PART – 3 सुबह मैं वही नहीं था मुझे याद नहीं कि मैं कब सोया। या फिर… मैं सोया भी था या नहीं। लेकिन जब मेरी आँख खुली, तो बाहर सुबह की हल्की रोशनी थी। मैं अपने ही बिस्तर पर था। उसी कमरे में। सब कुछ बिल्कुल normal लग रहा था। कुछ पल के लिए मुझे लगा… शायद सब सपना था। मैं उठकर बैठ गया। सिर भारी लग रहा था। जैसे पूरी रात नींद ही न ली हो। मैंने अपने हाथों को देखा। वो मेरे ही थे। मेरे पैर… मेरे ही थे। लेकिन अंदर कहीं… कुछ अजीब सा था। जैसे मैं अपने शरीर के अंदर पूरा नहीं भरा हुआ था। मैं बाथरूम की तरफ गया। आईना सामने था। मैंने जैसे ही खुद को देखा… मैं रुक गया। आईने में खड़ा इंसान मैं जैसा ही दिख रहा था। लेकिन उसकी आँखें… बहुत देर तक मुझे घूरती रहीं। मैंने धीरे से अपना हाथ उठाया। आईने में… हाथ एक पल देर से उठा। मेरा गला सूख गया। मैंने खुद से कहा — “थकान है… वहम है…” मैं पीछे मुड़ गया। तभी मेरे पीछे से बहुत धीमी आवाज़ आई — “इतनी जल्दी भूल गए?” मेरे शरीर में जैसे जान ही नहीं बची। वो आवाज़ मेरे कानों में नहीं… मेरे दिमाग के अंदर थी। मैंने होंठ हिलाने की कोशिश की, पर बोल नहीं पाया। और तभी मुझे एहसास हुआ… मेरे चेहरे पर अपने-आप हल्की सी मुस्कान आ गई थी। वो मुस्कान मेरी नहीं थी। मैं डर गया। अंदर से पूरा टूट गया। लेकिन मेरा शरीर बिल्कुल शांत था। तभी वही आवाज़ फिर से आई — “डरो मत… मैं सिर्फ तुम्हारी मदद कर रहा हूँ।” मुझे समझ नहीं आया कि किससे… या किस बात से… तभी उसने कहा — “आज से तुम थकोगे नहीं। तुम डरोगे नहीं। और सबसे ज़रूरी…” हल्का सा pause… “तुम अकेले नहीं रहोगे।” उस पल मुझे पहली बार ये डर लगा… कि शायद मैं अब इस शरीर में अकेला नहीं हूँ। और सबसे डरावनी बात ये थी… मुझे अब डर कम लग रहा था।
PART – 2 मैंने पीछे मुड़कर देख लिया Part-1 के बाद बहुत लोग पूछते हैं कि क्या मैंने सच में पीछे मुड़कर देखा था। सच ये है… मैं खुद को रोक नहीं पाया। जब कोई तुम्हारे बिल्कुल पास बैठकर कहे — “पीछे मत मुड़ना” तो दिमाग एक ही सवाल पूछता है… क्यों? मैंने बहुत धीरे से अपनी गर्दन घुमानी शुरू की। ऐसा लग रहा था जैसे हवा भारी हो गई हो। कमरा वही था। बिस्तर वही था। लेकिन मेरे पीछे… कोई चेहरा नहीं था। कोई आँखें नहीं थीं। सिर्फ एक काली-सी परछाई थी। लेकिन असली डर तब लगा जब मुझे एहसास हुआ… वो परछाई मुझे नहीं देख रही थी। वो… मेरी आँखों से मुझे देख रही थी। मेरे हाथ सुन्न हो गए। पैर हिल नहीं पा रहे थे। मैं चीखना चाहता था, लेकिन आवाज़ नहीं निकली। तभी वही आवाज़ फिर से आई — “अब देर हो चुकी है…” मेरी आँखें खुली थीं, लेकिन मैं उन्हें बंद नहीं कर पा रहा था। मेरा शरीर मेरे control में नहीं था। मेरे पैर अपने-आप बिस्तर से नीचे उतरे। मेरे हाथ अपने-आप हिले। और मुझे महसूस हुआ कि वो… मेरे अंदर और गहराई से उतर रहा है। फिर उसने आख़िरी बार कहा — “अब तुम सो जाओ… मुझे सुबह उठना है।” अगली सुबह मैं अपने ही बिस्तर पर उठा। सब कुछ normal था। लेकिन आज भी जब मैं आईने में खुद को देखता हूँ… तो कभी-कभी… reflection मुझसे पहले हिल जाता है।
PART – 1 पीछे मत मुड़ना… मैं ये कहानी इसलिए सुना रहा हूँ क्योंकि आज भी मुझे नहीं पता कि उस रात मेरे साथ क्या हुआ था। या यूँ कहूँ… मेरे साथ कौन था। वो रात बिल्कुल normal थी। मैं अपने कमरे में अकेला था। लाइट बंद थी, AC चल रहा था और मोबाइल बिस्तर के पास पड़ा था। घड़ी में देखा तो रात के लगभग दो बज रहे थे। सब कुछ ठीक था। लेकिन अचानक मुझे अजीब सा महसूस हुआ। जैसे कोई मुझे देख रहा हो। मैंने कमरे में नज़र घुमाई। दरवाज़ा बंद था। खिड़की भी बंद थी। मैंने खुद से कहा — “वहम है।” मैं करवट बदलकर लेट गया। तभी मुझे अपने कान के पास किसी की साँसों की आवाज़ महसूस हुई। गरम… बहुत गरम। मेरी आँखें खुली की खुली रह गईं। और तभी किसी ने बहुत धीरे से कहा — “तुम सोए नहीं हो…” मेरे शरीर में जैसे बिजली दौड़ गई। आवाज़ जानी-पहचानी थी… लेकिन कमरे में मेरे अलावा कोई नहीं था। मैं बोलना चाहता था, पर आवाज़ गले में अटक गई। तभी मुझे महसूस हुआ कि बिस्तर थोड़ा-सा दबा। जैसे कोई मेरे पास बैठ गया हो। मेरे हाथ काँप रहे थे। दिल इतनी तेज़ धड़क रहा था कि साँस लेना मुश्किल हो गया। फिर वही आवाज़… इस बार और पास से आई — “पीछे मत मुड़ना…” उस आवाज़ में डर नहीं था। उसमें चेतावनी थी। और मुझे उसी पल समझ आ गया… अगर मैं पीछे मुड़ गया… तो शायद ये कहानी यहीं खत्म हो जाएगी।
इस दिवाली, बस एक ही तमन्ना है मेरी… तेरा चेहरा हमेशा यूँ ही मुस्कुराता रहे, जैसे दीयों की रौशनी हर अंधेरे को मिटा देती है, वैसे ही तेरी मुस्कान मेरी ज़िंदगी के हर ग़म को भुला देती है 💫
तेरे बिना ये त्योहार अधूरा लगता है, हर पटाखे की आवाज़ में बस तेरा नाम सुनाई देता है 💞 काश, इस बार दीये जलें हमारे साथ, और ये Diwali हमारे प्यार की शुरुआत बने 🪔💖
Happy Diwali, My Love! तू ही मेरी सबसे बड़ी रौशनी है… 🌙❤️
Agyatvasiho
PART – 3
सुबह मैं वही नहीं था
मुझे याद नहीं कि मैं कब सोया।
या फिर…
मैं सोया भी था या नहीं।
लेकिन जब मेरी आँख खुली,
तो बाहर सुबह की हल्की रोशनी थी।
मैं अपने ही बिस्तर पर था।
उसी कमरे में।
सब कुछ बिल्कुल normal लग रहा था।
कुछ पल के लिए मुझे लगा…
शायद सब सपना था।
मैं उठकर बैठ गया।
सिर भारी लग रहा था।
जैसे पूरी रात नींद ही न ली हो।
मैंने अपने हाथों को देखा।
वो मेरे ही थे।
मेरे पैर…
मेरे ही थे।
लेकिन अंदर कहीं…
कुछ अजीब सा था।
जैसे मैं अपने शरीर के अंदर
पूरा नहीं भरा हुआ था।
मैं बाथरूम की तरफ गया।
आईना सामने था।
मैंने जैसे ही खुद को देखा…
मैं रुक गया।
आईने में खड़ा इंसान
मैं जैसा ही दिख रहा था।
लेकिन उसकी आँखें…
बहुत देर तक
मुझे घूरती रहीं।
मैंने धीरे से अपना हाथ उठाया।
आईने में…
हाथ एक पल देर से उठा।
मेरा गला सूख गया।
मैंने खुद से कहा —
“थकान है… वहम है…”
मैं पीछे मुड़ गया।
तभी मेरे पीछे से
बहुत धीमी आवाज़ आई —
“इतनी जल्दी भूल गए?”
मेरे शरीर में जैसे जान ही नहीं बची।
वो आवाज़
मेरे कानों में नहीं…
मेरे दिमाग के अंदर थी।
मैंने होंठ हिलाने की कोशिश की,
पर बोल नहीं पाया।
और तभी
मुझे एहसास हुआ…
मेरे चेहरे पर
अपने-आप
हल्की सी मुस्कान आ गई थी।
वो मुस्कान मेरी नहीं थी।
मैं डर गया।
अंदर से पूरा टूट गया।
लेकिन मेरा शरीर
बिल्कुल शांत था।
तभी वही आवाज़ फिर से आई —
“डरो मत…
मैं सिर्फ तुम्हारी मदद कर रहा हूँ।”
मुझे समझ नहीं आया
कि किससे…
या किस बात से…
तभी उसने कहा —
“आज से
तुम थकोगे नहीं।
तुम डरोगे नहीं।
और सबसे ज़रूरी…”
हल्का सा pause…
“तुम अकेले नहीं रहोगे।”
उस पल
मुझे पहली बार
ये डर लगा…
कि शायद
मैं अब
इस शरीर में
अकेला नहीं हूँ।
और सबसे डरावनी बात ये थी…
मुझे अब डर
कम लग रहा था।
2 weeks ago | [YT] | 2
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Agyatvasiho
PART – 2
मैंने पीछे मुड़कर देख लिया
Part-1 के बाद बहुत लोग पूछते हैं कि क्या मैंने सच में पीछे मुड़कर देखा था।
सच ये है…
मैं खुद को रोक नहीं पाया।
जब कोई तुम्हारे बिल्कुल पास बैठकर कहे —
“पीछे मत मुड़ना”
तो दिमाग एक ही सवाल पूछता है…
क्यों?
मैंने बहुत धीरे से अपनी गर्दन घुमानी शुरू की।
ऐसा लग रहा था जैसे हवा भारी हो गई हो।
कमरा वही था।
बिस्तर वही था।
लेकिन मेरे पीछे…
कोई चेहरा नहीं था।
कोई आँखें नहीं थीं।
सिर्फ एक काली-सी परछाई थी।
लेकिन असली डर तब लगा जब मुझे एहसास हुआ…
वो परछाई मुझे नहीं देख रही थी।
वो…
मेरी आँखों से मुझे देख रही थी।
मेरे हाथ सुन्न हो गए।
पैर हिल नहीं पा रहे थे।
मैं चीखना चाहता था, लेकिन आवाज़ नहीं निकली।
तभी वही आवाज़ फिर से आई —
“अब देर हो चुकी है…”
मेरी आँखें खुली थीं, लेकिन मैं उन्हें बंद नहीं कर पा रहा था।
मेरा शरीर मेरे control में नहीं था।
मेरे पैर अपने-आप बिस्तर से नीचे उतरे।
मेरे हाथ अपने-आप हिले।
और मुझे महसूस हुआ कि वो…
मेरे अंदर और गहराई से उतर रहा है।
फिर उसने आख़िरी बार कहा —
“अब तुम सो जाओ…
मुझे सुबह उठना है।”
अगली सुबह मैं अपने ही बिस्तर पर उठा।
सब कुछ normal था।
लेकिन आज भी जब मैं आईने में खुद को देखता हूँ…
तो कभी-कभी…
reflection
मुझसे पहले
हिल जाता है।
2 weeks ago | [YT] | 1
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Agyatvasiho
PART – 1
पीछे मत मुड़ना…
मैं ये कहानी इसलिए सुना रहा हूँ क्योंकि आज भी मुझे नहीं पता कि उस रात मेरे साथ क्या हुआ था।
या यूँ कहूँ… मेरे साथ कौन था।
वो रात बिल्कुल normal थी।
मैं अपने कमरे में अकेला था।
लाइट बंद थी, AC चल रहा था और मोबाइल बिस्तर के पास पड़ा था।
घड़ी में देखा तो रात के लगभग दो बज रहे थे।
सब कुछ ठीक था।
लेकिन अचानक मुझे अजीब सा महसूस हुआ।
जैसे कोई मुझे देख रहा हो।
मैंने कमरे में नज़र घुमाई।
दरवाज़ा बंद था।
खिड़की भी बंद थी।
मैंने खुद से कहा — “वहम है।”
मैं करवट बदलकर लेट गया।
तभी मुझे अपने कान के पास किसी की साँसों की आवाज़ महसूस हुई।
गरम… बहुत गरम।
मेरी आँखें खुली की खुली रह गईं।
और तभी किसी ने बहुत धीरे से कहा —
“तुम सोए नहीं हो…”
मेरे शरीर में जैसे बिजली दौड़ गई।
आवाज़ जानी-पहचानी थी…
लेकिन कमरे में मेरे अलावा कोई नहीं था।
मैं बोलना चाहता था, पर आवाज़ गले में अटक गई।
तभी मुझे महसूस हुआ कि बिस्तर थोड़ा-सा दबा।
जैसे कोई मेरे पास बैठ गया हो।
मेरे हाथ काँप रहे थे।
दिल इतनी तेज़ धड़क रहा था कि साँस लेना मुश्किल हो गया।
फिर वही आवाज़… इस बार और पास से आई —
“पीछे मत मुड़ना…”
उस आवाज़ में डर नहीं था।
उसमें चेतावनी थी।
और मुझे उसी पल समझ आ गया…
अगर मैं पीछे मुड़ गया…
तो शायद ये कहानी यहीं खत्म हो जाएगी।
2 weeks ago | [YT] | 0
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Agyatvasiho
1 month ago | [YT] | 2
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Agyatvasiho
whatsapp.com/channel/0029VbAWxEuAojYyCXNThT2g
1 month ago | [YT] | 0
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Agyatvasiho
1 month ago | [YT] | 2
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Agyatvasiho
स्पने टूटा खूब टूटा टूटा लोगो पर से भरोसा अब बची है तो मेरे सास देखते हैं अब वो कब टूटेगी
2 months ago | [YT] | 3
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Agyatvasiho
तुम हक़ीक़त नहीं हो हसरत' हो
जो मिले ख़्वाब में वो दौलत हो
मैं तुम्हारे ही दम से जिंदा हूँ
मर ही जाऊँ तो तुमसे फुर्सत हो
तुम हो ख़ुशबू के ख़्वाब की खुशबू और इतने ही बेमुरव्वत' हो
तुम हो पहलू' में पर क़रार नहीं
यानी ऐसा है जैसे फुर्कत हो
तुम हो अंगड़ाई रंग-ओ-निकहत' की कैसे अंगड़ाई से शिकायत हो
है मेरी आरजू कि मेरे सिवा
तुमको सब शायरों से वहशत हो
किस तरह छोड़ दूँ तुम्हें जानाँ
तुम मेरी जिंदगी की आदत हो
किसलिए देखते हो आईना
तुम तो ख़ुद से भी खूबसूरत हो
दास्ताँ ख़त्म होने वाली है
तुम पेरी आख़िरी मुहब्बत हो
2 months ago | [YT] | 4
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Agyatvasiho
🌸✨ Diwali Message for My Love ✨🌸
इस दिवाली, बस एक ही तमन्ना है मेरी…
तेरा चेहरा हमेशा यूँ ही मुस्कुराता रहे,
जैसे दीयों की रौशनी हर अंधेरे को मिटा देती है,
वैसे ही तेरी मुस्कान मेरी ज़िंदगी के हर ग़म को भुला देती है 💫
तेरे बिना ये त्योहार अधूरा लगता है,
हर पटाखे की आवाज़ में बस तेरा नाम सुनाई देता है 💞
काश, इस बार दीये जलें हमारे साथ,
और ये Diwali हमारे प्यार की शुरुआत बने 🪔💖
Happy Diwali, My Love!
तू ही मेरी सबसे बड़ी रौशनी है… 🌙❤️
2 months ago | [YT] | 3
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Agyatvasiho
2 months ago | [YT] | 6
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