am making an effort.
If anyone wants me to make a video on any topic of your choice then write on Comment option on any of my videos and I will try to work on it as soon as possible.
Subscribe me .
Rashmimathuradeep@gmail.com


LEGAL EYES by Adv. Mukta Rashmi

अगर आपको लगता है कि आपके खिलाफ False POCSO Case दर्ज किया गया है, तो आपको क्या करना चाहिए?

1. Experienced Criminal Advocate से सलाह लें

POCSO Act एक Special Law है, जिसके तहत बच्चों को Sexual Offences से Protection दिया जाता है। इसलिए FIR दर्ज होने या Police Investigation शुरू होने पर जल्द से जल्द किसी Experienced Criminal Advocate से Legal Advice लें।

2. अपने Defence से जुड़े Evidence सुरक्षित रखें

किसी भी Criminal Case में Evidence की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए आपके पास उपलब्ध Relevant Chat, Email, Messages, Call Records, Location History, Travel Documents और अन्य Original Records को सुरक्षित रखें।

यदि किसी व्यक्ति को घटना के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी है, तो उसके बारे में अपने Advocate को बताएं।

ध्यान रखें, किसी भी Evidence को Delete करना, उसमें बदलाव करना या Fabricated Evidence तैयार करना आपके लिए गंभीर Legal Problems पैदा कर सकता है। Evidence की Relevance और Admissibility का निर्णय Applicable Law के अनुसार ही होगा।

3. पहले से चल रहे Dispute के Documents सुरक्षित रखें-

यदि Complaint से पहले दोनों पक्षों के बीच Family Dispute, Property Dispute या कोई अन्य विवाद था, तो उससे संबंधित Legal Notices, Messages, Agreements और Court Records सुरक्षित रखें।

4. Age, Medical Report और Forensic Evidence को समझें-

POCSO Cases में Victim की Age एक महत्वपूर्ण Legal Fact हो सकती है। इसलिए Age से संबंधित Birth Certificate, School Records और अन्य Relevant Documents की जांच Legal Procedure के अनुसार कराई जा सकती है।

इसी तरह Medical Report, Forensic Report और अन्य Scientific Evidence का भी Case के पूरे Context में मूल्यांकन जरूरी है।

याद रखें, Medical Evidence का अभाव हर मामले में अपने आप Innocence साबित नहीं करता और नहीं किसी एक Report के आधार पर पूरे मामले का निष्कर्ष निकाला जा सकता।

5. Bail और FIR Quashing के विकल्प जानें

Case की परिस्थितियों के अनुसार Bail या अन्य Legal Remedies पर विचार किया जा सकता है।

Bail:
Arresting की आशंका होने पर Anticipatory Bail और Arrest हो जाने पर Regular Bail के विकल्पों के बारे में Advocate से सलाह लें। POCSO Case में Anticipatory Bail केवल कानूनी प्रावधानों और परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

FIR Quashing: कुछ Exceptional Circumstances में High Court (HC) के समक्ष Criminal Proceedings Quash कराने की Petition दायर की जा सकती है। Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita (BNSS), 2023 की Section 528, High Court की Inherent Powers से संबंधित है।

हालांकि, FIR Quashing अपने आप मिलने वाला अधिकार नहीं है। HC मामले के Facts, उपलब्ध Material और Applicable Law के आधार पर निर्णय लेता है।

6. Complainant, Victim या Witnesses पर Pressure न बनाएं

अपने Defence की तैयारी करते समय Complainant, Victim या Witnesses को Threat देना, उन पर Compromise के लिए दबाव बनाना, उन्हें Influence करने का प्रयास करना या Evidence नष्ट करना आपके लिए अतिरिक्त Legal Problems पैदा कर सकता है।

यदि किसी Statement या Evidence पर Objection है, तो उसे उचित Legal Procedure के माध्यम से Court के समक्ष उठाएं।

अपने Legal Rights की रक्षा करने का सही तरीका है—कानून के दायरे में रहकर अपना Defence तैयार करें।

PCSO Act की Section- 22 कुछ निर्धारित परिस्थितियों में False Complaint या False Information देने के लिए Punishment का प्रावधान करती है।
अगर आपके साथ झूठा षड्यंत्र रचा गया है तो आपके पास भी झूठे आरोपों के खिलाफ न्याय पाने और सज़ा दिलाने का अधिकार है ।

लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात समझिए—केवल आरोपी के Acquittal यानी बरी हो जाने से यह अपने आप साबित नहीं हो जाता कि Complaint False थी।

इसके लिए संबंधित Facts, परिस्थितियों और कानून में निर्धारित शर्तों का मूल्यांकन आवश्यक है।

आखिर में सबसे जरूरी बात

यदि आपको लगता है कि आपके खिलाफ गलत आरोप लगाए गए हैं, तो घबराहट में कोई कदम न उठाएं। Evidence सुरक्षित रखें, Experienced Criminal Advocate से सलाह लें और Investigation तथा Court Proceedings में कानून के अनुसार अपना Defence प्रस्तुत करें।

Legal Awareness ही आपके Legal Rights को समझने की पहली सीढ़ी है।

यदि आप POCSO Act या किसी अन्य Legal Issue के बारे में सामान्य कानूनी जानकारी चाहते हैं, तो Comment में अपना सवाल पूछ सकते हैं। कृपया किसी Minor की पहचान उजागर करने वाली जानकारी साझा न करें।

Disclaimer: यह पोस्ट केवल General Legal Information है। प्रत्येक केस के Facts और Circumstances अलग होते हैं। इसलिए अपने मामले में किसी Experienced Advocate से सलाह अवश्य लें।
धन्यवाद!
नमस्कार!

#POCSOAct #LegalAwareness #FalsePOCSOCase

2 hours ago |[YT] | 0

LEGAL EYES by Adv. Mukta Rashmi

तलाक… सौदेबाज़ी है?

सोशल मीडिया पर कुछ लोग बड़ी आसानी से तलाक को “लड़की पक्ष की सौदेबाज़ी” बताकर अपनी दुकान चमकाने में लगे हैं।

लेकिन ज़रा इस मामले को देखिए…

Vikram vs Priya, 2025

ज़ोरदार तमाचा है उन चेहरों पर, जिन्हें आत्मसम्मान में व्यापार दिखता है।

दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट के सामने एक ऐसा आपसी सहमति से तलाक का मामला आया, जिसे कोर्ट ने खुद कहा—

“Rare Settlement” — दुर्लभ समझौता।

क्यों?

क्योंकि पत्नी ने अपने पति से न गुज़ारा भत्ता माँगा, न कोई आर्थिक मुआवज़ा, न कोई वित्तीय दावा।

और बात यहीं खत्म नहीं हुई।

शादी के समय सास ने जो सोने के कंगन उसे उपहार में दिए थे, वह महिला उन्हें भी वापस कर दी।

कोर्ट ने इसे एक असाधारण और दुर्लभ व्यवहार माना। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने इस समझौते की सराहना की।

और जब महिला वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत से जुड़ी, तो सुप्रीम कोर्ट ने उससे कहा—

अतीत को भूलिए और खुशहाल जीवन की ओर आगे बढ़िए।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विवाह को समाप्त करते हुए पक्षकारों के बीच लंबित अन्य कार्यवाहियों को भी समाप्त कर दिया।

अब सवाल उन लोगों से—

क्या तलाक को केवल “सौदेबाज़ी” कहना न्याय है?

क्या हर महिला जो अपने वैधानिक अधिकार की बात करे, वह लालची है?

और क्या हर महिला जो कुछ न माँगने का फैसला करे, वह महान है?

नहीं!

कानून में असली बात है— स्वतंत्र इच्छा, सहमति और गरिमा।

किसी महिला का अपने अधिकार के लिए लड़ना भी गलत नहीं, और किसी महिला का स्वेच्छा से कोई दावा न करना भी गलत नहीं।

इसलिए तलाक को “लड़की वालों की वसूली” बनाकर पेश करने वालों से बस इतना कहूँगी—

कानून को सनसनी मत बनाइए। रिश्तों को व्यापार मत बनाइए। और महिलाओं के अधिकारों को बदनाम करके अपना व्यापार मत चमकाइए।

क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के इस मामले ने एक बात साफ कर दी—

तलाक हमेशा किसी की जीत या हार नहीं होता। कभी-कभी दो लोग अपनी गरिमा बचाकर अलग होने का फैसला भी करते हैं।

और शायद यही इस मामले का सबसे बड़ा संदेश है—

**रिश्ता टूट सकता है,

लेकिन इंसानियत नहीं टूटनी चाहिए।**
अपनी राय Comment में बताइए।

1 month ago |[YT] | 0

LEGAL EYES by Adv. Mukta Rashmi

नमस्कार मेरे यूट्यूब परिवार! 🙏

आप के विशेष आग्रह पर मैं एक नई सीरीज़ शुरू कर रही हूँ — "प्रश्न आपके, उत्तर मेरे"।

इस सीरीज़ की पहली कड़ी The Hindu Adoption and Maintenance Act, 1956 पर आधारित है। इस कानून से जुड़े अब तक आपके पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देने की शुरुआत मैंने कर दी है।

यदि इस कानून से संबंधित आपके मन में कोई भी सवाल हो, जैसे—

- गोद लेने (Adoption) के नियम,
- पत्नी, बच्चों या माता-पिता के भरण-पोषण (Maintenance) के अधिकार,
- या इस कानून से जुड़ी कोई भी व्यक्तिगत कानूनी जिज्ञासा,

तो अपना प्रश्न कमेंट बॉक्स में अवश्य लिखें।

मैं पूरी कोशिश करूँगी कि आपके हर प्रश्न का उत्तर सरल और आसान भाषा में, अलग-अलग वीडियो के माध्यम से दूँ, ताकि कानून को समझना सभी के लिए आसान हो।

तो देर किस बात की? अपना सवाल अभी कमेंट बॉक्स में लिखिए।

मिलते हैं अगली वीडियो में, आपके सवाल के जवाब के साथ।

धन्यवाद! 🙏

3 months ago |[YT] | 1

LEGAL EYES by Adv. Mukta Rashmi

क्या बेटी का पिता की खरीदी हुई संपत्ति में बराबर का अधिकार है?


अगर पिता ने अपनी कमाई से संपत्ति खरीदी थी और बिना वसीयत के उनका निधन हो गया है, तो बेटी का भी बेटों के समान कानूनी अधिकार हो सकता है। विवाह हो जाने या 2004 या 2005 से पहले जन्म होने से यह अधिकार समाप्त नहीं होता।
हालांकि, हर मामला अलग होता है। संपत्ति का प्रकार, वसीयत, उत्तराधिकार और अन्य कानूनी तथ्यों के आधार पर अधिकार तय किए जाते हैं।
⚖️ अपने अधिकार जानिए, लेकिन परिवार में संवाद और समझदारी से समाधान निकालने की कोशिश भी कीजिए।
👉 ऐसे ही कानूनी सवालों के जवाब पाने के लिए channel को Like, share, Subscribe करें।

#LegalAdvice #PropertyRights #Inheritance #DaughterRights #HinduSuccessionAct #LegalAwareness #Law #PropertyDispute #WomenRights #IndianLaw #FacebookReels #InstagramReels #YouTubeShorts

3 months ago |[YT] | 0

LEGAL EYES by Adv. Mukta Rashmi

कुलसुम निशा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2026)

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा कि केवल विवाहित होने के आधार पर किसी बेटी को परिवार की परिभाषा से बाहर नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कल्याणकारी योजनाओं, अनुकंपा नियुक्ति अथवा ऐसे अन्य लाभों के लिए विवाहित बेटियों को अयोग्य ठहराना संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 में निहित समानता के सिद्धांत के विपरीत।

मामले की पृष्ठभूमि:
इस case में कुलसुम निशा ने अपनी माँ के निधन के बाद उचित मूल्य की दुकान (PDS) के आवंटन का दावा किया।
राज्य अधिकारियों तथा इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उनका दावा यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि वे विवाहित पुत्री हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने इस दृष्टिकोण को असंवैधानिक मानते हुए उच्च न्यायालय के निर्णय को निरस्त कर दिया।

यह निर्णय केवल एक व्यक्ति की जीत नहीं, बल्कि उन सभी बेटियों के सम्मान, समानता और अधिकारों की पुष्टि है जिन्हें लंबे समय तक सामाजिक रूढ़ियों के कारण अपने वैधानिक अधिकारों से वंचित किया गया।
Supreme court ने कहा-
"बेटी पराया धन नहीं, परिवार का अभिन्न हिस्सा है।"

— Adv. Mukta Rashmi


📌 Disclaimer: यह पोस्ट केवल सामान्य कानूनी जानकारी और जन-जागरूकता के उद्देश्य से है। इसे किसी विशेष मामले में कानूनी सलाह न माना जाए।

#SupremeCourt #KulsumNisha #Article14 #Article15 #CompassionateAppointment #MarriedDaughter #WomenRights #Equality #LegalAwareness #AdvMuktaRashmi

3 months ago |[YT] | 0

LEGAL EYES by Adv. Mukta Rashmi

क्या App से घरेलू सहायिका बुलाना सुरक्षित है?

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आजकल लोग मोबाइल ऐप के माध्यम से घरेलू सहायिका, ड्राइवर, केयरटेकर, कुक या अन्य घरेलू कर्मचारी आसानी से बुक कर लेते हैं। लेकिन  क्या केवल ऐप पर भरोसा कर लेना पर्याप्त है?

इस विषय पर आपकी राय जानना चाहूंगी।
@Ashwini Upadhyay @Bureau of Police Research & Development @Ministry of Home Affairs
#LegalAwareness #DomesticHelp #PoliceVerification #SafetyFirst

3 months ago |[YT] | 1

LEGAL EYES by Adv. Mukta Rashmi

इन महान भारतीय वैज्ञानिकों की प्रेरणादायक यात्रा, जिनकी प्रतिभा को विदेश में सम्मान मिला। लेकिन आरक्षण की धुंध में अंधा भारत पहचान भी न सका। क्योंकि भारत में प्रतिभा, अवसर और आरक्षण जैसे संवेदनशील विषयों पर विचार करने का कभी प्रयास ही नहीं हुआ।

इस वीडियो का उद्देश्य किसी व्यक्ति, समुदाय या व्यवस्था के प्रति घृणा या वैमनस्य फैलाना नहीं, बल्कि तथ्यों और इतिहास के आधार पर एक स्वस्थ चर्चा को बढ़ावा देना है।
💬 आपकी क्या राय है? क्या भारत में प्रतिभा और अवसर के बीच बेहतर संतुलन होना चाहिए?
अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें।
👍 ऐसे ही कानूनी और सामाजिक विषयों पर जानकारी के लिए Legal Eyes by Adv. Mukta Rashmi को Follow/Subscribe करें।
@आरक्षण हटाओ देश बचाओ
#Reservation #Talent #India #America #IndianScientist #AdvMuktaRashmi #IndianEducation #History #SocialAwareness

3 months ago |[YT] | 0

LEGAL EYES by Adv. Mukta Rashmi

Can a widow legally disinherit her adopted daughter from her deceased husband's self-acquired property?

दरअसल, एक viewer ने यह पूछा है कि क्या एक Widow कानूनी तौर पर अपनी गोद ली हुई बेटी को अपने दिवंगत पति की खुद कमाई हुई संपत्ति यानी Self acquired property से बेदखल कर उसे वापस उसके Biological parent's के पास उस भेज सकती है?

तो Friends इसका उत्तर जानकर आप चौंक सकते हैं।
यदि दत्तक ग्रहण विधिवत और वैध रूप से हुआ है, तो Hindu Adoption and Maintenance Act, 1956 Section -12 के अनुसार दत्तक संतान, दत्तक माता-पिता की वैधानिक संतान बन जाती है।

* क्या दत्तक पिता की मृत्यु से दत्तक संबंध समाप्त होता है?

उत्तर- नहीं।


* क्या केवल संपत्ति से वंचित करने के लिए दत्तक बेटी को उसके जैविक माता-पिता के पास भेजा जा सकता है?

सामान्यतः नहीं।


* कोर्ट किस बात को सबसे अधिक महत्व देती है?

बच्चे का सर्वोत्तम हित (Best Interest of the Child)।


⚖️ कानून दत्तक ग्रहण को एक स्थायी कानूनी संबंध मानता है। इसे केवल इच्छा बदल जाने, पारिवारिक विवाद या संपत्ति बचाने के उद्देश्य से समाप्त नहीं किया जा सकता।

इस विषय की पूरी कानूनी जानकारी और सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांतों को सरल भाषा में समझने के लिए इस पोस्ट को अवश्य देखें। मैं बहुत जल्द इस मामले से संबंधित एक विस्तृत वीडियो सीरीज शुरू करने वाली हूँ। अगर मामले से सम्बन्धित आपका भी कोई प्रश्न है तो comment box में लिखें।
मैं हर व्यक्तिगत प्रश्नों का सटीक उत्तर देने की कोशिश करूंगी।

अगर पोस्ट उपयोगी लगे तो Like 👍 करें, Share 📲 करें और अपने विचार Comment 💬 में जरूर लिखें।
– Adv. Mukta Rashmi
Legal Eyes by Adv. Mukta Rashmi
#Adoption #AdoptedChild #HinduAdoptionAct #PropertyRights #LegalAwareness #SupremeCourt #IndianLaw #ChildRights #WidowRights

3 months ago |[YT] | 0

LEGAL EYES by Adv. Mukta Rashmi

Can a widow legally disinherit her adopted daughter from her deceased husband's self-acquired property?

दरअसल, एक viewer ने यह पूछा है कि क्या एक Widow कानूनी तौर पर अपनी गोद ली हुई बेटी को अपने दिवंगत पति की खुद कमाई हुई संपत्ति यानी Self acquired property से बेदखल कर उसे वापस उसके Biological parent's के पास उस भेज सकती है?

तो Friends इसका उत्तर जानकर आप चौंक सकते हैं।
यदि दत्तक ग्रहण विधिवत और वैध रूप से हुआ है, तो Hindu Adoption and Maintenance Act, 1956 Section -12 के अनुसार दत्तक संतान, दत्तक माता-पिता की वैधानिक संतान बन जाती है।

* क्या दत्तक पिता की मृत्यु से दत्तक संबंध समाप्त होता है?

उत्तर- नहीं।


* क्या केवल संपत्ति से वंचित करने के लिए दत्तक बेटी को उसके जैविक माता-पिता के पास भेजा जा सकता है?

सामान्यतः नहीं।


* कोर्ट किस बात को सबसे अधिक महत्व देती है?

बच्चे का सर्वोत्तम हित (Best Interest of the Child)।


⚖️ कानून दत्तक ग्रहण को एक स्थायी कानूनी संबंध मानता है। इसे केवल इच्छा बदल जाने, पारिवारिक विवाद या संपत्ति बचाने के उद्देश्य से समाप्त नहीं किया जा सकता।

इस विषय की पूरी कानूनी जानकारी और सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांतों को सरल भाषा में समझने के लिए इस पोस्ट को अवश्य देखें। मैं बहुत जल्द इस मामले से संबंधित एक विस्तृत वीडियो सीरीज शुरू करने वाली हूँ। अगर मामले से सम्बन्धित आपका भी कोई प्रश्न है तो comment box में लिखें।
मैं हर व्यक्तिगत प्रश्नों का सटीक उत्तर देने की कोशिश करूंगी।

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– Adv. Mukta Rashmi
Legal Eyes by Adv. Mukta Rashmi
#Adoption #AdoptedChild #HinduAdoptionAct #PropertyRights #LegalAwareness #SupremeCourt #IndianLaw #ChildRights #WidowRights

3 months ago |[YT] | 1