👉🏻 हाल ही में एक movie देखी The Girlfriend, यह प्रेम की उस प्रचलित परिभाषा पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है, जिसे हम अपने जीवन में, समाज में देखते हैं ।
👉🏻 यह फ़िल्म दिखाती है कि व्यवहार में प्रेम के नाम पर स्वतंत्रता को सीमित किया जा रहा है, अधिकार जताया जाता है और नियंत्रण को सामान्य बना दिया जाता है।
👉🏻 फ़िल्म की केंद्रीय पात्र एक ऐसी युवती है जो पितृसत्तात्मक सोच के दो छोरों के बीच फँसी हुई दिखाई देती है। एक ओर उसका पिता है, जो परंपरा, अनुशासन और सामाजिक मर्यादाओं के नाम पर उसकी स्वतंत्रता को नियंत्रित करता है; दूसरी ओर उसका कॉलेज का मित्र/प्रेमी है, जो आधुनिक भाषा और युवा सोच के आवरण में वही नियंत्रण, वही अधिकार-बोध और वही पितृसत्तात्मक दृष्टि लिए हुए है।
👉🏻 हालाँकि दोनों के बीच पीढ़ी का अंतर, भाषा और अभिव्यक्ति का फर्क साफ दिखाई देता है, लेकिन फ़िल्म बहुत स्पष्टता से यह स्थापित करती है कि केंद्र दोनों का एक ही है—स्त्री की स्वतंत्रता पर अधिकार। फर्क केवल इतना है कि पिता इसे “संस्कार” कहता है और प्रेमी इसे “प्यार”।
👉🏻 इन दोनों के बीच पिसती हुई नायिका का जीवन, उसकी इच्छाएँ, उसके निर्णय और उसकी आज़ादी लगातार सीमित होती जाती है। फ़िल्म यह उजागर करती है कि पितृसत्ता केवल पुरानी पीढ़ी की समस्या नहीं है; वह आधुनिक रिश्तों में भी नए रूप, नई भाषा और नए तर्कों के साथ मौजूद है।
👉🏻 The Girlfriend कोई प्रेम कहानी नहीं, बल्कि प्रेम के नाम पर होने वाले भावनात्मक शोषण और नियंत्रण की संवेदनशील पड़ताल है। यह दर्शक को आत्ममंथन के लिए मजबूर करती है कि क्या हम वास्तव में प्रेम करना जानते हैं, या केवल अधिकार जताना।
👉🏻 यह फ़िल्म हमें यह समझने का अवसर देती है कि सच्चा प्रेम किसी को बाँधता नहीं, बल्कि मुक्त करता है। और जब प्रेम स्वतंत्रता छीनने लगे, तो वह प्रेम नहीं—डर और असुरक्षा का दूसरा नाम होता है।
🌟 प्रेम पंख देता है, पिंजरा नहीं - आचार्य प्रशान्त
👉🏻अरावली भारत की सबसे प्राचीन पर्वतमालाओं में से एक है। 👉🏻यह गुजरात → राजस्थान → हरियाणा → दिल्ली तक लगभग 800 किमी लंबी श्रृंखला में फैली हुई है। 👉🏻थार मरुस्थल और पूर्वी मैदानों के बीच यह एक प्राकृतिक विभाजक का काम करती है।
🔹 2. भौगोलिक महत्व
👉🏻अरावली प्रायद्वीपीय प्लेट का हिस्सा है, जो लाखों वर्ष पहले का पुराना पर्वत तंत्र है। 👉🏻यह थल भूपृष्ठ के ऊँचे-नीचे भूभाग को जोड़ती है और स्थानीय जलवायु को प्रभावित करती है। 👉🏻अरावली से अनेक नदियाँ निकलती हैं — जैसे बनास, साबरमती, लूनी, जो क्षेत्र की कृषि और जीवन-चर्या में महत्त्वपूर्ण हैं। 👉🏻यह पर्वतमाला राजस्थान के पूर्व और पश्चिम भू-भाग को अलग करती है और थार मरुस्थल के फैलाव को रोकने में मदद करती है।
🔹 3. पर्यावरणीय महत्व
🌿 (a) जलवायु और वायु संतुलन
👉🏻अरावली क्षेत्र की हरियाली स्थानीय तापमान को नियंत्रित करती है और गर्म हवाओं की तीव्रता को कम करती है, जिससे आसपास के इलाकों में अत्यधिक उष्मा और सूखे का जोखिम घटता है। 👉🏻यह हवा में मौजूद धूल और प्रदूषण को रोकने में भी मदद करती है।
💧 (b) भूजल पुनर्भरण
👉🏻अरावली की भू-आकृतियाँ (fractured rocks) वर्षा के पानी को ज़मीन के भीतर भूजल में परिवर्तित करती हैं। 👉🏻विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रति हेक्टेयर लाखों लीटर भूजल पुनर्भरण का स्रोत है, जो नलों, कुओं और बोरवेल के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है।
🐾 (c) जैव विविधता (Biodiversity)
अरावली में विविध प्रकार के पारिस्थितिकी तंत्र पाए जाते हैं जिनमें शामिल हैं:
👉🏻 वनस्पति: कठिन जलवायु के अनुकूल झाड़ियाँ, शुष्क पर्णपाती वन, स्थानीय औषधीय पौधे।
👉🏻 वन्यजीव: बड़े मांसाहारी: तेंदुआ, मध्यम आकार के: सियार, नीलगाय, लोमड़ी, पक्षी प्रजातियाँ और छोटे प्राणी भी यहाँ पाए जाते हैं।
🪨 (d) मिट्टी, भू-सतह एवं भूमि संरक्षण
👉🏻यह पर्वतमाला मृदा अपरदन (soil erosion) को रोकती है और वर्षा जल को स्थिर करती है। 👉🏻अरावली की हरियाली धूल के तूफानों को रोककर पर्यावरण संतुलन बनाये रखती है।
🔹 4. ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व
👉🏻अरावली क्षेत्र राजपूत राजाओं की वीर गाथाओं का केंद्र रहा है; चित्तौड़गढ़, कुम्भलगढ़, आमेर किले इसी पर्वतमाला में स्थित हैं।
👉🏻यह क्षेत्र खेल, लोकगीत, लोकनृत्य और जीवनशैली में समृद्ध रहा है।
👉🏻जनजातीय समुदाय जैसे भील, मीणा, गरासिया की जीवन शैली अरावली से जुड़ी रही है।
🔹 5. वर्तमान चुनौतियाँ, सुप्रीम कोर्ट के आदेश एवं पूँजीवादी लालच की भूमिका
⚖️ (क) सुप्रीम कोर्ट का हालिया आदेश (संक्षेप में)
👉🏻सुप्रीम कोर्ट द्वारा अरावली की नई परिभाषा (100 मीटर ऊँचाई मानदंड) को स्वीकार किया गया है। 👉🏻इससे अरावली क्षेत्र का बड़ा हिस्सा कानूनी संरक्षण से बाहर हो जाने की आशंका है। 👉🏻विशेषज्ञों के अनुसार इससे खनन, निर्माण और रियल एस्टेट गतिविधियाँ बढ़ सकती हैं।
🏗️ (ख) पूँजीवादी लालच कैसे जिम्मेदार है
👉🏻अरावली क्षेत्र में खनिज संसाधन, पत्थर, बजरी और भूमि अत्यधिक लाभदायक हैं।
👉🏻बड़े खनन माफिया, रियल एस्टेट कंपनियाँ और औद्योगिक समूह अधिक मुनाफे के लिए:
👉🏻पहाड़ियों को समतल कर रहे हैं
👉🏻जंगलों को “बेकार भूमि” घोषित करवा रहे हैं
👉🏻पर्यावरणीय नियमों को कमजोर करवाने का दबाव बना रहे हैं
🪓 (ग) अवैध खनन और निजी लाभ
👉🏻 अवैध खनन से: पहाड़ खोखले हो चुके हैं, जलस्रोत सूख रहे हैं, आसपास के गाँवों में जल संकट बढ़ा है। 👉🏻यह सब निजी मुनाफे के लिए किया जा रहा है, जबकि इसका नुकसान समाज और भविष्य की पीढ़ियों को उठाना पड़ रहा है।
🏙️ (घ) शहरीकरण और रियल एस्टेट दबाव
👉🏻 दिल्ली-एनसीआर, गुरुग्राम, फरीदाबाद जैसे क्षेत्रों में: अरावली भूमि को लक्ज़री हाउसिंग, फार्महाउस और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स में बदला जा रहा है।
👉🏻 पूँजीवादी सोच के तहत प्रकृति को: “संसाधन”, “भूमि बैंक”, “निवेश अवसर” के रूप में देखा जा रहा है, जीवन-सहायक तंत्र के रूप में नहीं।
🌍 (ङ) पर्यावरणीय लागत बनाम आर्थिक लाभ
👉🏻 अल्पकालिक आर्थिक लाभ के बदले: दीर्घकालिक पर्यावरणीय क्षति हो रही है। भूजल स्तर गिर रहा है, जैव विविधता नष्ट हो रही है।
👉🏻 यह पूँजीवाद की मूल समस्या को दर्शाता है, जहाँ: लाभ निजी होता है, नुकसान सार्वजनिक (Public Loss) होता है
📢 (च) नीति निर्माण पर प्रभाव
👉🏻 बड़े उद्योग समूह नीति-निर्माण और नियमों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।
👉🏻 अरावली की परिभाषा को संकुचित करना भी इसी दबाव का परिणाम माना जा रहा है, ताकि: अधिक भूमि अपने स्वार्थ पूर्ति के लिए खोली जा सके, कानूनी बाधाएँ कम हों।
👉🏻 अरावली के विनाश में केवल प्राकृतिक कारण या जनसंख्या दबाव ही नहीं, बल्कि पूँजीवादी लालच एक केंद्रीय कारण है। जब तक विकास को पर्यावरण-केंद्रित और समाज-केंद्रित नहीं बनाया जाएगा, तब तक अरावली जैसी प्राचीन पर्वतमालाएँ मुनाफे की भेंट चढ़ती रहेंगी।
👉🏻 हाल ही में एक web series देखी "ग्राम चिकित्सालय"।
☘️ यह ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य संबंधित समस्या को उजागर करती है। जहां गाँव में PHC होती है वहां पर कोई Doctor जाना नहीं चाहते हैं। वहाँ posting को as a punishment posting consider किया जाता है। तभी वहां पर एक ऐसे डॉक्टर की posting होती है, जो शहर में पला बड़ा होता है तथा खुद का अस्पताल होता है। लेकिन वह लोगों के बीच में जाकर के कुछ करना चाहता है, इसलिए join कर लेता है।
वह जब वहां पहुंचता है तो देखता हैं की जो PHC है वह ना तो व्यवस्थित रुप से संचालित होती है और ना ही वहां पर कोई कर्मचारी नियमित रुप से कार्य करता है। वह सोचता है कि उसके पास अच्छी शिक्षा है, डिग्री है और सरकार ने उसे नियुक्त किया है तो मरीज उसके पास आ ही जायेंगे।
लेकिन होता बिल्कुल उल्टा है गांव में एक झोलाछाप डॉक्टर होता है सारे मरीज वहीं जा रहे होते हैं।
इससे यह पता चलता है कि वास्तविक धर्म जब लोगों तक नहीं पहुंच पाता है तो आम आदमी लोकधर्म की तरफ ही दौड़ेगा ।
👉🏻 मैं पिछले कुछ सालों से शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय हूं । इस दौरान मैंने एक गहरी बात अनुभव की है — आर्थिक समृद्धि और शिक्षा के बीच गहरा संबंध है। एक अमीर परिवार जब अपने बच्चे को स्कूल भेजता है और एक गरीब परिवार भी वही करता है, तो उनके बीच एक "अदृश्य खाई" बन जाती है ।
✒️ यह खाई कई स्तरों पर देखी जा सकती है — जैसे विद्यालय का चयन, पढ़ाई की गुणवत्ता, संसाधनों की उपलब्धता, और पाठ्यक्रम । मेरा आज का अवलोकन विशेष रूप से पाठ्यक्रम से जुड़ा हुआ है।
✒️ मैंने देखा है कि कक्षा 8 तक अधिकांश निजी विद्यालय अपनी पसंद की किताबें और सामग्री चुनते हैं । ये किताबें बच्चों के मानसिक विकास को व्यापक बनाती हैं, उन्हें वैश्विक दृष्टिकोण देती हैं । इन विद्यालयों की फीस ₹2 से ₹5 लाख सालाना तक होती है — जिसे एक मध्यमवर्गीय या निम्नवर्गीय परिवार वहन नहीं कर सकता।
✒️ वहीं दूसरी ओर, सरकारी या सामान्य निजी विद्यालयों में पाठ्यक्रम का स्तर बहुत ही सीमित होता है । इसमें वो गहराई नहीं होती जो एक बच्चे को समग्र रूप से विकसित कर सके। कई बार तो सरकार द्वारा सिलेबस में कटौती भी कर दी जाती है ।
✒️ जब ऐसे अलग-अलग पृष्ठभूमि वाले छात्र विद्यालय की शिक्षा पूरी करके निकलते हैं, तो दोनों के बीच जमीन-आसमान का अंतर होता है । एक बच्चा हर विषय पर गहरी समझ रखता है, जबकि दूसरा केवल सतही जानकारी के साथ ही बाहर आता है।
✒️ गरीब परिवारों के लिए गरीबी से निकलने का एकमात्र रास्ता होता है — सरकारी नौकरी की तैयारी । लेकिन जिस कमजोर पाठ्यक्रम से उन्होंने पढ़ाई की होती है, उसी को दोबारा पढ़ने में उन्हें 3–4 साल लग जाते हैं — और सफलता की कोई गारंटी भी नहीं होती ।महंगी कोचिंग, गाइड्स, मटेरियल और टेस्ट सीरीज — ये सब उनके लिए बहुत बड़ी चुनौती होती है । कई बार वह व्यवस्था कर भी लें, तो भी वह कुछ अपने जीवन की गुणवत्ता सुधार पाये, यह आवश्यक नहीं।
✒️इसके विपरीत, जो छात्र पहले से ही समृद्ध विद्यालयों से पढ़कर आए होते हैं, वे बिना खास तैयारी के भी प्रतियोगी परीक्षाओं को पास कर लेते हैं । उनकी विद्यालयी शिक्षा ही इतनी मजबूत होती है कि उन्हें अलग से बहुत मेहनत की आवश्यकता नहीं पड़ती।
✒️ यह सब देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि प्रतियोगी परीक्षाओं का डिज़ाइन ही ऐसा किया गया है कि एक गरीब या मध्यमवर्गीय छात्र आसानी से सफल न हो पाए । यह एक प्रकार का शैक्षिक अन्याय है — जो अक्सर नजरों से ओझल रह जाता है।
✒️ अंततः, जो गरीब बच्चा दिन-रात पढ़ाई करता है, उसे बस किसी निम्न स्तर की नौकरी देकर चुप करा दिया जाता है — ताकि वह सवाल न पूछे। 😐😐😐😐😐
🔸️ एक पुलिस अधिकारी और कुछ सिपाही उत्तर प्रदेश की बरेली जेल में हथकड़ियों और बेड़ियों से जकड़े एक तेजस्वी युवक को समझा रहे थे: - "कुँअर साहब, हमने आपको बहुत समय दे दिया है। अच्छा है कि अब आप अपने क्रांतिकारी साथियों के नाम बता दें। सरकार न केवल आपको छोड़ देगी, बल्कि इनाम भी देगी। आपका शेष जीवन सुख से बीतेगा।"
👉🏻 इस युवक का नाम था प्रताप सिंह बारहठ।
🌟 वे राजस्थान की शाहपुरा रियासत के प्रख्यात क्रांतिकारी केसरी सिंह बारहठ के पुत्र थे।
☘️ उनके चाचा जोरावर सिंह भी क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय थे। पूरा परिवार रासबिहारी बोस की योजना के तहत देश की स्वतंत्रता के लिए समर्पित था।
🔸️ पुलिस अधिकारी की बात सुनकर प्रताप सिंह मुस्कराए और बोले: "मौत भी मेरी ज़ुबान नहीं खुलवा सकती। हम सरकारी फैक्ट्री में ढले सामान्य मशीन के पुर्जे नहीं हैं। यदि आप सोचते हैं कि मैं अपने साथियों को फांसी दिलाकर खुद बच जाऊँगा, तो आपकी आशा व्यर्थ है। हम तो सरकार की जड़ उखाड़कर ही दम लेंगे।" ⚔️
🍁 पुलिस अधिकारी ने एक और प्रस्ताव दिया: "यदि आप नाम बता देंगे, तो हम आपके आजीवन कालेपानी की सजा पाए पिता को भी रिहा कर देंगे और चाचा के खिलाफ चल रहे मुकदमे भी हटा लेंगे। सोचिए, आपकी मां और परिवार को कितना सुख मिलेगा?"
🌟 प्रताप सिंह ने दृढ़ता से कहा: "वीर की मुक्ति समरभूमि में होती है। यदि आप सचमुच मुझे मुक्त करना चाहते हैं, तो मेरे हाथ में तलवार दीजिए। फिर देखिए मेरी तलवार कैसे अंग्रेज अफसरों को चीरती है।
मेरी मां अकेली दुख झेल रही हैं, पर अगर मैंने साथियों के नाम बताए तो और भी मांओं को यह पीड़ा सहनी पड़ेगी।" ⚔️
--- 🔸️लार्ड हार्डिंग बमकांड🔸️ प्रताप सिंह, लार्ड हार्डिंग की शोभायात्रा पर फेंके गए बमकांड में पकड़े गए थे। उन्हें पहले आजीवन कालेपानी की सजा दी गई, पर बाद में यह मृत्युदंड में बदल दी गई।
उन्हें फाँसी के लिए बरेली जेल लाया गया, जहाँ पुलिस अधिकारियों ने उन्हें साथियों के नाम उगलवाने के लिए दबाव डाला।
---
📌 अत्याचार की हदें पार😐जब वे नहीं टूटे, तो उन पर अमानवीय यातनाएं की गईं: 👉🏻 बर्फ की सिल्ली पर लिटाया गया 👉🏻 मिर्चों की धूनी आँखों और नाक में दी गई 👉🏻 कोड़ों से बेहोश होने तक मारा गया 👉🏻 भूखा-प्यासा रखा गया 👉🏻 शरीर की खाल जलाकर उसमें नमक भरा गया
पर उन्होंने फिर भी मुँह नहीं खोला — आन-बान और सम्मान के प्रतीक बनकर अडिग रहे।
वीरगति🙏🏻 लेकिन एक 25 वर्षीय शरीर इन यातनाओं को कब तक सहता? 27 मई, 1918 को प्रताप सिंह वीरगति को प्राप्त हो गये।
इसमें जिन कहानियों का संकलन है वह एक-एक कहानी अपने आप में अनूठी है। मेरा जी तो कर रहा है सभी कहानियों को ही यहां लिख दू।
😇पर पता है यहां लिख दूंगा तो पढ़ोगे नहीं, इसीलिए इन्हीं कहानियों के कुछ अंश लिख रहा हूं। जिनको पढ करके आपको जिज्ञासा हो और आप पूरी कहानियों तक पहुंचे। 😅😅
📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖
☘️ गुलियाना का एक खत ☘️
गुलियाना ने अपनी कमर की ओर संकेत कर मुझसे कहा - "यहां चाबियों के गुच्छे की तरह मुझे कई बार तारे बंधे हुए महसूस होते हैं।" मैं गुलियाना के चेहरे की ओर देखने लगी। तिजोरियों की चाबियों को चांदी के छल्लों में पिरोकर बना गुच्छा उसने अपनी कमर में बांधने से इनकार कर दिया था। और उसके जगह में तारों के गुच्छे अपनी कमर में बांधना चाहती थी। गुलियाना के चेहरे की ओर देखती हुई मैं सोचने लगी कि इस धरती पर वे घर कब बनेंगे जिनके दरवाजे तारों की चाबियां से खुलते हों।....... जिंदगी के घर से जाते हुए उसने जिंदगी को एक खत लिखा है और उसने खत में जिंदगी से, सबसे पहला सवाल पूछा है कि आखिर इस धरती में उसे फूल को आने का अधिकार क्यों नहीं दिया जाता जिसका नाम औरत हो? और साथ ही उसने पूछा की सभ्यता का वह युग कब आएगा जब औरत के मरजी के बिना कोई मर्द किसी औरत के जिस्म को हाथ नहीं लगा सकेगा? और तीसरा सवाल उसने यह पूछा कि जिस घर का दरवाजा खोलने के लिए उसने अपनी कमर में तारों के गुच्छे को चाबियों के गुच्छे की तरह बांधा था, उस घर का दरवाजा कहां है?
🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️
☘️ करमांवाली ☘️
....... आंसुओ से भीगी करमांवाली ने मेरा हाथ पकड़ लिया। "बीवी, तू मेरी मन की बात समझ ले। मुझसे उतार नहीं पहना जाता - मेरी गोटा-किनारेवाली शलवारें, मेरी तारों जङी चुनरियां और मेरी सिलमोंवाली कमीजे - है सब उसका 'उतार' (पहले पहने हुए कपड़े) थे। और मेरे कपड़ों की भांति मेरा घर वाला भी....." "अब बीवी, मैं सारे कपड़े उतार आई हूं। अपना घर वाला भी। यहां मामा-मामी के पास आ गई हूं। इनका घर लीपती हूं, मेज धोती हूं। और मैंने एक मशीन भी रख छोड़ी है। चार कपड़े सी लेती हूं, और रोटी खा लेती हूं। भले ही खद्दर जुड़े, चाहे लट्ठा। मैं किसी का 'उतार' नहीं पहनती।
🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️
☘️ अमाकड़ी ☘️
..... किशोर ने मोमबत्तियां की रोशनी में अपनी बीवी के मुंह की ओर देखा। उसकी बीवी के गोरे-गोरे मुख पर एक मुस्कान थी। फिर किशोर ने मोमबत्तियों के मुख की ओर देखा, मोमबत्तियों के गालों पर पिघलती मोम के आंसू बह रहे थे। और किशोर का दिल किया, कि वह अपनी सारी की सारी बीवी को झकझोर कर कहे कि यह देख इन मोमबत्तियों के आंसू तुम्हारी एक मुस्कान का मूल्य चूका रहे हैं।किशोर ने अपनी जुबान दांतों के नीचे दबा ली। उसे लगा कि अभी उसकी बीवी खिलखिला कर हंस उठेगी और कहेंगी, "आज इस हवेली की बैठक को देखा। अगर एक कोने में रेडियो-ग्राम पड़ा है तो दूसरे कोने में रेफ्रिजरेटर रखा हुआ है। तीसरे कोने में कपड़ों से भरे-पूरे ट्रंक पड़े हैं और चौथा कोना पलंगो और अलमारियों से भरा हुआ है। और हवेली के दरवाजे पर खड़ी मोटर - ये सब चीज तुम्हारे दिल का मूल्य चूका रही है।"
🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️
☘️ एक रुमाल, एक अंगूठी, एक छलनी ☘️
........मोती ने जो कदम उठाया था, उससे भला उसका क्या बनता-सँवरता? और रूपो का भी क्या सँवरता? एक दिन रुपो उसके पाँवो में गिरकर रोई, 'तुम्हें मेरी कसम है जो तुम अपनी यह हालत बनाओ। भुने हुए बीज अब उगेंगे नहीं।' उसी दिन रुपो ने उसकी भट्टी तोड़ डाली। कड़ाई उससे उठाई नहीं गई सो वह छलनी ही उठा लाई और उसे हुक्म दे आई कि अपने गांव वापस लौट जाए।मोती न उसकी कसम लौटा सका न उसका हुक्म टाल सका। अपनी अंगूठी, एक निशानी, उसने रूपो को दी और दूसरे दिन पता नहीं कहां चला गया। मोती भटियारा क्या बना, रूपो को सारी उम्र के लिए भटियारिन बना गया। इसने उसकी छलनी और अंगूठी अपने पास रख ली। अंगूठी पर मोती का नाम लिखा हुआ था। कहां छिपाती! चूल्हा तोड़कर उसने दोनों चीज मिट्टी के नीचे दबा दी। और ऊपर नया चूल्हा बना दिया। हम अभागिनें, जो किसी से प्यार करती है, जन्म से भटियारिनें हो जाती हैं। दिल की भट्ठी पर अपने सांसों को दानों की तरह भूनती हैं और यादों की छलनी में से वर्षों रेत छानती है।"
🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️
☘️ धुंआ और लाट ☘️
"यही तो दुनिया वालों की बुरी आदत है, कि वे आदमी का आदमी के साथ रिश्ता जानना चाहते हैं। वे आदमी को पीछे देखते हैं, रिश्ते को पहले। क्या औरत का मुंह औरत का नहीं होता? क्या वह जरूर मां का मुंह होना चाहिए? बहन का मुंह होना चाहिए? बेटी का मुंह होना चाहिए? बीवी का मुंह होना चाहिए? औरत का मुंह औरत का क्यों नहीं रह सकता।"
🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️
☘️ लाल मिर्च ☘️
गोपाल के उम्र की सीढी के अठारवें डंडे पर पांव रखा हुआ था, और गोपाल को लगाकर इस डंडे पर जवानी के एहसास का एक कुत्ता दुबक कर बैठा हुआ था, और आज उसने अचानक पागलों की तरह उसकी टांग में से मांस नाच लिया था- उस दिन से गोपाल का मन अपने जख्म पर लगाने के लिए लाल मिर्च जैसी लड़की ढूंढने लग गया था।....... उसे लगा, वह बुड्ढा हो गया था,लाल गोपाल दास। और उसकी पत्नी अपने घुटनों का दबाती हुई कह रही थी, 'लड़की इतनी बड़ी हो गई है, कोई लड़का देखो न। कहां छुपाऊं इस आंचल की आग को? ऐसा रूप... ऊपर से जमाना बुरा है....।' और फिर उसके दरवाजे पर बारात आ गई... उसके दामाद ने उसके पांव छुए.. उसकी बेटी लाल सुर्ख कपड़ों में लिपटी हुई थी... वह डोली के पास जाकर उसे प्यार देने लगा... उसकी बेटी... बिल्कुल लाल मिर्च...। लाल मिर्च... लड़की ...लाल मिर्च... और गोपाल को लगा,आज... आज किसी ने मिर्चें उठाकर उसकी आंखों में डाल दी थी।
🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️
☘️ बू ☘️
" गुलेरी मर गई " " गुलेरी मर गई " "उसने तुम्हारे विवाह की बात सुनी और मिट्टी का तेल अपने ऊपर डालकर जल मरी"।....मानक को चाहे कुछ समझ में नहीं आया था पर वह बात बड़ी थी। मां ने नहीं बहू को हौसला दिया था कि तू हिम्मत से यह बेला काट ले। जिस दिन मैं तुम्हारा बच्चा मानक की झोली में रखूंगी तो मानक के सभी सुधियाँ पलट आएंगी। फिर वह बेला भी कट गई। मानक के घर में बेटा पैदा हुआ। मां ने बालक को नहलाया-धुलाया, कोमल रेशमी कपड़े में लपेटकर मानक की झोली में डाल दिया।मानक झोली में पड़े हुए बच्चे को देखता रहा, फिर जैसे चीख उठा, "इसको दूर करो, दूर करो, मुझे इसमें मिट्टी के तेल की बू आती है।"
🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️
☘️ उधड़ी हुई कहानियां ☘️
"मैं कितनी देर केतकी के चेहरे की तरफ देखती रही। कार्तिक के वह कहानी जो किसी गुनिए ने अपने निर्दयी हाथों से उधेड़ दी थी, केतकी अपने मन के सुच्चे रेशमी धागे से उस उधड़ी हुई कहानी को फिर से सी रही थी। यह एक कहानी की बात है। और मुझे भी मालूम नहीं, आपको भी मालूम नहीं कि दुनिया के ये 'गुनिए' दुनिया की कितनी कहानियों को रोज उधड़ते हैं ।
🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️
☘️ एक दुखान्त ☘️
.....और सुकुमार को लगाकर उसमें और सार्त्र में एक फर्क था- सार्त्र के पास अपनी स्वतंत्रता को आकार दे सकने के लिए दो हथियार थे- एक उसकी कलम और दूसरा उसकी दोस्त औरत। पर उसके अपने पास कोई भी हथियार नहीं था, और यही फर्क उसका दुखान्त था..... 'भयानक दुखान्त' सुकुमार रो नहीं सकता था इसलिए हंस दिया। और उसका मन हुआ कि वह इस भयानक दुखान्त से एक भयानक मजाक करें.......
🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️
क्यों कुछ पढने की इच्छा जागृत हुई या नहीं😄😄
📖📖 और सबसे बेहतरीन कहानी 'पांच बहनें
👉🏻 पांच बहनें, औरत जात के उसे गूँगे दर्द की कहानी है, जिसे यह गूँगापन चाहे मजहब और इख़लाख की पुरातन कीमतों को स्वीकार करने से नसीब हुआ है, और चाहे उन कीमतों को अस्वीकार करने में असफल यत्न से।🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
🔴 1. 2023 में हमने 1.5°C की सीमा पार कर दी थी! 👉 वैज्ञानिकों के मुताबिक, जून 2023 में पहली बार वैश्विक तापमान औसत से 1.5°C अधिक हो गया था। यह दर्शाता है कि भविष्य में यह सीमा बार-बार पार होगी, जिससे अप्रत्याशित जलवायु घटनाएँ होंगी।
🔴 2. 2025 तक पृथ्वी पर CO₂ का स्तर पिछले 20 लाख वर्षों में सबसे अधिक होगा! 👉 वैज्ञानिकों के अनुसार, मई 2025 तक CO₂ स्तर 429.6 पीपीएम तक पहुँच जाएगा। 🌫️ यह औद्योगिक क्रांति से पहले के स्तर से 50% अधिक है और जलवायु परिवर्तन को अनियंत्रित करने वाला प्रमुख कारक बन सकता है।
🔴 3. 2024 में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी दर्ज की गई! 👉 पिछले 100 वर्षों में 2024 अब तक का सबसे गर्म साल था। इस साल तापमान 2.2°F (1.2°C) औसत से अधिक रहा। 🌡️
🔴 4. समुद्र का जलस्तर 2025 तक 30 सेमी तक बढ़ सकता है! 👉 आर्कटिक की बर्फ़ 70% कम हो चुकी है, जिससे समुद्री जलस्तर हर साल बढ़ रहा है। 🌊 इससे तटीय शहरों में बाढ़ और विस्थापन बढ़ेगा।
🔴 5. दुनिया के 70% जंगल खतरे में! 👉 अमेज़न वर्षावन, जिसे दुनिया का "फेफड़ा" कहा जाता है, हर मिनट एक फुटबॉल मैदान जितना नष्ट हो रहा है।
🌳 अगर यह सिलसिला जारी रहा, तो यह कार्बन अवशोषित करने की जगह छोड़कर स्वयं CO₂ छोड़ने लगेगा।
🔴 6. पिघलते ग्लेशियर से 1.6 अरब लोगों को जल संकट! 👉 हिमालय, एंडीज और आल्प्स ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे 1.6 अरब लोगों की जल आपूर्ति संकट में है। 🚱
🔴 7. सबसे ज़्यादा ग्रीनहाउस गैसें कौन उत्सर्जित कर रहा है? 📌 चीन – 30% 📌 अमेरिका – 14% 📌 भारत – 7% 📌 यूरोप – 9% 📌 बाकी दुनिया – 40%
👉 विकसित देश सबसे अधिक उत्सर्जन कर रहे हैं, लेकिन जलवायु आपदा का सबसे अधिक असर गरीब और विकासशील देशों पर हो रहा है।
🔴 8. सबसे ज़्यादा खतरे में कौन हैं? ❌ भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश – चक्रवात, बाढ़ और गर्मी की लहरें बढ़ रही हैं। ❌ मालदीव और इंडोनेशिया – समुद्र में डूबने की कगार पर। ❌ अफ्रीका – 40% कृषि भूमि बंजर हो रही है।
🚨 अब भी कुछ नहीं किया, तो...?
👉 जलवायु शरणार्थियों की संख्या 2050 तक 1 अरब हो सकती है! 👉 2050 तक पानी की कमी से 5 अरब लोग प्रभावित हो सकते हैं! 👉 21वीं सदी के अंत तक कई शहरों का अस्तित्व समाप्त हो सकता है!
⚠️ डाटा पर सावधानी: यह डेटा वर्तमान वैज्ञानिक शोध, रिपोर्ट्स और अनुमानों पर आधारित है, जो समय के साथ बदल सकते हैं। जलवायु परिवर्तन एक जटिल और गतिशील प्रक्रिया है, और नए शोध, नीतियां, और वैश्विक घटनाएँ इन संख्याओं को प्रभावित कर सकती हैं। COP सम्मेलनों, सरकारी नीतियों, और वैज्ञानिक प्रगति पर लगातार नजर रखना आवश्यक है।
👉 नवीनतम और सटीक जानकारी के लिए आधिकारिक स्रोतों और वैज्ञानिक रिपोर्ट्स को देखें |
पूनम चन्द यादव
अवलोकन : The Girlfriend, movie
👉🏻 हाल ही में एक movie देखी The Girlfriend, यह प्रेम की उस प्रचलित परिभाषा पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है, जिसे हम अपने जीवन में, समाज में देखते हैं ।
👉🏻 यह फ़िल्म दिखाती है कि व्यवहार में प्रेम के नाम पर स्वतंत्रता को सीमित किया जा रहा है, अधिकार जताया जाता है और नियंत्रण को सामान्य बना दिया जाता है।
👉🏻 फ़िल्म की केंद्रीय पात्र एक ऐसी युवती है जो पितृसत्तात्मक सोच के दो छोरों के बीच फँसी हुई दिखाई देती है। एक ओर उसका पिता है, जो परंपरा, अनुशासन और सामाजिक मर्यादाओं के नाम पर उसकी स्वतंत्रता को नियंत्रित करता है; दूसरी ओर उसका कॉलेज का मित्र/प्रेमी है, जो आधुनिक भाषा और युवा सोच के आवरण में वही नियंत्रण, वही अधिकार-बोध और वही पितृसत्तात्मक दृष्टि लिए हुए है।
👉🏻 हालाँकि दोनों के बीच पीढ़ी का अंतर, भाषा और अभिव्यक्ति का फर्क साफ दिखाई देता है, लेकिन फ़िल्म बहुत स्पष्टता से यह स्थापित करती है कि केंद्र दोनों का एक ही है—स्त्री की स्वतंत्रता पर अधिकार। फर्क केवल इतना है कि पिता इसे “संस्कार” कहता है और प्रेमी इसे “प्यार”।
👉🏻 इन दोनों के बीच पिसती हुई नायिका का जीवन, उसकी इच्छाएँ, उसके निर्णय और उसकी आज़ादी लगातार सीमित होती जाती है। फ़िल्म यह उजागर करती है कि पितृसत्ता केवल पुरानी पीढ़ी की समस्या नहीं है; वह आधुनिक रिश्तों में भी नए रूप, नई भाषा और नए तर्कों के साथ मौजूद है।
👉🏻 The Girlfriend कोई प्रेम कहानी नहीं, बल्कि प्रेम के नाम पर होने वाले भावनात्मक शोषण और नियंत्रण की संवेदनशील पड़ताल है। यह दर्शक को आत्ममंथन के लिए मजबूर करती है कि क्या हम वास्तव में प्रेम करना जानते हैं, या केवल अधिकार जताना।
👉🏻 यह फ़िल्म हमें यह समझने का अवसर देती है कि सच्चा प्रेम किसी को बाँधता नहीं, बल्कि मुक्त करता है। और जब प्रेम स्वतंत्रता छीनने लगे, तो वह प्रेम नहीं—डर और असुरक्षा का दूसरा नाम होता है।
🌟 प्रेम पंख देता है, पिंजरा नहीं - आचार्य प्रशान्त
2 weeks ago | [YT] | 1
View 0 replies
पूनम चन्द यादव
I just hyped this amazing creator @BodhBhoomi
3 weeks ago | [YT] | 1
View 0 replies
पूनम चन्द यादव
अरावली पर्वतमाला
🔹 1. सामान्य परिचय
👉🏻अरावली भारत की सबसे प्राचीन पर्वतमालाओं में से एक है।
👉🏻यह गुजरात → राजस्थान → हरियाणा → दिल्ली तक लगभग 800 किमी लंबी श्रृंखला में फैली हुई है।
👉🏻थार मरुस्थल और पूर्वी मैदानों के बीच यह एक प्राकृतिक विभाजक का काम करती है।
🔹 2. भौगोलिक महत्व
👉🏻अरावली प्रायद्वीपीय प्लेट का हिस्सा है, जो लाखों वर्ष पहले का पुराना पर्वत तंत्र है।
👉🏻यह थल भूपृष्ठ के ऊँचे-नीचे भूभाग को जोड़ती है और स्थानीय जलवायु को प्रभावित करती है।
👉🏻अरावली से अनेक नदियाँ निकलती हैं — जैसे बनास, साबरमती, लूनी, जो क्षेत्र की कृषि और जीवन-चर्या में महत्त्वपूर्ण हैं।
👉🏻यह पर्वतमाला राजस्थान के पूर्व और पश्चिम भू-भाग को अलग करती है और थार मरुस्थल के फैलाव को रोकने में मदद करती है।
🔹 3. पर्यावरणीय महत्व
🌿 (a) जलवायु और वायु संतुलन
👉🏻अरावली क्षेत्र की हरियाली स्थानीय तापमान को नियंत्रित करती है और गर्म हवाओं की तीव्रता को कम करती है, जिससे आसपास के इलाकों में अत्यधिक उष्मा और सूखे का जोखिम घटता है।
👉🏻यह हवा में मौजूद धूल और प्रदूषण को रोकने में भी मदद करती है।
💧 (b) भूजल पुनर्भरण
👉🏻अरावली की भू-आकृतियाँ (fractured rocks) वर्षा के पानी को ज़मीन के भीतर भूजल में परिवर्तित करती हैं।
👉🏻विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रति हेक्टेयर लाखों लीटर भूजल पुनर्भरण का स्रोत है, जो नलों, कुओं और बोरवेल के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है।
🐾 (c) जैव विविधता (Biodiversity)
अरावली में विविध प्रकार के पारिस्थितिकी तंत्र पाए जाते हैं जिनमें शामिल हैं:
👉🏻 वनस्पति: कठिन जलवायु के अनुकूल झाड़ियाँ, शुष्क पर्णपाती वन, स्थानीय औषधीय पौधे।
👉🏻 वन्यजीव: बड़े मांसाहारी: तेंदुआ, मध्यम आकार के: सियार, नीलगाय, लोमड़ी, पक्षी प्रजातियाँ और छोटे प्राणी भी यहाँ पाए जाते हैं।
🪨 (d) मिट्टी, भू-सतह एवं भूमि संरक्षण
👉🏻यह पर्वतमाला मृदा अपरदन (soil erosion) को रोकती है और वर्षा जल को स्थिर करती है।
👉🏻अरावली की हरियाली धूल के तूफानों को रोककर पर्यावरण संतुलन बनाये रखती है।
🔹 4. ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व
👉🏻अरावली क्षेत्र राजपूत राजाओं की वीर गाथाओं का केंद्र रहा है; चित्तौड़गढ़, कुम्भलगढ़, आमेर किले इसी पर्वतमाला में स्थित हैं।
👉🏻यह क्षेत्र खेल, लोकगीत, लोकनृत्य और जीवनशैली में समृद्ध रहा है।
👉🏻जनजातीय समुदाय जैसे भील, मीणा, गरासिया की जीवन शैली अरावली से जुड़ी रही है।
🔹 5. वर्तमान चुनौतियाँ, सुप्रीम कोर्ट के आदेश एवं पूँजीवादी लालच की भूमिका
⚖️ (क) सुप्रीम कोर्ट का हालिया आदेश (संक्षेप में)
👉🏻सुप्रीम कोर्ट द्वारा अरावली की नई परिभाषा (100 मीटर ऊँचाई मानदंड) को स्वीकार किया गया है।
👉🏻इससे अरावली क्षेत्र का बड़ा हिस्सा कानूनी संरक्षण से बाहर हो जाने की आशंका है।
👉🏻विशेषज्ञों के अनुसार इससे खनन, निर्माण और रियल एस्टेट गतिविधियाँ बढ़ सकती हैं।
🏗️ (ख) पूँजीवादी लालच कैसे जिम्मेदार है
👉🏻अरावली क्षेत्र में खनिज संसाधन, पत्थर, बजरी और भूमि अत्यधिक लाभदायक हैं।
👉🏻बड़े खनन माफिया, रियल एस्टेट कंपनियाँ और औद्योगिक समूह अधिक मुनाफे के लिए:
👉🏻पहाड़ियों को समतल कर रहे हैं
👉🏻जंगलों को “बेकार भूमि” घोषित करवा रहे हैं
👉🏻पर्यावरणीय नियमों को कमजोर करवाने का दबाव बना रहे हैं
🪓 (ग) अवैध खनन और निजी लाभ
👉🏻 अवैध खनन से: पहाड़ खोखले हो चुके हैं, जलस्रोत सूख रहे हैं, आसपास के गाँवों में जल संकट बढ़ा है।
👉🏻यह सब निजी मुनाफे के लिए किया जा रहा है, जबकि इसका नुकसान समाज और भविष्य की पीढ़ियों को उठाना पड़ रहा है।
🏙️ (घ) शहरीकरण और रियल एस्टेट दबाव
👉🏻 दिल्ली-एनसीआर, गुरुग्राम, फरीदाबाद जैसे क्षेत्रों में: अरावली भूमि को लक्ज़री हाउसिंग, फार्महाउस और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स में बदला जा रहा है।
👉🏻 पूँजीवादी सोच के तहत प्रकृति को: “संसाधन”, “भूमि बैंक”, “निवेश अवसर” के रूप में देखा जा रहा है, जीवन-सहायक तंत्र के रूप में नहीं।
🌍 (ङ) पर्यावरणीय लागत बनाम आर्थिक लाभ
👉🏻 अल्पकालिक आर्थिक लाभ के बदले: दीर्घकालिक पर्यावरणीय क्षति हो रही है। भूजल स्तर गिर रहा है, जैव विविधता नष्ट हो रही है।
👉🏻 यह पूँजीवाद की मूल समस्या को दर्शाता है, जहाँ: लाभ निजी होता है, नुकसान सार्वजनिक (Public Loss) होता है
📢 (च) नीति निर्माण पर प्रभाव
👉🏻 बड़े उद्योग समूह नीति-निर्माण और नियमों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।
👉🏻 अरावली की परिभाषा को संकुचित करना भी इसी दबाव का परिणाम माना जा रहा है, ताकि: अधिक भूमि अपने स्वार्थ पूर्ति के लिए खोली जा सके, कानूनी बाधाएँ कम हों।
👉🏻 अरावली के विनाश में केवल प्राकृतिक कारण या जनसंख्या दबाव ही नहीं, बल्कि पूँजीवादी लालच एक केंद्रीय कारण है। जब तक विकास को पर्यावरण-केंद्रित और समाज-केंद्रित नहीं बनाया जाएगा, तब तक अरावली जैसी प्राचीन पर्वतमालाएँ मुनाफे की भेंट चढ़ती रहेंगी।
#SaveAravalli
4 weeks ago | [YT] | 2
View 0 replies
पूनम चन्द यादव
प्रत्येक त्यौहार का एक अर्थ है, एक सीख है।
जिससे हम अपना जीवन और अधिक सुंदर बना सकते हैं।
4 months ago | [YT] | 4
View 0 replies
पूनम चन्द यादव
अवलोकन
👉🏻 हाल ही में एक web series देखी "ग्राम चिकित्सालय"।
☘️ यह ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य संबंधित समस्या को उजागर करती है। जहां गाँव में PHC होती है वहां पर कोई Doctor जाना नहीं चाहते हैं। वहाँ posting को as a punishment posting consider किया जाता है।
तभी वहां पर एक ऐसे डॉक्टर की posting होती है, जो शहर में पला बड़ा होता है तथा खुद का अस्पताल होता है। लेकिन वह लोगों के बीच में जाकर के कुछ करना चाहता है, इसलिए join कर लेता है।
वह जब वहां पहुंचता है तो देखता हैं की जो PHC है वह ना तो व्यवस्थित रुप से संचालित होती है और ना ही वहां पर कोई कर्मचारी नियमित रुप से कार्य करता है। वह सोचता है कि उसके पास अच्छी शिक्षा है, डिग्री है और सरकार ने उसे नियुक्त किया है तो मरीज उसके पास आ ही जायेंगे।
लेकिन होता बिल्कुल उल्टा है गांव में एक झोलाछाप डॉक्टर होता है सारे मरीज वहीं जा रहे होते हैं।
इससे यह पता चलता है कि वास्तविक धर्म जब लोगों तक नहीं पहुंच पाता है तो आम आदमी लोकधर्म की तरफ ही दौड़ेगा ।
6 months ago | [YT] | 0
View 0 replies
पूनम चन्द यादव
शिक्षा प्रणाली में आर्थिक असमानता – एक अदृश्य खाई
👉🏻 मैं पिछले कुछ सालों से शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय हूं । इस दौरान मैंने एक गहरी बात अनुभव की है — आर्थिक समृद्धि और शिक्षा के बीच गहरा संबंध है। एक अमीर परिवार जब अपने बच्चे को स्कूल भेजता है और एक गरीब परिवार भी वही करता है, तो उनके बीच एक "अदृश्य खाई" बन जाती है ।
✒️ यह खाई कई स्तरों पर देखी जा सकती है — जैसे विद्यालय का चयन, पढ़ाई की गुणवत्ता, संसाधनों की उपलब्धता, और पाठ्यक्रम । मेरा आज का अवलोकन विशेष रूप से पाठ्यक्रम से जुड़ा हुआ है।
✒️ मैंने देखा है कि कक्षा 8 तक अधिकांश निजी विद्यालय अपनी पसंद की किताबें और सामग्री चुनते हैं । ये किताबें बच्चों के मानसिक विकास को व्यापक बनाती हैं, उन्हें वैश्विक दृष्टिकोण देती हैं । इन विद्यालयों की फीस ₹2 से ₹5 लाख सालाना तक होती है — जिसे एक मध्यमवर्गीय या निम्नवर्गीय परिवार वहन नहीं कर सकता।
✒️ वहीं दूसरी ओर, सरकारी या सामान्य निजी विद्यालयों में पाठ्यक्रम का स्तर बहुत ही सीमित होता है । इसमें वो गहराई नहीं होती जो एक बच्चे को समग्र रूप से विकसित कर सके। कई बार तो सरकार द्वारा सिलेबस में कटौती भी कर दी जाती है ।
✒️ जब ऐसे अलग-अलग पृष्ठभूमि वाले छात्र विद्यालय की शिक्षा पूरी करके निकलते हैं, तो दोनों के बीच जमीन-आसमान का अंतर होता है । एक बच्चा हर विषय पर गहरी समझ रखता है, जबकि दूसरा केवल सतही जानकारी के साथ ही बाहर आता है।
✒️ गरीब परिवारों के लिए गरीबी से निकलने का एकमात्र रास्ता होता है — सरकारी नौकरी की तैयारी । लेकिन जिस कमजोर पाठ्यक्रम से उन्होंने पढ़ाई की होती है, उसी को दोबारा पढ़ने में उन्हें 3–4 साल लग जाते हैं — और सफलता की कोई गारंटी भी नहीं होती ।महंगी कोचिंग, गाइड्स, मटेरियल और टेस्ट सीरीज — ये सब उनके लिए बहुत बड़ी चुनौती होती है । कई बार वह व्यवस्था कर भी लें, तो भी वह कुछ अपने जीवन की गुणवत्ता सुधार पाये, यह आवश्यक नहीं।
✒️इसके विपरीत, जो छात्र पहले से ही समृद्ध विद्यालयों से पढ़कर आए होते हैं, वे बिना खास तैयारी के भी प्रतियोगी परीक्षाओं को पास कर लेते हैं । उनकी विद्यालयी शिक्षा ही इतनी मजबूत होती है कि उन्हें अलग से बहुत मेहनत की आवश्यकता नहीं पड़ती।
✒️ यह सब देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि प्रतियोगी परीक्षाओं का डिज़ाइन ही ऐसा किया गया है कि एक गरीब या मध्यमवर्गीय छात्र आसानी से सफल न हो पाए । यह एक प्रकार का शैक्षिक अन्याय है — जो अक्सर नजरों से ओझल रह जाता है।
✒️ अंततः, जो गरीब बच्चा दिन-रात पढ़ाई करता है, उसे बस किसी निम्न स्तर की नौकरी देकर चुप करा दिया जाता है — ताकि वह सवाल न पूछे।
😐😐😐😐😐
6 months ago | [YT] | 7
View 1 reply
पूनम चन्द यादव
🔥 प्रताप सिंह बारहठ 🔥
(25 May 1893 – 27 May 1918)
🔸️ एक पुलिस अधिकारी और कुछ सिपाही उत्तर प्रदेश की बरेली जेल में हथकड़ियों और बेड़ियों से जकड़े एक तेजस्वी युवक को समझा रहे थे: - "कुँअर साहब, हमने आपको बहुत समय दे दिया है। अच्छा है कि अब आप अपने क्रांतिकारी साथियों के नाम बता दें। सरकार न केवल आपको छोड़ देगी, बल्कि इनाम भी देगी। आपका शेष जीवन सुख से बीतेगा।"
👉🏻 इस युवक का नाम था प्रताप सिंह बारहठ।
🌟 वे राजस्थान की शाहपुरा रियासत के प्रख्यात क्रांतिकारी केसरी सिंह बारहठ के पुत्र थे।
☘️ उनके चाचा जोरावर सिंह भी क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय थे। पूरा परिवार रासबिहारी बोस की योजना के तहत देश की स्वतंत्रता के लिए समर्पित था।
🔸️ पुलिस अधिकारी की बात सुनकर प्रताप सिंह मुस्कराए और बोले:
"मौत भी मेरी ज़ुबान नहीं खुलवा सकती। हम सरकारी फैक्ट्री में ढले सामान्य मशीन के पुर्जे नहीं हैं। यदि आप सोचते हैं कि मैं अपने साथियों को फांसी दिलाकर खुद बच जाऊँगा, तो आपकी आशा व्यर्थ है। हम तो सरकार की जड़ उखाड़कर ही दम लेंगे।" ⚔️
🍁 पुलिस अधिकारी ने एक और प्रस्ताव दिया:
"यदि आप नाम बता देंगे, तो हम आपके आजीवन कालेपानी की सजा पाए पिता को भी रिहा कर देंगे और चाचा के खिलाफ चल रहे मुकदमे भी हटा लेंगे। सोचिए, आपकी मां और परिवार को कितना सुख मिलेगा?"
🌟 प्रताप सिंह ने दृढ़ता से कहा:
"वीर की मुक्ति समरभूमि में होती है। यदि आप सचमुच मुझे मुक्त करना चाहते हैं, तो मेरे हाथ में तलवार दीजिए। फिर देखिए मेरी तलवार कैसे अंग्रेज अफसरों को चीरती है।
मेरी मां अकेली दुख झेल रही हैं, पर अगर मैंने साथियों के नाम बताए तो और भी मांओं को यह पीड़ा सहनी पड़ेगी।" ⚔️
---
🔸️लार्ड हार्डिंग बमकांड🔸️
प्रताप सिंह, लार्ड हार्डिंग की शोभायात्रा पर फेंके गए बमकांड में पकड़े गए थे।
उन्हें पहले आजीवन कालेपानी की सजा दी गई, पर बाद में यह मृत्युदंड में बदल दी गई।
उन्हें फाँसी के लिए बरेली जेल लाया गया, जहाँ पुलिस अधिकारियों ने उन्हें साथियों के नाम उगलवाने के लिए दबाव डाला।
---
📌 अत्याचार की हदें पार😐जब वे नहीं टूटे, तो उन पर अमानवीय यातनाएं की गईं:
👉🏻 बर्फ की सिल्ली पर लिटाया गया
👉🏻 मिर्चों की धूनी आँखों और नाक में दी गई
👉🏻 कोड़ों से बेहोश होने तक मारा गया
👉🏻 भूखा-प्यासा रखा गया
👉🏻 शरीर की खाल जलाकर उसमें नमक भरा गया
पर उन्होंने फिर भी मुँह नहीं खोला — आन-बान और सम्मान के प्रतीक बनकर अडिग रहे।
वीरगति🙏🏻
लेकिन एक 25 वर्षीय शरीर इन यातनाओं को कब तक सहता?
27 मई, 1918 को प्रताप सिंह वीरगति को प्राप्त हो गये।
9 months ago | [YT] | 4
View 1 reply
पूनम चन्द यादव
🍁 अभी कुछ ही दिन पहले यह पुस्तक 📖 पढ़ी थी। 🍁
इसमें जिन कहानियों का संकलन है वह एक-एक कहानी अपने आप में अनूठी है। मेरा जी तो कर रहा है सभी कहानियों को ही यहां लिख दू।
😇पर पता है यहां लिख दूंगा तो पढ़ोगे नहीं, इसीलिए इन्हीं कहानियों के कुछ अंश लिख रहा हूं। जिनको पढ करके आपको जिज्ञासा हो और आप पूरी कहानियों तक पहुंचे। 😅😅
📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖📖
☘️ गुलियाना का एक खत ☘️
गुलियाना ने अपनी कमर की ओर संकेत कर मुझसे कहा - "यहां चाबियों के गुच्छे की तरह मुझे कई बार तारे बंधे हुए महसूस होते हैं।" मैं गुलियाना के चेहरे की ओर देखने लगी। तिजोरियों की चाबियों को चांदी के छल्लों में पिरोकर बना गुच्छा उसने अपनी कमर में बांधने से इनकार कर दिया था। और उसके जगह में तारों के गुच्छे अपनी कमर में बांधना चाहती थी। गुलियाना के चेहरे की ओर देखती हुई मैं सोचने लगी कि इस धरती पर वे घर कब बनेंगे जिनके दरवाजे तारों की चाबियां से खुलते हों।....... जिंदगी के घर से जाते हुए उसने जिंदगी को एक खत लिखा है और उसने खत में जिंदगी से,
सबसे पहला सवाल पूछा है कि आखिर इस धरती में उसे फूल को आने का अधिकार क्यों नहीं दिया जाता जिसका नाम औरत हो?
और साथ ही उसने पूछा की सभ्यता का वह युग कब आएगा जब औरत के मरजी के बिना कोई मर्द किसी औरत के जिस्म को हाथ नहीं लगा सकेगा?
और तीसरा सवाल उसने यह पूछा कि जिस घर का दरवाजा खोलने के लिए उसने अपनी कमर में तारों के गुच्छे को चाबियों के गुच्छे की तरह बांधा था, उस घर का दरवाजा कहां है?
🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️
☘️ करमांवाली ☘️
....... आंसुओ से भीगी करमांवाली ने मेरा हाथ पकड़ लिया। "बीवी, तू मेरी मन की बात समझ ले। मुझसे उतार नहीं पहना जाता - मेरी गोटा-किनारेवाली शलवारें, मेरी तारों जङी चुनरियां और मेरी सिलमोंवाली कमीजे - है सब उसका 'उतार' (पहले पहने हुए कपड़े) थे। और मेरे कपड़ों की भांति मेरा घर वाला भी....." "अब बीवी, मैं सारे कपड़े उतार आई हूं। अपना घर वाला भी। यहां मामा-मामी के पास आ गई हूं। इनका घर लीपती हूं, मेज धोती हूं। और मैंने एक मशीन भी रख छोड़ी है। चार कपड़े सी लेती हूं, और रोटी खा लेती हूं। भले ही खद्दर जुड़े, चाहे लट्ठा। मैं किसी का 'उतार' नहीं पहनती।
🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️
☘️ अमाकड़ी ☘️
..... किशोर ने मोमबत्तियां की रोशनी में अपनी बीवी के मुंह की ओर देखा। उसकी बीवी के गोरे-गोरे मुख पर एक मुस्कान थी। फिर किशोर ने मोमबत्तियों के मुख की ओर देखा, मोमबत्तियों के गालों पर पिघलती मोम के आंसू बह रहे थे। और किशोर का दिल किया, कि वह अपनी सारी की सारी बीवी को झकझोर कर कहे कि यह देख इन मोमबत्तियों के आंसू तुम्हारी एक मुस्कान का मूल्य चूका रहे हैं।किशोर ने अपनी जुबान दांतों के नीचे दबा ली। उसे लगा कि अभी उसकी बीवी खिलखिला कर हंस उठेगी और कहेंगी, "आज इस हवेली की बैठक को देखा। अगर एक कोने में रेडियो-ग्राम पड़ा है तो दूसरे कोने में रेफ्रिजरेटर रखा हुआ है। तीसरे कोने में कपड़ों से भरे-पूरे ट्रंक पड़े हैं और चौथा कोना पलंगो और अलमारियों से भरा हुआ है। और हवेली के दरवाजे पर खड़ी मोटर - ये सब चीज तुम्हारे दिल का मूल्य चूका रही है।"
🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️
☘️ एक रुमाल, एक अंगूठी, एक छलनी ☘️
........मोती ने जो कदम उठाया था, उससे भला उसका क्या बनता-सँवरता? और रूपो का भी क्या सँवरता? एक दिन रुपो उसके पाँवो में गिरकर रोई, 'तुम्हें मेरी कसम है जो तुम अपनी यह हालत बनाओ। भुने हुए बीज अब उगेंगे नहीं।' उसी दिन रुपो ने उसकी भट्टी तोड़ डाली। कड़ाई उससे उठाई नहीं गई सो वह छलनी ही उठा लाई और उसे हुक्म दे आई कि अपने गांव वापस लौट जाए।मोती न उसकी कसम लौटा सका न उसका हुक्म टाल सका। अपनी अंगूठी, एक निशानी, उसने रूपो को दी और दूसरे दिन पता नहीं कहां चला गया। मोती भटियारा क्या बना, रूपो को सारी उम्र के लिए भटियारिन बना गया। इसने उसकी छलनी और अंगूठी अपने पास रख ली। अंगूठी पर मोती का नाम लिखा हुआ था। कहां छिपाती! चूल्हा तोड़कर उसने दोनों चीज मिट्टी के नीचे दबा दी। और ऊपर नया चूल्हा बना दिया। हम अभागिनें, जो किसी से प्यार करती है, जन्म से भटियारिनें हो जाती हैं। दिल की भट्ठी पर अपने सांसों को दानों की तरह भूनती हैं और यादों की छलनी में से वर्षों रेत छानती है।"
🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️
☘️ धुंआ और लाट ☘️
"यही तो दुनिया वालों की बुरी आदत है, कि वे आदमी का आदमी के साथ रिश्ता जानना चाहते हैं। वे आदमी को पीछे देखते हैं, रिश्ते को पहले। क्या औरत का मुंह औरत का नहीं होता? क्या वह जरूर मां का मुंह होना चाहिए? बहन का मुंह होना चाहिए? बेटी का मुंह होना चाहिए? बीवी का मुंह होना चाहिए? औरत का मुंह औरत का क्यों नहीं रह सकता।"
🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️
☘️ लाल मिर्च ☘️
गोपाल के उम्र की सीढी के अठारवें डंडे पर पांव रखा हुआ था, और गोपाल को लगाकर इस डंडे पर जवानी के एहसास का एक कुत्ता दुबक कर बैठा हुआ था, और आज उसने अचानक पागलों की तरह उसकी टांग में से मांस नाच लिया था- उस दिन से गोपाल का मन अपने जख्म पर लगाने के लिए लाल मिर्च जैसी लड़की ढूंढने लग गया था।....... उसे लगा, वह बुड्ढा हो गया था,लाल गोपाल दास। और उसकी पत्नी अपने घुटनों का दबाती हुई कह रही थी, 'लड़की इतनी बड़ी हो गई है, कोई लड़का देखो न। कहां छुपाऊं इस आंचल की आग को? ऐसा रूप... ऊपर से जमाना बुरा है....।'
और फिर उसके दरवाजे पर बारात आ गई...
उसके दामाद ने उसके पांव छुए..
उसकी बेटी लाल सुर्ख कपड़ों में लिपटी हुई थी...
वह डोली के पास जाकर उसे प्यार देने लगा...
उसकी बेटी... बिल्कुल लाल मिर्च...।
लाल मिर्च... लड़की ...लाल मिर्च...
और गोपाल को लगा,आज... आज किसी ने मिर्चें उठाकर उसकी आंखों में डाल दी थी।
🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️
☘️ बू ☘️
" गुलेरी मर गई "
" गुलेरी मर गई "
"उसने तुम्हारे विवाह की बात सुनी और मिट्टी का तेल अपने ऊपर डालकर जल मरी"।....मानक को चाहे कुछ समझ में नहीं आया था पर वह बात बड़ी थी। मां ने नहीं बहू को हौसला दिया था कि तू हिम्मत से यह बेला काट ले। जिस दिन मैं तुम्हारा बच्चा मानक की झोली में रखूंगी तो मानक के सभी सुधियाँ पलट आएंगी। फिर वह बेला भी कट गई। मानक के घर में बेटा पैदा हुआ। मां ने बालक को नहलाया-धुलाया, कोमल रेशमी कपड़े में लपेटकर मानक की झोली में डाल दिया।मानक झोली में पड़े हुए बच्चे को देखता रहा, फिर जैसे चीख उठा, "इसको दूर करो, दूर करो, मुझे इसमें मिट्टी के तेल की बू आती है।"
🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️
☘️ उधड़ी हुई कहानियां ☘️
"मैं कितनी देर केतकी के चेहरे की तरफ देखती रही। कार्तिक के वह कहानी जो किसी गुनिए ने अपने निर्दयी हाथों से उधेड़ दी थी, केतकी अपने मन के सुच्चे रेशमी धागे से उस उधड़ी हुई कहानी को फिर से सी रही थी। यह एक कहानी की बात है। और मुझे भी मालूम नहीं, आपको भी मालूम नहीं कि दुनिया के ये 'गुनिए' दुनिया की कितनी कहानियों को रोज उधड़ते हैं ।
🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️
☘️ एक दुखान्त ☘️
.....और सुकुमार को लगाकर उसमें और सार्त्र में एक फर्क था- सार्त्र के पास अपनी स्वतंत्रता को आकार दे सकने के लिए दो हथियार थे- एक उसकी कलम और दूसरा उसकी दोस्त औरत। पर उसके अपने पास कोई भी हथियार नहीं था, और यही फर्क उसका दुखान्त था..... 'भयानक दुखान्त' सुकुमार रो नहीं सकता था इसलिए हंस दिया। और उसका मन हुआ कि वह इस भयानक दुखान्त से एक भयानक मजाक करें.......
🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️🔸️
क्यों कुछ पढने की इच्छा जागृत हुई या नहीं😄😄
📖📖 और सबसे बेहतरीन कहानी 'पांच बहनें
👉🏻 पांच बहनें, औरत जात के उसे गूँगे दर्द की कहानी है, जिसे यह गूँगापन चाहे मजहब और इख़लाख की पुरातन कीमतों को स्वीकार करने से नसीब हुआ है, और चाहे उन कीमतों को अस्वीकार करने में असफल यत्न से।🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
9 months ago | [YT] | 7
View 1 reply
पूनम चन्द यादव
💠 climate change में Ac और Refrigerators का नाम जोड़कर हम असली गुनहगार से बच जाना चाहते है।
💠 Climate change के प्रमुख कारण -
1. Massive consumption - एक विशेष वर्ग द्वारा अंधाधुंध भोग।
2. बढ़ती आबादी (आम आदमी यही समाधान कर सकता है संताने कम पैदा करके )
💠जिनको हमनें सेलिब्रिटी बना रखा है वह बड़े भोगवादी है, उनको फॉलो करना बंद करो। आवाज उठाओ उनके खिलाफ। वो असली गुनहगार है।
क्लाइमेट चेंज क्या है मूल कारण क्या है ?👇🏻👇🏻
💠 क्लाइमेट चेंज के विज्ञान को समझना होगा।
💠 आंकड़े तथ्य पता करना होगा।
💠 कार्बन emmison आता कहाँ से है इसे जानना होगा।
10 months ago | [YT] | 2
View 0 replies
पूनम चन्द यादव
🌍 जलवायु परिवर्तन के तथ्य
🔴 1. 2023 में हमने 1.5°C की सीमा पार कर दी थी!
👉 वैज्ञानिकों के मुताबिक, जून 2023 में पहली बार वैश्विक तापमान औसत से 1.5°C अधिक हो गया था। यह दर्शाता है कि भविष्य में यह सीमा बार-बार पार होगी, जिससे अप्रत्याशित जलवायु घटनाएँ होंगी।
🔴 2. 2025 तक पृथ्वी पर CO₂ का स्तर पिछले 20 लाख वर्षों में सबसे अधिक होगा!
👉 वैज्ञानिकों के अनुसार, मई 2025 तक CO₂ स्तर 429.6 पीपीएम तक पहुँच जाएगा।
🌫️ यह औद्योगिक क्रांति से पहले के स्तर से 50% अधिक है और जलवायु परिवर्तन को अनियंत्रित करने वाला प्रमुख कारक बन सकता है।
🔴 3. 2024 में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी दर्ज की गई!
👉 पिछले 100 वर्षों में 2024 अब तक का सबसे गर्म साल था। इस साल तापमान 2.2°F (1.2°C) औसत से अधिक रहा। 🌡️
🔴 4. समुद्र का जलस्तर 2025 तक 30 सेमी तक बढ़ सकता है!
👉 आर्कटिक की बर्फ़ 70% कम हो चुकी है, जिससे समुद्री जलस्तर हर साल बढ़ रहा है।
🌊 इससे तटीय शहरों में बाढ़ और विस्थापन बढ़ेगा।
🔴 5. दुनिया के 70% जंगल खतरे में!
👉 अमेज़न वर्षावन, जिसे दुनिया का "फेफड़ा" कहा जाता है, हर मिनट एक फुटबॉल मैदान जितना नष्ट हो रहा है।
🌳 अगर यह सिलसिला जारी रहा, तो यह कार्बन अवशोषित करने की जगह छोड़कर स्वयं CO₂ छोड़ने लगेगा।
🔴 6. पिघलते ग्लेशियर से 1.6 अरब लोगों को जल संकट!
👉 हिमालय, एंडीज और आल्प्स ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे 1.6 अरब लोगों की जल आपूर्ति संकट में है। 🚱
🔴 7. सबसे ज़्यादा ग्रीनहाउस गैसें कौन उत्सर्जित कर रहा है?
📌 चीन – 30%
📌 अमेरिका – 14%
📌 भारत – 7%
📌 यूरोप – 9%
📌 बाकी दुनिया – 40%
👉 विकसित देश सबसे अधिक उत्सर्जन कर रहे हैं, लेकिन जलवायु आपदा का सबसे अधिक असर गरीब और विकासशील देशों पर हो रहा है।
🔴 8. सबसे ज़्यादा खतरे में कौन हैं?
❌ भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश – चक्रवात, बाढ़ और गर्मी की लहरें बढ़ रही हैं।
❌ मालदीव और इंडोनेशिया – समुद्र में डूबने की कगार पर।
❌ अफ्रीका – 40% कृषि भूमि बंजर हो रही है।
🚨 अब भी कुछ नहीं किया, तो...?
👉 जलवायु शरणार्थियों की संख्या 2050 तक 1 अरब हो सकती है!
👉 2050 तक पानी की कमी से 5 अरब लोग प्रभावित हो सकते हैं!
👉 21वीं सदी के अंत तक कई शहरों का अस्तित्व समाप्त हो सकता है!
⚠️ डाटा पर सावधानी:
यह डेटा वर्तमान वैज्ञानिक शोध, रिपोर्ट्स और अनुमानों पर आधारित है, जो समय के साथ बदल सकते हैं। जलवायु परिवर्तन एक जटिल और गतिशील प्रक्रिया है, और नए शोध, नीतियां, और वैश्विक घटनाएँ इन संख्याओं को प्रभावित कर सकती हैं। COP सम्मेलनों, सरकारी नीतियों, और वैज्ञानिक प्रगति पर लगातार नजर रखना आवश्यक है।
👉 नवीनतम और सटीक जानकारी के लिए आधिकारिक स्रोतों और वैज्ञानिक रिपोर्ट्स को देखें |
10 months ago | [YT] | 7
View 0 replies
Load more