singer manjit satnami

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लोक गायक मंजित सतनामी

2 months ago | [YT] | 13

singer manjit satnami

सिंगर मंजित सतनामी
Singer manjit satnami

4 months ago | [YT] | 15

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बाजा मानिकपुर संपर्क करें 9630293013

5 months ago | [YT] | 14

singer manjit satnami

आप सभी को 1दिसम्बर गुरु पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं
सिंगर मंजित सतनामी

10 months ago | [YT] | 9

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सिंगर मंजित सतनामी
हमारे ग्राम बघमार में जोड़ा सेत खाम में परम पूज्य बाबा गुरु घासी दास जी छवि चित्र दिखाए दिया 🙏 बाबा जी साक्षात दर्शन दिया जय सतनाम 🙏🙏

11 months ago | [YT] | 8

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Coming soon

11 months ago | [YT] | 9

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""गुरुमाता सहोद्रा माता जी को जानने के लिए एक बार पूरा पढ़ें, गर्व से सीना चौड़ा हो जाएगा..""

परम पूज्य गुरु घासीदास जी ने कभी भी अपने जीवन काल मे सतनाम के छोड़ किसी को भी महत्व नही दिया.. न ही तो किसी के बारे में बताया है..
और उन्ही के ज्ञान संस्कार को माता सहोद्रा जो कि गुरु घासीदास जी के बड़े बेटी है.. ज्ञान गुणी गुणवान..सतनाम अनमोल रत्न..
माता जी के पास सतनाम के अद्भुत शक्ति थी... कहते है माता जी सतनाम शक्ति से भविष्य काल को भी जान जाती थी...जब माता जी के शादी हुई बुद्धू दीवान के साथ तो माता जी अपने ससुराल रिसदा (मस्तूरी ब्लॉक) में कुछ एक साल बिताए फिर... लगभग साल भर बाद माता जी अपने पति और बच्चे के साथ गांव कुटेला जो की पहले बंजर भाठा था में घर बनाकर रहने के सोंची और जाकर वही पर बसी...
फिर जब माता जी को पास के गांव वाले बसते देखे तो आसपास के गांव वाले लोग सभी जाति के लोग भी इच्छा जाहिर किये कि माता जी हम लोग भी आपके साथ रहना चाहते है...(माता जी जो कुटेला गांव बसाई है वो पहले बंजर भाठा था) तो माता जी ने गांव वालों के पास एक शर्त रखी कि मुझे मंजूर है कि मैं आप लोगो को यहां बसने दूंगी लेकिन मेरी एक शर्त है...,
जो शर्त का पालन करेगा वही इस गांव में बस सकता है..., और जिन्हें मंजूर न होगा वो हंसी खुशी जा सकते है कोई बात नही..
तो सभी लोग बोले कि माता जी हमे आपके सभी शर्त मंजूर है आप बताइए वो क्या शर्ते है..
तो माता जी बोले कि
1. यहां रहने वाले सभी केवल एक नाम सतनाम में अटल रहेंगे..केवल सतनाम सतपुरुष पिता पर विश्वास करेंगे..,
2. इस गांव में किसी भी प्रकार के देवी देवता का पूजा नही होगी..,
3. यहां कभी भी मूर्ति पूजा नही होगी..और न ही तो कभी मूर्ति स्थापना होगी..,
4. यहां केवल जोड़ा जैतखाम(सरई/साजा लकड़ी के) ही सब कुछ होगा.. किसी को कुछ भी परेशानी होती है तो जैतखाम में तन और मन को लेकर सतगुरु के ध्यान कर अपना दुःख तकलीफ निवारण करना...,
5. यहां कोई बैगा पंडित का कोई काम नही होगी..सब कुछ सतनाम से ही होगी..,
6. सभी को सतनाम के मार्ग धारण करना होगा औऱ सत के मार्ग पर चलना होगा..., अपने कर्म को सुधारकर..,
7. यहां किसी भी प्रकार के कोई जात धर्म वाले बात नही होगी...सब आपसी प्रेम भाईचारे के साथ रहेंगे...,
8. यहां होलिका नही जलेगी कभी भी..., नारी, नारी होती है चाहे वो कोई भी हो, और होलिका के नाम पर खुलेआम गाली गलौज करना एकदम अनुचित है, यह हमारे संस्कार नही है.., (एक और बात कि होलिका से सतनामियों के कोई रिश्ता नही है, बस नारी के सम्मान के बात थी इसीलिए मनाही है..)
9. और न ही तो किसी भी प्रकार के अंधविश्वास रूढ़िवादी परम्परा वादी तीज त्यौहार मनाई जाएगी.., आजकल तीज त्यौहार के नाम पर खुलेआम जुआ चित्ती, मंद मांस सेवन, जीव बलि, झगड़ा लड़ाई, हुम् धूप हो रहा है.., ऐसा कोई भी त्यौहार नही जो आज रक्त और शराब से रंगा न हो..
10. कोई भी यहां पितर नही मनाएगा.. इत्यादि...
इस प्रकार माता जी ने गांव वालों के सामने ये शर्तें रखी...तो इस शर्त को जानकर सुनकर...जिनको स्वीकार थे वे सभी लोग हां कहा कि हम लोग आज से आप ही के बताए अनुसार चलेंगे...आप हमारे गुरु है... आप हमें सत राह दिखाएंगे और हम चलेंगे...माता जी करके....,
अब देखिए इसमे ताज्जुब के बात यह है कि इस शर्त को मानने वाले केवल सतनामी जाति के ही नही बल्कि दूसरे जाति के भी थे तेली, राऊत, कुर्मी धोबी, लोहार मतलब हिंदू धर्म के मानने वाले भी शामिल थे उन सबने इस बात पर स्वीकृति दिए और गांव में हंसी खुशी बसे....और उस गांव में फिर जैतखाम के साथ सतनाम के ज्योत जली और सभी गांव वाले सुख शांति से जीवन यापन किये....
बताते है कि
यह प्रमाणित है कि माता जी आज भी संत समाज को तीन रूप में दर्शन देती है
1. छोटी बच्ची के रूप में बेटी बनकर,
2. महिला के रूप में माता बनकर,
3. बुढ़िया के रूप में डोकरी दाई बनकर,
अब इसमें तर्क लगाने वाले बात यह है कि आज के हमारे लोग बोलते है कि हम हिंदू धर्म के देवी देवता को नही मानेंगे तो हमे सम्मान कहाँ से मिलेगा...,
इन लोगो को माता जी से सिख लेना चाहिए...
हमारे गुरुवंशज लोग खुलेआम हिंदू धर्म के देवी देवताओं के पूजा करते है मंदिर जाते है, औऱ इनके अन्धराभक्त लोग बोलते है कि हमारे गुरु राजनीति करते है तो सबके सम्मान करना पड़ता है.... तो क्या माता जी किसी का सम्मान नही करती थी..?
करती थी लेकिन प्रचार प्रसार ज्ञान सब सतनाम के देती थी...अरे कहे आये है कि
सतनाम में कोई जोर जबरदस्ती नही.. जो हंसा सतनाम नाम लेकर आएगा उस हंसा को तुम मेरे पास आने देना उसे तुम रोक नही पाओगे... उसके सामने तुम्हारा सब कुछ माटी के समान है काल निरंजन...!!!
इसी बात को ध्यान में रख माता जी ने सबके सामने अपनी बात रखी..., जिनको आना था वो साथ आये बाकी किसी मे कोई जोर जबरदस्ती नही था...
एक बार के बात है जो एकदम वास्तविक है सन तो भूल गया लेकिन ज्यादा वर्ष नही हुआ है यही 8-10 हुआ है,
कि गांव कुटेला धाम में माता जी के महिमा प्रमाण के परीक्षा लेने के लिए कुछ लोग जानबूझ कर नवरात्रि के टाइम दुर्गा देवी के मूर्ति बिठाने के लिए सोंचे और जब बिठाने के दिन आये तो गांव में ले जा रहे थे दुर्गा को तभी अचानक से वो मूर्ति अपने आप टूट गया और माता जी के शक्ति एक महिला के ऊपर आई और गुस्से में गांव वालों को बोली कि "तुम लोग को पता नही है क्या की ये किसका गांव है..? यहां कौन बैठा है और कौन बैठायी है..? आज के बाद ऐसा नही होना चाहिए दोबारा नही तो अंजाम के लिए तैयार रहना," और वही एक दूसरी महिला पर दुर्गा देवी के शक्ति प्रवेशी हुई तो उसको भी माता जी ने फटकार लगाई थी, "भूल गई क्या यहां कौन बैठी है..? फिर भी आ गई, आज के बाद दोबारा मेरे गांव आओगी तो सोंच लेना, और फिर जवाब में देवी बोलती है कि मैं नही आ रही थी, गांव के लोगो ने ही बुलाए तो आयी, मुझे माफ़ कर दो माता जी आज के बाद दोबारा ऐसी नही होगा, माफ कर दीजिए मुझे.." इस तरह फिर माता जी ने गांव वालों को मूर्ति को तुरंत पानी मे ठंडा करने को बोली... ये एक वास्तविक घटना है, जो कुटेला धाम में घटा है आज भी जा के पूछ सकते है.., सतनामियों में इतना प्रमाण होने के बावजूद भी देवी देवता मानना, मंदिरों में जाना, एक दम कुछ कह नही सकते.. और ऐसे गुरु और गुरुमाता के वंशज होकर आज के वंशज लोग राजनीति लाभ के लिए बहुत ही शर्म की बात है..😢😢
वर्तमान वंशजो को माता जी से सिख लेना चाहिए कि किस तरह माता जी ने अपने पिता के अधूरे कार्य को पूरा करने के लिए किस तरह बेबाकी से अपने शर्त रख गांव बसाई जो आज भी प्रमाण है... और आज के हमारे गुरु वंशज है जो लोग कितने बेबाकी से राजनीति फायदे के लिए अपने ही पुरखा गुरु घासीदास जी के अधूरे सपने को औऱ पीछे ले जाते जा रहे हैं... और उनके संदेशों को लतियाते जा रहे है.... सिख लेना चाहिए इन लोगो को माता जी से....
साहब यू ही कोई गुरु और गुरुमाता नही बन जाता है, नाम के आगे पीछे लगाने से, कई त्याग, तपस्या, कड़ी मेहनत के फल होते है जो उसे सतगुरु कृपा से, और संत समाज के आशीष, मया दुलार से मिलता है, कर्म करना पड़ता है एक नाम में अटल रहना पड़ता है.., तब जा के "गुरु" शब्द समाज के लोग लगाते है, ज्ञानी आदमी स्वयं से अपने नाम के आगे पीछे गुरु नही लगाते, लोगो को लुभाने के लिए पल भर में गिरगिट के तरह रूप नही बदला करते है....
" तोर नाम के ज्योत जलाथे, हिंदू अउ सतनामी दाई वो,
देवी देवता ल माने नही, सत के धरे निशानी वो.. "

#सतनाम_सतपुरुष_पिता
#गुरु_घासीदास_जी
#जय_सतनाम
#साहेब_सतनाम
#सतनाम_छत्तीसगढ़

1 year ago | [YT] | 11

singer manjit satnami

Mera sad 😭 aa gaya sagwari ho like शेयर कॉमेंट सब्सक्राइब जरूर करे https://youtu.be/234U9RbEf4o?si=3ESUf...

1 year ago | [YT] | 2

singer manjit satnami

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1 year ago | [YT] | 5

singer manjit satnami

आज मिलो फिर मुंगेली में

1 year ago | [YT] | 101