मौलिकता परोसने की कोशिश करते हैं, जैसी जो घटना है तैसी बताते हैं। न मिर्च-मसाला न फालतू की छौंक लगाते हैं। पहले खुद बारीकी से पढ़ते हैं फिर आपको सुनाते हैं। भाषा में बेढंगापन, बचकानापन आपको महसूस हो सकता है लेकिन किस्से-कहानियों में सच्चाई दिखाते हैं। हमारा बस यही छोटा सा परिचय है। आज नहीं तो कल आपको भाएंगे इसलिए जुड़े चलिए और साथियों को जोड़े चलिए हमें अपना इस सोशल दुनिया का मित्र बनाते हुए आगे बढ़िए। विश्व का कल्याण हो।
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