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# samart choudhary #

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@@@@ aapki har samasya k samadhan hoga######

4 months ago | [YT] | 5

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Real story ak bar jarur padha
उत्तराखंड के एक छोटे से गाँव में सावित्री और उमाशंकर अपने इकलौते बेटे अनिल के साथ रहते थे�। अनिल होशियार और स्नेही बेटा था, मगर एक दिन वह बस दुर्घटना में लापता हो गया। बहुत खोजबीन और आस-पास के रिश्तेदारों से पूछताछ के बाद भी उसका कोई पता नहीं चला। पूरे गाँव में यह खबर फैल गई कि अनिल अब इस दुनिया में नहीं रहा। माँ सावित्री के लिए तो मानो सारी दुनिया उजड़ गई थी�।समय बीतता गया, दुख और अकेलेपन के बीच सावित्री हर रोज़ मंदिर जाती, भगवान से अपने बेटे को लौटा लाने की प्रार्थना करती�। उमाशंकर ने भी बेटे की बहुत कमी महसूस की, उनकी सारी खुशियाँ मानो घर छोड़ चुकी थीं।पच्चीस साल बीत गए। एक दिन वही घर, जहाँ कभी अनिल की किलकारियाँ गूंजती थीं, वहाँ एक अपरिचित नौजवान पहुंचा। उसके कपड़ों से वह पुलिस अधिकारी लगता था और उसकी आँखों में ग़ज़ब का आत्मविश्वास था�। उसने दरवाजे पर दस्तक दी और खुद को एसपी अनिल बताते हुए अपने माता-पिता से मिलने की इच्छा जताई।सावित्री और उमाशंकर चौंक गए। उन्होंने कहा, “हमारा बेटा तो 25 साल पहले मर गया था, तुम कौन हो?” लेकिन युवक ने बचपन की कई बातें, परिवार की यादें, और माँ के हाथ का स्वाद याद दिलाया�। उमाशंकर को शक रहा कि कहीं कोई धोखाधड़ी तो नहीं हो रही, क्योंकि उनके पास कुछ जमीन-जायदाद थी। लेकिन युवक ने बचपन की ऐसी बातें बताईं, जो केवल परिवारवाले ही जान सकते थे।धीरे-धीरे गाँव वाले भी इकठ्ठा हो गए। अनिल ने अपने चेहरे पर पड़ी बचपन की चोट का निशान दिखाया—सावित्री की आँखें भर आईं, और उन्होंने अपने बेटे को गले लगा लिया�। उमाशंकर की आँखों से भी आंसू बह निकले। नई उम्मीद और पुराने प्रेम के साथ परिवार फिर से एक हो गया।गाँव में त्योहार सा माहौल छा गया—सावित्री और उमाशंकर की खुशियों की कोई सीमा नहीं रही। सभी कहने लगे कि यह तो भगवान का चमत्कार है, जिसने एक माँ को उसका बेटा लौटा दिया�। वर्षों के इंतजार, ममता और आस्था के आगे काल भी हार गया।अब अनिल अपने माता-पिता के साथ रहने लगा। उसकी सफलता और उसका जीवित वापस लौट आना पूरे गाँव के लिए प्रेरणा बन गया। सावित्री को यकीन हो गया कि सच्ची ममता और प्रार्थना व्यर्थ नहीं जाती—कभी-कभी चमत्कार सच भी हो जाते हैं�।इस कहानी में माँ-बेटे के प्रेम, आस्था, और इंतजार की ताकत दिखाई गई है, जो हर पाठक को छू जाती है�।

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