यह एक डिवाइनली गाइडेड चैनल है। यहां हम आध्यात्मिक तथ्यों पर जानकारी प्रसारित करते हैं। यह सभी जानकारियां हमारे फाउंडर आचार्य सिद्धार्थ के अध्ययन और अनुभवों के आधार पर संचित की जाती हैं। मुक्तिसूत्र ऑनलाइन स्कूल ऑफ स्पिरिचुअल साइकोलॉजी आपको आध्यात्मिक अभ्यास के तमाम महत्वपूर्ण अंगों के बारे में बताता है।
यह इस बात पर केंद्रित है कि कोई इस जीवन में ही लक्ष्य कैसे प्राप्त कर सकता है।
आचार्य सिद्धार्थ के सानिध्य में हम यहां ध्यान करने के विभिन्न तरीके योग एवं मुद्राओं के विषय में सीखते हैं।
इसके अलावा हम अन्य व्यक्तित्व विकास एवं भौतिक जीवन में आध्यात्म के उपयोगों को सम्मिलित कर विभिन्न सेवाएं भी प्रदान करते हैं;
हमारी सेवाएं ;-
● Cosmic Healing (लौकिक उपचार)
● Handwriting Guidance (हस्तरेखा मार्गदर्शन)
● Numerology Guidance (अंकशास्त्र मार्गदर्शन)
● Spiritual Designing (आध्यात्मिक डिजाइनिंग)
● Guided Meditation (दिग्दर्शित ध्यान)
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● Spiritual Lectures & Seminars (Online)
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MuktiSutra™
🙏✨ मुक्तिसूत्र परिवार को महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं ✨🙏
🌸🕉️ हर हर महादेव 🕉️🌸
प्रिय भक्तों 💖🙌,
महाशिवरात्रि के इस पावन अवसर पर आप सभी को ढेर सारी शुभकामनाएं 🌺💫।
भगवान भोलेनाथ 🐍🔱 आपके जीवन से सभी दुख, कष्ट और बाधाएं दूर करें 🙏😇
और आपको सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि का वरदान दें 🌈💰🕊️।
✨🌙 इस पवित्र रात्रि में
आपकी भक्ति 🙏
आपका विश्वास 💖
और आपका संकल्प 🔥
आपको शिव तत्व से जोड़ दे 🕉️🌟।
🌼🔔
ॐ नमः शिवाय 🙏
हर हर महादेव 🚩
बम बम भोले 💥
🔔🌼
आप सभी का प्रेम और सहयोग ही मुक्तिसूत्र की असली शक्ति है 💕🤗
इसी तरह जुड़े रहिए, भक्ति में डूबे रहिए 🌊🛕✨
🙏💐
महाशिवरात्रि की अनंत शुभकामनाएं
आपका अपना
💖 मुक्तिसूत्र परिवार 💖
🔱🕉️✨ हर हर महादेव ✨🕉️🔱
1 month ago | [YT] | 2
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MuktiSutra™
ज्योतिष, प्राण और औषधि: भारतीय चिकित्सा का त्रिदेव दर्शन
भारत की चिकित्सा परंपरा केवल रोग मिटाने का विज्ञान नहीं अपितु यह जीवन को उसके मूल स्वरूप में पहचानने की साधना रही है।
जहाँ पश्चिमी चिकित्सा ने शरीर को प्रयोगशाला की तरह देखा, वहीं भारतीय वैद्य ने उसे मंदिर की तरह माना —
जहाँ हर कोशिका में आत्मा की उपस्थिति है,
हर श्वास में ब्रह्म का स्पंदन है, और हर रोग केवल असंतुलन का संकेत है, न कि शाप।
आयुर्वेद ने मनुष्य को तीन स्तरों पर विभाजित किया — शरीर, मन और आत्मा। इन तीनों का सामंजस्य ही स्वास्थ्य है।
जब शरीर की नाड़ी, मन की भावना और आत्मा का विचार एक रेखा पर बहने लगते हैं, तभी मनुष्य “आरोग्य” कहलाता है।
यही कारण है कि प्राचीन वैद्य केवल औषधि नहीं देते थे —
वे दिनचर्या, आहार, ध्यान और ग्रहों की स्थिति तक को देखकर रोग का निदान करते थे।
आज यह सुनना अजीब लगता है कि किसी रोग के उपचार से पहले ग्रहों की चाल देखी जाती थी, परन्तु वही वैदिक दृष्टि थी जिसने मनुष्य को सृष्टि का हिस्सा माना, न कि उससे अलग इकाई। जब चंद्रमा घटता है तो ज्वार-भाटा बदलता है — तो क्या शरीर, जो सत्तर प्रतिशत जल है, उस परिवर्तन से अछूता रह सकता है?
जब मंगल प्रबल होता है तो रक्त में उष्णता क्यों न बढ़े?
जब बुध और चंद्रमा असंतुलित हों तो विचार और स्मृति क्यों न डगमगाएँ?
इसी सूक्ष्म समझ के कारण वैद्य ज्योतिष आचार्य भी होते थे —
वे जानते थे कि आकाश का संतुलन ही भीतर के संतुलन का प्रतिबिंब है।
औषधि केवल पत्तियों या जड़ों से नहीं बनती थी, वह बनती थी प्रयोजन, भावना और शुद्ध संकल्प से।
वैद्य जब औषधि घोटता था, तो उसके मन में मंत्र होता था —
“सर्वे भवन्तु सुखिनः” —
यानी उस औषधि में केवल रासायनिक शक्ति नहीं, बल्कि प्राण शक्ति संचारित होती थी।
वह जानते थे कि रोग केवल शरीर का नहीं होता, कभी वह मन की उदासी, अपूर्ण इच्छा या ग्रहदोष का रूप लेकर आता है। इसलिए उपचार में आहार, औषधि, प्राणायाम और ध्यान — चारों का समन्वय होता था।
यह त्रिदेव दर्शन था —
ज्योतिष, प्राण और औषधि —
जहाँ ज्योतिष दिशा देता था, प्राण ऊर्जा जगाता था, और औषधि उस ऊर्जा को रूप देती थी। इसी एकात्म दृष्टि ने भारत की चिकित्सा को केवल विज्ञान नहीं, बल्कि आध्यात्मिक अनुभूति बना दिया था।
आज आधुनिक चिकित्सा ने शरीर को मशीन की तरह समझ लिया है, और हर रोग के लिए एक अलग पुर्जा खोजने में लगी है।
पर भारत की भूमि ने हमेशा कहा —
मनुष्य मशीन नहीं, मंत्र है।
उसका संतुलन दवाओं से नहीं, बल्कि ध्यान, आस्था और प्राण प्रवाह से लौटता है।
समय आ गया है कि हम फिर से उसी ज्ञान की ओर लौटें — जहाँ औषधि केवल इलाज नहीं, प्रार्थना थी।
जहाँ वैद्य केवल चिकित्सक नहीं, ऋषि होता था। और जहाँ स्वास्थ्य का अर्थ केवल बीमारी से मुक्त होना नहीं,
बल्कि जीवन से एकाकार होना था।
#ThinkDeep #IndianWisdom #SpiritualScience #UniversalEnergy #Consciousness #BeyondScience #InnerJourney #TruthSeekers
#MuktiSutra
#AacharyaSiddharth
5 months ago | [YT] | 1
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MuktiSutra™
कहानी: साधु भेष की मर्यादा
एक बहुरूपिया राज दरबार में पहुंचा, प्रार्थना की- "अन्नदाता बस ₹5 का सवाल है और महाराज से ये बहुरूपिया और कुछ नहीं चाहता।"
राजा ने कहा- मैं कला का पारखी हूं, कलाकार का सम्मान करना राज्य का नैतिक कर्तव्य है, कोई ऐसी कला दिखाओ कि मैं प्रसन्नता से ₹5 पुरस्कार में दे सकूं, पर दान नहीं दे सकता।
कोई बात नहीं अन्नदाता! मैं आप के सिद्धांत को तोड़ना नहीं चाहता, पर मुझे अपना स्वांग दिखाने के लिए 3 दिन का समय चाहिए, कहकर बहुरूपिया चला गया।
दूसरे दिन नगर से बाहर एक टीले के ऊपर समाधि मुद्रा में एक साधु दिखाई दिए। नेत्र बंद, तेजस्वी चेहरा, लंबी जटाएं।
चरवाहों ने उस साधु को देखा। उन्होंने पूछा- स्वामी जी!आपका आगमन कहां से हुआ है?
कोई उत्तर नहीं!
क्या आपके लिए कुछ फल, दूध की व्यवस्था की जाए?
कोई उत्तर नहीं!
शाम को चरवाहों ने नगर में चर्चा की। घर-घर तपस्वी की चर्चा होने लगी। दूसरे दिन नगर के अनेक शिक्षित, धनिक, दरबारी, थाली में मेवा, फल, नाना प्रकार के पकवान लेकर दर्शन के लिए दौड़ पड़े।
सबके आग्रह करने पर भी साधु ने उन वस्तुओं को ग्रहण करना तो दूर, आंख भी नहीं खोली।
यह बात प्रधानमंत्री तक पहुंची। वह भी स्वर्ण मुद्राएं लेकर दर्शनार्थ पहुंचा और निवेदन किया- "बस एक बार नेत्र खोल कर कृतार्थ कीजिए!"
प्रधानमंत्री का निवेदन भी व्यर्थ गया। अब तो सभी को निश्चय हो गया कि यह संत अवश्य पहुंचा हुआ है।
प्रधानमंत्री ने राजा के महल में जाकर वस्तुस्थिति से अवगत कराया, तो राजा सोचने लगे, जब मेरे राज्य में इतने बड़े तपस्वी का आगमन हुआ है तो उनकी अगवानी के लिए मुझे जाना चाहिए।
दूसरे ही दिन सुबह वे दर्शनार्थ जाने को उद्यत हुए। खबर बिजली की तरह फैल गई। जिस मार्ग से राजा की सवारी निकलने वाली थी, वह साफ करा दिए गए। रास्ते में सुरक्षा व्यवस्था ठीक कर दी गई।
राजा ने तपस्वी के चरणों में अशर्फियों का ढेर लगा दिया और उनके चरणों में मस्तक टेककर आशीर्वाद की कामना करने लगे ।
पर तपस्वी विचलित नहीं हुआ।
अब तो प्रत्येक व्यक्ति को निश्चय हो गया कि तपस्वी बहुत त्यागी और सांसारिक वस्तुओं से दूर है।
चौथे दिन बहुरूपिया फिर दरबार में पहुंचा, हाथ जोड़कर बोला- "राजन! अब तो आपने मेरा स्वांग देख लिया होगा और पसंद भी आया होगा, अब तो मेरी कला पर प्रसन्न होकर मुझे ₹5 का पुरस्कार दीजिए, ताकि परिवार के पालन पोषण हेतु आटा दाल की व्यवस्था कर सकूं!"
राजा चौका- कौन सा स्वाँग?
बहुरूपिए ने कहा-"वही तपस्वी साधु वाला, जिसके सामने आप ने अशर्फियों का ढेर लगा दिया था!"
राजा ने कहा- "तू कितना मूर्ख है! जब राजा सहित पूरी जनता, तेरे चरणों में सर्वस्व लुटाने आतुर खड़ी थी, तब तुमने धन दौलत पर दृष्टि तक नहीं डाली,और अब ₹5 के लिए चिरौरी कर रहा है।"
बहुरूपिए ने कहा- "राजन! उस समय एक तपस्वी की मर्यादा का प्रश्न था। एक साधु के वेश की लाज रखने की बात थी। भले ही साधु के रूप में मैं, बहुरूपिया था,पर था तो एक साधु ही! फिर उस धन दौलत की ओर दृष्टि उठाकर कैसे देख सकता था? उस समय सारे वही भाव थे,और अब पेट की ज्वाला को शांत करने के लिए, अपने श्रम के पारिश्रमिक और पुरस्कार की मांग है आपके सामने।"
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
जय श्री राधे राधे जय श्री राधे श्याम जय श्री राधे कृष्णा
7 months ago | [YT] | 0
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MuktiSutra™
होली सिर्फ रंगों और उमंग का त्योहार नहीं है, बल्कि इसका गहरा आध्यात्मिक संदेश भी है।
1. अहंकार का नाश
होलीका दहन की कथा हमें अहंकार के विनाश का संदेश देती है। प्रह्लाद की भक्ति और होलिका के अंत से यह सीख मिलती है कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति किसी भी दुष्ट शक्ति को पराजित कर सकती है।
2. सत्यमेव जयते
हिरण्यकश्यप के अहंकार और अधर्म का अंत हुआ, जबकि भगवान विष्णु ने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की। यह हमें सिखाता है कि अंततः सत्य और धर्म की विजय होती है।
3. राग-द्वेष से मुक्ति
होली के रंग हमें यह संदेश देते हैं कि हमें अपने मन से राग-द्वेष, ईर्ष्या और घृणा को मिटाकर प्रेम और समरसता का रंग भरना चाहिए। यह आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उत्थान का पर्व है।
4. संबंधों में प्रेम और एकता
इस दिन लोग पुराने मतभेद भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाते हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि क्षमा, प्रेम और सद्भावना से ही समाज में वास्तविक आनंद और शांति आ सकती है।
5. वसंत और आध्यात्मिकता
होली वसंत ऋतु में आती है, जो जीवन में नई ऊर्जा, उल्लास और सृजन का प्रतीक है। यह हमें अपने अंदर नई चेतना जगाने और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संदेश देती है।
अतः होली न केवल रंगों का त्योहार है, बल्कि यह आत्मशुद्धि, भक्ति, प्रेम, और सकारात्मकता को अपनाने का भी संदेश देती है।
1 year ago | [YT] | 1
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MuktiSutra™
होली है तो रंग है, रंग है तो जीवन है, इस रंग में खो जाओ, ये ही तो होली का अरमान है।" आप के जीवन दुःख कभी न आयें। ऐ मेरे यार हैप्पी होली। "रंगों का त्यौहार है, ख़ुशियों की बहार है, दिल से दिल मिलते हैं, ये होली का प्यार है।
आप को होली की ढेर सारी शुभकामनाएं।🌈🌈
1 year ago | [YT] | 2
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MuktiSutra™
मकर सक्रांति सूर्य के उत्तरायण (उत्तर की ओर यात्रा) होने का प्रतीक है। इस दिन से दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं। उत्तरायण को कई मायनों में शुभ और पवित्र समय माना जाता है। मकर संक्रांति कृषि आधारित समाज के लिए नई फसलों की शुरुआत का उत्सव है। मकर संक्रांति पर गंगा स्नान और दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। मकर संक्रांति के अवसर पर गंगा स्नान एवं गंगातट पर दान को अत्यन्त शुभ माना गया है।
शास्त्रों में कहा गया है कि -
माघे मासे महादेव: यो दास्यति घृतकम्बलम।
स भुक्त्वा सकलान भोगान अन्ते मोक्षं प्राप्यति॥
इस श्लोक के अर्थ के अनुसार, माघ मास (हिंदू कैलेंडर के अनुसार जनवरी-फरवरी का समय) में जो व्यक्ति भगवान महादेव को घी और कम्बल का दान करता है, वह इस लोक में सभी प्रकार के भौतिक सुखों का आनंद लेता है और अंत में मोक्ष प्राप्त करता है। यह श्लोक माघ मास में दान की महिमा का वर्णन करता है। शास्त्रों के अनुसार, इस महीने में दान-पुण्य, तप और ध्यान का विशेष महत्व है। इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि धार्मिक क्रियाकलापों का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस अवसर पर दिया गया दान सौ गुना बढ़कर पुन: प्राप्त होता है। इस दिन शुद्ध घी एवं कम्बल का दान मोक्ष की प्राप्ति करवाता है।
मुक्ति सूत्र परिवार को मकर संक्रांति 2025 की हार्दिक शुभकामनाएं🌹🌹🚩🚩🌺
#makarsankranti2025
1 year ago | [YT] | 2
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MuktiSutra™
आपकी खुशियां गणेशजी की सूड़ की तरह लंबी हो आपकी जिंदगी उनके पेट की तरह मोटी हो और जीवन का हर पल लड्डू की तरह मीठा हो।
इस नए साल 2025 में खुशियों की बरसात हो, प्यार भरे दिन और मोहब्बत भरी रात हो, रंजिशे, नफरतें मिट जाएं सदा के लिए
नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं
आप सबका प्यारा
आचार्य सिद्धार्थ
व्हाट्सएप: 7311138870
1 year ago | [YT] | 4
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MuktiSutra™
1 से 9 तक की संख्याओं का कुछ ऐसा कांबिनेशन जो सामान्य कांबिनेशन से अलग होते है और यह बरबस ही ध्यान आकर्षित करते है... आध्यात्मिक जीवन शैली में जीने वाले व्यक्तियों को ऐसे नंबर अधिक आकर्षित करते हैं। यह नंबर कहीं भी दिखाई पड़ सकते हैं जैसे की डिजिटल घड़ी में टाइम स्क्रीन पर, किसी पर्ची टिकट या फिर करेंसी नोट पर, या साइन बोर्ड पर, मोबाइल नंबर के पहले, अंतिम या बीच के 3 या 4 नम्बर, सबसे ज्यादा यह गाड़ियों के नंबर प्लेट पर दिखते हैं।
मैं अपने सब्सक्राइबर से पूछना चाहता हूं क्या वह देवदूत संख्या अर्थात एंजल नंबर विषय पर वीडियो चाहते हैं?
1 year ago | [YT] | 3
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MuktiSutra™
ॐ चं चं चं चं चपल चलंता।
ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता॥
ॐ हं हं हाँक देत कपि चंचल।
ॐ सं सं सहमि पराने खल-दल॥
अपने जन को तुरत उबारौ।
सुमिरत होय आनंद हमारौ॥
श्री हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं...
🍁🌺🌹🏵️🌺🍁🚩
1 year ago | [YT] | 5
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MuktiSutra™
श्री राम नवमी की हार्दिक शुभकामनाएं💐🌺🌺
1 year ago | [YT] | 7
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