भोर की किरण ने मुझे जगाया । धूप सुनहरी ने रूप दिखाया ।। कलरव करते मधुर विहंग । दिल में उठती नई उमंग।। मधुकर झूमे देख पुहुप। कली ले रही यौवन रूप।। हल्की - हल्की जब चले बयार। रिमझिम सावन की गिरे फुहार।। उस पर कोयल की कूक पुकार। तब अधिक सताये तेरा प्यार। । काले ,भूरे, बादल घेर रहे हैं । चलते दिख वो सुमेर रहे हैं।। सतरंगी बन इन्द्रधनुष । मानो दामिनी को टेर रहे हैं।। भादो की काली अंधियारी । जैसे हो नागिन इच्छाधारी। । वो रूप बदलकर खूब डराए। मानो अभी - अभी डसने को आए।। हरियाली ने हर रंग सजाया। मन मोहकता से भर आया।। भोर की किरण ने मुझे जगाया। धूप सुनहरी ने रूप दिखाया।।
Anoop Kum5120
सभी को राधे राधे
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Anoop Kum5120
🌹🌹🌹🌹🌹🙏
रचना 6/9/2025
दृष्टिकोण
जिसका कोई अंत नहीं है जिसका ना है कोई आदि।
वह ईश्वर हम सब का रक्षक है ,जो है अनंत अनादि।।
वो निरंकार, साकार वही है,वो ही घट- घट का है वासी।
जिसके दर्शन को सब तरसे देव ,दनुज ऋषि - मुनि, नारदादि
अनंत चतुर्दशी की हार्दिक शुभकामनाएं
जय हिन्द जय साहित्य
सादर घायल परिन्दा
🌹🌹🌹🌹🌹🙏
3 months ago | [YT] | 0
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Anoop Kum5120
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[05 09 25]
दृष्टिकोण
भोर की किरण ने मुझे जगाया ।
धूप सुनहरी ने रूप दिखाया ।।
कलरव करते मधुर विहंग ।
दिल में उठती नई उमंग।।
मधुकर झूमे देख पुहुप।
कली ले रही यौवन रूप।।
हल्की - हल्की जब चले बयार।
रिमझिम सावन की गिरे फुहार।।
उस पर कोयल की कूक पुकार।
तब अधिक सताये तेरा प्यार। ।
काले ,भूरे, बादल घेर रहे हैं ।
चलते दिख वो सुमेर रहे हैं।।
सतरंगी बन इन्द्रधनुष ।
मानो दामिनी को टेर रहे हैं।।
भादो की काली अंधियारी ।
जैसे हो नागिन इच्छाधारी। ।
वो रूप बदलकर खूब डराए।
मानो अभी - अभी डसने को आए।।
हरियाली ने हर रंग सजाया।
मन मोहकता से भर आया।।
भोर की किरण ने मुझे जगाया।
धूप सुनहरी ने रूप दिखाया।।
जय हिन्द जय साहित्य
सादर घायल परिन्दा
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