यह चैनल सभी हिंदू धर्मग्रंथों और प्राचीन कहानियों पर केंद्रित है, ताकि हम सभी सनातनी लोग अधिक से अधिक उनके बारे में जानें और उनमें रुचि लें।
This channel focuses on all the Hindu scriptures and ancient stories, so that more and more of us come to know about them and get interested in them.
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Divine Sagas
भगवान शिव ने माता पार्वती को कैसे समझाया कि दुख-सुख इंसान के कर्मों पर निर्भर करता है?
एक बार माता पार्वती ने भगवान शिव से प्रश्न किया –
“प्रभु, मैंने देखा है कि जो पहले से ही दुःखी है, उसे और दुःख मिलते हैं और जो सुखी है, उसे कोई कष्ट नहीं होता। ऐसा क्यों?”
भगवान शिव मुस्कराए और बोले –
“इसका उत्तर तुम्हें धरती पर मिलेगा। चलो, मानव रूप में चलें।”
फिर भगवान शिव और माता पार्वती पति-पत्नी बनकर एक गांव के पास ठहरे।
शाम को शिव जी ने कहा –
"हम इंसानों की तरह ही भोजन बनाएंगे। मैं सामग्री लाता हूं, तुम तब तक चूल्हा तैयार करो।”
माता पार्वती पास के टूटे-फूटे मकानों से ईंटें लाकर चूल्हा बना लेती हैं। तभी भगवान बिना कोई सामग्री लिए लौट आते हैं।
शिव जी मुस्कराते हुए पूछते हैं –
“ये ईंटें कहां से लाईं?”
माता पार्वती कहती हैं –
“गांव में कई जर्जर मकान थे, वहीं से ले आई। सुंदर घरों की दीवारें तोड़ना ठीक नहीं लगा।”
तब भगवान शिव बोले –
“यही तुम्हारे प्रश्न का उत्तर है। जिन लोगों ने अपने घर को संभाल कर रखा है, उन्हें कोई क्यों नुकसान पहुंचाएगा? और जो पहले से ही टूटे हुए हैं, वही और ज्यादा टूटते हैं।”
कहने का भाव यह है कि –
हमारा सुख-दुख हमारे कर्मों का फल है। जो अच्छे कर्म करता है, उसका जीवन सुंदर घर की तरह सुरक्षित रहता है। और जो लापरवाह रहता है, उसका जीवन कमजोर दीवारों की तरह धीरे-धीरे गिरने लगता है।
इसलिए हर इंसान को चाहिए कि वह ऐसे कर्म करे जिससे उसका जीवन इतना मजबूत हो जाए कि कोई भी दुःख उसे छू न पाए।
सीख:
अच्छे कर्म ही जीवन की सुरक्षा हैं।
!! हर हर महादेव !!
1 year ago | [YT] | 2
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Divine Sagas
*📜मृत्यु क्यों आवश्यक है 📜*
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*हर कोई मृत्यु से डरता है, लेकिन जन्म और मृत्यु सृष्टि के नियम हैं... यह ब्रह्मांड के संतुलन के लिए आवश्यक है। इसके बिना, मनुष्य एक-दूसरे पर हावी हो जाते। कैसे? इस कहानी से जानिए...*
*एक बार, एक राजा एक संत के पास गया, जो राज्य के बाहर एक पेड़ के नीचे बैठे थे। राजा ने पूछा, "हे स्वामी! क्या कोई औषधि है जो अमरता दे सके? कृपया मुझे बताएं।"*
*संत ने कहा, "हे राजा! आपके सामने जो दो पर्वत हैं, उन्हें पार कीजिए। वहाँ एक झील मिलेगी। उसका पानी पीने से आप अमर हो जाएंगे।"*
*राजा ने पर्वत पार कर झील पाई। जैसे ही वह पानी पीने को झुके, उन्होंने किसी के कराहने की आवाज सुनी। आवाज का पीछा करने पर उन्होंने एक बूढ़े और कमजोर व्यक्ति को दर्द में तड़पते देखा।*
*राजा ने कारण पूछा, तो उस व्यक्ति ने कहा, "मैंने इस झील का पानी पी लिया और अमर हो गया। जब मेरी उम्र सौ साल की हुई, तो मेरे बेटे ने मुझे घर से निकाल दिया। मैं पचास साल से यहाँ पड़ा हूँ, बिना किसी देखभाल के। मेरा बेटा मर चुका है, और मेरे पोते अब बूढ़े हो चुके हैं। मैंने खाना-पीना बंद कर दिया है, फिर भी जीवित हूँ।"*
*राजा ने सोचा, "बुढ़ापे के साथ अमरता का क्या फायदा? अगर मैं अमरता के साथ यौवन भी प्राप्त कर सकूँ तो?" राजा वापस संत के पास गए और समाधान पूछा, "कृपया मुझे अमरता के साथ यौवन प्राप्त करने का उपाय बताएं।"*
*संत ने कहा, "झील पार करने के बाद, आपको एक और पर्वत मिलेगा। उसे पार करिए, और एक पेड़ मिलेगा जिस पर पीले फल लगे होंगे। उन फलों में से एक खा लीजिए, और आपको अमरता के साथ यौवन भी मिल जाएगा।"*
*राजा ने दूसरा पर्वत पार किया और एक पेड़ देखा, जिस पर पीले फल लगे थे। जैसे ही उन्होंने फल तोड़ने के लिए हाथ बढ़ाया, उन्हें तेज बहस और लड़ाई की आवाजें सुनाई दीं। उन्होंने सोचा, इस सुनसान जगह में कौन झगड़ सकता है?*
*राजा ने चार जवान आदमियों को ऊंची आवाज़ में झगड़ते देखा। राजा ने पूछा, "तुम लोग क्यों झगड़ रहे हो?" उनमें से एक बोला, "मैं 250 साल का हूँ और मेरे दाहिने वाले व्यक्ति की उम्र 300 साल है। वह मुझे मेरी संपत्ति का हिस्सा नहीं दे रहा।"*
*जब राजा ने दाहिने वाले व्यक्ति से पूछा, उसने कहा, "मेरा पिता, जो 350 साल का है, अभी भी जीवित है और उसने मुझे मेरा हिस्सा नहीं दिया। तो मैं अपने बेटे को कैसे दूं?"*
*उस आदमी ने अपने 400 साल के पिता की ओर इशारा किया, जिन्होंने भी वही शिकायत की। उन्होंने राजा से कहा कि संपत्ति के इस अंतहीन झगड़े की वजह से गांववालों ने उन्हें गांव से निकाल दिया है।*
*राजा हैरान होकर संत के पास लौटे और बोले,* *"धन्यवाद, आपने मुझे मृत्यु का महत्व समझाया।"*
*संत ने कहा, "मृत्यु के कारण ही इस संसार में प्रेम है।"*
*"मृत्यु के बारे में चिंता करने के बजाय, हर दिन और हर पल को खुशी से जियो। खुद को बदलो, दुनिया बदल जाएगी।"*
1. *जब आप स्नान करते समय भगवान का नाम लेते हैं, तो वह एक पवित्र स्नान बन जाता है।*
2. *जब आप खाना खाते समय नाम लेते हैं, तो वह भोजन प्रसाद बन जाता है।*
3. *जब आप चलते समय नाम लेते हैं, तो वह एक तीर्थ यात्रा बन जाती है।*
4. *जब आप खाना पकाते समय नाम लेते हैं, तो वह भोजन दिव्य बन जाता है।*
5. *जब आप सोने से पहले नाम लेते हैं, तो वह ध्यानमय नींद बन जाती है।*
6. *जब आप काम करते समय नाम लेते हैं, तो वह भक्ति बन जाती है।*
7. *जब आप घर में नाम का सुमिरन भजन करते हैं, तो वह घर मंदिर बन जाता है।*
1 year ago | [YT] | 0
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Divine Sagas
शीर्षक: “गायत्री मंत्र की उत्पत्ति — धार्मिक कहानी”
बहुत प्राचीन काल की बात है। उस समय धरती पर धर्म, तपस्या और ज्ञान का प्रभाव था। ब्रह्मर्षि वशिष्ठ अपने तप, ज्ञान और ब्रह्मतेज के कारण प्रसिद्ध थे। वहीं, महाबली राजा विश्वामित्र (पूर्व नाम: कौशिक) एक पराक्रमी क्षत्रिय थे। विश्वामित्र ने देखा कि केवल तप और ज्ञान से ऋषि वशिष्ठ के पास ऐसी शक्ति है जो राजाओं के पास भी नहीं।
एक बार विश्वामित्र, अपने सैनिकों सहित, ऋषि वशिष्ठ के आश्रम पर पहुँचे। वहाँ उन्होंने देखा कि ऋषि के पास कामधेनु गाय है, जो इच्छानुसार अन्न, धन और सुख प्रदान करती है। राजा विश्वामित्र को यह अद्भुत लगा। उन्होंने आग्रह किया कि वह कामधेनु उन्हें सौंप दें ताकि वह अपने राज्य और प्रजा की भलाई कर सकें।
लेकिन वशिष्ठ जी ने स्पष्ट कह दिया कि यह गाय केवल धर्मकार्य और यज्ञों के लिए है, इसे राजा को नहीं दिया जा सकता। इस बात से क्रोधित होकर विश्वामित्र ने बलपूर्वक गाय को लेने का प्रयास किया, लेकिन वशिष्ठ के ब्रह्मतेज के आगे वह असफल रहे।
अपमानित और लज्जित होकर विश्वामित्र ने उसी समय संकल्प लिया:
राजा होकर भी मैं ऋषियों के समान शक्तिशाली नहीं। अब मैं भी तप करके ब्रह्मर्षि बनने का प्रयास करूंगा।
वह अपना राजपाट छोड़कर वन में चले गए। उन्होंने वर्षों तक कठिन तपस्या की, घोर यज्ञ और साधना की। उनकी तपस्या से देवता भी चकित हो उठे। उन्होंने बार-बार इंद्र द्वारा विघ्न डलवाने की चेष्टा की, लेकिन विश्वामित्र का संकल्प अडिग रहा।
इसी महान तपस्या और वेदाध्ययन के समय, उन्होंने ब्रह्मज्ञान प्राप्त किया। इसी काल में ऋग्वेद के तीसरे मंडल का 62वां सूक्त, जिसका 10वां मंत्र गायत्री मंत्र कहलाता है, विश्वामित्र द्वारा प्रकट हुआ।
गायत्री मंत्र (ऋग्वेद 3.62.10)
ॐ भूर्भुवः स्वः।
तत्सवितुर्वरेण्यं।
भर्गो देवस्य धीमहि।
धियो यो नः प्रचोदयात्॥
अर्थ:
हम उस परम तेजस्वी सविता (सूर्य स्वरूप परमात्मा) का ध्यान करते हैं, जो हमारी बुद्धियों को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें।
यह मंत्र न केवल विश्वामित्र की ब्रह्मविद्या प्राप्ति का प्रतीक बना, बल्कि आज तक हिन्दू धर्म में इसे सर्वश्रेष्ठ जप मंत्र माना जाता है। यही मंत्र 'त्रिपदा गायत्री' कहलाता है क्योंकि इसमें तीन चरण हैं।
गायत्री मंत्र के प्रकट होने के बाद भी उन्होंने अपनी तपस्या जारी रखी। अंततः जब उनके भीतर से समस्त अहंकार समाप्त हुआ, केवल ज्ञान, करुणा और ब्रह्मत्व ही शेष रहा, तब देवताओं ने उन्हें 'ब्रह्मर्षि' की उपाधि दी।
यह वही विश्वामित्र हैं, जिन्होंने भगवान श्रीराम को बालकांड में दिव्यास्त्र विद्या सिखाई थी।
विश्वामित्र की कहानी बताती है कि केवल जन्म या पद से नहीं, बल्कि कठोर परिश्रम, तपस्या और आत्मसंयम से ही कोई महान बनता है। गायत्री मंत्र भी यही सिखाता है कि हमारा अंतःकरण और बुद्धि हमेशा सन्मार्ग पर चले।
जय श्री सीताराम!
1 year ago | [YT] | 0
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देवर्षि नारद भगवान विष्णु के पास गए और प्रणाम करते हुए बोले- 'भगवान मुझे सत्संग की महिमा सुनाइये।'
भगवान मुस्कराते हुए बोले- 'नारद ! तुम यहाँ से आगे जाओ, वहाँ इमली के पेड़ पर एक रंगीन प्राणी मिलेगा। वह सत्संग की महिमा जानता है, वही तुम्हें समझाएगा।'
नारद जी खुशी-खुशी इमली के पेड़ के पास गए और गिरगिट से बातें करने लगे। उन्होंने गिरगिट से सत्संग की महिमा के बारे में पूछा। सवाल सुनते ही वह गिरगिट पेड़ से नीचे गिर गया और छटपटाते हुए प्राण छोड़ दिए।
नारदजी आश्चर्यचकित होकर लौट आए और भगवान को सारा वृत्तांत सुनाया। भगवान ने मुस्कराते हुए कहा- 'इस बार तुम नगर के उस धनवान के घर जाओ और वहाँ जो तोता पिंजरे में दिखेगा, उसी से सत्संग की महिमा पूछ लेना।'
नारदजी क्षण भर में वहाँ पहुँच गए और तोते से सत्संग का महत्व पूछा। थोड़ी देर बाद ही तोते की आँखें बन्द हो गईं और उसके भी प्राणपखेरू उड़ गए।
इस बार तो नारद जी भी घबरा गए और दौड़े-दौड़े भगवान कृष्ण के पास पहुँचे। नारद जी कहा-'भगवान यह क्या लीला है। क्या सत्संग का नाम सुनकर मरना ही सत्संग की महिमा है ?'
भगवान हँसते हुए बोले-'यह बात भी तुमको जल्द ही समझ आ जाएगी। इस बार तुम नगर के राजा के महल में जाओ और उसके नवजात पुत्र से अपना प्रश्न पूछो।'
नारदजी तो थर-थर काँपने लगे और बोले- 'अभी तक तो पक्षी ही अपने प्राण छोड़ रहे थे। इस बार अगर वह नवजात राजपुत्र मर गया तो राजा मुझे जिन्दा नहीं छोड़ेगा।'
भगवान ने नारदजी को अभयदान दिया। नारदजी दिल मुट्ठी में रखकर राजमहल में आए। वहाँ उनका बड़ा सत्कार किया गया। अब तक राजा को कोई सन्तान नहीं थी। अतः पुत्र के जन्म पर बड़े आनन्दोल्लास से उत्सव मनाया जा रहा था।
नारदजी ने डरते-डरते राजा से पुत्र के बारे में पूछा। नारदजी को राजपुत्र के पास ले जाया गया। पसीने से तर होते हुए, मन-ही- मन श्रीहरि का नाम लेते हुए नारदजी ने राजपुत्र से सत्संग की महिमा के बारे में प्रश्न किया।
नवजात शिशु हँस पड़ा और बोला- 'महाराज ! चन्दन को अपनी सुगन्ध और अमृत को अपने माधुर्य का पता नहीं होता। ऐसे ही आप अपनी महिमा नहीं जानते, इसलिए मुझसे पूछ रहे हैं। वास्तव में आप ही के क्षणमात्र के संग से मैं गिरगिट की योनि से मुक्त हो गया और आप ही के दर्शनमात्र से तोते की क्षुद्र योनि से मुक्त होकर इस मनुष्य जन्म को पा सका।
आपके सान्निध्यमात्र से मेरी कितनी सारी योनियाँ कट गईं और मैं सीधे मानव-तन में ही नहीं पहुँचा अपितु राजपुत्र भी बना। यह सत्संग का ही अदभुत प्रभाव है- हे ऋषिवर ! अब मुझे आशीर्वाद दें कि मैं मनुष्य जन्म के परम लक्ष्य को पा सकूँ।'
#ॐ_नमो_भगवतेवासुदेवाय_नमः 🙏
1 year ago | [YT] | 1
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Divine Sagas
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌤️ *दिनांक - 07 जुलाई 2025*
🌤️ *दिन - सोमवार*
🌤️ *विक्रत संवत 2082 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2081)*
🌤️ *शक संवत -1947*
🌤️ *अयन - दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु - वर्षा ॠतु*
🌤️ *मास - आषाढ*
🌤️ *पक्ष - शुक्ल*
🌤️ *तिथि - द्वादशी रात्रि 11:10 तक तत्पश्चात त्रयोदशी*
🌤️ *नक्षत्र - अनुराधा 08 जुलाई रात्रि 01:12 तक तत्पश्चात ज्येष्ठा*
🌤️ *योग - शुभ रात्रि 10:03 तक तत्पश्चात शुक्ल*
🌤️ *राहुकाल - सुबह 07:43 से सुबह 09:23 तक*
🌤️ *सूर्योदय - 06:03*
🌤️ *सूर्यास्त - 07:23*
👉 *दिशाशूल - पूर्व दिशा मे*
🚩 *व्रत पर्व विवरण -*
💥 *विशेष - द्वादशी को पूतिका(पोई) अथवा त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌷 *आर्थिक परेशानी या कर्जा हो तो* 🌷
➡ *08 जुलाई 2025 मंगलवार को भौम प्रदोष योग है ।*
🙏🏻 *किसी को आर्थिक परेशानी या कर्जा हो तो भौम प्रदोष योग हो, उस दिन शाम को सूर्य अस्त के समय घर के आसपास कोई शिवजी का मंदिर हो तो जाए और ५ बत्ती वाला दीपक जलाये और थोड़ी देर जप करें :*
👉🏻 *ये मंत्र बोले :–*
🌷 *ॐ भौमाय नमः*
🌷 *ॐ मंगलाय नमः*
🌷 *ॐ भुजाय नमः*
🌷 *ॐ रुन्ह्र्ताय नमः*
🌷 *ॐ भूमिपुत्राय नमः*
🌷 *ॐ अंगारकाय नमः*
👉🏻 *और हर मंगलवार को ये मंगल की स्तुति करें:-*
🌷 *धरणी गर्भ संभूतं विद्युत् कांति समप्रभम |*
*कुमारं शक्ति हस्तं तं मंगलम प्रणमाम्यहम ||*
🙏🏻 *सुरेशानंदजी*
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌷 *कर्ज-निवारक कुंजी भौम प्रदोष व्रत* 🌷
🙏🏻 *त्रयोदशी को मंगलवार उसे भौम प्रदोष कहते हैं ....इस दिन नमक, मिर्च नहीं खाना चाहिये, इससे जल्दी फायदा होता है | मंगलदेव ऋणहर्ता देव हैं। इस दिन संध्या के समय यदि भगवान भोलेनाथ का पूजन करें तो भोलेनाथ की, गुरु की कृपा से हम जल्दी ही कर्ज से मुक्त हो सकते हैं। इस दैवी सहायता के साथ थोड़ा स्वयं भी पुरुषार्थ करें। पूजा करते समय यह मंत्र बोलें –*
🌷 *मृत्युंजयमहादेव त्राहिमां शरणागतम्।* *जन्ममृत्युजराव्याधिपीड़ितः कर्मबन्धनः।।*
*🔱🚩🇮🇳 आर्यावर्त भरतखण्ड 🇮🇳🚩🔱*
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
1 year ago | [YT] | 1
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Divine Sagas
जय मां लक्ष्मी जी 🙏
1 year ago | [YT] | 1
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Divine Sagas
Mera channel monetize hoga ?
1 year ago | [YT] | 0
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Divine Sagas
🌟🌟🌟आपके अनुसार हनुमान जी का सबसे अच्छा कांड कौन सा है 👇👇👇👇👇👇
1 year ago | [YT] | 0
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Divine Sagas
🌟🌟कौन से ऋषि ने भगवान श्री राम के पुत्र लव और कुश को रामायण की शिक्षा दी थी 👇👇👇👇👇👇👇👇👇
1 year ago | [YT] | 3
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Divine Sagas
🌟हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार ज्ञान और विद्या की देवी के है 👇👇👇👇👇
1 year ago | [YT] | 3
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