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डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को भारतीय इतिहास से हटा दें, तो सवाल उठेगा आजादी किसके लिए थी?
भारत की स्वतंत्रता को केवल अंग्रेजों के जाने और सत्ता हस्तांतरण तक सीमित नहीं किया जा सकता। Transfer of Power से शासन की बागडोर अंग्रेजों से भारतीयों के हाथ में आई, लेकिन वास्तविक स्वतंत्रता का अर्थ तब पूरा होता है जब देश के हर नागरिक को समानता, स्वतंत्रता, न्याय और मानवाधिकार प्राप्त हों।
ब्रिटेन के भारत छोड़ने के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण थेद्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन की आर्थिक-सैन्य कमजोरी, लेबर पार्टी की सरकार की उपनिवेशवाद-विरोधी नीति, भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन, क्रांतिकारियों की गतिविधियां, सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौज का प्रभाव तथा भारतीय सैनिकों में बढ़ती असंतोष की भावना।
लेकिन सवाल यह है कि सत्ता हस्तांतरण के बाद भारत के सबसे वंचित लोगों को वास्तविक स्वतंत्रता कौन दिलाता?
यहीं डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का ऐतिहासिक महत्व सामने आता है।
उन्होंने केवल अंग्रेजी सत्ता से मुक्ति की बात नहीं की, बल्कि उस सामाजिक व्यवस्था को चुनौती दी जिसमें करोड़ों लोग जन्म के आधार पर अस्पृश्यता, भेदभाव और असमानता झेल रहे थे। संविधान में समानता, स्वतंत्रता, मौलिक अधिकार, सामाजिक न्याय और अस्पृश्यता के उन्मूलन को स्थान दिलाना इसी व्यापक स्वतंत्रता की दिशा में निर्णायक कदम था।
इसलिए एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है
अंग्रेजों से सत्ता का हस्तांतरण = Transfer of Power
हर नागरिक के अधिकारों की संवैधानिक गारंटी = वास्तविक लोकतांत्रिक Independence
अगर बाबासाहेब अम्बेडकर न होते, तो क्या केवल सत्ता बदल जाने से भारत के सबसे वंचित व्यक्ति को समान नागरिक होने का अधिकार मिल जाता?
इसीलिए बाबासाहेब को भारतीय स्वतंत्रता की व्यापक सामाजिक और संवैधानिक परियोजना से अलग करके देखना इतिहास को अधूरा देखना है।
सभी स्वतंत्रता सेनानियों को नमन।
सभी शहीदों को नमन।
बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर को कोटि-कोटि नमन।
जय भीम। जय भारत। 🇮🇳
2 weeks ago | [YT] | 5
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New logo of Bahujan Journey.
नमो बुद्धाय, जय गुरु रविदास जी, जय भीम, जोहार 🙏
3 weeks ago | [YT] | 9
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🌼 गुरु पूर्णिमा की मंगलकामनाएँ 🌼
बौद्ध परंपरा में गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व है। आषाढ़ पूर्णिमा के दिन ही तथागत गौतम बुद्ध ने सारनाथ के मृगदाय वन में अपने पाँच पूर्व साथियों को प्रथम उपदेश देकर धम्मचक्र प्रवर्तन किया था। इसी क्षण से धम्म और संघ की स्थापना हुई तथा मानवता को दुःख से मुक्ति का वैज्ञानिक और करुणामय मार्ग प्राप्त हुआ।
तथागत बुद्ध ने सिखाया कि
"अप्प दीपो भव" स्वयं अपना दीपक बनो।
उन्होंने अंधविश्वास नहीं, बल्कि प्रज्ञा (ज्ञान), शील (सदाचार) और करुणा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। बौद्ध धर्म में गुरु वह है जो सत्य का मार्ग दिखाए, विवेक जगाए और मनुष्य को आत्मनिर्भर बनाए।
आइए, इस गुरु पूर्णिमा पर हम संकल्प लें कि हम बुद्ध के धम्म के अनुसार सत्य, करुणा, मैत्री और समानता के मार्ग पर चलकर एक न्यायपूर्ण और समतामूलक समाज के निर्माण में अपना योगदान देंगे।
सभी को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक मंगलकामनाएँ।
बुद्धं शरणं गच्छामि।
धम्मं शरणं गच्छामि।
संघं शरणं गच्छामि।
🙏 जय भीम। नमो बुद्धाय।
#guru_purnima
1 month ago | [YT] | 10
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अंतत: शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा. 12 साल में पहली बार है जब मोदी सरकार को खुद को जनता के प्रति जिम्मेदार मानना पड़ा. इस देश के छात्रों ने, 18-20 साल के लड़के/लड़कियों ने मोदी जी को मजबूर कर दिया कि वो धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा लें. अगर प्रधान का नहीं लेते तो खुद देना पड़ता - बात यही है.
अब इसके बाद राजनाथ सिंह चचा को खुद की कड़ी निंदा करते हुये एक वक्तव्य जारी करना चाहिये. राजनाथ का कहना था कि बीजेपी में इस्तीफे नहीं होते. अब हो गया. आज पहला हुआ है आगे और होंगे.
1 month ago | [YT] | 1
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कोल्हापुर रियासत के 71 उच्च शासकीय पदों में 60 पर ब्राह्मणओ के करीब 500 क्लर्कों में 490 ब्राह्मण थे.
सरकारी व्यवस्था में आज की तरह ही एक वर्ग का इतना बड़ा वर्चस्व था कि बाकी समाज की भागीदारी लगभग न के बराबर थी.
यही हाल भारत के हर रियासत में था. एक वर्ण के ओवर रिप्रजेंटेशन पर उस दौर में बड़े बड़े समाज सुधारकों का मुंह नही खुला. छत्रपति शाहूजी महाराज ने व्यवस्था बदलने का संकल्प लिया.
1902 में उन्होंने पिछड़े वर्ग के लिए 50% आरक्षण लागू किया. इसका उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था में संतुलन बनाए रखना था. आरक्षण व्यवस्था ने कोल्हापुर रियासत में एक वर्ण के वर्चस्व को खत्म कर दिया.
आरक्षण के जनक और महान समाज सुधारक छत्रपति शाहूजी महाराज की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन 🙏🏼
2 months ago | [YT] | 13
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Q &A मेरी विडियो से संबंधित कोई भी सवाल हो आपको जवाब जरूर दिया जाएगा
2 months ago | [YT] | 1
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लोकमाता महारानी अहिल्याबाई होल्कर जयंती पर श्रद्धांजलि
31 मई 1725 को जन्मी लोकमाता महारानी अहिल्याबाई होल्कर भारतीय इतिहास की उन विरल शासकों में से थीं, जिन्होंने सत्ता को वैभव का नहीं, बल्कि जनसेवा का माध्यम बनाया। अपने पति खंडेराव होल्कर और पुत्र की मृत्यु के बाद उन्होंने मालवा राज्य की बागडोर संभाली और लगभग तीन दशकों तक न्याय, सुशासन तथा लोककल्याण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया।
अहिल्याबाई ने अपने शासनकाल में किसानों को संरक्षण दिया, व्यापार को बढ़ावा दिया और महिलाओं की सुरक्षा व सम्मान के लिए अनेक कदम उठाए। वे धार्मिक सहिष्णुता और सामाजिक समरसता की प्रतीक थीं। उनके द्वारा बनवाए गए मंदिर, घाट, कुएँ, धर्मशालाएँ और सड़कें आज भी उनकी दूरदर्शिता और जनहितकारी सोच की गवाही देते हैं।
काशी विश्वनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण से लेकर सोमनाथ, गया, उज्जैन, नासिक और देश के अनेक तीर्थस्थलों के विकास में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। यही कारण है कि जनता ने उन्हें सम्मानपूर्वक "लोकमाता" की उपाधि दी।
आज उनकी जयंती पर हम उस महान शासिका को नमन करते हैं, जिन्होंने यह सिद्ध किया कि सच्चा नेतृत्व शक्ति से नहीं, बल्कि न्याय, करुणा और जनकल्याण से पहचाना जाता है।
"सिंहासन पर बैठकर राज करना आसान है, लेकिन जनता के दिलों पर राज करना अहिल्याबाई होल्कर जैसी महान विभूतियों के ही बस की बात है।"
🌹 लोकमाता महारानी अहिल्याबाई होल्कर जी को उनकी जयंती पर शत-शत नमन। 🙏🏻
3 months ago | [YT] | 8
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बुद्ध पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानव इतिहास की सबसे क्रांतिकारी वैचारिक यात्राओं में से एक की याद है। यह वही दिन है जब गौतम बुद्ध का जन्म हुआ, उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई और अंततः महापरिनिर्वाण भी इसी तिथि से जुड़ा माना जाता है।
बुद्ध का सबसे बड़ा योगदान यह था कि उन्होंने जीवन के जटिल सवालों को किसी अलौकिक शक्ति या अंधविश्वास से नहीं, बल्कि तर्क, अनुभव और निरीक्षण से समझाने की कोशिश की। उन्होंने कहा दुःख है, दुःख का कारण है, और उससे मुक्ति का मार्ग भी है। यह कोई आस्था का दावा नहीं, बल्कि एक प्रेक्षणीय सत्य (observable reality) है जिसे हर व्यक्ति स्वयं जांच सकता है।
आज के समय में, जब समाज अक्सर धर्म, जाति और पहचान के नाम पर बंटा हुआ दिखता है, बुद्ध का संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है। उन्होंने न तो किसी विशेष वर्ग को श्रेष्ठ माना और न ही किसी को नीचा। उनके संघ में हर व्यक्ति को समान स्थान मिला चाहे वह राजा हो या साधारण नागरिक। यह उस समय की सामाजिक व्यवस्था के खिलाफ एक शांत लेकिन गहरा विद्रोह था।
बुद्ध ने यह भी स्पष्ट किया कि अंधविश्वास और कर्मकांड व्यक्ति को मुक्त नहीं करते। उन्होंने बार-बार कहा कि किसी बात को सिर्फ इसलिए मत मानो क्योंकि वह परंपरा है, या किसी गुरु ने कहा है। उसे तभी स्वीकार करो जब वह तुम्हारे तर्क और अनुभव पर खरा उतरे। यह दृष्टिकोण आज के वैज्ञानिक सोच के बेहद करीब है।
उनकी शिक्षा का मूल था
सम्यक दृष्टि, सम्यक विचार, सम्यक कर्म।
यानी सही समझ, सही सोच और सही आचरण। यह कोई जटिल दर्शन नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक जीवन-पद्धति है, जिसे अपनाकर व्यक्ति अपने जीवन में संतुलन और शांति ला सकता है।
बुद्ध पूर्णिमा पर अगर हम सच में उन्हें याद करना चाहते हैं, तो सिर्फ दीप जलाने या शुभकामनाएँ देने से ज्यादा जरूरी है कि हम उनके विचारों को अपने जीवन में लागू करें
क्रोध की जगह करुणा चुनें,
अंधविश्वास की जगह तर्क अपनाएँ,
और भेदभाव की जगह समानता को स्वीकार करें।
यही बुद्ध को सच्ची आदरंजलि होगी। 🙏
4 months ago | [YT] | 16
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ब्रिज भूषण सरन सिंह कल परशुराम जयंती समारोह में गए थे.
परशुराम जयंती पर परशुराम की बात न करके आरक्षण पर बात करने लगे.21 बार पृथ्वी को क्षत्रिय शून्य कर ही दिए परशुराम जी, ऐसा महाभारत के आदिपर्व में लिखा है, (सबूत संलग्न है )थोड़ा इस पर भी बोल देते कि फिर आए कहाँ से 🤔 खैर
ब्रिज भूषण सरन सिंह ने कहा, आरक्षण चाहे 175 साल तक जारी रहे, सवर्ण समाज को कोई फर्क नही पड़ता है.
उन्होंने आगे कहा, ब्राह्मण ठाकुर बनिया दिहाड़ी मजदूरी कर के, ऑटोरिक्शा चला के किसी तरह कमा खा रहे हैं.कितने चला रहे हैं यह भी बता देते साथ में. देश के सभी संसाधनो पर सदियों से कुंडली मार कर बैठे हैं, सभी में बराबर बटवारा कीजिए SC ST OBC अपना रिजर्वेशन तुम्हारे मुँह पर फेंक कर मारेंगे.
ब्रिज भूषण परशुराम जयंती में गए थे या India Against Reservation के कार्यक्रम में. ये ब्रिज भूषण कौन होते हैं OBC SC ST आरक्षण पर बोलने वाले. सवर्णों को आबादी के लिहाज से 10% EWS आरक्षण मिला है इस पर क्यों नही बोला ?
ऐसी मानसिकता के कारण ही देश गुलाम बना. ये लोग अपने हेजेमोनी बनाए रखने के लिए आरक्षण का विरोध कर रहे हैं. आरक्षण का विरोध करने के बावजूद ये लोग OBC SC ST वोटों से लोकसभा चुनाव भी जीत जाते हैं ?ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है।
4 months ago | [YT] | 6
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✨ बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती की हार्दिक शुभकामनाएँ ✨
Dr. B. R. Ambedkar जी का जीवन हमें सिखाता है कि शिक्षा, समानता और आत्मसम्मान से ही समाज का सच्चा विकास संभव है।
उनके दिखाए मार्ग पर चलकर हम एक ऐसे भारत का निर्माण करें, जहाँ हर व्यक्ति को बराबरी का अधिकार और सम्मान मिले।
📘 “शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो” यही उनके विचार आज भी हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
जय भीम! 💙
4 months ago | [YT] | 16
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