शास्त्रों में बताए गए पति-पत्नी के धर्म श्लोकों सहित |
1. स्त्री का पति धर्म (पातिव्रत्य)
🌸 मनुस्मृति (5/154)
> न स्त्री स्वातंत्र्यमर्हति। 👉 स्त्री का धर्म है कि वह अपने पिता, पति और पुत्र के संरक्षण में रहे। पति को देवतुल्य मानकर उसका आदर करे।
🌸 महाभारत, अनुशासन पर्व
> नास्ति पतिसमो देवो नास्ति पतिसमा गति:। पतिं या नाभिनन्देत सा गता नरकं ध्रुवम्॥ 👉 पति स्त्री के लिए देवता के समान है। जो पत्नी पति का अनादर करती है, वह पातालगति को प्राप्त होती है।
🌸 रामायण (अयोध्या कांड – सीता माता)
> अनन्या राघवेणाहं भास्करेण प्रभा यथा। 👉 सीता जी कहती हैं – जैसे सूर्य के बिना किरण का अस्तित्व नहीं, वैसे ही मेरा जीवन श्रीराम के बिना अधूरा है।
2. पुरुष का धर्म (पति का पत्नी के प्रति कर्तव्य)
🌸 मनुस्मृति (3/55)
> यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः। यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफला: क्रिया:॥ 👉 जहाँ स्त्रियों का सम्मान होता है, वहाँ देवता निवास करते हैं; जहाँ नहीं, वहाँ सभी कर्म निष्फल हो जाते हैं।
🌸 महाभारत (शांति पर्व)
> स्त्रीणामार्येण व्यवहारः कार्यः सततमात्मना। 👉 स्त्री के साथ हमेशा सम्मानजनक और मर्यादापूर्ण व्यवहार करना पति का धर्म है।
🌸 रामायण (अरण्य कांड)
> पत्नीं हि परमं मित्रम् धर्मं हि परमं स्मृतम्। 👉 पत्नी पति की परम मित्र और जीवन की सबसे बड़ी सहचरी है।
पातिव्रता स्त्री और पुरुष का धर्म हिन्दू शास्त्रों और परंपराओं में बहुत गहराई से बताया गया है। दोनों के अपने-अपने कर्तव्य होते हैं, और यही वैवाहिक जीवन को सुखी और संतुलित बनाते हैं।
1. पातिव्रता स्त्री का धर्म
पति को देवतुल्य मानना – पति को ईश्वर का रूप मानकर उसकी सेवा, सम्मान और आदर करना।
सहयोगिनी बनना – सुख-दुख, रोग-शोक, आर्थिक कठिनाई हर परिस्थिति में पति का साथ निभाना।
मर्यादा का पालन – अपने आचरण, वाणी और विचार में पवित्रता बनाए रखना।
गृहस्थ जीवन को संभालना – परिवार, संतान और घर को प्रेम, धैर्य और समर्पण से संभालना।
धार्मिक आचरण – व्रत, पूजा-पाठ और सत्कर्मों द्वारा परिवार की उन्नति और कल्याण की कामना करना।
2. पति (पुरुष) का धर्म
पत्नी का सम्मान – पत्नी को केवल "गृहलक्ष्मी" ही नहीं, बल्कि समान अधिकारों वाली साथी मानना।
पालन-पोषण का दायित्व – परिवार को आर्थिक, सामाजिक और मानसिक सुरक्षा प्रदान करना।
विश्वास और निष्ठा – पत्नी के प्रति निष्ठावान रहना और किसी प्रकार का छल न करना।
सुख-दुख में साथ – पत्नी के हर सुख-दुख, बीमारी और संघर्ष में उसका सहारा बनना।
धार्मिक कर्तव्य – परिवार को धर्म, सत्य और सदाचार के मार्ग पर चलाना।
Ankit Negi Mahakal
3 days ago | [YT] | 1
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Ankit Negi Mahakal
सच यही है:
जो समझना चाहता है, उसे एक इशारा ही काफी होता है;
और जो नहीं चाहता, उसे हज़ार शब्द भी कम पड़ जाते हैं।
1 month ago | [YT] | 3
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Ankit Negi Mahakal
अगर किसी को बार-बार समझाने पर भी वह न समझे, तो इसका मतलब अक्सर यह नहीं होता कि उसे समझ नहीं है, बल्कि यह होता है कि वह समझना ही नहीं चाहता।
1 month ago | [YT] | 5
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Ankit Negi Mahakal
गंगापुत्र भीष्म का बालपन का नाम क्या है?
6 months ago | [YT] | 2
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Ankit Negi Mahakal
मगध नरेश जरासंध का वध किसने किया?
6 months ago | [YT] | 2
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Ankit Negi Mahakal
द्वापर युग में भगवान विष्णु के नर-नारायण अवतार किस रूप में अवतरित हुए?
6 months ago | [YT] | 2
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Ankit Negi Mahakal
इनमें से कौन सा माता कुंती का पुत्र नहीं है ?
6 months ago | [YT] | 1
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Ankit Negi Mahakal
शास्त्रों में बताए गए पति-पत्नी के धर्म श्लोकों सहित |
1. स्त्री का पति धर्म (पातिव्रत्य)
🌸 मनुस्मृति (5/154)
> न स्त्री स्वातंत्र्यमर्हति।
👉 स्त्री का धर्म है कि वह अपने पिता, पति और पुत्र के संरक्षण में रहे। पति को देवतुल्य मानकर उसका आदर करे।
🌸 महाभारत, अनुशासन पर्व
> नास्ति पतिसमो देवो नास्ति पतिसमा गति:।
पतिं या नाभिनन्देत सा गता नरकं ध्रुवम्॥
👉 पति स्त्री के लिए देवता के समान है। जो पत्नी पति का अनादर करती है, वह पातालगति को प्राप्त होती है।
🌸 रामायण (अयोध्या कांड – सीता माता)
> अनन्या राघवेणाहं भास्करेण प्रभा यथा।
👉 सीता जी कहती हैं – जैसे सूर्य के बिना किरण का अस्तित्व नहीं, वैसे ही मेरा जीवन श्रीराम के बिना अधूरा है।
2. पुरुष का धर्म (पति का पत्नी के प्रति कर्तव्य)
🌸 मनुस्मृति (3/55)
> यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफला: क्रिया:॥
👉 जहाँ स्त्रियों का सम्मान होता है, वहाँ देवता निवास करते हैं; जहाँ नहीं, वहाँ सभी कर्म निष्फल हो जाते हैं।
🌸 महाभारत (शांति पर्व)
> स्त्रीणामार्येण व्यवहारः कार्यः सततमात्मना।
👉 स्त्री के साथ हमेशा सम्मानजनक और मर्यादापूर्ण व्यवहार करना पति का धर्म है।
🌸 रामायण (अरण्य कांड)
> पत्नीं हि परमं मित्रम् धर्मं हि परमं स्मृतम्।
👉 पत्नी पति की परम मित्र और जीवन की सबसे बड़ी सहचरी है।
6 months ago | [YT] | 6
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Ankit Negi Mahakal
6 months ago | [YT] | 8
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Ankit Negi Mahakal
पातिव्रता स्त्री और पुरुष का धर्म हिन्दू शास्त्रों और परंपराओं में बहुत गहराई से बताया गया है। दोनों के अपने-अपने कर्तव्य होते हैं, और यही वैवाहिक जीवन को सुखी और संतुलित बनाते हैं।
1. पातिव्रता स्त्री का धर्म
पति को देवतुल्य मानना – पति को ईश्वर का रूप मानकर उसकी सेवा, सम्मान और आदर करना।
सहयोगिनी बनना – सुख-दुख, रोग-शोक, आर्थिक कठिनाई हर परिस्थिति में पति का साथ निभाना।
मर्यादा का पालन – अपने आचरण, वाणी और विचार में पवित्रता बनाए रखना।
गृहस्थ जीवन को संभालना – परिवार, संतान और घर को प्रेम, धैर्य और समर्पण से संभालना।
धार्मिक आचरण – व्रत, पूजा-पाठ और सत्कर्मों द्वारा परिवार की उन्नति और कल्याण की कामना करना।
2. पति (पुरुष) का धर्म
पत्नी का सम्मान – पत्नी को केवल "गृहलक्ष्मी" ही नहीं, बल्कि समान अधिकारों वाली साथी मानना।
पालन-पोषण का दायित्व – परिवार को आर्थिक, सामाजिक और मानसिक सुरक्षा प्रदान करना।
विश्वास और निष्ठा – पत्नी के प्रति निष्ठावान रहना और किसी प्रकार का छल न करना।
सुख-दुख में साथ – पत्नी के हर सुख-दुख, बीमारी और संघर्ष में उसका सहारा बनना।
धार्मिक कर्तव्य – परिवार को धर्म, सत्य और सदाचार के मार्ग पर चलाना।
6 months ago | [YT] | 6
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