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Maulana Saad Sahab Bayanat | Dawat-o-Tabligh Ki Awaz
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tabligh ka rasta
Alert ahle sunnat Wal jamat
2 weeks ago | [YT] | 37
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tabligh ka rasta
आज से लगभग 20–30 साल पहले मुसलमानों के अंदर एक बहुत ख़बीस टोल़ा पैदा हुआ था।
इस ख़बीस टोल़े का मक़सद सिर्फ़ एक था —
कि मुस्लिम समाज में जिन उलमा-ए-कराम को क़बूल-ए-आम हासिल है (जैसे क़ारी तैय्यब साहब, मौलाना इलियास साहब, मौलाना साद साहब वगैरह वगैरह) — उनको दबाना, उनको एक्सपोज़ करना और उनके ख़िलाफ़ प्रोपेगेंडा करना।
बहुत सारी कोशिशें करने के बाद और लगातार प्रोपेगेंडा चलाने के बावजूद भी वो अपने मक़सद में पूरी तरह कामयाब नहीं हो पा रहे थे।
फिर इस ख़बीस टोल़े ने दारुल उलूम देवबंद का सहारा लेना शुरू किया।
इसलिए कि मुस्लिम समाज आम तौर पर हर मसले में दारुल उलूम देवबंद के फतवे को बहुत अहमियत देता है। बल्कि दूसरे लफ़्ज़ों में कहें तो ये मुस्लिम समाज की एक बड़ी कमज़ोरी भी है कि जब दारुल उलूम देवबंद का नाम आ जाता है, तो किसी को इख़्तिलाफ़ की गुंजाइश नहीं रहती।
इस टोल़े ने दारुल उलूम देवबंद से दावत व तब्लीग़ की बड़ी-बड़ी हस्तियों के बारे में इस्तिफ़्ता किया, जिनमें मौलाना साद साहब दामत बरकातुहुम का नाम सबसे ऊपर था।
मनगढ़ंत सवाल बनाकर अपने मतलब का फतवा हासिल किया गया।
और सिर्फ़ इतना ही नहीं, बल्कि मुल्क के दूसरे दारुल इफ्ता को भी गुमराह करने की कोशिश की गई — और कुछ हद तक वो इसमें कामयाब भी हुए।
जैसा पहले कहा गया कि दारुल उलूम देवबंद का नाम आते ही उम्मत हथियार डाल देती है।
बस फिर क्या था — फतवा हासिल कर लिया गया।
और ऐसी सियासत की गई कि हर जगह, हर मजलिस में, हर बयान में — “देवबंद का फतवा” बोल-बोलकर मासूम उम्मत को गुमराह करने की कोशिश की गई।
कुछ हद तक वो लोग इसमें कामयाब भी हो गए।
लेकिन जब फतवों की क्रॉस-चेकिंग हुई, और तब्लीगी अकाबिर के बयानों को किताबों में तलाश किया गया — तो उन बयानों के मरजअ व माख़ज़ कहीं न कहीं मिल गए।
जब हवाले सामने आए, तो फिर नया इल्ज़ाम लगाया गया — कि ये बयान “मरजूह” हैं।
फिर कहा गया — ये जम्हूर के मौक़िफ़ के खिलाफ़ हैं।
बेचारी मासूम उम्मत ये बात न समझ सकी कि पहले इन बयानों को “ख़िलाफ़-ए-शरीअत” कहा जा रहा था, और जब हवाले सामने आ गए तो अब कहा जाने लगा कि ये “जम्हूर के खिलाफ़” हैं।
तब पता चला कि जिन्होंने फतवा हासिल किया था, उन्हें खुद ही ठीक से मालूम नहीं था कि मामला शरीअत का है या सिर्फ़ इख़्तिलाफ़-ए-राय का।
अब सवाल ये पैदा होता है —
अगर किसी आलिम की बात जम्हूर के मौक़िफ़ के खिलाफ़ हो, तो क्या उस पर कुफ़्र या गुमराही का फतवा लगाया जा सकता है?
क्या हर इख़्तिलाफ़ गुमराही होता है?
जब कुछ मुतअदिल उलमा और मुफ़्तियान के सामने इस टोल़े के दोनों चेहरे आए, तो उन्होंने खामोशी इख़्तियार कर ली।
लेकिन सबसे ज़्यादा नुक़सान किसका हुआ?
उन लोगों का जिन्हें देवबंद का फतवा दिखाकर दावत व तब्लीग़ से दूर कर दिया गया।
वो लोग न दीन के रहे, न दुनिया के।
न दावत व तब्लीग़ के रहे, न फतवे के।
बस कन्फ्यूज़न में पड़ गए।
सियासत बहुत गंदी चीज़ है।
अगर सियासत दीन की नशर व इशाअत के लिए हो, तो मक़बूल भी होती है और फ़ायदेमंद भी।
लेकिन अगर सियासत किसी तहरीक, किसी जमात या किसी बड़े आलिम के खिलाफ़ हो — तो उसका नुक़सान आम लोगों को भुगतना पड़ता है।
उलमा तो किनारा कर लेते हैं।
लेकिन आम लोग परेशान हो जाते हैं — किसे मानें? किसे फॉलो करें? किस जमात से जुड़ें?
अगर ऐसे माहौल में किसी मुतअदिल और सही आलिम की रहनुमाई मिल जाए, तो इंसान बच जाता है।
लेकिन अगर रहनुमाई न मिले — तो लोग घर बैठ जाते हैं।
आज हम देख रहे हैं कि बहुत से लोग जो पहले बहुत मुतहर्रिक थे, हर फील्ड में काम करते थे — अब अपने घर और कारोबार तक महदूद हो गए हैं।
ना ताईद कर पाते हैं, ना तर्दीद।
कुछ लोग तो अंधी भक्ति के ऐसे लेवल तक पहुँच गए हैं कि उन्हें सिर्फ़ वही बात सच लगती है जो उनके टोल़े ने बताई है।
आज अल्लाह तआला ने उस ख़बीस टोल़े को और उसके अंधे मुरीदों को काम से हटा दिया है।
लेकिन जो लोग शुरू से हक़ पर थे, और मुतअदिल उलमा की रहनुमाई में काम कर रहे थे — अल्लाह आज भी उनसे दुनिया भर में काम ले रहा है।
जमातें निकल रही हैं।
दुनिया के कोने-कोने में जा रही हैं।
अल्लाह के दीन की शमा रोशन कर रही हैं।
अब सवाल ये है —
अगर वो फतवा कई साल पहले आ चुका था, तो आज भी उसे बार-बार क्यों दिखाया जाता है?
क्या इसलिए कि लोग उसे पूरी तरह कबूल नहीं कर रहे?
आज लोग सिर्फ़ अकीदत से नहीं, बल्कि बसीरत के साथ काम कर रहे हैं।
लोग पढ़ रहे हैं, समझ रहे हैं, हवाले देख रहे हैं।
आख़िर में हम अल्लाह तआला से दुआ करते हैं —
कि अल्लाह हमें हक़ को हक़ समझने की तौफ़ीक़ दे,
बातिल को बातिल समझने की समझ दे,
और उम्मत को फितनों से महफूज़ रखे।
आमीन।
Mufti salim sahab foundation
4 weeks ago | [YT] | 13
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tabligh ka rasta
😭😭😭😭😭
4 weeks ago | [YT] | 671
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tabligh ka rasta
Please share nd subscribe my channel
4 weeks ago | [YT] | 6
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tabligh ka rasta
Sahi jawab
4 weeks ago | [YT] | 24
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tabligh ka rasta
Assalamualaikum
4 weeks ago | [YT] | 311
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CMTS please
4 weeks ago | [YT] | 709
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Assalamualaikum
4 weeks ago | [YT] | 114
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1 month ago | [YT] | 453
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1 month ago | [YT] | 453
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