शंकराचार्य हैं इसलिए हम हैं

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हमारे channel पर गुरुदेव से शेष किसी भी संत अथवा व्यक्ति की वीडियो क्लिप को लगाने का प्रमुख लक्ष्य उनके चरित्रों पर टिप्पणी करना नहीं है। अहस्तक्षेप की नीति के पीछे मूल कारण असहजता अथवा आलोचना का भय नहीं, अरुचि है।


शंकराचार्य हैं इसलिए हम हैं

इस महत्वपूर्ण क्लिप को अवश्य देखें :

youtube.com/shorts/auFbUCZdYaI

1 week ago | [YT] | 255

शंकराचार्य हैं इसलिए हम हैं

तमसो मा ज्योतिर्गमय चैनल के संचालक महानुभाव को सादर साधुवाद। ये अपने चैनल द्वारा पुरी शंकराचार्य जी के दुर्लभ ज्ञान रत्नों को संकलित कर प्रस्तुत करते हैं। दुर्भाग्य से कई ऐसे लोग जो पुरी शंकराचार्य जी से एक दो वर्ष पहले ही जुड़े हैं उनको महाभाग के ज्ञान सागर का कोई अनुमान ही नहीं है और उनको लगता है कि वो स्वस्थ क्रांति इत्यादि सीमित सामाजिक विषयों मात्र पर चर्चा करते हैं। अतः ऐसे में उनके दीर्घ प्रवचनों को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करना अति शोभनीय पहल है। आप सब लोग भी इन्हें अवश्य सब्सक्राइब करें एवं लाभान्वित हों।

Channel link - ‪@aniketphadtare‬

(नोट : यद्यपि हमारा इनसे कोई निजी संबंध नहीं है तथापि अभी तक पोस्ट किए गए वीडियो के अल्प मूल्यांकन के आधार पर हम अपने स्मार्त बंधुओं को बढ़ावा देने का प्रयास करते हैं तदार्थ यह पोस्ट प्रसारित की जा रही है)

2 weeks ago | [YT] | 128

शंकराचार्य हैं इसलिए हम हैं

कई बार हम लोगों में स्वस्थ क्रांति प्रचार के प्रति संकोच की भावना आ जाती है कि यह इतना विशाल अभियान है, हम इसके बारे में कुछ कैसे कहें। इसमें गुरुदेव के विरुद्ध किए गए दुष्प्रचार का भी बहुत बड़ा हाथ है। किसी भी सादे सज्जन व्यक्ति में अर्ध नास्तिकता होना स्वाभाविक रूप से संभव है।

इसका परिणाम यह होता है कि स्वस्थ क्रांति प्रचारकों के रूप में बहुत भारी मात्रा में ऐसे ही व्यक्ति दिखाई देते हैं जिनमें शीलता का अभाव होता है।

सज्जनों से हमारा आह्वाहन है -

एक क्षण को मान लेते हैं कि स्वस्थ क्रांति में आप नास्तिक हो,

चलो एक बार को मान लिया कि ये प्रकल्प आगे नहीं बढ़ने वाला,

तो भी अपने स्वयं के गुरु का प्रचार करने में आप का क्या घाटा हो रहा है ?

यह हिंदू मर्यादा नहीं है। हिंदू मर्यादा तो गुरु के लिए सर मुंडवा के भिक्षा मांगने को भी ऐसे तत्पर रहना है जैसे जगत की सबसे उत्तम नौकरी मिल गई हो। गुरु का प्रचार करने में असफल होना भी चेले के लिए गर्व की बात होती है।

आप से कोई नहीं कह रहा कि आप भी शीलता विहीन हो जाओ। आप अपने शीलत्व में स्थित रहें, और संकोच विवेक पूर्वक ही सीमित क्षमता में जो कहते बनता है केवल उतना कहें, पर तटस्थ हो कर ना रहें। जीवन बन जाएगा। अहंकार पिघलेगा। भक्ति पुष्ट होगी। आज ही से शुरुआत करें।

शेष आप अपने निज संतोष के लिए इस वीडियो पर जा सकते हैं :

लिंक : https://youtu.be/yzp6KYbt6ic

इस वीडियो को पोस्ट किए हुए लगभग पूरा ब्रिटिश 2025 वर्ष बीत चुका है। आप कमेंट सेक्शन खंगाल कर देख लें, एक भी ऐसा रिप्लाई आप को ऐसा नहीं दिखेगा जिसमें किसी तर्क का खंडन किया गया हो। खंडन के नाम पर कोरी भावुकता ही मिलेगी और कुछ नहीं।

4 weeks ago | [YT] | 130

शंकराचार्य हैं इसलिए हम हैं

यद्यपि मोदी जी का यह कदम स्वागत योग्य है,

परन्तु स्मरणीय विषय है कि वर्तमान कलियुग में ऐसे बयानों को दार्शनिक कसौटी पर कसे बिना लोकग्राहय कदापि नहीं माना जाता।

"वंदे मातरम में दुर्गा लिखा होने से क्या होता है ? लिखा हुआ है तो हम क्यों मानें ? दुर्गा शब्द का अर्थ क्या है ? राष्ट्र में मातृवत दर्शन तो एक कवि की काल्पनिक भावना मात्र है!" - इत्यादि सहस्त्रों तर्कव्यूह हैं जिनका निदान आचार्य शरण बिना संभव नहीं है। नेताओं के लिए तो कदापि नहीं है।

स्मरणीय है कि जब पुरी शंकराचार्य जी आज से ४ वर्ष पूर्व गोवर्धन मठ में मां दुर्गा की मूर्ति के समक्ष एक दिव्य घटना घटी थी।

"अखंड हिंदू राष्ट्र ! अखंड हिंदू राष्ट्र ! अखंड हिंदू राष्ट्र !"

1 month ago | [YT] | 119

शंकराचार्य हैं इसलिए हम हैं

यदि आप पुरी शंकराचार्य जी के चैनल से जुड़े रहते हैं तो आप ने देखा होगा कि वर्तमान में महाराज जी विविध स्थानों पर दो दिवसीय प्रवास कर रहे हैं। ये प्रवास पहले की भांति उत्तर प्रदेश, उड़ीसा इत्यादि में नहीं ; अपितु गुजरात और हरियाणा जैसे प्रदेशों में हो रहे हैं जहां काफी समय से वो नहीं गए थे।

हरियाणा में हुए प्रवास के चित्रों से यह ज्ञात होता है कि वहां हर समागम में १००+ भीड़ एकत्रित हुई है। यह शुभ संकेत है। पहले जो लोग गुरुदेव के बारे में जानते भी नहीं थे उन्हें भी मीडिया ने केवल भड़काने की आकांक्षा के साथ पुरी शंकराचार्य जी की निंदा करते हुए कई प्रचार आंदोलन हाल ही में चलाए हैं। जनता के रुझान से यह ज्ञात होता है कि भारत के हिंदुओं में वर्तमान में होते धार्मिक पतन को ले कर चिंता और जागरूकता व्याप्त हो रही है। ऐसे में बिना जलेबी की तरह गोल गोल बातें किए धर्म के पक्ष को स्पष्ट रूप से रखने वाले पुरी शंकराचार्य महाभाग धीरे धीरे देश के कई सत्बुद्धि युक्त हिंदुओं के लिए आशा की किरण बनते चले जा रहे हैं।

तत्वपक्षपातो ही स्वभावो धियाम।।

1 month ago | [YT] | 410

शंकराचार्य हैं इसलिए हम हैं

दुर्भाग्य से वर्तमान में स्वस्थ क्रांति की दूरदर्शिता को वैचारिक धरातल पर उतारने हेतु जो कार्य अपेक्षित है वो पूर्ण नहीं हो सका है। एक ओर ऐसे लोग हैं जो स्वस्थ क्रांति में अविश्वास करने पर उतर आए हैं, वहीं दूसरे कई जन स्वस्थ क्रांति के समर्थक होते हुए भी उसके विषय में स्पष्ट चर्चा करने से बचते हैं।

इस community post series का लक्ष्य सरलता से समझ आने वाले तार्किक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना है। ये कुछ ऐसे दृष्टांत हैं जो नास्तिक मनोवैज्ञानिक या सामाजिक विज्ञान के धरातल पर भी १००% सटीक सिद्ध हैं। आप इनको समझ कर ना केवल परस्पर सुहृद हिंदुओं के बीच, बल्कि अन्यों से भी विनम्रतापूर्वक स्वस्थ संवाद की प्रतिष्ठा कर सकते हैं।

1 month ago | [YT] | 239