जसपाल सिंह कौराल बनाम एनसीटी राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला, जो 7 अप्रैल, 2025 को आया, इस बात पर केंद्रित था कि शादी के वादे का हर उल्लंघन बलात्कार नहीं माना जा सकता। मामले का सारांश: पृष्ठभूमि: जसपाल सिंह कौराल पर एक महिला ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (बलात्कार) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत एफआईआर दर्ज कराई थी। महिला का आरोप था कि कौराल ने उससे शादी का वादा करके उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए, जिसके चलते उसने अपने पति को तलाक दे दिया। बाद में जब कौराल ने शादी से इनकार कर दिया, तो उसने एफआईआर दर्ज कराई। निचली अदालत और हाई कोर्ट: सत्र अदालत ने मामले को सहमति से बना संबंध मानते हुए कौराल को बरी कर दिया था। हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया और कौराल के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट का फैसला: कौराल ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया। मुख्य सिद्धांत: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सहमति से बने संबंध, भले ही बाद में शादी का वादा टूट जाए, तब तक बलात्कार नहीं माने जा सकते, जब तक यह साबित न हो जाए कि आरोपी का इरादा शुरू से ही झूठा वादा करने का था। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि शिकायतकर्ता महिला रिश्ते की प्रकृति से पूरी तरह अवगत थी। दोनों पक्षों के बीच 2016 से संबंध थे, जबकि वे दोनों उस समय शादीशुदा थे। पीठ ने पाया कि रिश्ते में कभी भी बल या धोखे का तत्व नहीं था, बल्कि यह एक सहमति-आधारित संबंध था, जो बाद में विफल हो गया। इस प्रकार, सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक कार्यवाही को समाप्त कर दिया और सत्र अदालत के बरी करने के आदेश को बहाल कर दिया।
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जसपाल सिंह कौराल बनाम एनसीटी राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला, जो 7 अप्रैल, 2025 को आया, इस बात पर केंद्रित था कि शादी के वादे का हर उल्लंघन बलात्कार नहीं माना जा सकता।
मामले का सारांश:
पृष्ठभूमि: जसपाल सिंह कौराल पर एक महिला ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (बलात्कार) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत एफआईआर दर्ज कराई थी। महिला का आरोप था कि कौराल ने उससे शादी का वादा करके उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए, जिसके चलते उसने अपने पति को तलाक दे दिया। बाद में जब कौराल ने शादी से इनकार कर दिया, तो उसने एफआईआर दर्ज कराई।
निचली अदालत और हाई कोर्ट: सत्र अदालत ने मामले को सहमति से बना संबंध मानते हुए कौराल को बरी कर दिया था। हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया और कौराल के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला: कौराल ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया।
मुख्य सिद्धांत:
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सहमति से बने संबंध, भले ही बाद में शादी का वादा टूट जाए, तब तक बलात्कार नहीं माने जा सकते, जब तक यह साबित न हो जाए कि आरोपी का इरादा शुरू से ही झूठा वादा करने का था।
अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि शिकायतकर्ता महिला रिश्ते की प्रकृति से पूरी तरह अवगत थी। दोनों पक्षों के बीच 2016 से संबंध थे, जबकि वे दोनों उस समय शादीशुदा थे।
पीठ ने पाया कि रिश्ते में कभी भी बल या धोखे का तत्व नहीं था, बल्कि यह एक सहमति-आधारित संबंध था, जो बाद में विफल हो गया।
इस प्रकार, सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक कार्यवाही को समाप्त कर दिया और सत्र अदालत के बरी करने के आदेश को बहाल कर दिया।
#supremecourtofindia #supremecourt #delhihighcourt #judgement
1 month ago | [YT] | 2
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www.livelaw.in/top-stories/nhai-or-its-agents-cant…
4 months ago | [YT] | 5
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There is no greater tyranny than that which is perpetrated under the shield of the law and in the name of justice #Highcourt #Court
5 months ago (edited) | [YT] | 8
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Supreme Court Judgement #postviral💪
5 months ago (edited) | [YT] | 2
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भारत में नागरिकता पाने के तरीके जो कि संविधान के अनुच्छेद 5 से 11 में व्याख्या किया गया हैं
5 months ago | [YT] | 3
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