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Hindutva

**शिव और नशा — भक्ति या भ्रम?**

**“शिव को पाना है?
तो खुद को खोने की नहीं –
खुद को पाने की ज़रूरत है।”**

आजकल हम एक खतरनाक भ्रम में जी रहे हैं।
शिव की भक्ति को कुछ लोगों ने नशे की चादर में लपेट दिया है।
बम बोले के नाम पर धुएं में खो जाना,
भांग या गांजा को भक्ति मान लेना –
ये शिव का अपमान है, न कि आराधना।

**शिव नशा नहीं हैं।
वो चेतना हैं, प्रकाश हैं, जागरण हैं।**
उनकी भक्ति का अर्थ है –
भीतर के अंधकार को हर लेना,
ना कि उसे और गहरा करना।

जो सच में शिव को पाना चाहता है –
वो अपनी अंतरात्मा में उतरता है,
न कि किसी नशे के धुएं में।

👉 **भक्ति का अर्थ है... जागना –
ना कि नशे में सो जाना।**

**महादेव का मार्ग त्याग, तपस्या और आत्मज्ञान का है।
न कि मस्तिष्क को सुन्न करने वाले भ्रम का।**

🙏 आइए इस भ्रम से बाहर आएं।
शिव को महसूस करें —
अपने भीतर की शांति, शक्ति और सत्य के रूप में।

अगर आप भी मानते हैं कि
**“शिव चेतना हैं, नशा नहीं”** —
तो इस लेख को शेयर करें और एक संदेश फैलाएं।

** शिवाय नमः** 🌺

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6 months ago | [YT] | 1