Karan Singh Mkdolia

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Karan Singh Mkdolia

कवि जयसिंह रईया, झज्जर, हरियाणा

पूंजीवाद व्यवस्था देश मैं माची लूट खसोट मार दिये मेहनतकश बिन खोट

इसी व्यवस्था बणी देश मैं भूखा मरै कमेरा सै जो तिनका भी नां ठाकै धरता कती मौज सी लेर्या सै थारी मेहनत पै कब्जा करकै तम नै ये दुःख देर्या सै म्हारी एकता तोडन खातर चालै सै ये नई-नई चाल कदे धर्म म्हं कदे जात म्हं कदे भाषा का करै सवाल कदे इलाके म्हं अळझा कै बदल गिरै सै म्हारा ख्याल चौगरदे तै जाळ गेर यें दे सैं गळ न घोट मार दिये मेहनतकश बिन खोट

कई खरब के करे घोटाले या भी थारी कमाई सै जिस तरियां ये चाल रहे या कती नाश की राही सै बुद्धिजीवी माणस कै तै होती नहीं समाई सै जै याहे रही चाल देश की क्यूकर होवे गुजारा सै जो देश चलावण आळा सै वोहे लूट मचा रहा सै चक्र खाग्या देश कती जब लगी हवाला की चोट मार दिये मेहनतकश बिन खोट

राजनीति म्हं गुण्डे बडगे इब गुण्ड्यां का होग्या राज जो अपणे घर म्हं डाका डालै उनके सिर पै होग्या ताज मेहनतकश तू सोच समझ ले तेरे सिर पै रही सै बाज इब गुण्ड्यां की चक चढ रही सै सुणळे बात लगाकै ध्यान सुप्रीम कोर्ट नै पत्र द्वारा इब गुण्डे देवैं सै ज्ञान लडनी आप लड़ाई होगी जब रहगी दुनियां मै श्यान सारा बेरा पर नां बोलै बिचारी सरकार का के खोट मार दिये मेहनतकश बिन खोट

ओर के लिखूं इन गुण्ड्यां की बाकी बात रही कोन्यां ठाढ़े आगे हीणे की कोय जात जमात रही कोन्यां कोण कमेरा मन्नै बताद्यों जिसने लात सही कोन्यां क्यूं खावो सो लात बात सै थोड़ा ध्यान लगाणे की मिल कै सारे लड़ो लड़ाई या टोली ना थ्याणे की समझदार के खटक लागज्या इस जयसिंह के गाणे की तम संगठित हो कै लड़ो लड़ाई मारो सिर मै ट्योंट मार दिये मेहनतकश बिन खोट

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4 days ago | [YT] | 20

Karan Singh Mkdolia

छुट्टी के दिन पूरे होग्ये न्यू सोचण लाग्या मन म्हं
बांध बिस्तरा चाल पड्या कुछ बाकी रही ना तन म्हं

छाती कै ला कै माता रोई जिसनै पाळया पोष्या जाम्यां था
बुआ बाहण पुचकारण लागी भाई भी रोया राम्भा था
दरिया केसी झाल उठती मनैं कालजा थांब्या था
छोटे भाई नै घी पीपी म्हं गूंद खाण का बांध्या था
न्यूं बोले दिए छोड़ नौकरी के दब कै मरैगा धन म्हं

पिता जी खड़े दरवाजे म्हं उनकी कान्ही चाल्या था
कोळै लागी मेरी बहू रोवै थी सांस सबर का घाल्या था
आंख्यां के म्हं नीर देख कै मेरा काळजा हाल्या था
न्यूं बोली पिया मेरे नाम का किसतैं दिया हवाला था
गश खाकै नै पड़ी घर आळी होश रही ना तन म्हं

हाथ फेर कै पुचकार दई कुछ ना चाल्या जोर मेरा
छ: महीने म्हं आल्यूंगा जै ना आया तो चोर तेरा
रस्ते म्हं सुसराड़ पड़ै थी उड़ै बी लाग्या दौर मेरा
जीजा आया जीजा आया साळा करता आया शोर मेरा
सासू नैं पुचकार दिया मेरै सीळक हुई बदन म्हं

उड़ै रोटी तक अभी खाई कोन्या करी चलण की त्यारी
जीजा जी क्सद आओगे न्यू बूझै साळी प्यारी
म्हारे आवण का बेरा ना तुम आस छोड़ दियो म्हारी
इतने ए दिन की जोड़ी थी या थारे तैं रिश्तेदारी
मेरी लियो आखरी राम राम थारे कर चाल्या दर्शन मैं

टेशन ऊपर छोड़ण खातर साळा संग म्हं आया था
बाबू जी तैं करी नमस्ते वारंट चेंज कराया था
गाड़ी के म्हं बैठग्या मनै पाला गस का खाया था
सिंगापुर म्हं जा पहोंच्या डांगर ज्यूं डकराया था
कर बदली मैं भेज दिया उस केहरी बबरी बण म्हं

यूनिट म्हं दई हाजरी मनैं पक्का देणा पहरा हो
घर की याद बहू की चिंटा यो भी दुख गहरा हो
फौज के म्हां वो जाइयो जो बिन ब्याहा रह रहया हो
फौजियों तैं बूझ लियो जो मेहर सिंह गलत कह रहया हो
कोए बहुआं आळा सुणता हो तो मत दियो पैर बिघन म्हं

1 week ago | [YT] | 19

Karan Singh Mkdolia

सूर्य कवि पंडित लख्मीचंद

पिया मेरे चाला करग्या, ज़िन्दगी का गाला करग्या सोवती नै छोड़ कै गया, तनै के मिला... टेक

टाप्पू मै गया छोड़ अकेली -2 और नहीं कोए मन का मेली -2 एकली करड़ाई नै घेरी, साजन याद सतावै तेरी मेरी किस्मत फोड़ कै गया, तनै के मिला...

और कुटुंब छोड़ आई साथ तेरी -2 और कोण बुझैगा बात मेरी -2 या सिर पै रात अंधेरी छाई, तनै के सोची अन्यायी हो राही मुखड़ा मोड़ कै गया, तनै के मिला...

और कुण करै रक्षा भिड़ पड़ी मै -2

और मोती रलगा जो था लड़ी मै -2 कोए घड़ी मै दिखै खपना, चाद सुरज जूं दिखै छूपना मुझसे नाता तोड़ कै गया, तनै के मिला..

काया मीन की तरियां लोची -2 घीटी पकड़ कै विपद नै बोची -2 या के सोची तनै मती मंद, कहगे ब्राह्मण लख्मीचंद छंद इसे जोड़ कै गया, तनै के मिला...

हरियाणवी संस्कृति प्रचार प्रसार

1 week ago | [YT] | 13

Karan Singh Mkdolia

कवि पंडित नंदलाल मुनीमपुर

प्यारे धोरै जाण का के डर हो सै पिया, टोटा नफा साझला एकै घर हो सै पिया ।। टेक ।

प्यारा ना तारया करै जात नै, उड़ै चाहे दिन में जाओ चाहे रात नै, जो सोचे समझे बात नै उकी मर हो सै पिया ।।।।

क्यूं बोलै सै मंदा-मंदा, तेरे टोटे का काट देगा फंदा, जो बिना ज्ञान का बंदा इसा जिसा खर हो सै पिया 1121

चुगली तै किस नै लाभ रहे सै, सबनै ठाडे की दाब रहे सै, उसकी आब रहै सै जिसकै जर हो सै पिया ।।4।

जा प्यारे के दर्शन करिये, आड़ै तूं मतना भूखा मरिये, कहै नन्दलाल मत डरिये सब का हर हो सै पिया । ।5।

हरियाणवी संस्कृति प्रचार प्रसार

1 week ago | [YT] | 9

Karan Singh Mkdolia

कवि पं. रामकिशन व्यास

वैद्य, हकीम, डॉक्टर नामर्दो को मर्द बणाते हैं। बोल्लै साफ सफेद झूठ बेशर्म लूटकै खाते हैं।।

हीजडे क्यों नहीं मर्द बणाए बोल्लो झूठ भुकावो क्यूँ बाँझ के नहीं बालक हों इसे झूठे सुए लाओ क्यूँ जनसंख्या कम करो. तो नामर्दों को मर्द बणाओ क्यूँ टी. वी. के माँह बीर मर्द के नंगे नाच दिखाओ क्यूँ दीवारों पर लिख-लिख डॉक्टर झूठे प्रचार कराते हैं।।

वैद्य, हकीम, डॉक्टर सारै मिलकै लूट मचावैं सै पचास फीस के पाँच का सूवा पन्द्रह बीस मै लावें सै बिना सणंद के नए डॉक्टर लूट-लूट के खावैं सै जीव हत्या करै पैसे खात्तर पापी गर्भ गिरावैं सै जवान बणावै बूढ्यां नै बेशर्म नहीं शर्माते हैं ।।

वैद्य, डॉक्टर बेइमानी से जनता नै जो लूटैगा लुटज्यां सब जयदाद याद रख धेल्ला तक ना उठेगा घड़ा पाप का भरकै एक दिन कान्या तक का फूटैगा वंश कंश का नष्ट हुआ न्यूँ मर कै पैन्डा छूटेगा बुरे बुराई नेक डॉक्टर नेकी संग ले जाते हैं।।

टी. वी., साँग, सिनेमा मै सब गन्दे गाणे बन्द करो आशिक मासूक बेशर्मी से इश्क कमाणे बन्द करो सत्य की कथा सुणाओं नगें नाच दिखाणे बन्द करो नारनौंदिये व्यास जनसंख्या कम हो मर्द बणाणे बन्द करो टी. वी. देख बालक भी गोली, घुस्से, लात चलाते हैं ।।

नकली वैद्य और डाक्टरों को चेतावनी तथा पाश्चात्य संस्कृति के प्रति क्षोम) भजन

1 week ago | [YT] | 12