योग दवा भी, अध्यात्म भी
देवों के देव महादेव महायोगी हैं। उन्होंने ही मनुष्य के कल्याण के लिए योग विधा की रचना की। योग का मतलब केवल आसान या प्राणायाम नहीं हैं। यह पूर्ण दर्शन है। प्राचीन छह दर्शनों में योग प्रमुख है। यह शरीर से अध्यात्म की यात्रा का सर्वसुलभ साधन है। आज जब दुनिया में गलाकाट प्रतियोगिताएं चल रहीं हैं, लोग अपने शरीर को मशीन में तब्दील करते जा रहे हैं, तमाम युवा दवाओं के भरोसे अपना जीवन जीने को अभिशप्त हैं, ऐसे में प्राचीन ऋषियों द्वारा साधे गए योग और उसके अनंत प्रयोग की उपयोगिता बढ़ गई है। कोरोना काल में भारत में योगाभ्यास ने बहुतों की जान बचाई। आज दुनिया भी योग की उपयोगिता को समझ चुकी है। पीएम मोदी के प्रयासों के कारण संयुक्त राष्टï्र ने 21 जून को विश्व योग दिवस घोषित किया। ऐसे ही गुणों की खान योग के बारे में जागरूक करने, इसका प्रचार-प्रसार करने और सरल तरीके से योगाभ्यास, प्राणायाम की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए योगाचार्य डॉ. ममता त्रिपाठी ने योग विद महामाया यू-ट्यूब चैनल शुरू किया है। डॉ.ममता पिछले चालीस वर्षों से योग साधन कर रही हैं और लोगों को प्रशिक्षित कर रही हैं।