पारब्रह्म

"यह यूट्यूब चैनल 'पारब्रहम' एक ऐसी मंच है जो लोगों को आत्म-जागरूकता हासिल करने के लिए मार्गदर्शन करता है। यहाँ पर आपको जीवन के ४ आयाम ब्रह्मांड के ६४ आयाम,आत्मा के अनंतता और उसकी उपलब्धियों, मंत्र चिकित्सा ,उपनिषद वेद ,शास्त्र के विषय में प्रमाणिक ज्ञान 7 समझाने वाली व्यावहारिक और ज्ञानवर्धक वीडियोज़ आप तक पहुँचाने का होगा । यहाँ पर आपको आत्म-ज्ञान रियलाइजेशन और आध्यात्मिक विकास के लिए सरल और प्रभावी उपायों की जानकारी मिलेगी। हमारा लक्ष्य मानवता और जीवन के महत्त्व को समझाना और पराज्ञान को जन जन तक पहुँचाना है ।"
#paarbrahmn
#motivation



पारब्रह्म

सर्वंसदानी गुरु गोविंद सिंह जी ने अपने पूरे परिवार—
माता गुजरी जी और चारों साहिबज़ादों—के सर्वोच्च बलिदान के पश्चात ये अमर वचन कहे:

“पुत्रन के सीस पर वार दिए, सुत चार।
चार मुए तो क्या हुआ, जीवित कई हजार॥”

(मैंने अपने चारों पुत्रों का बलिदान दे दिया।
यदि मेरे चार पुत्र शहीद हो गए, तो क्या हुआ—
हज़ारों खालसा आज भी जीवित हैं।)

लेकिन आज हमें स्वयं से यह प्रश्न पूछना चाहिए—
क्या हम शहादत समागमों में सहभागी होने का उत्साह खो चुके हैं?
क्या हमने यह भुला दिया है कि शहीदों ने अपना जीवन कैसे जिया था?

20–27 दिसंबर | शहादत सप्ताह

20 दिसंबर 1704 से 27 दिसंबर 1704 तक
गुरु गोविंद सिंह जी ने
देश और धर्म की रक्षा हेतु
अपने चारों पुत्रों को बलिदान कर दिया।

चमकौर की गढ़ी,
सरसा नदी का विच्छोह,
सरहिंद की दीवारें—
सब शहादत की अमर गाथा कहती हैं।

चार साहिबज़ादों और माता गुजरी जी को कोटि-कोटि नमन 🙏

यह इतिहास नहीं, हमारी आत्मा है।

#ShaheediWeek #SikhShaheedi #GuruGobindSinghJi
#Sahibzade #VeerBalDiwas #NeverForget

3 weeks ago | [YT] | 2

पारब्रह्म

गुरु गोविंद सिंह जी का आनंदपुर साहिब किला त्याग – 20 दिसंबर 1704 ई.

गुरु गोविंद सिंह जी भारतीय इतिहास के ऐसे महान राष्ट्रीय नायक हैं, जिनका जीवन और बलिदान प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का विषय है। उनके पूजनीय पिता, गुरु तेग बहादुर जी ने कश्मीरी हिंदुओं की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया और “हिंद की चादर” कहलाए। ऐसे महान संस्कारों की विरासत को आगे बढ़ाने वाले गुरु गोविंद सिंह जी ने अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध जीवनभर संघर्ष किया।

औरंगजेब के क्रूर शासनकाल में जब मुगल सेना आनंदपुर साहिब को जीतने में असफल रही और किले के भीतर स्थित गुरु गोविंद सिंह जी तथा उनके वीर सिखों को पराजित नहीं कर सकी, तब छल का सहारा लिया गया। औरंगजेब ने कुरान की शपथ लेकर गुरु जी को संदेश भिजवाया कि यदि वे आनंदपुर साहिब का किला छोड़ दें, तो उन्हें पूरे हिंदुस्तान में कहीं भी निर्बाध आने-जाने की स्वतंत्रता दी जाएगी।

गुरु गोविंद सिंह जी इस संदेश की नीयत को भली-भांति समझते थे, किंतु उनके साथियों ने कहा कि जब कुरान की कसम खाकर वचन दिया गया है, तो उसे स्वीकार करना चाहिए। अंततः भारी मन से गुरु जी ने यह प्रस्ताव स्वीकार किया और 20 दिसंबर 1704 ई. की रात अपने परिवार तथा लगभग 400 सिखों के साथ आनंदपुर साहिब का किला त्याग दिया।

वह रात अत्यंत भीषण थी—तेज सर्दी और मूसलाधार वर्षा हो रही थी। गुरु गोविंद सिंह जी का काफिला लगभग 25 किलोमीटर दूर सरसा नदी के तट तक पहुँचा ही था कि पहले से घात लगाए बैठे मुगल आक्रमणकारियों ने अंधेरे में अचानक हमला कर दिया। भयंकर बारिश के कारण नदी उफान पर थी। वीरता से युद्ध करते हुए अनेक सिख योद्धा शहीद हो गए और कई उफनती नदी में बह गए। इस अफरा-तफरी में गुरु जी का परिवार भी बिछुड़ गया।

माता गुजरी जी और दोनों छोटे साहिबजादे गुरु जी से अलग हो गए, जबकि दोनों बड़े साहिबजादे गुरु गोविंद सिंह जी के साथ रहे। उस रात गुरु जी ने खुले मैदान में पड़ाव डाला। अब उनके साथ केवल दोनों बड़े साहिबजादे और मात्र 40 सिख योद्धा शेष थे। अगले दिन उन्होंने चौधरी रूपचंद और जगत सिंह की कच्ची गढ़ी में मोर्चा संभाला।

इसके पश्चात जो अद्भुत और अनुपम युद्ध हुआ, वह इतिहास में चमकौर के युद्ध के नाम से अमर हो गया। इस युद्ध में दोनों बड़े साहिबजादों सहित 40 सिख योद्धाओं ने मुगल सेना की विशाल टुकड़ी का सामना करते हुए वीरगति प्राप्त की और बलिदान की अनुपम मिसाल स्थापित की।

इधर, माता गुजरी जी के साथ बिछुड़े दोनों छोटे साहिबजादों को अनेक कठिनाइयों के बाद सरहिंद के किले में बंदी बना लिया गया। सरहिंद के नवाब ने उन्हें धर्म परिवर्तन कर इस्लाम स्वीकार करने का दबाव डाला और इंकार करने पर दीवार में जीवित चुनवाने की धमकी दी। किंतु दोनों साहिबजादों ने अडिग आस्था के साथ हँसते-हँसते मृत्यु को स्वीकार कर लिया, पर अपना धर्म नहीं छोड़ा।

इस प्रकार गुरु गोविंद सिंह जी ने मात्र एक सप्ताह के भीतर—20 दिसंबर से 27 दिसंबर 1704 ई. के बीच—अपने चारों पुत्रों को देश और धर्म की रक्षा के लिए बलिदान कर दिया। माता गुजरी जी ने भी सरहिंद के किले में उन भीषण ठंड भरी रातों को असहनीय कष्टों के साथ सहा।

एक समय था जब इस पूरे सप्ताह को शोक और स्मरण के रूप में मनाया जाता था—लोग जमीन पर सोते थे और इन बलिदानों को नमन करते थे। किंतु आज आधुनिकता की दौड़ में गुरु साहब के इस अद्वितीय और महापावन बलिदान को भुलाया जा रहा है, जो हमारी ऐतिहासिक स्मृति के लिए अत्यंत चिंताजनक है। #SikhShaheedi #ShaheediWeek #GuruGobindSinghJi #Sahibzade
#ChamkaurDiLadai #VeerBalDiwas #SikhHistory
#IndianHistory #Sacrifice #NeverForget

3 weeks ago | [YT] | 0

पारब्रह्म

आप सभी को शारदीय नवरात्र की शुभकामनाएं, 🙏🏻 इस बार शारदीय नवरात्र में मां भगवती का आगमन गज पर हो रहा है। जब जगदंबा गज पर आती हैं तब धन धान्य समृद्धि व सुख से संसार और अपने भक्तों के घर को भर देती हैं।

नवरात्र साधना – एक आह्वान शक्ति का
कल सोमवार ,22 सितंबर 2025 से नवरात्र प्रारंभ हो रहे हैं। यह केवल नवरात्र नहीं, बल्कि तुम्हारे जीवन में नई ऊर्जा और नई किरणों के आगमन का अवसर है।
परंतु यह तभी संभव है जब तुम पहले दिन से ही दस दिन तक अपने भीतर दिव्यता का उत्साह जागृत कर सको।

साधना का नियम पालन करो:
प्रतिदिन कम से कम तीन घंटे का समय आसन को दो। चाहे जप-कवच का हो, चाहे किसी भी दिव्य मंत्र का – लेकिन साधना नियमित और अखंड होनी चाहिए।
यदि तुम्हें अभिचारिक प्रयोगों की बाधा है, तो रात्रि 10 बजे से 1 बजे तक आसन पर बैठकर निम्न से जो भी तुम श्रद्धा से कर सको कोई एक पाठ का संकल्प और पूरे मन से पाठ करो

क्या और कौन से स्त्रोत पाठ कर सकते हो:
भगवती बगलामुखी के 108 नाम का 108 बार पाठ
कालिका कवच का 108 बार पाठ
बटुक भैरव ब्रह्म कवच का 108 बार पाठ
बगला कवच का 108 बार पाठ
रामरक्षा स्तोत्र, बजरंग बाण, हनुमान बड़वानल, रामबाण, या भगवती के 32 नाम – जो भी तुम्हारी श्रद्धा से मेल खाए
इस समय अपने तन-मन को पूरी तरह साधना में झोंक दो।
जब आसन पर बैठोगे तो मन बहकायेगा – "कुछ नहीं होगा, ये तंत्र नहीं कटेगा।"
लेकिन भीतर की गहराई से आवाज आयेगी – "बैठ जा, जप कर, तंत्र कटेगा और अधर्मी पर भगवती की मार भी पड़ेगी।"
नींद आयेगी, आलस्य आयेगा, मन कहेगा – "अगले नवरात्र कर लेंगे।"
परंतु सुनना भीतर की पुकार – "इसी बार करना है, यह अवसर व्यर्थ नहीं जाना चाहिए।"
न जाने कितने साधक इस बार सिद्धि पाएंगे, उनमें से एक तुम भी बन सकते हो।
प्रलोभनों से सावधान रहना:
इन दिनों पत्नी/पति, प्रेमी/प्रेमिका अथवा कोई और मोहपाश तुम्हें साधना से भटकाने का प्रयास करेंगे।
स्मरण रखो – जो विकारों पर विजय पाकर, उन्हें रौंदकर भैरवी-भैरव की भांति आसन पर स्थिर हो जाता है, उसी को महाभवानी छिन्नमस्ता का रहस्य प्राप्त होता है।

नवरात्र का व्रत और साधना कैसे करे:
जो नौ दिन पूर्ण निष्ठा और समर्पण से साधना करता है, वहां जगदंबा स्वयं आती हैं, सौ बार आती हैं और विराजमान हो जाती हैं।
हम उनकी आभा को पहचान भले ही न पाएं, पर यदि पुकार सच्ची है और समर्पण निष्कपट है, तो देवी अवश्य आलोकित करती हैं।

इस नवरात्र का संकल्प लो:
जप करना ही है। दीप जलता रहे, जप चलता रहे।
शरीर को यंत्र बना दो, मन को कामनाओं से शून्य कर दो, आत्मा को केवल जगदंबा की चेतना से भर दो।
ऐसी साधना करो कि स्वयं को मंत्रसिद्ध बना सको।
जब सामर्थ्य भीतर है, तब साधना करो। समय निकल जाने पर शरीर, परिवार और संसार सब तुम्हें भुला देंगे।
इसलिए साधना की कामना रखो – मंत्र-सामर्थ्य की, देवी-कृपा की, जागृत सिद्धि की।
दैविक साधना के साथ भौतिक जीवन भी स्वतः संवर जायेगा।

नौ दिनों का त्याग:
ये नौ दिन और रातें केवल माता भवानी के चरणों में अर्पित करो।
सोते-जागते, खाते-पीते, चलते-फिरते हर श्वास में जगदंबा को पुकारो।
ऐसा अभ्यास करो कि दसवें दिन देवी दर्शन देने में संकोच न करें।
भले दर्शन हों या न हों – साधना ही तुम्हें संतुष्टि और अनंत आनंद देगी।

याद रखो – एक बार साधक का मन जप की ओर दृढ़ हो गया, तो वह माला का प्रत्येक मनका जीवन की समस्याओं पर प्रचंड अस्त्र बन जाता है।

बस भवानी का भजन करो।
गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानी।

शिव शक्ति दास
शिव ॐ तत् सत् 🙏🏻

3 months ago | [YT] | 5

पारब्रह्म

धन गुरु नानक 🙏🏻सवेरे 108 मूल मंत्र पाठ दा अमृत श्रवण करिए और अपनी जीवन ऊर्जा को बलवान बनाए https://youtu.be/sCT8RvMaHMA?si=ZC-C-...
☝🏻youtube link पर सवेरे
7:00 A.M
सविनय निवेदन
..शिवशक्ति दास

4 months ago | [YT] | 1

पारब्रह्म

हर हर महादेव 🙏🏻

चन्द्र ग्रहण 7 सितंबर 2025 को रहेगा
दोपहर 1:00 बजे से सूतक आरंभ
ग्रहण 9:45 से आरंभ
रात 11:00 से 12:35 - पुर्ण ग्रहण - मुख्य विशिष्ट काल हम सभी साधकों के लिए

मंत्र जपने का समय सभी लोगो और साधकों के लिए -
रात 9:45 से लेकर‌ रात 1:35 तक।
इतने समय लगातार जप करें जिस मंत्र को जाग्रत व सिद्ध करना है।

गंगा जल से स्नान आदि प्रातः ही कर ले


विशेष ध्यान दें - जप शुभारंभ रात 9:45 से कर दीजिए व समापन 1:30 बजे रात को करें


शिव ॐ तत् सत् 🙏🏻।।

4 months ago | [YT] | 1

पारब्रह्म

📚 संस्कृत दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 📚

"संस्कृतं नाम दैवी वागन्वाख्यता महर्षिभिः।"
— संस्कृत, देवताओं की वाणी है, जिसे महर्षियों ने प्रकट किया।

🌸 संस्कृत दिवस भारतीय संस्कृति, ज्ञान और परंपरा की आत्मा को सम्मान देने का दिन है।
यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमारी संस्कृत भाषा केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि ज्ञान, विज्ञान, दर्शन और आध्यात्मिकता का अमूल्य खजाना है।

🕉 संस्कृत का महत्व
✨ वेद, पुराण, उपनिषद और योग का मूल स्रोत
✨ भारतीय संस्कृति और इतिहास का आधार
✨ उच्चारण में मधुर, अर्थ में गहन, और विज्ञान में अद्वितीय

📅 तिथि: 9 अगस्त 2025 पूर्णिमा श्रावण मास शुक्ल पक्ष
आइए, इस संस्कृत दिवस पर हम सब मिलकर प्रतिज्ञा लें —
संस्कृत भाषा के संरक्षण, प्रचार और अध्ययन में अपना योगदान देंगे।

#संस्कृतदिवस #SanskritDiwas #SanskritLanguage #BharatiyaSanskriti #SanatanDharma

5 months ago | [YT] | 0

पारब्रह्म

🌸 वेद माता गायत्री जयंती 2025 की हार्दिक शुभकामनाएं 🌸

🙏 "ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यम् भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्" 🙏

गायत्री जयंती वह पावन दिन है जब ऋषि विश्वामित्र को माँ गायत्री मंत्र का दिव्य उपदेश प्राप्त हुआ था। यह दिन ज्ञान, शक्ति और प्रकाश का प्रतीक है।

इस दिन विशेष रूप से गायत्री मंत्र जाप, हवन, ध्यान और दान करने से आत्मिक शांति, बुद्धि-विवेक और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

🌞 गायत्री मंत्र जाप के लाभ
✨ मानसिक एकाग्रता और स्मरण शक्ति में वृद्धि
✨ नकारात्मक विचारों का नाश
✨ आत्मिक उन्नति और दिव्य ऊर्जा की प्राप्ति

📅 तिथि: 9 अगस्त 2025 पूर्णिमा श्रावण मास शुक्ल पक्ष
🕉 आइए, इस पावन अवसर पर हम सब मिलकर माँ गायत्री का स्मरण करें और उनके दिव्य आशीर्वाद को अपने जीवन में उतारें।

#गायत्रीमंत्र #गायत्रीजयंती #SanatanDharma #HinduFestival #GayatriMantra

5 months ago | [YT] | 0

पारब्रह्म

गुरु पूर्णिमा पर कैसे करें अपने गुरु को प्रसन्न | Guru Purnima 2025 🌕

गुरु पूर्णिमा वह पावन दिन है जब हम अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण पथप्रदर्शकों — गुरुजनों — को श्रद्धा, प्रेम और कृतज्ञता अर्पित करते हैं। इस दिन का उद्देश्य केवल पूजा करना नहीं, बल्कि गुरु के दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लेना है।

🙏 जानिए गुरु पूर्णिमा पर आपको क्या करना चाहिए़ अपनी सामर्थ्य अनुसार गुरु को प्रसन्न करने के कुछ श्रेष्ठ उपाय:
✔ अपने गुरु को स्मरण कर प्रार्थना करें
✔ ज्ञान के पथ पर आगे बढ़ने का संकल्प लें
✔ किसी ज़रूरतमंद की सेवा करें (सेवा ही सच्ची श्रद्धा है)
✔ गुरु मंत्र या श्लोकों का जाप करें
✔ उनका आशीर्वाद लें और उनके उपदेशों को जीवन में उतारें

🎥 इस वीडियो में जानिए कैसे आप गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरु को प्रसन्न कर सकते हैं — भौतिक और आध्यात्मिक दोनों रूपों में।

🕉️ गुरुर्ब्रह्मा, गुरुर्विष्णुः, गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परब्रह्म, तस्मै श्री गुरवे नमः॥

💠 गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ!
#ytshorts #motivation #yt #ytshortsindia #ytshort
#GuruPurnima
#GuruPurnima2025
#गुरुपूर्णिमा
#गुरु_पूर्णिमा
#GuruPurnimaStatus
#GuruPurnimaSpeech
#GuruQuotes
#गुरुकीमहिमा
#गुरु_वंदना
#SpiritualVideo
#HinduFestival
#गुरु_पौर्णिमा
#GuruKripa
#IndianCulture
#ThankYouGuru
#MotivationalVideoHindi
#BhaktiVideo
#GuruDevotional
#GururBrahma
#GuruPurnimaCelebration

6 months ago | [YT] | 0

पारब्रह्म

धन्यवाद 🙏🏻

7 months ago | [YT] | 0

पारब्रह्म

*▪️प्रमुख नदीयाँ, उद्गम एवं मुहाना/ Major rivers, sources and estuaries*

*सिंधु / Indus*
Origin/उद्गम: मानसरोवर झील / Mansarovar Lake
Mouth/मुहाना: अरब सागर / Arabian Sea

*नर्मदा / Narmada*
Origin/उद्गम: अमरकंटक की पहाड़ी / Amarkantak Hills
Mouth/मुहाना: खंभात की खाड़ी / Gulf of Khambhat

*ताप्ती / Tapi*
Origin/उद्गम: मुलताई (मध्य प्रदेश) / Multai (M.P.)
Mouth/मुहाना: खंभात की खाड़ी / Gulf of Khambhat

*यमुना / Yamuna*
Origin/उद्गम: यमुनोत्री ग्लेशियर / Yamunotri Glacier
Mouth/मुहाना: गंगा नदी / Ganga River

*रामगंगा / Ramganga*
Origin/उद्गम: नैनीताल के निकट / Near Nainital
Mouth/मुहाना: गंगा नदी / Ganga River

*गंडक / Gandak*
Origin/उद्गम: नेपाल / Nepal
Mouth/मुहाना: गंगा नदी / Ganga River

*कोसी / Kosi*
Origin/उद्गम: सप्तकोशी (नेपाल) / Saptakoshi (Nepal)
Mouth/मुहाना: गंगा नदी / Ganga River

*सोन / Son*
Origin/उद्गम: अमरकंटक की पहाड़ी / Amarkantak Hills
Mouth/मुहाना: गंगा नदी / Ganga River

*ब्रह्मपुत्र / Brahmaputra*
Origin/उद्गम: मानसरोवर झील / Mansarovar Lake
Mouth/मुहाना: बंगाल की खाड़ी / Bay of Bengal

*महानदी / Mahanadi*
Origin/उद्गम: सिहावा (मध्य प्रदेश) / Sihawa (M.P.)
Mouth/मुहाना: बंगाल की खाड़ी / Bay of Bengal

*गोदावरी / Godavari*
Origin/उद्गम: नासिक के निकट / Near Nashik
Mouth/मुहाना: बंगाल की खाड़ी / Bay of Bengal

*कावेरी / Kaveri*
Origin/उद्गम: कर्कत्ता ब्रह्मगिरि पहाड़ी / Karakata Brahmagiri Hills
Mouth/मुहाना: बंगाल की खाड़ी / Bay of Bengal

*गंगा / Ganga*
Origin/उद्गम: गंगोत्री ग्लेशियर / Gangotri Glacier
Mouth/मुहाना: बंगाल की खाड़ी / Bay of Bengal

*चंबल / Chambal*
Origin/उद्गम: जानापाव पहाड़ी / Janapav Hills
Mouth/मुहाना: यमुना नदी / Yamuna River

*चिनाब / Chenab*
Origin/उद्गम: बारालाचा दर्रा / Baralacha Pass
Mouth/मुहाना: सिंधु नदी / Indus River

*झेलम / Jhelum*
Origin/उद्गम: शेषनाग झील / Sheshnag Lake
Mouth/मुहाना: चिनाब नदी / Chenab River

*रावी / Ravi*
Origin/उद्गम: रोहतांग दर्रा / Rohtang Pass
Mouth/मुहाना: चिनाब नदी / Chenab River

*कृष्णा / Krishna*
Origin/उद्गम: महाबलेश्वर / Mahabaleshwar
Mouth/मुहाना: बंगाल की खाड़ी / Bay of Bengal

*लूनी / Luni*
Origin/उद्गम: नाग पहाड़ (अरावली पर्वत) / Nag Pahad (Aravalli Range)
Mouth/मुहाना: कच्छ की खाड़ी / Gulf of Kutch

*व्यास / Beas*
Origin/उद्गम: रोहतांग दर्रा / Rohtang Pass
Mouth/मुहाना: सतलज नदी / Sutlej River

*सतलज / Sutlej*
Origin/उद्गम: मानसरोवर झील / Mansarovar Lake
Mouth/मुहाना: चिनाब नदी / Chenab River

*नील / Nile*
Origin/उद्गम: विक्टोरिया झील / Victoria Lake
Mouth/मुहाना: भूमध्य सागर / Mediterranean Sea

*आमेजन / Amazon*
Origin/उद्गम: लैगो विलफेरो / Lago Vilafro
Mouth/मुहाना: अटलांटिक महासागर / Atlantic Ocean

*हांगहो / Huang He*
Origin/उद्गम: क्यूनेटुन पर्वत / Kuenlun Mountains
Mouth/मुहाना: चिहिल खाड़ी / Gulf of Chihli

*डैन्यूब / Danube*
Origin/उद्गम: ब्लैक फॉरेस्ट पर्वत / Black Forest Mountains
Mouth/मुहाना: काला सागर / Black Sea

*वोल्गा / Volga*
Origin/उद्गम: स्लाइड पथार / Slide Plateau
Mouth/मुहाना: कैस्पियन सागर / Caspian Sea

*यांग्सी / Yangtze*
Origin/उद्गम: तिब्बत का पठार / Tibet Plateau
Mouth/मुहाना: चीन सागर / China Sea

*कांगो / Congo*
Origin/उद्गम: लुआलाया / Luala
Mouth/मुहाना: अटलांटिक महासागर / Atlantic Ocean

```If you have read this completely, please comment

7 months ago | [YT] | 0