Abhay Kumar Tecnical boss

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Abhay Kumar Tecnical boss

कल का मौसम 15 जून 2026: बिहार में मानसून की रफ्तार तेज, पटना सहित 20 जिलों में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट
बिहार में दक्षिण-पश्चिम मानसून तेजी से सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार मानसून की उत्तरी सीमा मुजफ्फरपुर सहित कई क्षेत्रों से गुजर रही है और अगले कुछ दिनों में पूरे बिहार में फैलने की संभावना है। 15 जून को पटना समेत लगभग 20 जिलों में तेज बारिश, गरज-चमक और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। �
Jagran +1
मौसम विभाग का अलर्ट
मौसम विभाग ने 15 जून के लिए बिहार के कई जिलों में भारी वर्षा और तेज हवाओं की संभावना जताई है। कुछ स्थानों पर हवा की रफ्तार 50 से 80 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। गरज के साथ बिजली गिरने की भी आशंका है, इसलिए लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। �
Navbharat Times +1
किन जिलों में ज्यादा असर?
पटना, गया, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, समस्तीपुर, वैशाली, सीतामढ़ी, मधुबनी, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सहरसा, सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर, बांका, जमुई और आसपास के जिलों में बारिश और आंधी का प्रभाव अधिक देखने को मिल सकता है। �
Jagran +1
पटना का मौसम
राजधानी पटना में दिनभर बादल छाए रहने की संभावना है। कई इलाकों में तेज बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चल सकती हैं। इससे तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को गर्मी व उमस से राहत मिलेगी। �
Jagran +1
किसानों के लिए राहत
मानसून की सक्रियता से धान की रोपाई और अन्य खरीफ फसलों की तैयारी कर रहे किसानों को फायदा मिलेगा। पर्याप्त वर्षा होने से खेतों में नमी बढ़ेगी और सिंचाई की आवश्यकता कम होगी। हालांकि तेज हवा और वज्रपात के दौरान खेतों में काम करने से बचने की सलाह दी गई है। �
Amar Ujala +1
लोगों के लिए जरूरी सावधानियां
खराब मौसम के दौरान घर से बाहर निकलने से बचें।
बिजली कड़कने पर पेड़ों के नीचे खड़े न हों।
मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग सावधानी से करें।
खुले मैदान और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें।
मौसम विभाग के ताजा अपडेट पर नजर रखें। �
Navbharat Times +1
निष्कर्ष
15 जून 2026 को बिहार में मानसून पूरी तरह सक्रिय रहने की संभावना है। पटना सहित लगभग 20 जिलों में भारी बारिश, तेज आंधी और वज्रपात का अलर्ट जारी किया गया है। इससे गर्मी से राहत मिलेगी, लेकिन लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। �

2 weeks ago | [YT] | 3

Abhay Kumar Tecnical boss

बिहार भूमि समाचार 2026 – पूरी जानकारी विस्तार से (Step By Step)
बिहार में जमीन से जुड़े विवाद, फर्जी दाखिल-खारिज, सरकारी जमीन पर कब्जा और गलत तरीके से जमीन की खरीद-बिक्री को रोकने के लिए बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इनका उद्देश्य भूमि रिकॉर्ड को पारदर्शी बनाना और आम लोगों को उनकी जमीन की सही जानकारी उपलब्ध कराना है।
भाग 1: दाखिल-खारिज (Mutation) क्या है?
दाखिल-खारिज वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा जमीन खरीदने, विरासत मिलने या दान मिलने के बाद नए मालिक का नाम सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज किया जाता है।
उदाहरण
यदि राम ने श्याम से जमीन खरीदी है, तो रजिस्ट्री के बाद जमीन का मालिकाना रिकॉर्ड राम के नाम करने की प्रक्रिया को दाखिल-खारिज कहते हैं।
भाग 2: फर्जी दाखिल-खारिज पर सरकार की कार्रवाई
कुछ लोग अधिकारियों के नाम से नकली आदेश बनाकर जमीन अपने नाम करवाने की कोशिश कर रहे थे।
सरकार ने क्या किया?
स्टेप 1
संदिग्ध दाखिल-खारिज मामलों की जांच शुरू की गई।
स्टेप 2
फर्जी आदेश अपलोड करने वाले लोगों की पहचान की गई।
Step 3
दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
Step 4
गिरफ्तार लोगों के लैपटॉप, प्रिंटर और बायोमेट्रिक मशीन जब्त किए गए।
Step 5
भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए ऑनलाइन निगरानी बढ़ाई गई।
भाग 3: सरकारी जमीन की पहचान कैसे करें?
कई बार लोग अनजाने में सरकारी जमीन खरीद लेते हैं, जिससे बाद में बड़ी समस्या हो सकती है।
इसीलिए बिहार सरकार ने सरकारी जमीन खोजने की सुविधा उपलब्ध कराई है।
सरकारी जमीन जांचने की प्रक्रिया
स्टेप 1
बिहार भूमि पोर्टल खोलें।
स्टेप 2
"Search Government Land" विकल्प चुनें।
स्टेप 3
अपना जिला चुनें।
स्टेप 4
अंचल (Circle) चुनें।
स्टेप 5
मौजा (Village) चुनें।
स्टेप 6
खेसरा संख्या दर्ज करें।
स्टेप 7
खोज (Search) बटन दबाएं।
स्टेप 8
सिस्टम बताएगा कि जमीन सरकारी है या निजी।
भाग 4: मठ-मंदिर की जमीन बचाने के लिए सरकार का अभियान
बिहार में कई मंदिरों और मठों की जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायतें मिली थीं।
सरकार के कदम
Step 1
धार्मिक न्यास बोर्ड और राजस्व विभाग की बैठक हुई।
Step 2
अतिक्रमित जमीनों की सूची तैयार की गई।
Step 3
विशेष सेल (Special Cell) बनाई गई।
Step 4
अवैध कब्जाधारियों की पहचान शुरू हुई।
Step 5
कब्जा हटाने की कार्रवाई शुरू की गई।
भाग 5: बिहार विशेष भूमि सर्वेक्षण (Land Survey)
यह बिहार सरकार की सबसे बड़ी भूमि परियोजनाओं में से एक है।
सर्वे का उद्देश्य
जमीन का सही रिकॉर्ड तैयार करना।
सीमा विवाद खत्म करना।
डिजिटल रिकॉर्ड बनाना।
जमीन के वास्तविक मालिक की पहचान करना।
सर्वे के दौरान क्या होगा?
Step 1
सर्वे टीम गांव में पहुंचेगी।
Step 2
हर प्लॉट और खेसरा का मापन होगा।
Step 3
जमीन मालिकों से दस्तावेज लिए जाएंगे।
Step 4
सीमा की जांच होगी।
Step 5
रिकॉर्ड कंप्यूटर में दर्ज होगा।
Step 6
ड्राफ्ट प्रकाशित किया जाएगा।
Step 7
आपत्ति होने पर सुनवाई होगी।
Step 8
अंतिम रिकॉर्ड जारी किया जाएगा।
भाग 6: यदि परिवार में बंटवारा नहीं हुआ है तो क्या होगा?
बहुत से परिवारों में जमीन का बंटवारा नहीं हुआ है।
ऐसी स्थिति में:
Step 1
सर्वे टीम जमीन का रिकॉर्ड देखेगी।
Step 2
पूर्वजों के नाम दर्ज किए जाएंगे।
Step 3
सर्वे कार्य नहीं रुकेगा।
Step 4
बाद में परिवार आपसी सहमति से बंटवारा करा सकता है।
भाग 7: जमाबंदी क्या है?
जमाबंदी जमीन का सरकारी रिकॉर्ड होता है जिसमें मालिक का नाम और जमीन का विवरण दर्ज रहता है।
भाग 8: जमाबंदी ऑनलाइन कैसे देखें?
Step By Step प्रक्रिया
Step 1
बिहार भूमि पोर्टल पर जाएं।
Step 2
"जमाबंदी पंजी देखें" विकल्प चुनें।
Step 3
अपना जिला चुनें।
Step 4
अंचल चुनें।
Step 5
मौजा चुनें।
Step 6
खाता संख्या, खेसरा संख्या या नाम दर्ज करें।
Step 7
Search बटन दबाएं।
Step 8
जमाबंदी रिकॉर्ड स्क्रीन पर दिखाई देगा।
भाग 9: जमाबंदी में क्या-क्या जानकारी होती है?
रैयत (मालिक) का नाम
पिता/पति का नाम
खाता संख्या
खेसरा संख्या
जमाबंदी संख्या
भूमि का प्रकार
कुल रकबा
लगान की जानकारी
भाग 10: जमीन खरीदने से पहले क्या जांच करें?
1. जमाबंदी जांचें
मालिक का नाम सही है या नहीं।
2. दाखिल-खारिज जांचें
Mutation पूरा हुआ है या नहीं।
3. सरकारी जमीन जांचें
जमीन सरकारी तो नहीं है।
4. सर्वे रिकॉर्ड देखें
सर्वे रिकॉर्ड और जमाबंदी का मिलान करें।
5. लगान रसीद देखें
लगान नियमित जमा हो रहा है या नहीं।
6. न्यायालय विवाद जांचें
जमीन किसी केस में फंसी तो नहीं है।
7. रजिस्ट्री दस्तावेज देखें
पिछली खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड जांचें।
निष्कर्ष
बिहार सरकार भूमि रिकॉर्ड को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में काम कर रही है। फर्जी दाखिल-खारिज पर सख्त कार्रवाई, सरकारी जमीन की ऑनलाइन पहचान, मंदिर-मठ की जमीनों की सुरक्षा और विशेष भूमि सर्वेक्षण जैसे कदमों से भविष्य में जमीन विवाद कम होने की उम्मीद है। किसी भी जमीन की खरीद-बिक्री से पहले जमाबंदी, दाखिल-खारिज, सर्वे रिकॉर्ड और सरकारी भूमि की स्थिति अवश्य जांचें। इससे आप धोखाधड़ी और कानूनी समस्याओं से बच सकते हैं।

3 weeks ago | [YT] | 0

Abhay Kumar Tecnical boss

इस कमेंट में व्यक्ति अपनी जमीन सर्वे (Land Survey) से जुड़ी समस्या बता रहा है।
उसने लिखा है:
“एक केवाला पर 2000 हजार रुपए सर्व अमीन मांगा जा रहा है, इसी कारण से कोई कागज नहीं दिया गया ❤️ बिहार मधेपुरा कुमारखंड बेराद”
इसका सरल और सही मतलब यह है कि:
बिहार के मधेपुरा जिले के कुमारखंड क्षेत्र में जमीन सर्वे के दौरान सर्वे अमीन (Survey Amin) द्वारा एक “केवाला” यानी जमीन के एक दस्तावेज पर लगभग ₹2000 रुपये मांगे जा रहे हैं।
व्यक्ति का आरोप है कि पैसे नहीं देने के कारण उसका जमीन संबंधी कागज स्वीकार नहीं किया गया या जमा नहीं लिया गया।
“केवाला” क्या होता है?
केवाला (Sale Deed) वह सरकारी रजिस्ट्री दस्तावेज होता है जिससे जमीन खरीद-बिक्री साबित होती है।
जमीन सर्वे, दाखिल-खारिज, जमाबंदी सुधार आदि में यह बहुत जरूरी कागज माना जाता है।
“सर्व अमीन” कौन होता है?
सर्वे अमीन या कानूनगो वह कर्मचारी होता है जो:
जमीन की नापी करता है
नक्शा और खेसरा जांचता है
जमीन मालिक का रिकॉर्ड तैयार करता है
सर्वे रिपोर्ट बनाता है
व्यक्ति की मुख्य शिकायत
व्यक्ति कहना चाहता है कि:
सरकारी काम के बदले अतिरिक्त पैसे मांगे जा रहे हैं
बिना पैसा दिए कागज जमा नहीं हो रहा
गरीब लोगों को परेशानी हो रही है
ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए?
1. रसीद के बिना पैसा न दें
सरकारी शुल्क हमेशा रसीद के साथ लिया जाता है।
यदि कोई कर्मचारी नकद रिश्वत मांगे तो सावधान रहें।
2. अंचल कार्यालय में शिकायत करें
आप:
CO (Circle Officer)
DCLR
SDO
जिला पदाधिकारी (DM)
को लिखित शिकायत दे सकते हैं।
3. ऑनलाइन शिकायत करें
बिहार भूमि सर्वे और राजस्व विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर शिकायत की जा सकती है:
biharbhumi.bihar.gov.in⁠�
4. जरूरी दस्तावेज तैयार रखें
केवाला / रजिस्ट्री
रसीद
आधार कार्ड
जमाबंदी
खेसरा संख्या
पुराना नक्शा
ध्यान देने वाली बात
कई बार लोग “सुविधा शुल्क” या फोटोकॉपी/फॉर्म खर्च के नाम पर पैसे मांगते हैं, लेकिन:
सरकारी तय शुल्क अलग होता है
रिश्वत देना और लेना दोनों गलत है
यदि कोई कर्मचारी गलत तरीके से पैसे मांगता है तो उसके खिलाफ शिकायत की जा सकती है।
निष्कर्ष
यह कमेंट बिहार के मधेपुरा जिले में जमीन सर्वे के दौरान कथित रूप से अधिक पैसे मांगने और कागज स्वीकार नहीं करने की शिकायत को दर्शाता है। व्यक्ति सरकारी व्यवस्था से नाराज है और अपनी परेशानी सार्वजनिक रूप से बता रहा है।

1 month ago | [YT] | 1