✅️कड़ी पत्ता के पौधे में हर महीने 1 लीटर पानी में 2 चम्मच खट्टी दही घोलकर जरूर डाला करें। यह 100% ऑर्गेनिक खाद जड़ों को मजबूत बनाता है , जिससे पौधा बहुत ज्यादा घना, स्वस्थ, सुगंधित पत्तियाँ देता है।
✅️अक्सर नए या कम अनुभवी बागवान मुझसे पूछते हैं कि गमले की मिट्टी कैसे तैयार करें। दरअसल, अलग-अलग मिट्टियों लाल, काली और दोमट/भूरी की अपनी-अपनी विशेषताएँ होती हैं, और इनमें पौधे अलग गति से बढ़ते हैं। यही कारण है कि गमले में मिट्टी का मिश्रण भी थोड़ा-थोड़ा बदलना पड़ता है। नीचे मैं प्रत्येक प्रकार की मिट्टी के लिए उचित अनुपात बता रहा हूँ।
1) लाल मिट्टी : लाल मिट्टी हल्की और जल्दी सूखने वाली होती है। इसमें नमी धारण क्षमता कम होती है।
👉 मिश्रण: • लाल मिट्टी – 40% • कोकोपीट – 20% • पत्तियों की खाद – 15% • वर्मीकम्पोस्ट या गोबर की खाद – 15% • नदी की रेत – 5 से 7% (ढीलापन देने के लिए) • नीम खली – 2 से 5% (कीट-नियंत्रण व पोषण) • फफूंदनाशक (ट्राइकोडर्मा) – 1 चम्मच प्रति 5 किलो • एप्सोम साल्ट – 1 चम्मच प्रति 5 किलो मिश्रण
2) काली मिट्टी : काली मिट्टी भारी व नमी रोकने वाली होती है, इसमें ड्रेनेज समस्या हो सकती है।
👉 मिश्रण: • काली मिट्टी – 35% • नदी की रेत – 20% • कोकोपीट – 15% • पत्तियों की खाद – 10% • वर्मीकम्पोस्ट/गोबर खाद – 15% • नीम खली – 2 से 5% • फफूंदनाशक (ट्राइकोडर्मा) – 1 चम्मच प्रति 5 किलो • एप्सोम साल्ट – 1 चम्मच प्रति 5 किलो
3) दोमट/भूरी मिट्टी : यह संतुलित मिट्टी मानी जाती है, इसमें हवा, पानी और पोषण का अनुपात अच्छा होता है।
📌 महत्वपूर्ण सुझाव ◆ पॉटिंग मिक्स तैयार करने के बाद इसे 4–5 दिन खुला छोड़ें ताकि बनने वाला गैसें बाहर निकल जाएँ। ◆ जरूरत हो तो इसमें बोनमिल या मछली खाद भी 1–2% मिलाई जा सकती है। ◆ रिपॉटिंग के बाद तुरंत खाद या एप्सोम साल्ट न डालें, कम से कम 15 दिन बाद डालें। ◆ केवल पीली मिट्टी में पौधे जल्दी कमजोर हो जाते हैं। इसलिए इसे लाल या दोमट मिट्टी के साथ मिलाकर प्रयोग करना और भी अच्छा रहता है।
अगर यह जानकारी आपको उपयोगी लगी हो, तो कृपया इसे अपने दोस्तों और परिवारजनों के साथ साझा करें। अपने अनुभव, सुझाव या प्रश्न नीचे कमेंट में ज़रूर लिखें। हम हर प्रतिक्रिया का स्वागत करते हैं।
अपराजिता /विष्णुकांता एक सुंदर और गुणकारी फूलों वाला पौधा है। यह नीले, सफेद या बैंगनी रंग के फूलों से घर या बगीचे की सुंदरता बढ़ा देता है। लेकिन कई बार गमले में पौधा तो हरा-भरा होता है, पर फूल कम आते हैं आइए जानें कुछ ऐसे आसान घरेलू उपाय, जिनसे आप अपराजिता के पौधे की हर डाल को नीले फूलों से भर सकते हैं👇
▪️पर्याप्त धूप दें :- अपराजिता को रोजाना 5–6 घंटे की सीधी धूप जरूर मिले। जितनी ज्यादा धूप मिलेगी, उतने ही ज्यादा फूल खिलेंगे। अगर पौधा छांव में रहेगा तो फूल बहुत कम आएंगे या जल्दी झड़ जाएंगे।
▪️ नियमित छंटाई करें :- हर 15–20 दिन में सूखी और पुरानी शाखाओं को काट दें। इससे नई टहनियाँ तेजी से निकलती हैं और उन पर जल्दी फूल आते है।
▪️खाद डालें :- महीने में एक बार जैविक खाद डाले।आप गोबर की खाद, वर्मीकम्पोस्ट या रसोई के बचे सब्जी-फलों के कचरे से बनी खाद का उपयोग करें। केले के छिलकों का पाउडर मिट्टी में मिलाना बहुत फायदेमंद होता है, क्योंकि यह फूलों की संख्या और आकार दोनों बढ़ाता है। साथ ही फिटकरी का पानी दें। 1 लीटर पानी में 2–3 ग्राम फिटकरी घोलकर महीने में एक बार मिट्टी में डालें, अधिक मात्रा में उपयोग न करें। फिटकरी का पानी अपराजिता पौधे के लिए एक असरदार घरेलू उपाय है। इसमें एंटीबैक्टीरियल और एंटिफंगल गुण होते हैं जो मिट्टी को कीटों और फफूंद से बचाते हैं। यह जड़ों को मजबूत बनाता है, फूलों की संख्या और रंग बढ़ाता है।
▪️ राख मिलाएँ :- लकड़ी या उपले की राख में पोटैशियम भरपूर होता है। थोड़ी सी राख मिट्टी में मिलाने से पौधा ज्यादा फूल देता है और मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है।
▪️पानी का संतुलन बनाए रखें :- अपराजिता को हमेशा हल्की नमी चाहिए, लेकिन पानी रुकना नहीं चाहिए। गर्मियों में रोज पानी दें, जबकि ठंड में 3–4 दिन के अंतराल पर पानी देना पर्याप्त होता है।
▪️ सूखे फूल तोड़ते रहें :- जब फूल मुरझा जाएँ, तो उन्हें तुरंत तोड़ दें। इससे पौधे को नए फूल आने का संकेत मिलता है। यह उपाय लगातार फूल आने में बहुत मदद करता है।
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https://youtu.be/qiHS6iaFnrY?si=N-4Rd...
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https://youtu.be/qkW5Ju1k_p8?si=tLpgs...
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✅️कड़ी पत्ता के पौधे में हर महीने 1 लीटर पानी में 2 चम्मच खट्टी दही घोलकर जरूर डाला करें। यह 100% ऑर्गेनिक खाद जड़ों को मजबूत बनाता है , जिससे पौधा बहुत ज्यादा घना, स्वस्थ, सुगंधित पत्तियाँ देता है।
✅️अक्सर नए या कम अनुभवी बागवान मुझसे पूछते हैं कि गमले की मिट्टी कैसे तैयार करें। दरअसल, अलग-अलग मिट्टियों लाल, काली और दोमट/भूरी की अपनी-अपनी विशेषताएँ होती हैं, और इनमें पौधे अलग गति से बढ़ते हैं। यही कारण है कि गमले में मिट्टी का मिश्रण भी थोड़ा-थोड़ा बदलना पड़ता है। नीचे मैं प्रत्येक प्रकार की मिट्टी के लिए उचित अनुपात बता रहा हूँ।
1) लाल मिट्टी : लाल मिट्टी हल्की और जल्दी सूखने वाली होती है। इसमें नमी धारण क्षमता कम होती है।
👉 मिश्रण:
• लाल मिट्टी – 40%
• कोकोपीट – 20%
• पत्तियों की खाद – 15%
• वर्मीकम्पोस्ट या गोबर की खाद – 15%
• नदी की रेत – 5 से 7% (ढीलापन देने के लिए)
• नीम खली – 2 से 5% (कीट-नियंत्रण व पोषण)
• फफूंदनाशक (ट्राइकोडर्मा) – 1 चम्मच प्रति 5 किलो
• एप्सोम साल्ट – 1 चम्मच प्रति 5 किलो मिश्रण
2) काली मिट्टी : काली मिट्टी भारी व नमी रोकने वाली होती है, इसमें ड्रेनेज समस्या हो सकती है।
👉 मिश्रण:
• काली मिट्टी – 35%
• नदी की रेत – 20%
• कोकोपीट – 15%
• पत्तियों की खाद – 10%
• वर्मीकम्पोस्ट/गोबर खाद – 15%
• नीम खली – 2 से 5%
• फफूंदनाशक (ट्राइकोडर्मा) – 1 चम्मच प्रति 5 किलो
• एप्सोम साल्ट – 1 चम्मच प्रति 5 किलो
3) दोमट/भूरी मिट्टी : यह संतुलित मिट्टी मानी जाती है, इसमें हवा, पानी और पोषण का अनुपात अच्छा होता है।
👉 मिश्रण:
• दोमट मिट्टी – 40%
• कोकोपीट – 15%
• वर्मीकम्पोस्ट – 20%
• पत्तियों की खाद – 10%
• रेत – 10%
• नीम खली – 5%
• फफूंदनाशक (ट्राइकोडर्मा) – 1 चम्मच प्रति 5 किलो
• एप्सोम साल्ट – 1 चम्मच प्रति 5 किलो
4) पीली मिट्टी : पीली मिट्टी अक्सर कम उपजाऊ और भारी होती है, इसलिए इसमें हल्कापन और जैविक पदार्थ बढ़ाना ज़रूरी है।
👉 मिश्रण अनुपात:
• पीली मिट्टी – 30%
• कोकोपीट – 20%
• पत्तियों की खाद (लीफ मोल्ड) – 15%
• वर्मीकम्पोस्ट/गोबर खाद – 20%
• नदी की रेत – 10%
• नीम खली – 5%
• फफूंदनाशक (ट्राइकोडर्मा) – 1 चम्मच प्रति 5 किलो
• एप्सोम साल्ट – 1 चम्मच प्रति 5 किलो
📌 महत्वपूर्ण सुझाव
◆ पॉटिंग मिक्स तैयार करने के बाद इसे 4–5 दिन खुला छोड़ें ताकि बनने वाला गैसें बाहर निकल जाएँ।
◆ जरूरत हो तो इसमें बोनमिल या मछली खाद भी 1–2% मिलाई जा सकती है।
◆ रिपॉटिंग के बाद तुरंत खाद या एप्सोम साल्ट न डालें, कम से कम 15 दिन बाद डालें।
◆ केवल पीली मिट्टी में पौधे जल्दी कमजोर हो जाते हैं। इसलिए इसे लाल या दोमट मिट्टी के साथ मिलाकर प्रयोग करना और भी अच्छा रहता है।
अगर यह जानकारी आपको उपयोगी लगी हो, तो कृपया इसे अपने दोस्तों और परिवारजनों के साथ साझा करें। अपने अनुभव, सुझाव या प्रश्न नीचे कमेंट में ज़रूर लिखें। हम हर प्रतिक्रिया का स्वागत करते हैं।
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अपराजिता /विष्णुकांता एक सुंदर और गुणकारी फूलों वाला पौधा है। यह नीले, सफेद या बैंगनी रंग के फूलों से घर या बगीचे की सुंदरता बढ़ा देता है। लेकिन कई बार गमले में पौधा तो हरा-भरा होता है, पर फूल कम आते हैं आइए जानें कुछ ऐसे आसान घरेलू उपाय, जिनसे आप अपराजिता के पौधे की हर डाल को नीले फूलों से भर सकते हैं👇
▪️पर्याप्त धूप दें :-
अपराजिता को रोजाना 5–6 घंटे की सीधी धूप जरूर मिले। जितनी ज्यादा धूप मिलेगी, उतने ही ज्यादा फूल खिलेंगे। अगर पौधा छांव में रहेगा तो फूल बहुत कम आएंगे या जल्दी झड़ जाएंगे।
▪️ नियमित छंटाई करें :-
हर 15–20 दिन में सूखी और पुरानी शाखाओं को काट दें। इससे नई टहनियाँ तेजी से निकलती हैं और उन पर जल्दी फूल आते है।
▪️खाद डालें :-
महीने में एक बार जैविक खाद डाले।आप गोबर की खाद, वर्मीकम्पोस्ट या रसोई के बचे सब्जी-फलों के कचरे से बनी खाद का उपयोग करें। केले के छिलकों का पाउडर मिट्टी में मिलाना बहुत फायदेमंद होता है, क्योंकि यह फूलों की संख्या और आकार दोनों बढ़ाता है।
साथ ही फिटकरी का पानी दें। 1 लीटर पानी में 2–3 ग्राम फिटकरी घोलकर महीने में एक बार मिट्टी में डालें, अधिक मात्रा में उपयोग न करें। फिटकरी का पानी अपराजिता पौधे के लिए एक असरदार घरेलू उपाय है। इसमें एंटीबैक्टीरियल और एंटिफंगल गुण होते हैं जो मिट्टी को कीटों और फफूंद से बचाते हैं। यह जड़ों को मजबूत बनाता है, फूलों की संख्या और रंग बढ़ाता है।
▪️ राख मिलाएँ :-
लकड़ी या उपले की राख में पोटैशियम भरपूर होता है। थोड़ी सी राख मिट्टी में मिलाने से पौधा ज्यादा फूल देता है और मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है।
▪️पानी का संतुलन बनाए रखें :-
अपराजिता को हमेशा हल्की नमी चाहिए, लेकिन पानी रुकना नहीं चाहिए। गर्मियों में रोज पानी दें, जबकि ठंड में 3–4 दिन के अंतराल पर पानी देना पर्याप्त होता है।
▪️ सूखे फूल तोड़ते रहें :-
जब फूल मुरझा जाएँ, तो उन्हें तुरंत तोड़ दें। इससे पौधे को नए फूल आने का संकेत मिलता है। यह उपाय लगातार फूल आने में बहुत मदद करता है।
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