बारबरीक के पास तीन अद्भुत बाण थे और वह किसी भी युद्ध का परिणाम पल भर में बदल सकते थे।

श्रीकृष्ण ने उनसे पूछा कि अगर वे महाभारत का युद्ध लड़ें तो किसका साथ देंगे?

उन्होंने कहा – “जो हारता दिखेगा, मैं उसका साथ दूँगा।”

इससे धर्म और अधर्म के संतुलन पर प्रभाव पड़ता, इसलिए श्रीकृष्ण ने उनसे दान में उनका सिर माँगा।

बारबरीक ने अपना सिर खुशी-खुशी दे दिया।

युद्ध के दौरान उनका सिर ऊँचे स्थान पर रखकर पूरे युद्ध का साक्षी बनाया गया।