भावार्थ- जिसप्रकार लवण अर्थात् नमक के सम्बन्ध से दूध विकृत हो जाता है उसीप्रकार द्वेष करने से जीव विकृत-सारहीन और दुःखमय हो जाता है क्योंकि द्वेष करने से इस लोक में मधुर सम्बन्ध भी कड़वे हो जाते हैं। मित्र भी शत्रु बन जाते हैं। यहाँ तक कि अपने भी पराये हो जाते हैं तथा द्वेष करने वाला पाप कर्म का बंध करता है अतः परलोक में भी दुःखी रहता है।
भावार्थ-देह का अर्थ शरीर है और केवली भगवान् ने औदारिक, वैक्रियिक, आहारक, तैजस और कार्मण; ये पाँच प्रकार के शरीर बताये हैं जो संसार भ्रमण के मुख्य कारण हैं। पौद्गलिक और पर-रूप शरीर में अपनत्व मानकर जीव स्वयं के वास्तविक स्वभाव को भूल जाता है। उसे अपने सत्यार्थ स्वरूप पर भी संदेह होने लगता है। अतः वह शरीरगत अनेक प्रपंचों में फँसकर गहनतम दुःखों से जूझता है। ऐसी देह में निवास करने वाले देहवान आत्मा को आचार्य देहाती का सम्बोधन करते हुए समझा रहे हैं कि हे देहाती ! देह का छोड़ने के उपायभूत रत्नत्रय की आराधना कर ताकि पर पदार्थों से अत्यन्त भिन्न निर्मल आत्मस्वरूप को प्राप्त कर चिरकाल तक स्वाश्रित सुख में निमग्न हो सके। . #vidhyasagar_bm#haiku#haikupoetry#jainism #vidhyasagarji
भावार्थ-सौरमण्डल में देखते हैं तो चन्द्रमा इन्द्र है और अपने परिवार यानि अन्य ग्रह, नक्षत्र, तारों से घिरा रहता है लेकिन सूर्य दिन में आकाश में अकेले ही दैदीप्यमान होता है। उसीप्रकार संत-साधु निस्संग, एकाकी ही विचरण करते हैं, गृहस्थ परिवार जनों से घिरे रहते हैं।
संस्मरण-आचार्यश्री से किसी ने कहा कि आप इतने विशाल संघ के नायक हैं। तब आचार्यश्री ने उत्तर दिया कि हम नायक नहीं, ज्ञायक हैं।
विद्यासागर भक्त मंडल
आज की कक्षा
1 year ago | [YT] | 9
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विद्यासागर भक्त मंडल
🔅मंगल प्रवचन 🔅
उत्तम संयम धर्म 🚩
🪷आचार्य भगवन श्री समयसागर जी महामुनिराज🪷
1 year ago | [YT] | 6
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विद्यासागर भक्त मंडल
Day 4 | उत्तम शौच धर्म
1 year ago | [YT] | 164
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विद्यासागर भक्त मंडल
Day 1 | उत्तम क्षमा धर्म
1 year ago | [YT] | 87
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विद्यासागर भक्त मंडल
*दस लक्षण महापर्व 🚩✨*
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1 year ago | [YT] | 91
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विद्यासागर भक्त मंडल
भावार्थ- जिसप्रकार लवण अर्थात् नमक के सम्बन्ध से दूध विकृत हो जाता है उसीप्रकार द्वेष करने से जीव विकृत-सारहीन और दुःखमय हो जाता है क्योंकि द्वेष करने से इस लोक में मधुर सम्बन्ध भी कड़वे हो जाते हैं। मित्र भी शत्रु बन जाते हैं। यहाँ तक कि अपने भी पराये हो जाते हैं तथा द्वेष करने वाला पाप कर्म का बंध करता है अतः परलोक में भी दुःखी रहता है।
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🪷 विद्यासागर भक्त मंडल🪷
1 year ago | [YT] | 154
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विद्यासागर भक्त मंडल
विचार सूत्र ✨
आचार्य भगवन १०८ विद्यासागर जी महामुनिराज🙌
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#vidhyasagar_bm #vidhyasagarjimaharaj #badebaba #kundalpur #jaintirth #jaintemple #jainism #explore
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#education #jainism #jains #jainsong #jainstatus
1 year ago | [YT] | 175
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विद्यासागर भक्त मंडल
भावार्थ-देह का अर्थ शरीर है और केवली भगवान् ने औदारिक, वैक्रियिक, आहारक, तैजस और कार्मण; ये पाँच प्रकार के शरीर बताये हैं जो संसार भ्रमण के मुख्य कारण हैं। पौद्गलिक और पर-रूप शरीर में अपनत्व मानकर जीव स्वयं के वास्तविक स्वभाव को भूल जाता है। उसे अपने सत्यार्थ स्वरूप पर भी संदेह होने लगता है। अतः वह शरीरगत अनेक प्रपंचों में फँसकर गहनतम दुःखों से जूझता है। ऐसी देह में निवास करने वाले देहवान आत्मा को आचार्य देहाती का सम्बोधन करते हुए समझा रहे हैं कि हे देहाती ! देह का छोड़ने के उपायभूत रत्नत्रय की आराधना कर ताकि पर पदार्थों से अत्यन्त भिन्न निर्मल आत्मस्वरूप को प्राप्त कर चिरकाल तक स्वाश्रित सुख में निमग्न हो सके।
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1 year ago | [YT] | 161
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विद्यासागर भक्त मंडल
विचार सूत्र ✨
आचार्य भगवन १०८ विद्यासागर जी महामुनिराज🙌
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1 year ago | [YT] | 179
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विद्यासागर भक्त मंडल
भावार्थ-सौरमण्डल में देखते हैं तो चन्द्रमा इन्द्र है और अपने परिवार यानि अन्य ग्रह, नक्षत्र, तारों से घिरा रहता है लेकिन सूर्य दिन में आकाश में अकेले ही दैदीप्यमान होता है। उसीप्रकार संत-साधु निस्संग, एकाकी ही विचरण करते हैं, गृहस्थ परिवार जनों से घिरे रहते हैं।
संस्मरण-आचार्यश्री से किसी ने कहा कि आप इतने विशाल संघ के नायक हैं। तब आचार्यश्री ने उत्तर दिया कि हम नायक नहीं, ज्ञायक हैं।
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1 year ago | [YT] | 143
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