SVRJ Brand={Swami Vivekanand+Ravindra JainJi}: स्वराज ब्राण्ड(@pramodbartala)🇮🇳🕉️
Hey guys, this is Pramod Kumar and you’re watching SVRJ Brand.


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बातों से रोते हुई चेहरे को हंसा देता हूं और हाथों से हंसते हुए चेहरे को रुला देता हूं...✍️✍️💪👌

2 weeks ago | [YT] | 6

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✍️🥹

3 weeks ago | [YT] | 3

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प्राचीन काल में मल्ल महाजनपद हुआ करता था। मल्ल महाजनपद में मल्ल जाति के लोगों का शासन था, और इनका राज्य उत्तर प्रदेश एवं बिहार वाले भूभाग में था।
मल्ल महाजनपद नौ गणराज्यों का समूह था, और इसकी दो राजधानियाँ थीं — उत्तरी मल्ल की राजधानी कुशीनगर, और दक्षिणी मल्ल की राजधानी पावापुरी।
कुशीनगर में ही गौतम बुद्ध का महापरिनिर्वाण हुआ था, और पावापुरी में ही महावीर की मृत्यु हुई थी।
मल्ल महाजनपद को मगध के राजा अजातशत्रु ने जीत लिया था। जब अजातशत्रु का यहाँ अधिकार हो गया, तो मल्ल जाति के लोग यहाँ से भारत के उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत में जाकर बस गए। वहाँ मल्ल जनपद के लोगों को मालव कहा जाने लगा, और वहाँ उन्होंने एक मालव गणराज्य स्थापित कर लिया।
जब सिकंदर ने भारत पर आक्रमण किया, तो मालव जाति के लोगों के साथ सिकंदर का युद्ध हुआ। माना जाता है कि इसी जाति से हुए युद्ध के दौरान सिकंदर की छाती पर एक तीर लगा, और उसी तीर के संक्रमण (इनफेक्शन) से आगे चलकर 323 ईसा पूर्व में बेबीलोन में सिकंदर की मृत्यु हुई थी।
सिकंदर के आक्रमण के उपरांत मालव जाति के लोग भारत के उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत की जगह राजस्थान और मध्य प्रदेश में आकर बस गए, और इन्हीं के कारण राजस्थान और पश्चिमी मध्य प्रदेश के इस क्षेत्र को मालवा कहा जाने लगा।
मालव जाति के ही एक राजा हुए — उज्जैन के महान राजा विक्रमादित्य।
मालव जाति मूल रूप से मल्लों की वंशज है। मल्ल कौन हैं, इसकी जानकारी रामायण से मिलती है — मल्ल लक्ष्मण के पुत्र चंद्रकेतु के वंशज हैं। तो लक्ष्मण के पुत्र चंद्रकेतु के वंशजों को मल्ल कहा गया, और मल्ल जाति को ही आगे चलकर मालव कहा गया।
मालव जाति से ही संबंधित थे उज्जैन के राजा विक्रमादित्य। इतिहास में सामान्यतः यह माना जाता है कि भील लोग कहते हैं कि विक्रमादित्य हमारे वंश के राजा थे, परमार वंश के लोग कहते हैं कि ये हमारे वंश या जाति के थे। लेकिन ऐतिहासिक तथ्य यह है कि विक्रमादित्य वास्तव में एक इक्ष्वाकु वंशी क्षत्रिय थे — अयोध्या के राजा भगवान राम के वंश के थे। इसीलिए आप देखेंगे कि विक्रमादित्य की जो भी मूर्तियाँ दिखाई देती हैं, उनके पीछे प्रभामंडल में सूर्य बना हुआ है — क्योंकि वे सूर्यवंशी और इक्ष्वाकुवंशी क्षत्रिय थे।

1 month ago | [YT] | 6

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देश को एक और विवेकानंद चाहिए, यह समझने के लिए कि इस विवेकानंद ने अब तक क्या किया है... हे प्रभु कब आओगे 🥹🥰♥️

2 months ago (edited) | [YT] | 5

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यदि मेरे देश की तरफ किसी ने आंख उठाकर देखा तो उन आंखों को निकाल कर कंचा बना देंगे।😎🇮🇳🙏

2 months ago | [YT] | 7

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यह ब्रह्मांड कहाँ से आया? और एक दिन कहाँ जाएगा?
उपनिषद हज़ारों साल पहले कह गए — सब कुछ ब्रह्म से उत्पन्न होता है और अंत में उसी में विलीन हो जाता है।
ब्रह्म कोई देवता नहीं — वो वो परम चेतना है जिससे यह सारी सृष्टि बनी है। जैसे मिट्टी से घड़ा बनता है और टूटने पर वापस मिट्टी बन जाता है — वैसे ही हम सब ब्रह्म के रूप हैं।
माया वो शक्ति है जो एक को अनेक दिखाती है। आत्मा ब्रह्म से अलग नहीं — अहम् ब्रह्मास्मि।
और आधुनिक विज्ञान भी यही कहता है — सब एक बिंदु से आया, एक दिन उसी में समाएगा।
सृष्टि, स्थिति, प्रलय — यह चक्र अनंत है। 🙏

3 months ago | [YT] | 7

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क्या ईश्वर पहले किस्मत लिखता है और फिर कर्मों का हिसाब माँगता है? यह सुनने में विरोधाभास लगता है — लेकिन असल में यह एक बेहद सटीक और न्यायपूर्ण व्यवस्था है।
इस विषय में समझने वाली ज़रूरी बातें —
प्रारब्ध, संचित और क्रियमाण — तीन तरह के कर्म और उनका फर्क। किस्मत पूरी ज़िंदगी नहीं लिखती, सिर्फ शुरुआती परिस्थिति देती है। ईश्वर का सब जानना हमारी स्वतंत्र इच्छा को नहीं छीनता। हिसाब सिर्फ उसी का होगा जो हमारे हाथ में था। और आज का कर्म ही कल की किस्मत बनता है।
सार एक ही है — प्रारब्ध को माथे पर रखो, क्रियमाण को हाथ में रखो।
किस्मत और कर्म विरोधी नहीं — एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। 🙏

3 months ago | [YT] | 11

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Bibliophile❤️❤️🥰🥹📚
:A room without books is like a body without a soul and
A reader lives a thousand lives before he dies.

3 months ago (edited) | [YT] | 9

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ईश्वर अल्लाह वाहेगुरु जीसस गौतम बुद्ध महावीर स्वामी यहोवा प्रभु सब की रक्षा करें।..✍️✍️
मैं तो सिर्फ इतना चाहता हूं कि माथे पर चंदन और दिल में रघुनंदन होना चाहिए, साथ ही सिर के ऊपर अंबर और तन पर पीतांबर होना चाहिए..✍️✍️--  ‪@pramodbartala‬ 
Radhe Radhe🥰🥰

3 months ago | [YT] | 10

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प्रेम रोग लग जाए तो इंसान बदल जाता है,
हंसता हुआ चेहरा भी अक्सर संभल जाता है।
दिल में एक खालीपन सा बस जाता है,
हर खुशी का रंग जैसे फीका पड़ जाता है।
वो पास ना हो फिर भी हर जगह दिखता है,
उसका नाम ही हर धड़कन में लिखता है।
रातें लंबी हो जाती हैं, नींद रूठ जाती है,
उसकी याद चुपके से आकर सब लूट जाती है।
ये कैसा रिश्ता है जो टूटकर भी जुड़ा रहता है,
हर दर्द के बाद भी दिल उसी को चुनता है।
ना कोई मरहम काम आता है, ना कोई दवा,
ये “प्रेम रोग” है जनाब, बस दिल की ही सजा।
आँखों में आंसू हों फिर भी मुस्कुराना पड़ता है,
उसके बिना हर पल खुद को समझाना पड़ता है।
और सबसे बड़ा सच तो यही है...
जिसे हम सबसे ज्यादा चाहते हैं,
अक्सर वही सबसे ज्यादा रुलाता है… 💔

4 months ago | [YT] | 6