Aware News 24 — समाधान की पत्रकारिता | Solution-oriented Journalism
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हम ऐसी खबरें लाते हैं जो सिर्फ सवाल नहीं उठातीं, बल्कि उनके समाधान भी तलाशती हैं।
🗞️ यहाँ मिलेगा —
Political debates & social issues
Ground reports & investigative stories
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हम मानते हैं कि पत्रकारिता का असली उद्देश्य सिर्फ शोर मचाना नहीं, बल्कि समाज में बदलाव लाना है।
100 खबर भले ही छूट जाए, लेकिन एक भी फेक न्यूज़ हम प्रसारित नहीं करेंगे।
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क्या इंडिगो फ़रवरी 2026 में #DGCA के नये नियम मान लेगा ? अगर मान लेता है तो क्या भारत में सस्ती फ्लाइट फिर से दूर की कौरी होगी विचार कीजिएगा ! सस्ती दरो के लिए नियमो को लचीला रखना अतिआवश्यक है, जब फ्लाइट कैंसिल हुई तो मनमाने ढंग से रेट बढे थे पार्थ, जब सबकुछ प्राइवेट होगा फिर सरकारी नियम खासकर fare सम्बंधित निर्धारित नही कर पाएगी, भारत जैसे विकाशशील देश में विकशित देश के नियम थोपना मूर्खतापूर्ण होगा, आम आदमी की पहुँच से उड़ान अब दूर निकल जायेगी धीरे धीरे खाली फ्लाइट फिर जो हाल सभी एयरलाइन्स का है वही हाल IndiGo का भी होगा. फिर समजावाद और पूंजीवाद खेलते रहिएगा इसी के लिए समय बचेगा
1 day ago | [YT] | 1
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यूँ ही आबाद रहेगी दुनिया
हम न होंगे कोई हमसा होगा
शुक्रिया
@TheLallantop
मान, पहचान और ज्ञान के लिए.
एक अल्पविराम के बाद नई यात्रा की तैयारी
( शेर नासिर काज़मी की कलम से)
@saurabhtop On X
शुक्रिया
@TheLallantop
पहचान, सबक और हौसले के लिए.
और शुभकामनाएँ भविष्य के लिए.
अपना साथ यहाँ समाप्त होता है.
अध्ययन अवकाश और फिर आगे के संकल्प की बात करूँगा.
आप सबने भी बहुत सिखाया. शुक्रिया.
1 day ago | [YT] | 0
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यदा यदा हि धर्मस्य
ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य
तदात्मानं सृजाम्यहम्॥ 4.7
परित्राणाय साधूनां
विनाशाय च दुष्कृताम्।
धर्मसंस्थापनार्थाय
सम्भवामि युगे युगे॥ 4.8 🪔 सरल हिंदी अर्थ
जब-जब धर्म की हानि होती है
और अधर्म बढ़ने लगता है,
तब-तब मैं स्वयं प्रकट होता हूँ।
सज्जनों की रक्षा के लिए,
दुष्टों के विनाश के लिए
और धर्म की पुनः स्थापना के लिए
मैं हर युग में अवतार लेता हूँ। 👉 यहाँ “मैं” कौन है?
उत्तर:
यह “मैं” कोई भीड़ नहीं है,
कोई संगठन नहीं है,
कोई स्वयंभू धर्म-रक्षक नहीं है।
👉 यह “मैं” स्वयं परमात्मा है। 🔴 दूसरा बड़ा सवाल
👉 क्या भगवान ने यह कहा कि इंसान धर्म बचाने के लिए हिंसक हो जाए?
❌ नहीं।
भगवान ने साफ़ कहा:
“मैं स्वयं आता हूँ”
न कि
“तुम मेरी तरफ़ से मारो, तोड़ो, गाली दो।”
🔴 “दुष्टों का विनाश” का सही अर्थ
गीता में “विनाश” हमेशा
शारीरिक हत्या नहीं होता।
विनाश का अर्थ है:
अहंकार का अंत
अधर्म का पतन
अन्याय की सत्ता का गिरना
कृष्ण ने भी महाभारत में
सबको मारने का आदेश नहीं दिया,
बल्कि अर्जुन को विवेक दिया। ⚖️ गीता का संतुलन (जो आज गायब है)
👉 धर्म की रक्षा तलवार से नहीं, विवेक से होती है।
👉 धर्म का शत्रु अधर्म है, असहमति नहीं।
👉 भगवान को बचाने कोई नहीं आता — भगवान स्वयं आते हैं।🔥 गीता का मौन संदेश (Unspoken Truth)
अगर कोई कहे:
“हम भगवान की रक्षा कर रहे हैं”
तो गीता का उत्तर है:
“भगवान को तुम्हारी नहीं,
तुम्हें भगवान की आवश्यकता है।” 🧩 निष्कर्ष (आज के समय के लिए)
धर्म संकट में होगा → भगवान आएँगे
समाज संकट में होगा → विवेक काम आएगा
और अगर इंसान अहंकार में बोले
“मैं धर्म का रक्षक हूँ”
तो समझ लीजिए —
यहीं से अधर्म शुरू होता है।
1 week ago | [YT] | 0
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सुनने में आया की टर्म वा बड़ा खराब आदमी है टैरिफ बहुत लगाता है लेकिन फिर भी मीडिया से मुखातिब है quite ही बोलता है मीडिया को quit नही करता है और हमारे मोदी चा प्रोयोजित interview देते हैं, एक बार दिखे थे प्रेस कांफ्रेंस में लेकिन मोटा भाई उनकर सवाल पकड लिए मोदी चा मौन रहे और हम मनमोहन को मौन कहते हैं ! समझ में हमको बस हमको इ नही आ रहा है mother of डेमोक्रेसी भारत को बताने वाले 4 थे खम्भे से इतना खिसिआये हुए क्यों हैं एक खम्भा तोड़ के बुझाता है father of democracy भारत को बनायेंगे का ? खैर रहने दीजिये मोदी चा देश के प्रधान सेवक है नौकर मत कहियेगा आजकल सेवक और नौकर में फर्क है ! हु समझे की नही ! का बुझे ?
Chat Gpt का सुद्ध किया हुआ version और उसकी प्रतिक्रिया
आपकी बात कटाक्ष नहीं, लोकतांत्रिक सवाल है—और वही असली बात चुभती है।
सुनने में आता है कि Donald Trump टैरिफ़ लगाता है, सख़्त है, विवादित है—
लेकिन फिर भी मीडिया से मुखातिब रहता है।
धीरे बोलता है, कम बोलता है, पर quit नहीं करता।
मीडिया को छोड़ा नहीं, सवालों से भागा नहीं।
इधर हमारे नरेंद्र मोदी—
ज़्यादातर प्रायोजित इंटरव्यू।
प्रेस कॉन्फ़्रेंस?
एक-दो बार दिखे भी, तो सवाल पहले ही अमित शाह ने पकड़ लिए,
मोदी जी मौन रहे।
और फिर हम मनमोहन सिंह को “मौन प्रधानमंत्री” कहते रहे!
यह तुलना नहीं—
यह दोहरे मापदंड का आईना है।
अब बड़ा दावा—
“Mother of Democracy”
तो सवाल जायज़ है कि
चौथे खंभे (मीडिया) से इतनी चिढ़ क्यों?
लोकतंत्र में मीडिया सवाल करता है,
और सत्ता जवाब देती है—
यही संतुलन है।
अगर एक खंभा तोड़कर
“Father of Democracy” बनने की कोशिश होगी,
तो इमारत बचेगी नहीं—
सिर्फ़ पोस्टर बचेगा।
और हाँ—
मोदी जी प्रधान सेवक हैं,
नौकर मत कहिएगा—
आजकल सेवक और नौकर में फर्क बताया जाता है।
लेकिन लोकतंत्र में
सेवक भी जनता को जवाबदेह होता है।
अब समझ में आया या नहीं—
यह आप पर छोड़ते हैं।
हमने तो सवाल रख दिया।
का बुझइए?
1 week ago | [YT] | 1
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जब आप किसी को टैग करते हैं, तो सूचना उसे उसी क्षण मिल जाती है।
लेकिन जवाब अक्सर तब आता है जब पोस्ट वायरल हो जाती है।
शुरुआत में ही उत्तर देकर लोग बात खत्म क्यों नहीं करते?
क्योंकि आज संवाद का पैमाना सही–गलत नहीं, बल्कि कहने वाले की “औक़ात” बन चुका है।
सच यह है कि बहुतों को सही या गलत से कोई लेना-देना नहीं है—
बस मंच पर नाचते रहना है।
चाहे वो सोनू सूद हों या कोई और बड़ा रसूखदार व्यक्ति,
या कोई फिल्मी चेहरा।
कुछ लोग आज भी down to earth हैं—
उन्हें ही हम Instagram और X पर फॉलो करते हैं,
क्योंकि उनमें संवेदनशीलता है, ज़मीन से जुड़ाव है।
संवेदनहीनता और अहंकार से भरे लोगों से दूरी ही बेहतर है।
कुछ लोग खुद संवाद नहीं करते,
टीम के ज़रिये ऑपरेट होते हैं—
उनसे भी हमें कोई लेना-देना नहीं।
हम ज़मीन पर रहते हैं,
हमें ज़मीनी लोग पसंद हैं।
आप मुझे नहीं जानते—
तो हम भी आपको नहीं जानते।
और जब आप कहते हैं कि “छोटा-बड़ा कोई नहीं”,
तो फिर ये दूरी, ये मौन, ये चयन क्यों?
सही सवाल पर
सही ढंग से
सही जवाब मिलना चाहिए।
वरना संवाद नहीं,
सिर्फ समय की बर्बादी है।
कुछ लोग संवाद नहीं करना चाहते—
वो सिर्फ टीवी की तरह देखते हैं।
मेरा काम बोलना है, सवाल करना है।
इसलिए मेरा स्वभाव भी वैसा ही है।
इस पूरी बात को
किसी वीडियो में विस्तार से रखा जाएगा।
फिलहाल के लिए—
क्रमशः… 🙏
1 week ago | [YT] | 0
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जब आप किसी भी व्यक्ति के अनुचित मांग और कार्य को मान लेते है तब आप खुद को तो ठेश तो पहुचाते ही हैं मगर असली ठेश अनुचित मांग करनेवाले व्यक्ति को ही लगती है. महाभारत में सत्यवती की एक अनुचित मांग को मान लिया गया था भीष्म को गद्दी नही मिली और फिर सत्यवती के पुरे कुल को ही अंबिका के बेटे ध्रितराष्ट्र ने ही हस्तिनापुर से निकाल दिया था. तब सत्यवती को पश्चाताप के सिवा कुछ भी हाँथ नही लगा. एक गलत निर्णय महाभारत को जन्म देगा ध्यान रहे इसलिए किसी की भी अनुचित मांग को न माने, मोह गलत निर्णय को जन्म देता है प्रेम आद्र और सहिसुन बनाता है प्रेम ही इस संसार की नीव है स्वयम विचार कीजिये राधे राधे
1 week ago | [YT] | 0
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अटल बिहारी वाजपेयी जी हमारे मत में देश के सबसे सफल और दूरदर्शी प्रधानमंत्रियों में से एक नहीं, बल्कि अपने आप में एक युग थे।
उनके कार्यकाल में भारत ने सबसे स्थिर आर्थिक स्थिति का अनुभव किया, जबकि उसी कालखंड में देश ने पोखरण-II जैसे ऐतिहासिक परमाणु परीक्षण और कारगिल युद्ध जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना किया।
इन विषम परिस्थितियों के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था को संतुलित और सुदृढ़ बनाए रखना किसी असाधारण नेतृत्व क्षमता का प्रमाण है—और अटल जी ने यह कर दिखाया।
एक नेता के रूप में वे दृढ़ थे,
एक पत्रकार के रूप में निर्भीक,
एक कवि के रूप में संवेदनशील,
और एक लेखक के रूप में विचारशील।
अटल बिहारी वाजपेयी जी ने जीवन के हर क्षेत्र में स्वयं को सिद्ध किया।
यूं ही कोई “अटल” नहीं बन जाता।
“मौत से ठन गई,
या काल के कपाल पर
लिखता और मिटाता हूँ,
हर रोज़ एक गीत नया गाता हूँ।”
ये पंक्तियाँ केवल कविता नहीं,
बल्कि उनके व्यक्तित्व का दर्पण हैं।
अटल जी किसी पद से बड़े थे—
वे अपने आप में विराट विचार, विराट व्यक्तित्व और विराट चेतना थे।
उनकी प्रशंसा में शब्द कम पड़ जाते हैं,
और मौन भी श्रद्धांजलि बन जाता है।
1 week ago | [YT] | 0
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एक मंत्री महोदय का बयान आया कि जब महिलाओं की आबादी पुरुषों से अधिक हो जाएगी, तब पुरुषों को दो विवाह की अनुमति देनी पड़ेगी www.awarenews24.com/opinion/a-statement-came-from-…
2 weeks ago | [YT] | 1
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ढाका में प्रस्तावित संगीत कार्यक्रम रद्द, छायानट पर भीड़ के हमले के बाद भारतीय शास्त्रीय कलाकार बोले — ‘हमें अपनी जान का डर लगा’ www.awarenews24.com/opinion/proposed-concert-in-dh…
2 weeks ago | [YT] | 3
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कुछ लोग धुरंधर को प्रोपेगेंडा बता रहे हैं अरे भाई देख के मजा आया और फिल्म हम सिर्फ एंटरटेनमेंट के लिए देखते हैं उल्टा रह्म्मान डाकू हीरो बन गया और तुम पता नही क्या क्या बोल रहे हो बोलो बोलो विडियो डालो देखते हैं हम भी की तुम कहते क्या हो यार उसके बाद हम भी कुछ कहेंगे तुम नही सुनोगे लेकिन 10 आदमी भी सुन रहा है तब तक हम अखबार बेचते रहेंगे का भाई
2 weeks ago | [YT] | 0
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