“Jaswant Singh Rathore” A stand-up comedian,Film actor and a very fine mimicry artist From Bollywood & Pollywood.
for business inquiry - 9892321711 ( Tiwari ji )

Famous Tv Shows 📺
India’s laughter champion on Sony
The Kapil sharma show on Sony & colours
Comedy circus on Sony tv
Laughter challenge on star one
Chote miyan bade miyan on colours
Movers & shekhar on sab tv
Apna news ayega on Sab tv
Happy hours On & tv
Hasde Hasande ravo on mh1
Hasdyan de Ghar Wasde on Zee Punjabi
Etc.

Songs 🎶
Reejh on zee music company
Dara singh ‘Gym de vichon’ on zee music company

Punjabi movies 🎥
Viah 70 kilometer (2012)
Aashiqi not allowed (2013)
Sikka (2014)
Mukhtiar chadha (2014)
Jatt Jugaadi Hundey ney (2019
15 lakh kado auga(2019)
Kulchey choley (2022)
Redua-2 (2024)
Farlo (2025)
Anne wah ( coming soon )
Constable Harjeet Kaur ( coming soon )

Bollywood movies 🎬
Jane kyon de yaro (2017)
Roll sound camera action (2015)
VVKVWV ( 2024)
Dail k for kidnapping


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दोस्तों ये वीडियो देखिए और अपनी प्रतिकृतिया दीजिए और मेरे इस नये यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब कर लीजिए
बहुत अच्छा अच्छा कंटेंट इस चैनल पे आने वाला है ❤️🙏

2 weeks ago | [YT] | 0

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Please subscribe my new YouTube channel for more new content

JSR Films Official
youtube.com/@jaswantsinghrathorefilms?si=1d3s1UtGj…

Jaswant Singh Rathore ❤️🙏

3 weeks ago (edited) | [YT] | 9

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Watch new short movie on my new official YouTube channel
https://youtu.be/6eEZ8k31Uhc?si=bonvN...

3 weeks ago | [YT] | 5

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Instagram पर इस वीडियो पर 1M+ व्यूज़ थे लेकिन आज वहाँ से उड़ा दी गई कारण मुझे समझ नहीं आया आपको पता है क्या ?

4 weeks ago | [YT] | 4

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🎉 आ गया... आ गया... आ गया...! 🎉
आप सबको हँसाने...
गुदगुदाने...
चेहरे पर मुस्कान सजाने...
गुज़रे ज़माने की यादों में ले जाने...
बचपन की गलियों से फिर मिलवाने...
यादों की अलमारी फिर खुलवाने...

कभी शॉर्ट फ़िल्मों से दिल छू जाएँगे...
कभी पैरोडी से पेट पकड़कर हँसाएँगे...
कभी मिमिक्री में सितारों से मिलवाएँगे...
कभी गीतों से महफ़िल सजाएँगे...
कभी व्लॉग में सफ़र दिखाएँगे...
कभी पॉडकास्ट में दिल की बातें सुनाएँगे...

कभी नॉस्टैल्जिया...
कभी मेमोरीज़...
हर बार कुछ नया लेकर आएँगे...
हँसी भी होगी...
कहानी भी होगी...
यादें भी होंगी...
और ज़िंदगी की सच्चाई भी होगी।

तो देर किस बात की...
Subscribe कीजिए, Bell 🔔 दबाइए,
और इस सफ़र में हमारे हमसफ़र बन जाइए।
मैं हूँ जसवंत सिंह राठौर...
और अब हर हफ़्ते होगी मुलाक़ात...
हँसी, यादों और दिल से निकली बातों के साथ! ❤️
👇👇👇👇👇👇
youtube.com/@justoneentertainment?si=4WfyRZKab0fNt…

1 month ago | [YT] | 13

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🎬 'माचिस' से 'सतलुज' तक:
30 साल बाद सिनेमाई चक्र का पूरा होना! 🍿कुछ फिल्में सिर्फ कहानियां नहीं होतीं, वे हमारे दिमाग पर ऐसी छाप छोड़ जाती हैं जो दशकों बाद भी धुंधली नहीं पड़तीं। बचपन में केबल टीवी पर गुलज़ार साहब की 'माचिस' (1996) देखना एक ऐसा ही अनुभव था।उस दौर में, जब कंवलजीत सिंह जी टीवी शोज़ में हमेशा एक भले, शालीन और शरीफ इंसान के रूप में नजर आते थे, 'माचिस' में उनके द्वारा निभाए गए क्रूर और बेरहम पुलिस अफसर "वोहरा" के किरदार ने अंदर तक झकझोर दिया था।

⏳ ठीक 30 साल बाद... 'सतलुज' का वो चौंकाने वाला कनेक्शन!हाल ही में जब मैंने ओटीटी पर डायरेक्टर हनी त्रेहान की फिल्म 'सतलुज' देखी, तो इतिहास खुद को दोहराता हुआ लगा। फिल्म में जब कंवलजीत सिंह जी डीजीपी इंदरपाल सिंह बिट्टा (Bitta) के रूप में सामने आए, तो उनकी खौफनाक परफॉर्मेंस ने तुरंत 'माचिस' के "वोहरा" की याद दिला दी। वही रसूख, वही बेरुखी और वही सस्पेंस!मेरा यह यकीन तब पूरी तरह सच में बदल गया जब पर्दे पर एस.एम. ज़हीर (S.M. Zaheer) साहब की एंट्री हुई! उन्होंने 'सतलुज' में "आनंद सिंह" का किरदार निभाया है। याद कीजिए, ये वही दिग्गज अभिनेता हैं जिन्होंने 'माचिस' में "खुराना" का वह कड़क किरदार निभाया था।

🎯 कास्टिंग का मास्टरस्ट्रोक या पुरानी यादों का ट्रिब्यूट?
यह महज कोई इत्तेफाक नहीं हो सकता। डायरेक्टर ने यकीनन 'माचिस' में इन दोनों ही कलाकारों के काम को ध्यान में रखकर ही इन्हें 'सतलुज' के इस बेहद गंभीर ड्रामा के लिए चुना होगा।30 साल पहले 'माचिस' में पंजाब के जिस दौर और सिस्टम को दिखाया गया था, आज 'सतलुज' उसी व्यवस्था के दूसरे पहलू को दिखाती है। और इस गंभीर कहानी को पर्दे पर जीवंत करने के लिए 'माचिस' के ही दो स्तंभों को वापस लाना कास्टिंग का एक ऐसा मास्टरस्ट्रोक है, जिसके बारे में शायद किसी ने सोचा भी नहीं होगा!सच्चे सिनेमा लवर्स के लिए यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि नॉस्टेल्जिया और बेहतरीन अभिनय का एक ऐसा कोलाज है जो रोंगटे खड़े कर देता है। 🙌✨क्या आपमें से किसी और ने 'सतलुज' देखते वक्त इस 'माचिस' वाले कनेक्शन को नोटिस किया था? कमेंट्स में जरूर बताएं!👇

1 month ago | [YT] | 9

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जिम वाले हीरो...
80 के दशक की फुल मसाला फिल्मों में हीरो की ताकत उसकी बॉडी नहीं, उसकी एंट्री और मुक्कों से मापी जाती थी। पोस्टर पर ही दस-बीस गुंडे उड़ते हुए दिख जाते थे और अंदर फिल्म में अमिताभ बच्चन, विनोद खन्ना, शत्रुघ्न सिन्हा जैसे हीरो बिना सिक्स पैक और डौले दिखाए ही पहलवानों को धूल चटा देते थे। उस दौर में अगर किसी ने अपनी देसी बॉडी खुलकर दिखाई और सबसे ज़्यादा तालियाँ बटोरीं, तो वो थे धर्मेंद्र। उनकी जाँघें और देसी डौले अपने आप में स्टार थे। फिर ये विरासत सनी देओल तक पहुँची।
लेकिन 90 का दशक आते-आते भारत के देसी अखाड़े धीरे-धीरे जिम और "हेल्थ क्लब" बनने लगे। और अगर उन जिमों की दीवारों पर किसी भारतीय हीरो के पोस्टर सबसे ज़्यादा नज़र आते थे, तो वो थे—सलमान खान, संजय दत्त और सुनील शेट्टी।
1989 में मैंने प्यार किया आई और सलमान खान ने आते ही शर्ट उतार दी। लीन बॉडी, छोटे-छोटे मसल्स और शीर्षासन में लगाए गए पुश-अप्स... बस फिर क्या था! न जाने कितने लड़कों ने अपनी क्लास की लड़की को इम्प्रेस करने के लिए उल्टे होकर पुश-अप्स लगाने की कोशिश की। फिर जागृति, वीरगति, करण अर्जुन और प्यार किया तो डरना क्या तक आते-आते सलमान बॉलीवुड के पहले बड़े सिक्स पैक आइकन बन चुके थे।लड़के गिटार खरीद कर ही सोच रहे थे कि सिक्स पैक एबस बन जाएँगे
उधर संजय दत्त 1981 में रॉकी से अपनी मासूम आँखों के साथ आए थे, लेकिन 80 का दशक खत्म होते-होते उन्होंने डम्बल उठा लिए। 1990 की फतेह के गानों में जिम करते हुए दिखे और 1991 की सड़क में जब महारानी के गुंडों ने उनकी शर्ट उतरवाकर उन्हें लकड़ी से बाँधा, तो लड़कों को पहली बार समझ आया कि चौड़े कंधे किसे कहते हैं। फिर खलनायक, यलगार, आतिश और दौड़ फिलम तक आते-आते संजय दत्त के पोस्टर सिर्फ लड़कियों के नहीं, लड़कों के कमरों की भी शान बन गए। आज भले बाबा का पेट निकल आया हो, लेकिन 90 के दशक के जवानों के दिल से उनकी बॉडी आज भी नहीं निकली।
और फिर आए अन्ना...
1989 से ही अपनी बॉडी बिल्डिंग का पोर्टफोलियो लेकर प्रोड्यूसरों के चक्कर काटने वाले सुनील शेट्टी ने जब 1992 में बलवान में अपनी फौलादी भुजाओं से डैनी और उसके गुंडों को उठाकर पटका, तो मेरे जैसे न जाने कितने बच्चे सीट से उछल पड़े। फिर मोहरा, टक्कर, रघुवीर, रक्षक शस्त्र और विनाशक फिलम तक आते-आते अन्ना की चौड़ी पीठ, गोल शोल्डर और धमाकेदार बाइसेप्स देखकर न जाने कितने युवाओं ने पहली बार जिम की फीस भरी। हर किसी की यही ख्वाहिश थी—बाइसेप्स अपने हों, लेकिन दिखें अन्ना जैसे।
कहते हैं कि किसी भी मर्द का पहला प्रभाव उसकी पर्सनैलिटी से पड़ता है। शायद इसलिए उस दौर के जिमों की दीवारों पर मोटिवेशनल कोट्स नहीं, इन तीनों हीरो के पोस्टर लगे होते थे।
आज के महंगे जिमों में पेंट की दीवारों पर अंग्रेज़ी के मोटिवेशनल कोट्स पढ़ने वाली जेनरेशन शायद कभी नहीं समझ पाएगी कि 90 के दशक के जिमों में भाईजान, बाबा और अन्ना का क्या जलवा हुआ करता था।

जसवंत सिंह राठौर

1 month ago | [YT] | 11

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हमारे बचपन के सारे हीरोज़ की एक फ़िल्म आ रही है “welcome to jungle” तो मैंने सोचा क्यों ना कुछ नया बनाये एक मिमिक्री वीडियो बनाया है रियल जंगल में टीम के साथ..संडे को देखना मत भूलना ☺️👍🙌

2 months ago | [YT] | 44

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सुनो गौर से कोल्ड ड्रिंक वालो
बुरी नज़र ना दूध पे डालो
चाहे जितनी ऐड करा लो
सबसे आगे होगा नारियल पानी..
हमने पिया है तुम भी पियो 😁👍

2 months ago | [YT] | 34

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बोले तो..❤️😁

2 months ago | [YT] | 26