Vipul Garg - Yuva Motivational Speaker

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सुन्दरकाण्ड पाठ व भजन संध्या की शुरुवात :
जनवरी 2017 से मेने अंतर्प्रेरणा से सुन्दरकाण्ड पाठ व भजन संध्या की शुरुवात की है । मेरे जीवन का लक्ष्य भारतीय संस्कृति का घर घर प्रचार करना है , मनुष्य जीवन बड़े भाग्य से मिलता है इसीलिए हमे : हरिनाम संकीर्तन" में नाम जप करके अपने जीवन की सफल बनाना चाहिए , "हरिनाम ही सार ,बाकी सब व्यर्थ पसार।।
"कलयुग केवल नाम अधारा, सुमिर सुमिर नर उतरहि पारा ।। Contact For Harinaam sankirtan,Last Prayer & Shradhanjli sabha Meditation workshop, Session, Stress management camp, Bhajan Sandhya, Sai kirtan, Mata ki chocki programs. Ph: 8700410217


Vipul Garg - Yuva Motivational Speaker

राधे राधे
*राधा अष्टमी*
के पावन पर्व पर राधा नाम संकीर्तन!
समय शाम 4 बजे से
19 सितम्बर 2026 शनिवार
स्थान: राजापुरी, मटियाला। दिल्ली
M 50,Gali no 7 som bazar Road near Pawan Rathi Office rajapuri, Delhi

1 week ago | [YT] | 75

Vipul Garg - Yuva Motivational Speaker

हाईकोर्ट की पैरोल के बाद भी रिहाई में देरी, प्रशासन से जवाब मांगने की जरूरत क्यों पड़ी?

जोधपुर | 25 अगस्त 2026

आसाराम बापू की पैरोल का मामला अब केवल एक कैदी की रिहाई का विषय नहीं रह गया है। यह सवाल भी सामने है कि जब राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से 20 दिन की पैरोल मंजूर कर दी, तो उसके बाद भी रिहाई की प्रक्रिया क्यों नहीं पूरी हो सकी?

3 अगस्त 2026 को राजस्थान हाईकोर्ट ने आसाराम बापू को 20 दिन की पैरोल मंजूर की थी। अदालत ने उनकी उम्र, लंबी अवधि से चल रहे कारावास और पूर्व में मिली अंतरिम राहत के दौरान उनके आचरण सहित कई पहलुओं पर विचार किया।

राज्य सरकार की ओर से पैरोल का विरोध किया गया था। गुजरात में लंबित मामले और अन्य प्रशासनिक-सुरक्षा संबंधी आपत्तियां भी अदालत के सामने रखी गईं। लेकिन हाईकोर्ट ने इन आपत्तियों को पैरोल से इनकार का पर्याप्त आधार नहीं माना।

यहीं से प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े होते हैं।

आदेश अदालत का, लेकिन रिहाई में देरी क्यों?

हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी तत्काल रिहाई नहीं हुई।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जेल प्रशासन की ओर से गुजरात में लंबित मामले और आदेश के क्रियान्वयन से जुड़े कानूनी पहलुओं का हवाला दिया गया।

लेकिन यदि प्रशासन के पास ऐसा कोई ठोस कानूनी आधार था, जिसके कारण हाईकोर्ट द्वारा मंजूर पैरोल के बावजूद रिहाई रोकी जा सकती थी, तो सवाल यह है कि वह आधार अदालत के सामने कितना प्रभावी था और उसका लिखित रिकॉर्ड क्या है?

क्योंकि अदालत ने राज्य सरकार की आपत्तियों पर विचार करने के बाद ही पैरोल मंजूर की थी।

8 अगस्त को हाईकोर्ट को फिर हस्तक्षेप करना पड़ा

पैरोल के बावजूद रिहाई नहीं होने का मुद्दा दोबारा हाईकोर्ट पहुंचा।

8 अगस्त को अदालत ने राज्य सरकार से जवाब मांगा कि पैरोल मंजूर होने के बावजूद रिहाई क्यों नहीं की गई। मामले में अगली सुनवाई के लिए 17 अगस्त की तारीख तय की गई।

यह घटनाक्रम अपने आप में महत्वपूर्ण है।

अगर प्रशासनिक प्रक्रिया सामान्य रूप से चल रही थी, तो अदालत को रिहाई में देरी का कारण पूछने की आवश्यकता क्यों पड़ी?

यही वह प्रश्न है जिसका जवाब सरकार और जेल प्रशासन को स्पष्ट रूप से देना चाहिए।

प्रशासन की आपत्तियां पहले ही अदालत के सामने थीं

यह भी ध्यान देने योग्य है कि पैरोल का विरोध करते समय राज्य सरकार ने अपनी आपत्तियां अदालत के सामने रखी थीं।

अदालत ने उन दलीलों को सुना और उसके बाद पैरोल मंजूर की।

ऐसे में बाद में उसी मामले से जुड़े प्रशासनिक या कानूनी आधारों के कारण रिहाई में देरी होती है, तो यह स्वाभाविक रूप से सवाल पैदा करता है कि क्या न्यायालय के आदेश के क्रियान्वयन में प्रशासनिक स्तर पर कोई अतिरिक्त अड़चन पैदा हुई?

यदि हां, तो उसका जिम्मेदार कौन था और वह अड़चन किस नियम के तहत थी?

“SP ने पैरोल रोक दी” दावे की भी जांच जरूरी

सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि SP स्तर पर पैरोल रोकी गई।

लेकिन अभी उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड के आधार पर किसी एक अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।

फिर भी प्रशासन से यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि:

रिहाई की अंतिम अनुमति किस स्तर पर लंबित थी?

क्या कोई लिखित रोक आदेश जारी हुआ?

यदि हुआ तो उसे किस अधिकारी ने जारी किया?

उस आदेश का कानूनी आधार क्या था?

और क्या उसकी जानकारी हाईकोर्ट को दी गई?

अगर ऐसा कोई लिखित आदेश मौजूद नहीं है, तो फिर रिहाई में हुई देरी का प्रशासनिक आधार क्या था?

सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही को भी अलग रखना होगा

6 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में आसाराम बापू की चिकित्सा आधार पर राहत से जुड़ी कार्यवाही हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत नहीं दी, लेकिन जेल में उनकी पसंद के प्रशिक्षित caretaker की अनुमति दी।

यह कार्यवाही राजस्थान हाईकोर्ट की 20 दिन की पैरोल से अलग थी।

इसलिए प्रशासन यदि गुजरात या सुप्रीम कोर्ट की किसी अन्य कार्यवाही को पैरोल के क्रियान्वयन में बाधा के रूप में देख रहा था, तो उसका स्पष्ट कानूनी आधार सार्वजनिक होना चाहिए।

सवाल सिर्फ देरी का नहीं, जवाबदेही का है

किसी भी दोषसिद्ध व्यक्ति को लेकर प्रशासन अपनी सुरक्षा और कानून-व्यवस्था संबंधी चिंताएं रख सकता है। लेकिन जब वही आपत्तियां न्यायालय के सामने रखी जा चुकी हों और अदालत अपना आदेश दे चुकी हो, तब उस आदेश के बाद की प्रशासनिक प्रक्रिया भी पारदर्शी होनी चाहिए।

किसी न्यायालय के आदेश को लागू करने में यदि वास्तविक कानूनी बाधा है, तो सरकार को उसे स्पष्ट करना चाहिए।

यदि कोई प्रशासनिक प्रक्रिया लंबित है, तो उसकी समयसीमा बताई जानी चाहिए।

और यदि किसी अधिकारी के स्तर पर देरी हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

न्यायिक आदेश और प्रशासनिक इच्छा के बीच अंतर नहीं होना चाहिए।

अब सरकार से सीधे सवाल

1. 3 अगस्त के पैरोल आदेश के बाद रिहाई में देरी का वास्तविक कारण क्या था?

2. क्या सरकार या जेल प्रशासन ने कोई लिखित आदेश जारी करके रिहाई रोकी या स्थगित की?

3. यदि ऐसा आदेश था, तो उसका कानूनी आधार क्या था?

4. गुजरात के लंबित मामले को राजस्थान की हाईकोर्ट-स्वीकृत पैरोल के क्रियान्वयन में किस प्रावधान के तहत बाधा माना गया?

5. 8 अगस्त को हाईकोर्ट को सरकार से जवाब क्यों मांगना पड़ा?

6. 17 अगस्त के बाद मामले में क्या कार्रवाई हुई?

7. यदि लगातार नई तारीखें पड़ रही हैं, तो पैरोल की 20 दिन की अवधि का वास्तविक लाभ कैसे सुनिश्चित होगा?

इन सवालों का जवाब किसी समर्थक या विरोधी पक्ष से नहीं, बल्कि राज्य सरकार और जेल प्रशासन के आधिकारिक रिकॉर्ड से आना चाहिए।

निष्कर्ष

इस पूरे घटनाक्रम में अदालत का आदेश सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है।

हाईकोर्ट ने पैरोल पर विचार किया, सरकार की आपत्तियां सुनीं और उसके बाद 20 दिन की पैरोल मंजूर की।

इसके बावजूद रिहाई में देरी हुई और मामला दोबारा अदालत पहुंचा।

इससे कम से कम इतना सवाल तो बनता ही है कि न्यायालय के आदेश के बाद प्रशासनिक स्तर पर ऐसा क्या हुआ कि रिहाई तत्काल नहीं हो सकी?

यह किसी व्यक्ति विशेष के प्रति पक्षधरता का सवाल नहीं है।

यह सवाल है न्यायिक आदेश की प्रभावशीलता और प्रशासनिक जवाबदेही का।

और यदि सरकार के पास रिहाई में देरी का कोई ठोस कानूनी आधार है, तो उसे सार्वजनिक करने में संकोच नहीं होना चाहिए।

क्योंकि अदालत का आदेश स्पष्ट हो, लेकिन उसके बाद भी रिहाई तारीखों और प्रक्रियाओं में उलझी रहे, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।

1 month ago | [YT] | 895

Vipul Garg - Yuva Motivational Speaker

No. 317
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जेल में इलाज संभव है तो लालू को बेल क्यों, आसाराम बापू को क्यों नहीं?

6 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने संत आसाराम बापूजी की अंतरिम/मेडिकल बेल याचिका पर फैसला देते हुए कहा कि "आसाराम बापूजी को आवश्यक चिकित्सा उपचार जेल में ही उपलब्ध कराया जाए, इसके लिए बेल देने की आवश्यकता नहीं है।"

अगर जेल में ही उपचार संभव है, तो लालू प्रसाद यादव को मेडिकल बेल पर 5 साल 4 महीने से अब तक रिहा क्यों रखा गया?

और अगर लालू यादव को जमानत मिल सकती है, तो आसाराम बापूजी से कानून की क्या दुश्मनी है?

आखिर कानून की आड़ में ये राजनीतिक खेल संत आसाराम बापूजी के साथ कब तक खेला जाएगा?

#ReleaseSantShriAsaramBapuJi #JusticeForBapuji #DoubleStandards #90YearsOld #SupremeCourt #LaluYadav

1 month ago | [YT] | 1,033

Vipul Garg - Yuva Motivational Speaker

Ek ko bail dusre ko jail, ka tak chalega kya Political khel?

1 month ago | [YT] | 367

Vipul Garg - Yuva Motivational Speaker

⚖️पूज्य श्री नारायण साँई जी सुप्रीम कोर्ट अपडेट.
आज पूज्य श्री नारायण साँई जी की सजा स्थगन (Suspension of Sentence) याचिका पर सुनवाई के दौरान माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि गुजरात उच्च न्यायालय तीन माह के भीतर अपील की सुनवाई पूर्ण कर उसका निस्तारण करे. #NarayanSaiji

1 month ago | [YT] | 994

Vipul Garg - Yuva Motivational Speaker

SC में सुनवाई आज | Update
🔹 अंतरिम जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई।
🔹 संत आसाराम बापू की याचिका पर कोर्ट करेगा विचार।
🔹 मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर।
🔹 सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार।, अगली सुनवाई ६ ऑगस्त

1 month ago (edited) | [YT] | 1,835

Vipul Garg - Yuva Motivational Speaker

✍️ *पूज्य बापूजी को जोधपुर हाईकोर्ट में 20 दिन की पैरोल दे दी है।*

1 month ago | [YT] | 2,740

Vipul Garg - Yuva Motivational Speaker

✨ *खुश खबर* ✨


✨✍️ *पूज्य बापूजी को जोधपुर हाईकोर्ट में 20 दिन की पैरोल दे दी है।*

1 month ago | [YT] | 1,642

Vipul Garg - Yuva Motivational Speaker

*गुरुपूर्णिमा जोधपुर से संदेश
29 जुलाई 2026 बुधवार*
*💥 ब्रह्म परमात्मा बोले 💥

🌸🙏 *परम कल्याणकारी सत्संग अमृत* 🙏🌸
🌼🪔 *ज्योत से ज्योत जगाओ – आरती* 🪔🌼
*सोहम नाद जगाओ, सद्गुरु ज्योत से ज्योत जगाओ।*
जिन्होंने ज्योत जगाई है और जो नहीं लाये हैं वो भी, *ज्योतिषामपि तद्ज्योति..*
*तुम ज्योतियों की ज्योति हो* ✨
🌹 कृष्ण को देखकर कोई भी, किसी भी मत-पंथ का हो, उनके मधुर आनंद का अनुभव करता है। कि हम नहीं मानते कृष्ण को.. 10 बार अल्लाह अल्लाह करो लेकिन कृष्ण को देखो.. तो...
🌹 पांडवों के पास सेना बल, धन बल सब इतना नहीं था। ज्योतिष गणना के अनुसार कौरवों की जीत निश्चित थी, उनके पास हर प्रकार से बल ज्यादा था। तो धृतराष्ट्र ने रणभेरी बजवा दी। लेकिन पहले दिन-दूसरे दिन युद्ध में जो हुआ तो धृतराष्ट्र कहने लगा कि मुझे आपके ज्योतिष गणना पर विश्वास है लेकिन ये क्या हो रहा है। कोई है जो समता में रहता है। *श्री कृष्ण* 🙏
🌹 पहले भी बताया है, जो लोग पहली बार सुन रहे हैं, पहले *सोहम मंत्र* हम देते थे। फिर देखा कि इसके अधिकारी नहीं तो हमने 6 मंत्र देना शुरू किया। अभी फिर से ये मंत्र देना शुरू किया है।
*कबीर जी कहते हैं:*
*माला श्वासों श्वास की, भगत जगत के बीच।*
*जो फेरे वो गुरुमुखी, ना फेरे सो नीच।*
तो आज से शुरू करो। ये आज्ञा है? प्रार्थना नहीं।
पहले श्वास लिया उसको देखो, छोड़ा तब गिनती, 100 तक गिनती हो जाये, एकाग्रता हो रही है तब फिर "*सो*" श्वास अंदर जाये तो वो आनंद स्वरूप, वो ज्ञान स्वरूप, श्वास बाहर जाये तो "*हम*" वो मैं ही हूँ।
*कबीर जी ने ये साधना की होगी, ऐसा मुझे लगता है।*
*खोजत खोजत कबीरो गयो हिराई,*
*खोजते खोजते मैं खो गया,*
*जिसको खोजता था मैं वही हो गया।* 🌺
🌹 आदि शंकराचार्य ने पैदल ही भारत भ्रमण किया और देखा माँ सरस्वती के पीठ पर दक्षिण का पीठ खाली है। तो शास्त्रार्थ जीत कर जब उन्हें पीठ पर बिठाने की तैयारी थी तब माँ सरस्वती ने प्रकट होकर कहा, *अये शंकर! तुम जानते हो तुमने क्या किया है?*
शंकराचार्य जी को समझने में देर नहीं लगी और तुरंत बोले, *हाँ माँ, लेकिन इस संन्यासी शरीर से नहीं, राजा के शरीर से वो कर्म हुए थे।*
माँ प्रसन्न हुई। तो ये देवी-देवता हैं.. 🙏
📚 *विद्यार्थियों को मैं सारस्वत्य मंत्र देता हूँ।*
बुद्धि शक्ति में अद्भुत लाभ होता है। कोई कहे कि मैं कोई और मंत्र देता हूँ विद्यार्थियों को, *सारस्वत्य मंत्र नहीं!*
🌹 *मंडन मिश्र*
🌹 *व्यास जी को नमन है:*
*सच्चिदानन्द रूपाय विश्वोत्पत्त्यादि हेतवे।*
*तापत्रय विनाशाय श्री कृष्णाय वयं नुमः।।* 🙏
🌹 अभी *श्री कृष्ण, भगवान शंकराचार्य, व्यास जी, मेरे लीलाशाह भगवान* भी प्रसन्न हो रहे होंगे तुमको देखकर।
🌹 हमारे सत्संग में 260 लोग तो क्या मरे, कभी किसी को खरोंच तक नहीं आयी होगी, इतने वर्षों से। ये वैदिक संस्कृति की महिमा है।
*तुकाराम महाराज कहते हैं:*
*अम्ही बोलतो वेद बोलते।*
🌹 *पोंटियस पिलेट* की हाजिरी में जीसस जी को कीले ठोके, जो जीसस जी भारत में 17 साल रहे (और जिन्होंने वेदों के ज्ञान का प्रचार किया)।
🌹 सेवा करनेवाले खास ध्यान दें कि *मान में फूले नहीं, अपमान में सिकुड़े नहीं।*
*मान पुड़ी है जहर की।*
*खाये सो मर जाये।*
*चाह उसी की राखता, वो भी अति दुःख पाये।* ⚠️
🌹 अपने को विशेष मानने की भूल न करें।
मान मिले तो *हनुमान जी* का स्मरण करें।
*रामजी ने कहा:*
*कह हनुमंत प्रतिउपकार करउ का तोरा,*
*सनमुख हो न सके मुख मोरा।*
तो हनुमान जी चरणों में गिर पड़े कि,
*"प्रभु आप भी प्रशंसा करेंगे तो मैं कहाँ जाऊँ।"* 🙏🥹
🌹 *मानव बम, मुसलमान युवाओं का भी मंगल।*
अंतरिक्ष में अपना ही पेशाब फिल्टर करके पीना पड़ता है साइंटिस्ट्स को तो शराब के चश्मे इतने लाख करोड़ किलोमीटर दूर कैसे हो सकते हैं, विचार करना चाहिए।
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*हूरें मिलेंगी, कैसे? विचार करना चाहिए।* 🤔
🌹 *बापूजी अपने गुरुदेव का मानस पूजन कैसे करते थे ये बताया।*
हमको मानस पूजन की जरूरत नहीं है, तुमको है।
*साधन-भजन में बरकत होगी।* 🌺
🌹 *राबिया* बिकी हुई दासी थी। क्रूर मालिक गलती होने पर उसके हथेलियों पर कुर्सी के पैर रखकर हिलता था।
राबिया काम में व्यस्त थी, हसन ने कहा, *कुरान में लिखा किसने काटा?*
क्या काटा?
*"शैतान से नफरत करो"* ये काटा।
तो हर कहीं वो ही है तो शैतान है कहाँ?
*सूफी फकीरों ने कहा:*
✨ *जिधर देखता हूँ खुदा ही खुदा है,*
✨ *खुदा से न कोई चीज जुदा है।* 🙏🌹
🪔🌼 *हरि ॐ तत्सत* 🌼🪔

1 month ago | [YT] | 594