रिश्तों के धागों का एक एक सिरा
हम दोनों के ही पास था,
मगर उलझा हुआ
चंद लफ्ज़ों से सुलझ जाता वो
गर किसी ने सुलझाया होता
नज़रें कई दफा मिलीं दोनों की
मगर लब था बंधा हुआ।
दूर हो जाती सभी
गलतफहमियाँ गर दोनों ने
एक दूजे को बुलाया होता
सब पहले सा हो जाता फिर से
गर किसी ने आगे बढ़कर
हक से गले लगाया तो होता।
#IRSHAD❤️🩹🥀
IRSHAD
10 months ago | [YT] | 0
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