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Prateek Bhatt - Redefining Astrology
#शनि ग्रह 4 नवंबर को कुंभ राशि में #मार्गी होगा
आजकल मैं देख रहा हु शनि क बारे में लोग अक्सर गलत व्याख्यान कर देते है..आज कुछ शनि देव के बारे में लिख रहा हु.
शनि देव की मुख्य पहचान है - धीरे मद्धम, देरी,जैसे कि मैं कहता आया हु(Slow but steady) । शनि के प्रभाव से जातक में आलस्य, धीरे से धैर्य पूर्वक कार्य देखने को मिलत| है लेकिन ये अपने कार्य में कुशल होते हैं। शनि कमजोर होने पर लोग एक काम को ज्यादा देर तक नहीं कर पाते है. शनि प्रधान जातक नियम या सिद्धांतो को साधारत्या पालन करते है अगर राहु का असर उस पर नहीं है.
चम़डे पर शनि देव का अधिकार है। इसलिए श्मशान, मरणोपरांत कर्मकाण्ड,चमड़ा कारोबार, कोयला और मृत देह सब शनि के अधिकार में हैं।
कष्टों बार-बार होना या उनकी अति हो जाना इसके कारण भी शनि हैं। शनि दशाओं में अथवा साढ़ेसाती या ढैया में जातक को तपाता रहता है, और खरा सोना बनाने की कोशिश करता है अगर शनि अच्छा है तो आखिर में बहुत देकर भी जाता है. शनि से प्रभावित व्यक्तियों को दाढ़ी-मूछ का शौक होता है। शनि के जातक नौकरी में जयादा सफल होते है, इनको नपुंसक माना गया है, इसलिए मैं इनको इससे जोड़ता हु की ये आदेश देने से ज्यादा आदेश लेने में और उसका सत्यता से पालन करते है. हालांकि वक्रता में कहानी बदल जाती है कारकत्वा की वजह से
अगर सूर्य या बृहस्पति मजबूत होहकर शनि पर प्रभाव रखते है तो ये आदेश की पूर्ति पूरी ईमानदारी से करते हैं पर प्रारंभिक अवस्था में आदेश देने में कतराते हैं।शरीर का दुबला और लम्बा होना, शरीर की अपेक्षा टाँगों का अधिक लम्बा होना. चमड़ा, चर्म रोग, लेबोरेटरी, बदबूदार जगह, ये सब शनि के ही विषय हैं। अघोरी, फक्कड़, नीचे की जाती से इनका लगाव होता है,अपने से नीची कर्मो वाले लोगो से मेल-जोल, तेल और उससे सम्भन्धित विषय , विष, अज्ञातवास, अपनों से दूरी, दूत या गुप्तचर, चोरी और मन की कठोरता, खण्डहर,अँधेरे वाले स्थान ये विषय शनिदेव के हैं।
2 years ago (edited) | [YT] | 18
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Prateek Bhatt - Redefining Astrology
राहु किस भाव में सर्वश्रेष्ठ होता है
2 years ago | [YT] | 15
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Prateek Bhatt - Redefining Astrology
Happy to share with you that I have been part of the Indian National Media Oscar “ENBA award night,” and this was a great feeling to be with the country's leading journalists and news channels and witness their day-night hard work convert into awards for their incredible contributions.
I also had the honor of presenting awards myself to some exceptional channels and media stars with my dear friend media baron Dr. Anurag Batra ji, very experienced media pillar Vinod ji, and congratulations to creative, knowledgable, and affluent speaker Shweta Ji for her special award.
2 years ago | [YT] | 29
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Prateek Bhatt - Redefining Astrology
#भविष्यावाणी/ #फलादेश गलत क्यों हो जाते.
ज्योतिष में फलादेश क्यों सही नहीं होते उसके 1 #पहलु की आज चर्चा कर रहा हूँ. ग्रह सिर्फ #strong और #weak (बलवान और कमजोर) नहीं होते ना ही सिर्फ इसको देखकर फलादेश किया जा सकता बल्कि उससे भी महत्वपूर्ण है उनकी #शुभता-#अशुभता (Malefic & Benefic) का गहराई से मूल्यांकन
जैसे की जो कमाल #11वे भाव में #चंद्र नहीं कर सकते वो #बृहस्पति, शनि और #राहु आसानी से कर देते है
आजकल बोलता ज्यादा हु लिखता कम हु अर्थात #टीवी/ #Youtube के बाद लेखन कम हो गया 😊. और कुछ लोगो ने आग्रह किया है की ग्रह को कैसे समझे की ये अच्छा फल देगा या बुरा. तमाम ऐसे लोग आते है और कहते/पूछते है की सर फलां ने कहा की ये दशा बहुत अच्छी जाएगी या फिर ये तो आपका योगकारक ग्रह है ये #मालामाल कर देगा, लेकिन उससे सम्बंधित रिजल्ट्स कुछ खास नहीं मिले आज तक. उदहारण के तौर पर तमाम लोगो की साढ़े साती का दौर अच्छा व्यतीत होता है और तमाम लोगो को कष्ट महसूस होता है,अपनी साढ़े साती के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी भी सत्ता के शिखर पर थे। कुछ बताते है फलां ने कहा था कुंडली में उच्च या स्वग्रही ग्रह बलि माना जाता है लेकिन उससे ज्यादा लाभ नहीं मिल बल्कि इसके विपरीत कुछ के नीच के या फिर कमजोर ग्रह भी बुरा नहीं करते.
जैसा की ऋषि पराशर लिखते है की लग्न का बृहस्पति कुंडली के 1 लाख दोष दूर करता है, लेकिन तमाम ऐसे लोग मिलेंगे जिनके मित्र राशि गुरु लग्न में है लेकिन साधरण जीवन बिता रहे और बहुत बार तो नए ज्योतिषी किसी के राहु को उपचय भाव में या फलां ग्रह को केंद्र/त्रिकोण में देखते ही उसका गुरगान करने लगते है, लेकिन अंत में फलादेश गलत साबित होता है, तो आखिर माज़रा है क्या, इसी से सम्बंधित कुछ सूत्र बताता हूँ, ज़रूरत है ग्रह की शुभता और अशुभता का प्रतिशत निकलना .
#सूत्र 1: ग्रह की परिपक्क्वता की उम्र #planets #Age of #maturity:
हक़ीक़त में बहुत से ग्रह समय के साथ अपने शुभ अशुभ रिजल्ट्स पर असर डालते है जिसको मैं ग्रह की परिपक्वता की अवस्था या Planet Age of Maturity भी बोलता हु, उसको फलादेश करते समय ध्यान में रखना चाहिए और तभी कहना चाहिए पहला ग्रह बलशाली के साथ ही शुभ भी है.
उदाहरण के तौर पर #सिंह लग्न में विवाह के माज़रे को समझते है जैसा की मंगल योगकारक ग्रह है यहाँ पर लेकिन कालपुरुष की कुंडली में शुक्र तुला राशि का प्रतिनिधि करके विवाह के कारक भाव का प्रतिनिधित्वा कर रहे होते है और मंगल शुक्र के शत्रु है लेकिन लग्नेश सूर्य के परम मित्र और सेनापति तो अब उनको क्या करना चाहिए? मंगल आपकी कुंडली के 7 भाव में है और आपकी उम्र है 25 से 32 के बीच तो सबसे ज्यादा असर डालेंगे आपके विवाह में क्योकि इस उम्र में मंगल परिपक्क्व हो रहे होते है, एनेर्जी लेवल हाई होता क्रोध की भावना भी बहुत होती है, लेकिन यही स्थित मंगल की दशा अगर 50 के आस पास आती है तो वो आपकी नौकरी या बिज़नेस में शिखर तक ले जाते है. क्योकि मंगल ग्रह है साहस, दृरनिश्चय, आत्मनिर्भर, स्वतंत्रता के, ऊर्जा के
दूसरा पहलु इसी सूत्र में जैसे सूर्य 22वे वर्ष परिपक्क्व होते है और चंद्र 24वे, शनि 36वे और राहु 42वे इसको समझ कर फलादेश में उतरने के लिए नीचे के तमाम सूत्र का भी अध्ययन ज़रूरी है
#सूत्र 2: षड्बल, अष्टकवर्ग को बारीकी से अध्ययन करिये
सूत्र 3: ग्रह की राशि में स्थिति उस राशि स्वामी की स्थिति, ग्रह (उच्चा नीच स्वराशि/मित्र) की भाव में स्थिती उस भाव के कारक ग्रह की स्थिति, ग्रह किस भाव में है कही वो अपने कारक के उलटे भाव में तो नहीं है जैसे की सूर्य लग्न, पंचम, नवम, दसम में बहुत अच्छा है लेकिन कहि सूर्य 7 भाव में तो नहीं है.
सूत्र 4: ग्रह की नक्षत्र स्थिति उससे भी महत्वपूर्ण उसका नक्षत्र पद
सूत्र 5: ग्रह की डिग्री और उसकी परिपक्क्वता की डिग्री से दुरी जैसे की सूर्य 10 अंश पर परम उच्च या नीच के हो जाते है. तो मान लीजिए सूर्य अगर तुला राशि में 7 भाव में है लेकिन डिग्री 28 है तो काफी हद तक विवाह में तकलीफ कम करेगा. ये एक टेक्निकल वर्क जिसको बारीकी से निकलना पड़ता है जिसे फिर कभी समझाऊंगा.
सूत्र 6: शुभ-बलशाली ग्रह की महादशा का सही उम्र में आना उसके कारक और परिपक्वता के अनुसार शुभता निकलए
सूत्र 7: वर्ग कुंडली का अध्ययन प्रश्न के अनुसार. उदहारण : पद प्रतिष्ठा के कारक सूर्य है तो उनकी स्थिति वर्ग चार्ट में और सूर्य से संभंधित वर्ग ही देखे सबसे पहले जैसे के D-1, D-4, D-9, D-10 में स्थिति
सूत्र 8: संगीति का असर, मतलब किन ग्रहो से युति है या नैना टकरा रहे है मतलब दृष्टि. अगर युति है तो किस ग्रह का प्रभुत्वा ज्यादा है
सूत्र 9: आखिरी में सुदर्शन चक्र में उस ग्रह की OVERALL शुभता देखनी चाहिए
तो मुझे लगता है सॉफ्टवेयर कुंडली बनाने के बाद योग कारक ग्रह अच्छा दिखने या फिर कुंडली में 2-3 उच्चा या स्वग्रही ग्रहो को देखने से ही परम सुख की अनुभूति नहीं करनी चाइये, आजकल नए ज्योतिषी भी सिर्फ इसी को देखकर फलादेश करने लगते है बल्कि ग्रह की शुभता को निकलना चाहिए. तो लब्बोलुबाब ये है की ग्रह बलि है 1 बात है लेकिन क्या वो ग्रह कुंडली में शुभ है अगर है तो अच्छे रिजल्ट्स देगा ही.
प्रतीक भट्ट
3 years ago (edited) | [YT] | 24
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Prateek Bhatt - Redefining Astrology
प्रतीक भट्ट से जुड़े लाइव और पूछे अपनी कुंडली के प्रश्न रविवार दोपहर 12 बजे 25/12/2022
PRATEEK BHATT will be LIVE on Sunday 12 PM IST 25/12/2022. Ask all your questions.
3 years ago (edited) | [YT] | 16
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Prateek Bhatt - Redefining Astrology
PRATEEK BHATT will be LIVE at 21 :00 PM today 20/12/2022. Ask all your questions.
प्रतीक भट्ट से जुड़े लाइव और पूछे अपनी कुंडली के प्रश्न आज रात 9 बजे
3 years ago (edited) | [YT] | 14
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Prateek Bhatt - Redefining Astrology
राहू शत्रु है ….लेकिन #केतु गुप्त #शत्रु, #2023 #मुबारक
3 years ago | [YT] | 8
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Prateek Bhatt - Redefining Astrology
ये धर्म युद्ध है (#UPElections2022). लेकिन द्वापर की तरह क्या हमेशा धर्म की विजय होगी
आज रात देखिये 9 बजे धर्म या अधर्म किसकी होगी जीत मेरे यूट्यूब चैनल Prateek Bhatt - Jyotish Phir Se
3 years ago | [YT] | 74
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