गांव के फल-सब्जियां ---------------------------- उत्तराखंड के जैविक फल और सब्जियों की बात ही कुछ और है. पहचानिए आपको इस खजाने में क्या-क्या सब्जियां और फल दिखाई दे रहे हैं?
धान कटाई-मंडाई
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इस समय उत्तराखंड के दूरस्थ जैसे पिथौरागढ़, चंपावत, बागेश्वर, चमोली और उत्तरकाशी जिलों में धान की कटाई और मंडाई का काम चल रहा है. यहां प्रमुख रूप से झूम धान, गोविंदभोग और लाल चावल जैसी पहाड़ी प्रजाति का धान उगाया जाता है. इनमें लाल चावल बिना पानी वाले खेतों में उगाया जाता है; इन खेतों को ऊखड़ कहा जाता है. ये प्रजाति पूर्णत: बारिश पर निर्भर करती है. पहाड़ों में धान आषाढ़ में लगाया जाता है और सितंबर-अक्टूबर में काटा जाता है.
इस बार पहाड़ों में अधिक बारिश होने का असर खेती पर भी पड़ रहा है. आप देख रहे होंगे कि धान की फसल का समय पूरा होने पर भी बालियां हरी-हरी दिखाई दे रही हैं. कटाई-मंडाई के समय भी बारिश हो रही है. इसलिए किसानों को इसकी मंडाई और भंडारण में भी दिक्कतें आ रही हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग की वजह से ऐसा हो रहा है.
इस साल उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में सर्वाधिक तो पौड़ी जिले में सामान्य से कम वर्षा रिकॉर्ड हुई. बागेश्वर में निश्चित रूप से इसका असर खेती पर पड़ रहा है. पौड़ी में सर्वाधिक पलायन की वजह से खेती न के बराबर हो रही है. अब 75 फीसद पौड़ी खेती रहित हो गया है. बीरोंखाल-धुमाकोट, थलीसैण-बैजरो, पाबौ-पैठाणी और श्रीनगर क्षेत्र में ही कुछ खेती होती है.
अगर आपके क्षेत्र में भी धान की कटाई-मंडाई चल रही है तो हमें क्षेत्र-गांव का नाम बताइए और कमेंट में फोटो भी भेजें. ये फोटो हमें पिथौरागढ़ से हमारे सहयोगी आनंद वोरा ने भेजे हैं. जुन्याली उत्तराखंड आपका आभारी है.
Photo Courtesy: @mypithoragarh
सपनों का अलहदा घर
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ये घर AI से नहीं बना है बल्कि ऑरिजनल घर है. घुम्मकड़ी और जिज्ञासु प्रवृत्ति होने के कारण ये फोटो हमने 19 फरवरी 2022 को लिया था. उत्तराखंड पौड़ी गढ़वाल के एकेश्वर ब्लॉक में सिमार गांव में बना है यह शानदार सपनों का घर. हम नौगांवखाल जा रहे थे. गाड़ी से जैसे ही हमने यह घर देखा तो अनायास ही ब्रेक लग गए और हमने अपना अपने फोन से ये 2-3 तस्वीरें ले लीं. आजकल लोग ऐसे ही कई घरों के फोटो डाल रहे हैं कि ये किसी रावत जी या नेगी जी का सपनों का पहाड़ी स्टाइल का घर है. जब्कि वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से बना हुआ होता है. सावधान रहिए, असली और नकली का भेद समझिए...
रंसूलन दीबा मंदिर
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यह मंदिर उत्तराखंड पौड़ी गढ़वाल क्षेत्र के मध्य हिमायल में दूधातोली पर्वत श्रृंखला की सबसे ऊंची चोटी पर स्थित है. पोखड़ा ब्लॉक पट्टी किमगडी के अंतर्गत झालपड़ी गांव से लगभग 7 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पर स्थित हैं. रंसूल और बांज के वृक्षों के बीच होने से ही इसे रंसूलन दीबा देवी का नाम दिया गया है.
रंसूलन दीबा देवी मंदिर की ऊंचाई समुद्रतल से 8760 फीट (2670 मीटर) है. यहां वर्ष भर काफी ठंड रहती है. सिर्फ मई और जून के महीने दर्शन के लिए उपयुक्त समय है. यहां से सूर्योदय का अद्भुत नजारा दिखता है. इसीलिए लोग रातभर बेस गांव झालपड़ी से चढ़ाई करते हैं और प्रात: 4 बजे सूर्योदय का आनंद लेते हैं.
हर साल जून के महीने में आसपास के गांव के लोग मंदिर में देवी की पूजा अर्चना के लिए जुटते हैं. जिसे दीबा का मेला कहा जाता है. इस साल यानि 2025 में यह मेला 5 जून को संपप्न हुआ है. इस बार हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने इस मेले में भाग लिया. अब सिर्फ 15 से 20 दिन बचे हैं इस खूबसरत मंदिर के दर्शन के लिए. उसके बाद यहां भारी बारिश शुरू हो जाएगी. नवंबर से मार्च तक ये पर्वत श्रृंखला बर्फ से आच्छादित हो जाती है.
यहां जाने के लिए कोटद्वार से वाया सतपुली - एकेश्वर - चौबट्टाखाल होते हुए झालपड़ी तक 120 किलोमीटर मोटर मार्ग है. उसके बाद पैदल 7 किलोमीटर का ट्रैक कर सकते हैं. रामनगर की ओर से वाया मर्चुला - बीरोंखाल - बैजरो - पोखड़ा होते हुए झालपड़ी करीब 230 किलोमीटर का सड़क मार्ग का सफर है.
कुछ पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब 17-18वीं शताब्दी में उत्तराखंड में गोरखाओं ने आक्रमण किया था. उस समय देवी ने स्थानीय लोगों को गोरखाओं के हमले से बचने के लिए धवड़ी (आवाज देना) लगाती थी. तभी से स्थानीय लोग देवी की पूजा करने लगे थे.
(संलग्न फोटो 7 मई 2025 को देवराज खाल पंचवटी से लिया गया है.)
आप सोच सकते हैं कि मई के महीने में स्वेटर और जैकेट? जी हां ये नजारा है हमारे गांव मलेथा, एकेश्वर ब्लॉक, पौड़ी गढ़वाल उत्तराखंड का. यूं तो हमारे यहां बुजुर्ग लोग बारहों महीने स्वैटर और रजाई ओढते हैं, लेकिन ये वाकया है 10 मई का जब अचानक मौसम ने करबट बदली और दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक जमकर बादल बरसे. मौसम बेहद ठंडा हो गया. हमें भी स्वैटर जैकेट निकालनी पड़ी.
5 को शादी 9 को रिसेप्शन ------------------------- 'मैं पहाड़ों कु रैबासी, तु दिल्ली रौण वाळी' गढ़वाली गीत से चर्चा में आए सौरव मैठाणी का विवाह तृप्ता कुकरेती के साथ 5 मार्च को रुद्रप्रयाग के त्रियुगी नारायण मंदिर में होगा. करीबी लोगों के लिए 9 मार्च को देहरादून में रिसेप्शन का आयोजन किया गया है. आपको बताते चलें कि सौरव रुद्रप्रयाग जिले के जखोळी ब्लॉक में पट्टी भरदार क्वीलाखाळ के रहने वाले हैं. उनके पिता का नाम चैतराम मैठाणी और मां का नाम हेमा मैठाणी है. तृप्ता कुकरेती पौड़ी गढ़वाळ के द्वारीखाळ ब्लॉक स्थित बरसूड़ी गांव की निवासी हैं.
सौरव मैठाणी ने 1 मार्च को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर तृप्ता के साथ मंदिर में हवन करते हुए कुछ फोटो पोस्ट किए हैं, जिसे देखकर कुछ लोग यह भी कमेंट कर रहे हैं कि शादी से पहले हवन कैसे संभव है. आप अपनी राय दें.
सौरव मैठाणी जी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बधाई पत्र भी पोस्ट किया है. जो मुख्यमंत्री जी ने 10 फरवरी को लिखा है. साथ ही सोशल मीडिया में 9 मार्च को प्रीतिजोज के लिए निमंत्रण पत्र भी मौजूद हैं.
चिरंजीवी सौरव मैठाणी और आयुष्मती तृप्ता कुकरेती को जुन्याळी उत्तराखंड और हमारे फॉलोवर्स की ओर से विवाह और उपरांत नव दांपत्य जीवन के लिए ढेरों शुभकामनाएं.
जुन्याळी उत्तराखंड के सभी व्यूवर्स / सब्सक्राइबर्स को संकट चौदस के व्रत की ढेरों शुभकामनाएं. जैसे करवा चौथ में व्रत निर्जला होता है और चांद देखकर व्रत खोला जाता है. संकट चौदस में भी उसी तरह चांद देखकर पूजा की जाती है. हमारे पहाड़ के संकट चौदस में खास बात यह है कि इस व्रत को अविवाहित कन्या भी रख सकती हैं. परिवार में किसी के लिए भी यह व्रत रखा जाता है, जब्कि करवाचौथ सिर्फ विवाहिता अपने पति की लंबी आयु के लिए रखती है. #sankatchaudas
जुन्याळी उत्तराखंड के सभी व्यूवर्स और सब्सक्राइबर्स को उत्तराखंड के लोकपर्व मकर संक्रांति की ढेरों शुभकामनाएं. गढ़वाल क्षेत्र में इसे मकरैणी और कुमाऊं में उतरैणी या घुघुतिया त्यार के नाम से मनाया जाता है. कुमाऊं में आटे के घुघुचों की माला बनाकर कव्वों को खाने के लिए बुलाते हैं. साथ ही गढ़वाल में कई जगह गिन्दी (गेंद) कौथिग का आयोजन किया जाता है. द्वारीखाल ब्लॉक के डाडामंडी और थळ नदी का गेंद मेला प्रसिद्ध है. कोटद्वार के पास कण्वाश्रम में भी गिंदी मेले का आयोजन किया जाता है. अगर आप भी किसी ऐसे मेलों में शामिल हुए तो कृपया कमेंट में फोटो और जगह का नाम लिखें. अगर आपने घर पर कोई पकवान बनाए तो उनकी फोटो भी कमेंट में डाल सकते हैं... #makarsankrati#ghughutiyatyaar
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गांव के फल-सब्जियां
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उत्तराखंड के जैविक फल और सब्जियों की बात ही कुछ और है. पहचानिए आपको इस खजाने में क्या-क्या सब्जियां और फल दिखाई दे रहे हैं?
3 weeks ago | [YT] | 8
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धान कटाई-मंडाई
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इस समय उत्तराखंड के दूरस्थ जैसे पिथौरागढ़, चंपावत, बागेश्वर, चमोली और उत्तरकाशी जिलों में धान की कटाई और मंडाई का काम चल रहा है. यहां प्रमुख रूप से झूम धान, गोविंदभोग और लाल चावल जैसी पहाड़ी प्रजाति का धान उगाया जाता है. इनमें लाल चावल बिना पानी वाले खेतों में उगाया जाता है; इन खेतों को ऊखड़ कहा जाता है. ये प्रजाति पूर्णत: बारिश पर निर्भर करती है. पहाड़ों में धान आषाढ़ में लगाया जाता है और सितंबर-अक्टूबर में काटा जाता है.
इस बार पहाड़ों में अधिक बारिश होने का असर खेती पर भी पड़ रहा है. आप देख रहे होंगे कि धान की फसल का समय पूरा होने पर भी बालियां हरी-हरी दिखाई दे रही हैं. कटाई-मंडाई के समय भी बारिश हो रही है. इसलिए किसानों को इसकी मंडाई और भंडारण में भी दिक्कतें आ रही हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग की वजह से ऐसा हो रहा है.
इस साल उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में सर्वाधिक तो पौड़ी जिले में सामान्य से कम वर्षा रिकॉर्ड हुई. बागेश्वर में निश्चित रूप से इसका असर खेती पर पड़ रहा है. पौड़ी में सर्वाधिक पलायन की वजह से खेती न के बराबर हो रही है. अब 75 फीसद पौड़ी खेती रहित हो गया है. बीरोंखाल-धुमाकोट, थलीसैण-बैजरो, पाबौ-पैठाणी और श्रीनगर क्षेत्र में ही कुछ खेती होती है.
अगर आपके क्षेत्र में भी धान की कटाई-मंडाई चल रही है तो हमें क्षेत्र-गांव का नाम बताइए और कमेंट में फोटो भी भेजें. ये फोटो हमें पिथौरागढ़ से हमारे सहयोगी आनंद वोरा ने भेजे हैं. जुन्याली उत्तराखंड आपका आभारी है.
Photo Courtesy: @mypithoragarh
2 months ago | [YT] | 2
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सपनों का अलहदा घर
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ये घर AI से नहीं बना है बल्कि ऑरिजनल घर है. घुम्मकड़ी और जिज्ञासु प्रवृत्ति होने के कारण ये फोटो हमने 19 फरवरी 2022 को लिया था. उत्तराखंड पौड़ी गढ़वाल के एकेश्वर ब्लॉक में सिमार गांव में बना है यह शानदार सपनों का घर. हम नौगांवखाल जा रहे थे. गाड़ी से जैसे ही हमने यह घर देखा तो अनायास ही ब्रेक लग गए और हमने अपना अपने फोन से ये 2-3 तस्वीरें ले लीं. आजकल लोग ऐसे ही कई घरों के फोटो डाल रहे हैं कि ये किसी रावत जी या नेगी जी का सपनों का पहाड़ी स्टाइल का घर है. जब्कि वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से बना हुआ होता है. सावधान रहिए, असली और नकली का भेद समझिए...
6 months ago | [YT] | 1
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रंसूलन दीबा मंदिर
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यह मंदिर उत्तराखंड पौड़ी गढ़वाल क्षेत्र के मध्य हिमायल में दूधातोली पर्वत श्रृंखला की सबसे ऊंची चोटी पर स्थित है. पोखड़ा ब्लॉक पट्टी किमगडी के अंतर्गत झालपड़ी गांव से लगभग 7 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पर स्थित हैं. रंसूल और बांज के वृक्षों के बीच होने से ही इसे रंसूलन दीबा देवी का नाम दिया गया है.
रंसूलन दीबा देवी मंदिर की ऊंचाई समुद्रतल से 8760 फीट (2670 मीटर) है. यहां वर्ष भर काफी ठंड रहती है. सिर्फ मई और जून के महीने दर्शन के लिए उपयुक्त समय है. यहां से सूर्योदय का अद्भुत नजारा दिखता है. इसीलिए लोग रातभर बेस गांव झालपड़ी से चढ़ाई करते हैं और प्रात: 4 बजे सूर्योदय का आनंद लेते हैं.
हर साल जून के महीने में आसपास के गांव के लोग मंदिर में देवी की पूजा अर्चना के लिए जुटते हैं. जिसे दीबा का मेला कहा जाता है. इस साल यानि 2025 में यह मेला 5 जून को संपप्न हुआ है. इस बार हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने इस मेले में भाग लिया. अब सिर्फ 15 से 20 दिन बचे हैं इस खूबसरत मंदिर के दर्शन के लिए. उसके बाद यहां भारी बारिश शुरू हो जाएगी. नवंबर से मार्च तक ये पर्वत श्रृंखला बर्फ से आच्छादित हो जाती है.
यहां जाने के लिए कोटद्वार से वाया सतपुली - एकेश्वर - चौबट्टाखाल होते हुए झालपड़ी तक 120 किलोमीटर मोटर मार्ग है. उसके बाद पैदल 7 किलोमीटर का ट्रैक कर सकते हैं. रामनगर की ओर से वाया मर्चुला - बीरोंखाल - बैजरो - पोखड़ा होते हुए झालपड़ी करीब 230 किलोमीटर का सड़क मार्ग का सफर है.
कुछ पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब 17-18वीं शताब्दी में उत्तराखंड में गोरखाओं ने आक्रमण किया था. उस समय देवी ने स्थानीय लोगों को गोरखाओं के हमले से बचने के लिए धवड़ी (आवाज देना) लगाती थी. तभी से स्थानीय लोग देवी की पूजा करने लगे थे.
(संलग्न फोटो 7 मई 2025 को देवराज खाल पंचवटी से लिया गया है.)
6 months ago | [YT] | 3
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आप सोच सकते हैं कि मई के महीने में स्वेटर और जैकेट? जी हां ये नजारा है हमारे गांव मलेथा, एकेश्वर ब्लॉक, पौड़ी गढ़वाल उत्तराखंड का. यूं तो हमारे यहां बुजुर्ग लोग बारहों महीने स्वैटर और रजाई ओढते हैं, लेकिन ये वाकया है 10 मई का जब अचानक मौसम ने करबट बदली और दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक जमकर बादल बरसे. मौसम बेहद ठंडा हो गया. हमें भी स्वैटर जैकेट निकालनी पड़ी.
7 months ago | [YT] | 8
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5 को शादी 9 को रिसेप्शन
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'मैं पहाड़ों कु रैबासी, तु दिल्ली रौण वाळी' गढ़वाली गीत से चर्चा में आए सौरव मैठाणी का विवाह तृप्ता कुकरेती के साथ 5 मार्च को रुद्रप्रयाग के त्रियुगी नारायण मंदिर में होगा. करीबी लोगों के लिए 9 मार्च को देहरादून में रिसेप्शन का आयोजन किया गया है. आपको बताते चलें कि सौरव रुद्रप्रयाग जिले के जखोळी ब्लॉक में पट्टी भरदार क्वीलाखाळ के रहने वाले हैं. उनके पिता का नाम चैतराम मैठाणी और मां का नाम हेमा मैठाणी है. तृप्ता कुकरेती पौड़ी गढ़वाळ के द्वारीखाळ ब्लॉक स्थित बरसूड़ी गांव की निवासी हैं.
सौरव मैठाणी ने 1 मार्च को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर तृप्ता के साथ मंदिर में हवन करते हुए कुछ फोटो पोस्ट किए हैं, जिसे देखकर कुछ लोग यह भी कमेंट कर रहे हैं कि शादी से पहले हवन कैसे संभव है. आप अपनी राय दें.
सौरव मैठाणी जी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बधाई पत्र भी पोस्ट किया है. जो मुख्यमंत्री जी ने 10 फरवरी को लिखा है. साथ ही सोशल मीडिया में 9 मार्च को प्रीतिजोज के लिए निमंत्रण पत्र भी मौजूद हैं.
चिरंजीवी सौरव मैठाणी और आयुष्मती तृप्ता कुकरेती को जुन्याळी उत्तराखंड और हमारे फॉलोवर्स की ओर से विवाह और उपरांत नव दांपत्य जीवन के लिए ढेरों शुभकामनाएं.
9 months ago | [YT] | 7
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10 months ago | [YT] | 6
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जुन्याळी उत्तराखंड के सभी व्यूवर्स / सब्सक्राइबर्स को संकट चौदस के व्रत की ढेरों शुभकामनाएं. जैसे करवा चौथ में व्रत निर्जला होता है और चांद देखकर व्रत खोला जाता है. संकट चौदस में भी उसी तरह चांद देखकर पूजा की जाती है. हमारे पहाड़ के संकट चौदस में खास बात यह है कि इस व्रत को अविवाहित कन्या भी रख सकती हैं. परिवार में किसी के लिए भी यह व्रत रखा जाता है, जब्कि करवाचौथ सिर्फ विवाहिता अपने पति की लंबी आयु के लिए रखती है.
#sankatchaudas
11 months ago | [YT] | 3
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जुन्याळी उत्तराखंड के सभी व्यूवर्स और सब्सक्राइबर्स को उत्तराखंड के लोकपर्व मकर संक्रांति की ढेरों शुभकामनाएं. गढ़वाल क्षेत्र में इसे मकरैणी और कुमाऊं में उतरैणी या घुघुतिया त्यार के नाम से मनाया जाता है. कुमाऊं में आटे के घुघुचों की माला बनाकर कव्वों को खाने के लिए बुलाते हैं. साथ ही गढ़वाल में कई जगह गिन्दी (गेंद) कौथिग का आयोजन किया जाता है. द्वारीखाल ब्लॉक के डाडामंडी और थळ नदी का गेंद मेला प्रसिद्ध है. कोटद्वार के पास कण्वाश्रम में भी गिंदी मेले का आयोजन किया जाता है. अगर आप भी किसी ऐसे मेलों में शामिल हुए तो कृपया कमेंट में फोटो और जगह का नाम लिखें. अगर आपने घर पर कोई पकवान बनाए तो उनकी फोटो भी कमेंट में डाल सकते हैं...
#makarsankrati #ghughutiyatyaar
11 months ago | [YT] | 6
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इगास के दिन यानी मंगलवार 12 नवंबर 2024 को होगा जुन्याली उत्तराखंड से पहला उत्तराखंडी गीत...
1 year ago | [YT] | 10
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