इस चैनल का उद्देश्य आप सभी को भारत के राष्ट्रीय और सांस्कृतिक महत्व से जुड़े हुए तथ्यों से अवगत कराने का एक छोटा प्रयास है, जो आज तक भारत के गौरवशाली इतिहास को प्रभावित करते रहे हैं जिसमें साहित्य, कला, राजनीति तथा साथ ही मेरे खुद के विचार भी शामिल होंगे।

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Prashant Singh

माँ दुर्गा के अष्टम स्वरूप माँ बगलामुखी जयंती के पावन अवसर पर सभी सनातनी धर्मबन्धुओं को असीम मंगल कामनाएं। माँ बगलामुखी की कृपा से हम सभी सनातनी धर्मबन्धुओं के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और विजय का वास हो।
#माँ_बगलामुखी

2 weeks ago | [YT] | 9

Prashant Singh

1 month ago | [YT] | 5

Prashant Singh

#शहीद_दिवस 🙏
पुरुषोत्तम दास टंडन ने भगत सिंह का समर्थन करते हुए लिखा है, “हिंसा और अहिंसा हमारे देश का पुराना दार्शनिक प्रश्न है। प्रकृति हमें उत्पन्न करती है और हमारी रक्षा करती है। साथ ही एक हिलोर में हमारा नाश करती है। जिसके ऊपर समाज के संचालन का दायित्व रहता है उन्हें रक्षा और संहार दोनों काम करने होते हैं"
#ShaheedDiwas_Bhagat_Sukhdev_Rajguru

1 month ago | [YT] | 7

Prashant Singh

1 month ago | [YT] | 17

Prashant Singh

राष्ट्र चेतना के प्रखर साधक, संगठन-पुरुष, और तपस्वी जीवन के प्रतीक पूज्यनीय माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर ‘गुरुजी’ की जयंती पर कोटि-कोटि नमन🙏🙏🙇🙇।

2 months ago | [YT] | 9

Prashant Singh

हिंदवी स्वराज के प्रणेता, अदम्य साहस और स्वाभिमान के प्रतीक छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर कोटि-कोटि नमन 🙏🙏🙇🙇।

2 months ago | [YT] | 9

Prashant Singh

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का जीवन साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति का अमर प्रतीक है।
उनका अदम्य साहस हमें स्वतंत्रता और स्वाभिमान के लिए सदैव प्रेरित करता रहेगा।
जय हिन्द!
#नेताजी #नेता_जी

2 months ago | [YT] | 6

Prashant Singh

आप सभी को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा की शुभकामनाएं।

2 months ago | [YT] | 2

Prashant Singh

ये नव वर्ष हमे स्वीकार नहीं

है अपना ये त्यौहार नहीं

है अपनी ये तो रीत नहीं

है अपना ये व्यवहार नहीं

धरा ठिठुरती है सर्दी से

आकाश में कोहरा गहरा है

बाग़ बाज़ारों की सरहद पर

सर्द हवा का पहरा है

सूना है प्रकृति का आँगन

कुछ रंग नहीं , उमंग नहीं

हर कोई है घर में दुबका हुआ

नव वर्ष का ये कोई ढंग नहीं

चंद मास अभी इंतज़ार करो

निज मन में तनिक विचार करो

नये साल नया कुछ हो तो सही

क्यों नक़ल में सारी अक्ल बही

उल्लास मंद है जन -मन का

आयी है अभी बहार नहीं

ये नव वर्ष हमे स्वीकार नहीं

है अपना ये त्यौहार नहीं

ये धुंध कुहासा छंटने दो

रातों का राज्य सिमटने दो

प्रकृति का रूप निखरने दो

फागुन का रंग बिखरने दो

प्रकृति दुल्हन का रूप धार

जब स्नेह – सुधा बरसायेगी

शस्य – श्यामला धरती माता

घर -घर खुशहाली लायेगी

तब चैत्र शुक्ल की प्रथम तिथि

नव वर्ष मनाया जायेगा

आर्यावर्त की पुण्य भूमि पर

जय गान सुनाया जायेगा

युक्ति – प्रमाण से स्वयंसिद्ध

नव वर्ष हमारा हो प्रसिद्ध

आर्यों की कीर्ति सदा -सदा

नव वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा

अनमोल विरासत के धनिकों को

चाहिये कोई उधार नहीं

ये नव वर्ष हमे स्वीकार नहीं

है अपना ये त्यौहार नहीं

है अपनी ये तो रीत नहीं

है अपना ये त्यौहार नहीं   


-राष्ट्रकवि रामधारीसिंह दिनकर 

4 months ago | [YT] | 2

Prashant Singh

शत शत नमन

4 months ago | [YT] | 4