यह सत्संग जैसे प्रात:काल का जलपान है। इसमें हमलोगों ने अभी स्तुति-विनती किया है। जिसकी स्तुति कोई करते हैं, उनके प्रति उसकी श्रद्धा जमती है। श्रद्धा 'जमने' का अर्थ है उगना या उत्पन्न होना। श्रद्धा अंकुरित होती है और फिर बढ़कर दृढ़ होती है।
धर्म में श्रद्धा नहीं रखने से धर्म-कर्म करने में आदमी प्रवृत्त नहीं होता है। बोधमय, ज्ञानमय श्रद्धा अच्छी है। विनती या प्रार्थना करने से हृदय में नम्रता आती है; क्योंकि यह स्वाभाविक है कि किसी के पास कुछ माँगने जाओगे तो उससे नम्र होकर माँगना पड़ेगा अर्थात् नम्रता दृढ़ होगी। किसी से कुछ माँगो और कड़ुवा शब्द भी बोलो, तो वह नहीं देगा। दीन-हीन होकर माँगने से देनेवाले के मन में दया आ जाती है और उसके मन में होता है कि कुछ दे दें।
लोग कहते हैं कि ईश्वर भी खुशामदी हैं, बहुत स्तुति कराते हैं, तब कुछ देते हैं। ईश्वर ऐसे हल्के नहीं हैं कि स्तुति से खुश हो जाएँगे। स्तुति करने से अपनी श्रद्धा बढ़ती है, इसमें अपनी ही भलाई है। विनती से नम्रता आती है, यह भी अपनी ही भलाई है।
#गुरुजनों_की_सेवा_और_दुखियों_की_सेवा_भी_भक्ति_है_#,_पर_भक्तिमार्ग_में_उपासना_की_प्रधानता_है। उपासना करने से उपास्य की ओर ऊर्ध्वगति होती है अर्थात् ऊपर गमन होता है। स्थूलता से सूक्ष्मता की ओर जाना होता है। स्थूल से सूक्ष्म में जाने से सूक्ष्म माया को पार कर जाते हैं। पुन: माया के सूक्ष्मातिसूक्ष्म स्वरुप को पार करके परमात्मा को प्राप्त कर लेते हैं। जबतक ऐसी उपासना नहीं होगी, तबतक ऊपर नहीं चढ़ सकेंगे।
आज वा कल, कभी न कभी इस शरीर का नाश हो जाना निश्चित है, किन्तु लोक-कल्याणकारी कार्य मे इस शरीर का बलि हो जाना अति श्रेयस्कर है। मैं बूढ़ा हो गया हूँ, हाथ काँपते है, फिर भी यदि देश - रक्षा के निमित्त सरकार मुझे युद्ध युद्ध मे मे जाने के लिये कहे है तो तो मैं मैं सहर्ष जाने के लिऐ तैयार हूँ। देश - रक्षार्थ युद्ध के लिए अपने देश के किसी भी व्यक्ति को मुँह नही कृषको के लिए कृषि - कर्म की होती है। नवजवानो को मोड़ना चाहिए। यह अनिवार्य हिंसा है, जैसे साहसी, निरालसी और पुरुषार्थी होना चाहिए और सभी देशवासियों को तन, मन और धन से सतत सरकार की सहायता के लिये ततपर्य, सावधान और क्रियाशील रहना चाहिए, जिससे देश का यह संकट शीघ्र टल जाय।
- सन्त सद्गुरु महर्षि मेंहीँ परमहंसजी महाराज की देश - रक्षार्थ मंगलमयी प्रेरणा
संसार के लोग यदि पंच पापों से बचें तो आपस में प्रेम होगा। अभी लोग बहुत झूठ बोलते हैं। इसलिए एक को दूसरे का विश्वास नहीं है। हिंसा नहीं करेगा तो लड़ाई-झगड़ा नहीं होगा, तकरार नहीं होगी। स्वराज्य हुआ है, सुराज नहीं। अध्यात्म-ज्ञान का, सदाचार का खूब जोरों से सरकार प्रचार करे, तो लोग सदाचारी बनने लगेंगे और तब देश में शांति आ जाएगी। राजनीति के मैदान में भी शांति हो जाएगी। ईश्वर-भक्ति करने के लिए सदाचार की बड़ी जरूरत है। लेकिन धन कमाने में इसकी कोई जरूरत नहीं। चोरी करो, धन हो जाएगा। पकड़े जाओगे, मार खाओगे। कानून के डंडे से लोग सदाचारी नहीं बन सकते। जनता ठीक नहीं है तो सरकार ठीक कहां से होगी? जनता की ओर से ही लोग जाते हैं, जिससे सरकार बनती है। ईश्वर- भजन करो, सदाचार का पालन करो तो यहां और वहां दोनों जगह अच्छे रहोगे ।..
संत सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज
जय गुरु 🌺
2 months ago | [YT] | 85
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संत सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज
यह सत्संग जैसे प्रात:काल का जलपान है। इसमें हमलोगों ने अभी स्तुति-विनती किया है। जिसकी स्तुति कोई करते हैं, उनके प्रति उसकी श्रद्धा जमती है। श्रद्धा 'जमने' का अर्थ है उगना या उत्पन्न होना। श्रद्धा अंकुरित होती है और फिर बढ़कर दृढ़ होती है।
धर्म में श्रद्धा नहीं रखने से धर्म-कर्म करने में आदमी प्रवृत्त नहीं होता है। बोधमय, ज्ञानमय श्रद्धा अच्छी है। विनती या प्रार्थना करने से हृदय में नम्रता आती है; क्योंकि यह स्वाभाविक है कि किसी के पास कुछ माँगने जाओगे तो उससे नम्र होकर माँगना पड़ेगा अर्थात् नम्रता दृढ़ होगी। किसी से कुछ माँगो और कड़ुवा शब्द भी बोलो, तो वह नहीं देगा। दीन-हीन होकर माँगने से देनेवाले के मन में दया आ जाती है और उसके मन में होता है कि कुछ दे दें।
लोग कहते हैं कि ईश्वर भी खुशामदी हैं, बहुत स्तुति कराते हैं, तब कुछ देते हैं। ईश्वर ऐसे हल्के नहीं हैं कि स्तुति से खुश हो जाएँगे। स्तुति करने से अपनी श्रद्धा बढ़ती है, इसमें अपनी ही भलाई है। विनती से नम्रता आती है, यह भी अपनी ही भलाई है।
#गुरुजनों_की_सेवा_और_दुखियों_की_सेवा_भी_भक्ति_है_#,_पर_भक्तिमार्ग_में_उपासना_की_प्रधानता_है। उपासना करने से उपास्य की ओर ऊर्ध्वगति होती है अर्थात् ऊपर गमन होता है। स्थूलता से सूक्ष्मता की ओर जाना होता है। स्थूल से सूक्ष्म में जाने से सूक्ष्म माया को पार कर जाते हैं। पुन: माया के सूक्ष्मातिसूक्ष्म स्वरुप को पार करके परमात्मा को प्राप्त कर लेते हैं। जबतक ऐसी उपासना नहीं होगी, तबतक ऊपर नहीं चढ़ सकेंगे।
सभी संतों के साधना-सिद्धांतों में एक मेल है।
- संत सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज
👇
youtube.com/@sadgurumaharshimehiparamhans?si=YuIKj…
4 months ago | [YT] | 125
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संत सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज
महर्षि मेँहीँ महापरिनिर्वाण। Maharshi Menhi । Mahaparinirvan। Darshan Video।😭👇
https://youtu.be/xoufKhriHJI?si=45PgY...
5 months ago | [YT] | 31
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संत सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज
संत सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज दर्शन। Mahrshi Menhi। Darshan। Video। 👇
https://youtu.be/sYLIVKidpq4?si=b6hEv...
5 months ago | [YT] | 111
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संत सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज
गुरुसेवी भगीरथ चरित ( संक्षिप्त महाकाव्य ) से लिया गया। पेज संख्या - ४२
5 months ago | [YT] | 46
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संत सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज
जय गुरु 🌺
5 months ago | [YT] | 50
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संत सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज
आज वा कल, कभी न कभी इस शरीर का नाश हो जाना निश्चित है, किन्तु लोक-कल्याणकारी कार्य मे इस शरीर का बलि हो जाना अति श्रेयस्कर है। मैं बूढ़ा हो गया हूँ, हाथ काँपते है, फिर भी यदि देश - रक्षा के निमित्त सरकार मुझे युद्ध युद्ध मे मे जाने के लिये कहे है तो तो मैं मैं सहर्ष जाने के लिऐ तैयार हूँ। देश - रक्षार्थ युद्ध के लिए अपने देश के किसी भी व्यक्ति को मुँह नही कृषको के लिए कृषि - कर्म की होती है। नवजवानो को मोड़ना चाहिए। यह अनिवार्य हिंसा है, जैसे साहसी, निरालसी और पुरुषार्थी होना चाहिए और सभी देशवासियों को तन, मन और धन से सतत सरकार की सहायता के लिये ततपर्य, सावधान और क्रियाशील रहना चाहिए, जिससे देश का यह संकट शीघ्र टल जाय।
- सन्त सद्गुरु महर्षि मेंहीँ परमहंसजी महाराज की देश - रक्षार्थ मंगलमयी प्रेरणा
5 months ago | [YT] | 93
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संत सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज
मोहि दे दो भक्ति दान सतगुरु हो दाता जी।
***********जय गुरु 🌺**********
5 months ago | [YT] | 90
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संत सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज
" कबीर पूरे गुरु बिना, पूरा शिष्य न होय।
गुरु लोभी शिष लालची, दूनी दाझन होय।।"
जब कभी पूरे और सच्चे सद्गुरु मिलेंगे, तभी उनके सहारे अपना परम कल्याण बनाने का काम समाप्त होगा।
पूरे और सच्चे सद्गुरु का मिलना परम प्रभु सर्वेश्वर के मिलने के तुल्य ही है।
5 months ago | [YT] | 130
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संत सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज
संसार के लोग यदि पंच पापों से बचें तो आपस में प्रेम होगा। अभी लोग बहुत झूठ बोलते हैं। इसलिए एक को दूसरे का विश्वास नहीं है। हिंसा नहीं करेगा तो लड़ाई-झगड़ा नहीं होगा, तकरार नहीं होगी। स्वराज्य हुआ है, सुराज नहीं। अध्यात्म-ज्ञान का, सदाचार का खूब जोरों से सरकार प्रचार करे, तो लोग सदाचारी बनने लगेंगे और तब देश में शांति आ जाएगी। राजनीति के मैदान में भी शांति हो जाएगी। ईश्वर-भक्ति करने के लिए सदाचार की बड़ी जरूरत है। लेकिन धन कमाने में इसकी कोई जरूरत नहीं। चोरी करो, धन हो जाएगा। पकड़े जाओगे, मार खाओगे। कानून के डंडे से लोग सदाचारी नहीं बन सकते। जनता ठीक नहीं है तो सरकार ठीक कहां से होगी? जनता की ओर से ही लोग जाते हैं, जिससे सरकार बनती है। ईश्वर- भजन करो, सदाचार का पालन करो तो यहां और वहां दोनों जगह अच्छे रहोगे ।..
- संत सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंसजी महाराज
5 months ago | [YT] | 55
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