जय गुरुदेव ,
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Bajrang digital noli official
*बीता हुआ कल तुम्हारे दिमाग़ में है,*
*और आने वाला कल तुम्हारे हाथ में...!*
*सफल होते ही दुनियां आपके भीतर*
*अनेक खूबियां ढूंढ लेती है..!!*
*और असफल होते ही हजार कमियां..!!*
*पछताने के लिए पूरी उम्र पड़ी है*
*सवार लो इस पल को.....*
*यही जिंदगी बदलने की घड़ी है!*
*🙏🏻🎍🙏🏻🙏🏻🎍🙏🏻*
8 months ago | [YT] | 9
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Bajrang digital noli official
*ईर्ष्या की ज्वाला से मुक्त होकर सुखमय जीवन जीएं*
*ईर्ष्या - एक मनोवैज्ञानिक विकार*
*ईर्ष्या एक नकारात्मक भावना है जो अहंकार से उत्पन्न होती है।* *जब कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को सफलता प्राप्त करते हुए देखता है और स्वयं उस स्तर तक नहीं पहुंच पाता, तो उसके मन में ईर्ष्या की भावना पनपने लगती है।*
*
*अहंकार का कुप्रभाव*
*अहंकारी व्यक्ति खुद को दूसरों से श्रेष्ठ समझता है।* *जब वे किसी अन्य व्यक्ति को सफल होते हुए देखते हैं, तो उन्हें हताशा और जलन का अनुभव होता है *।* *वे दूसरों की बुराई की कामना करते हैं, जबकि अपनी कमियों को स्वीकार करने में असमर्थ होते हैं।** *यह ईर्ष्या की आग धीरे-धीरे उन्हें अंदर से जलाकर खा जाती है।*
*ईर्ष्या - क्रोध का रूप*
*ईर्ष्या क्रोध का एक रूप है जो सफल व्यक्ति की बुराई करने की प्रवृत्ति रखता है।* *ईर्ष्यालु व्यक्ति भले ही सीधे तौर पर कुछ न कर पाए, लेकिन उनकी नकारात्मक भावनाएं छिप नहीं पातीं और किसी न किसी रूप में प्रकट हो ही जाती हैं।*
*नकारात्मक परिणाम*
*ईर्ष्यालु व्यक्ति अनावश्यक चिंता, भय, भ्रम और घबराहट से ग्रस्त रहते हैं। वे हमेशा किसी न किसी रोग से पीड़ित रहते हैं और सुख-शांति का अनुभव नहीं कर पाते।*
*सफलता का मार्ग*
*ईर्ष्या से मुक्त होने का सबसे अच्छा तरीका है कि हम सफल व्यक्ति की सराहना करें और उनसे प्रेरणा लें।* हमें *अपनी मेहनत और क्षमता पर विश्वास रखते हुए आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए।* *तभी हम सच्चा सुख और सफलता प्राप्त कर पाएंगे..!!*
🙏🏼🙏🏿🙏🏾जय श्री कृष्ण*🙏🏻🙏🏽🙏
8 months ago | [YT] | 5
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Bajrang digital noli official
✍️✍️
*क्रोध में बोला हुआ एक कठोर शब्द*
*भी इतना जहरीला हो सकता है कि*
*आपकी हजार प्यारी बातों को एक*
*बार में ही नष्ट कर सकता है..*
*अक्षय तृतीया की शुभकामनाएं*
*🙏🏻💐 💐🙏🏻*
8 months ago | [YT] | 6
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Bajrang digital noli official
✍️
*"रिश्ते कभी जिंदगी के*
*साथ साथ नहीं चलते.,*
*रिश्ते एक बार बनते हैं..*
*फिर जिंदगी रिश्तों के*
*साथ साथ चलती है...!!*
🍰
*इस पृथ्वी पर दान जैसी उत्तम क्रिया नहीं है,*
*लोभ जैसा दूसरा कोई शत्रु नहीं है ।।*
*अच्छे स्वभाव जैसा कोई आभूषण नहीं है*
*और संतोष जैसा दूसरा कोई धन नहीं है ।।।*
🍰🍰🍰
*जय श्री कृष्णा.......!!*🌹🙏🏻
9 months ago | [YT] | 6
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Bajrang digital noli official
जय गुरुदेव 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
9 months ago | [YT] | 64
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Bajrang digital noli official
*🚩दिपावली यानी प्रकाशमय पर्व🚩*
*रामायण में रामजी का पाञ मनोरंजन के लिए नहीं अपितु वह तो निरन्तर पुरुषार्थ करने की प्रेरणा देता है|
दिपावली यानी..........
अधर्म पर धर्म की विजय..*
*अत्याचार पर सदाचार की विजय..*
*क्रोध पर दया,*
*क्षमा की विजय..*
*अज्ञान पर ज्ञान की विजय
देवो की दानवों पर विजय
अंधकार से प्रकाशमय पर्व की ओर
रावण पर श्रीराम की विजय के बाद अयोध्या पधारने, श्रीराम से मर्यादा पुरुषोत्तम राजा राम के आगमन पावन प्रकाशमय पर्व *रुप चौदस, दिपावली, खेखरा, भाईदूज अर्थात पंच प्रकाश मय पर्व की आप सभी को हार्दिक मंगलमय शुभकामनाएं|
*राष्ट्र प्रेम की ज्योति जलाकर
पंच प्रकाश मय पर्व के शुभ अवसर पर
आनंद उमंग से सदा दिपाली
मनाएं हम आओ मिलजुलकर|*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏
🚩🚩🚩🚩🚩🚩
जय श्री राम
1 year ago | [YT] | 9
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Bajrang digital noli official
*गुरु एक खुशबू है*
*जिससे सारा जहाँ महक उठता है*
*गुरु एक दीपक है*
*जो हमेशा सही रास्ता दिखाता है*
*गुरु एक नगमा है*
*जिसकी गूंज ज़िन्दगी का एहसास दिलाती है*
*गुरु एक दुआ है*
*जो सर पर सदा छाया करती है*
*गुरु एक खुशी है*
*जो ज़िन्दगी के दामन में खुशियां भरती है*
*गुरु एक राह है*
*जो सीधी मोक्ष की मंजिल पर जाती है*
🙏🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🚩🚩🚩🚩🚩
1 year ago | [YT] | 11
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Bajrang digital noli official
*♨️ आज का प्रेरक प्रसंग ♨️*
*चेतावनी*
दुनिया का हर आदमी मृत्यु की कतार में खड़ा है,इसलिए हर पल जागृत रहना।
चूँकि जीवन एक यात्रा है जिसकी समाप्ति मौत है।जैसे पंछी पिंजरे को छोड़कर उड़ जाता है ऐसे ही आत्मा का शरीर के पिंजरे को छोड़कर उड़ जाने का नाम मृत्यु है।आत्मा को यह देह रूप पिंजरा छोड़ना पड़े उससे पूर्व इन तीन तथ्यों का चिन्तन बार-बार कर लेना ...।
पहला तथ्य यह है,मेरे जीवन में कभी भी रोगों का आक्रमण हो सकता है और मैं इसे टाल नहीं सकता।चाहे कितने ही कुशल डॉक्टर, वैद्य या चिकित्सक मिल जाए... वे भी मुझे बीमारी से नहीं बचा सकते।
दूसरा तथ्य यह है,समय की धारा में बहते हुए मेरी यह सुड़ौल काया जीर्ण-शीर्ण होगी और एक दिन जब बुढ़ापा आयेगा तब आवाज कंपकंपायेगी ... कदम लड़खड़ायेंगे... हाथ-पैर थरथरायेंगे और आँखें निस्तेज हो जायेगी जिसे मैं टाल नहीं सकता।
तीसरा चिन्तन यह है,किसी भी पल जीवन से चलाचली होगी और उसे मैं टाल नहीं सकता। कहा भी है-
न गाती है न गुनगुनाती है,
न चिल्लाती है न रोती है।
मौत जब लेने आ जाती है,
चुपके से लेकर चली जाती है।
मौत आग की भाँति है। जैसे मिट्टी में पड़े हुए सोने को जला डालने की ताकत आग में नहीं है परन्तु वह कचरे को जलाकर राख कर देती है। यही हाल मौत का है... उसमें आत्मा के एक भी आत्म प्रदेश को समाप्त कर डालने की क्षमता नहीं है पर शरीर के एक भी अंग को वह सलामत नहीं रहने देती।
प्रतिदिन का ऐसा चिन्तन अभिमान पर चोट करता है तथा आसक्ति से विरक्त रखकर धर्माचरण की ओर गतिशील रखता है। इस लिए धर्म करने की कोई उमर नही होती जब जागे सवेरा समझो 🙏🏻🙏🏻 इस भाग दौड वाली ज़िन्दगी मे टाईम
तो निकालने से निकल जाता है परन्तु जो लौग धर्म नही करते नास्तिक है वह जरूर कहते है अभी धर्म करने की उम्र
थोडी है व्यापार और गृहस्थी पर ध्यान देवे धर्म करने के लिए उम्र पडी है यह सुन कर हमारा विचलित मन को उसकी बात ठीक महसुस होती है और धर्म से और अरिहंत से जुडना रह जाता है और हम.पैसे,मान सम्मान,ऐश्वर्य,सुख सुविधा को ही भगवान मान लेते है और जीवन के अन्तिम समय तक मोह माया के बन्धन मे जकडे रहते है 🙏🏻🙏🏻🙏🏻
जब की यह तो भ्रम जाल है करोडो की सम्पति आँख बन्द
करते ही पराई हो जाती है पैसा तो साथ गया नही परन्तु पैसा कमाने मे जो छल कपट नकली झूठा दगा किया है उस पाप की गठरी तो तुम्हारे साथ जायेगी और कितने भवो तक चुकाते रहने के बाद भी मुक्ति असम्भव है
हे जीव अरिहंत भक्ति मे अभी लग जा आज से लग जा जीवन का अन्तिम दिन का पता नही रोज ही जीवन का अन्तिम दिन समझो और संसार छोड कर जाने से पहले पुण्य की गठरी को भारी कर लो..!!
*सदैव प्रसन्न रहिये*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।*
1 year ago | [YT] | 5
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Bajrang digital noli official
*संसार में दो प्रकार के पेड़ पौधे होते हैं:-*
पहला: अपना फल स्वयं दे देते हैं,
जैसे- आम, अमरुद, केला इत्यादि।
दूसरा: अपना फल छिपाकर रखते हैं,
जैसे- आलू, अदरक, प्याज इत्यादि।
जो पेड़ अपने आप फल दे देते हैं, उन वृक्षों को सभी खाद-पानी देकर सुरक्षित रखते हैं, और ऐसे वृक्ष फिर से फल देने के लिए तैयार हो जाते हैं।
किन्तु जो अपना फल छिपाकर रखते है, वे जड़ सहित खोद लिए जाते हैं, उनका वजूद ही खत्म हो जाता हैं।
ठीक इसी प्रकार...
जो व्यक्ति अपनी विद्या, धन, शक्ति स्वयं ही समाज सेवा में समाज के उत्थान में लगा देते हैं, उनका सभी ध्यान रखते हैं और वे मान-सम्मान पाते है।
वही दूसरी ओर
जो अपनी विद्या, धन, शक्ति स्वार्थवश छिपाकर रखते हैं, किसी की सहायता से मुख मोड़े रखते है, वे जड़ सहित खोद लिए जाते है, अर्थात् समय रहते ही भुला दिये जाते है।
प्रकृति कितना महत्वपूर्ण संदेश देती है, बस समझने, सोचने और कार्य में परिणित करने की बात है।
1 year ago | [YT] | 5
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Bajrang digital noli official
परमात्मा इच्छा मात्र से मिलते हैं। उनको रोकने की ताकत किसीमे भी नहीं है। छोटा बालक रोता है तो मां आ जाती है। बालक घर का कुछ भी काम नहीं करता। उल्टे काम करनेमे आपको बाधा लगता है। पर जब वह रोने लगता है तब सब घरवाले उसके पक्ष में हो जाते हैं। सास ससुर देवर जेठ सभी कहते हैं कि बहू बालक रो रहा है उसको उठा ले माको सब काम छोड़कर बालकको उठाना पड़ता है। बालक का एकमात्र बाल रोना ही है रोनेमे बड़ी ताकत है। आप सच्चे हृदयसे व्याकुल होकर भगवान के लिये रोने लग जाओ तो। जितने भगवान के भक्त हुए हैं संत महात्मा हुए हैं। वे सबके सब आपके पक्ष में हो जाएंगे
1 year ago | [YT] | 12
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