Dr.Mitesh Sharma



Dr.Mitesh Sharma

वर्षा ऋतु मे होनेवाली बिमारी -टाइफाइड

टाइफाइड साल्मोनेला एन्टेरिका नामक बैक्टीरिया के कारण होने वाला रोग है। यह बैक्टीरिया दूषित पानी और भोजन के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है। टाइफाइड में आमतौर पर भूख कम लगना, कब्ज, सिरदर्द और लंबे समय तक बुखार रहना, जैसे लक्षण हो सकते हैं। आधुनिक चिकित्सा में, टाइफाइड के उपचार के लिए एंटीबायोटिक्स दिए जाते हैं। जिन देशों में टाइफाइड बुखार बहुत अधिक होता है, उन देशों में जाने वाले लोगों को टाइफाइड का टीका लगाने के लिए कहा जाता है।

अच्छी तरह से पके हुए और गर्म खाद्य पदार्थ, छिलके उतरे हुए फल और सब्जियां खाना, दूषित पानी से बनी चीजे खाने से बचना और स्ट्रीट फूड न खाना, टाइफाइड पैदा करने वाले बैक्टीरिया को आपसे दूर रख सकता है।

टाइफाइड के लक्षणों को कम करने के लिए आयुर्वेदिक दवाओं और जड़ी बूटियों का संयोजन प्रभावी पाया जाता है। बुखार के लिए दी जाने वाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का स्वाद कड़वा होता है और इनमें कृमि (वॉर्म) नाशक गुण होते हैं। गुडूची (गिलोय) टाइफाइड के उपचार के लिए सबसे अधिक उपयोग होने वाली जड़ी बूटियों में से एक है।

उपवास भी टाइफाइड बुखार कम करने में फायदेमंद है क्योंकि यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को साफ करता है। टाइफाइड के इलाज के लिए उपयोग की जाने वाली अधिकांश हर्बल दवाएं रोगाणुओं के खिलाफ अच्छा असर दिखाती हैं, इस कारण शरीर से टाइफाइड बैक्टीरिया को हटाने में मदद मिलती है।

आयुर्वेद में कहा गया है कि जिवानु टाइफाइड में होने वाले आंतरिक ज्वर (एक प्रकार का बुखार) के कारक होते हैं। टाइफाइड में ज्वर (बुखार), शिर-शूल (सिरदर्द), अरुचि (स्वाद में कमी), अरती (काम में रुचि की कमी) और मलबद्धता (कब्ज) जैसे लक्षण पैदा होते हैं। टाइफाइड के इलाज में उपयोग होने वाली हर्बल औषधियों का पहले से ही भारतीय जनजातियों और आयुर्वेदिक चिकित्सकों द्वारा उपयोग की जाती रही हैं।

टाइफाइड का इलाज करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली अधिकांश जड़ी-बूटियाँ कटु और तिक्त रस (तीखा और कड़वा स्वाद) वाली होती हैं। इनमें ज्वरघ्न (बुखार नाशक) और कृमिघ्न (जीवाणु-नाशक) गुण होते हैं। ये गुण शरीर के मल (शरीर में अपशिष्ट पदार्थ) या कफ जिस पर बैक्टीरिया रहते हैं और बढ़ते हैं, को कम करके रोगाणुओं को मारते हैं या विस्थापित कर देते हैं।

शोधन उपचार

लंघन:
लंघन ज्वर के लिए एक प्रमुख उपचार प्रक्रिया है। लंघन शब्द का अर्थ आमतौर पर उपवास होता है, जो अपतर्पण (शरीर का पोषण कम होना) की स्थिति की ओर ले जाता है। थेरेपी का उद्देश्य धातु और दोषों में संतुलन बनाकर शरीर में हल्कापन लाना है।

उपवास विधि को व्यक्ति की प्रकृती के आधार पर चुना जाता है। वात प्रकृति वाले व्यक्ति के लिए फलाहार विधि अधिक उपयुक्त होती है, जबकि पित्त या कफ प्रधान व्यक्ति निराहार विधि का पालन कर सकता है।

उपवास के कारण, वात और अग्नि (पाचन अग्नि) उत्तेजित हो जाते हैं और शरीर में असंतुलित दोषों को संतुलित करने में मदद करते हैं। उपवास टाइफाइड बुखार के मूल कारण जमे हुए कफ और मल से राहत देता है। लंघन का उपयोग टाइफाइड के अलावा कई अन्य बीमारियों के लिए भी किया जाता है, जिनमें अतिसार (दस्त), विसुचिका (हैजा), विबंध (कब्ज), अलसक (पेट फूलना), छर्दि (उल्टी) इत्यादि शामिल हैं।
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2 years ago | [YT] | 0