मां सरस्वती की पूजा के पावन पर्व 'बसंत पंचमी' की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। माँ सरस्वती आपके जीवन में ज्ञान की ज्योति, वाणी में मधुरता और मन में सुकून भर दें..!! 🌼 बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएँ 🌼
"वसंतोत्स्व वसंत पंचमी" नवप्रभात, नवसृजन और नवचेतना के उत्सव का पावन पर्व 'बसंत पंचमी' की समस्त सनातन प्रेमी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं...
वाणी, विद्या और विवेक की अधिष्ठात्री भगवती माँ शारदे से प्रार्थना है कि हम सभी के जीवन में प्रकाश, प्रज्ञा और पवित्र प्रेरणा का संचार करें। जय माँ शारदे!
जीवन में परीक्षाएं दूसरों की मत लेना। और दूसरों की परीक्षाओं से जो तुम्हें मिल भी जाएगा, वह कभी तुम्हारा नहीं होगा। दूसरे के अनुभव कभी तुम्हारे अनुभव नहीं हो सकते। जीवन की आत्यंतिक रहस्यमयता तो उसी के सामने प्रगट होती है, जो अपने को ही अपना परीक्षा—स्थल बना लेता, जो अपने को ही अपनी प्रयोग— भूमि बना लेता।
इसलिए कहता हूं. सोच—विचार से नहीं, प्रयोग से, ध्यान से मति उपलब्ध होगी। और तुमने सदा सुन रखा है. स्वर्ग कहीं ऊपर, नर्क कहीं नीचे। उस भ्रांत धारणा को छोड़ दो। स्वर्ग तुम्हारे भीतर, नर्क तुम्हारे भीतर। स्वर्ग तुम्हारे होने का एक ढंग और नर्क तुम्हारे होने का एक ढंग। मैं से भरे हुए तो नर्क, मैं से मुक्त तो स्वर्ग।
संसार बंधन, और मोक्ष कहीं दूर सिद्ध—शिलाएं हैं जहां मुक्त पुरुष बैठे हैं—ऐसी भ्रांतियां छोड़ दो। अगर मन में चाह है, चाहत है, तो संसार। अगर मन में कोई चाहत नहीं, छोड़ने तक की चाह नहीं, त्याग तक की चाह नहीं, कोई चाह नहीं—ऐसी अचाह की अवस्था मोक्ष।
बाहर मत खोजना स्वर्ग—नरक, संसार—मोक्ष को। ये तुम्हारे होने के ढंग हैं। स्वस्थ होना मोक्ष है, अस्वस्थ होना संसार है। इसलिए? बाहर छोड़ने को भी कुछ नहीं है, भागने को भी कुछ नहीं है। हिमालय पर भी बैठो तो तुम तुम ही रहोगे और बाजार में भी बैठो तो तुम तुम ही रहोगे। इसलिए मैंने तुमसे नहीं कहा है, मेरे संन्यासियों को मैंने नहीं कहा है, तुम कुछ भी छोड़ कर कहीं जाओ। मैंने उनको सिर्फ इतना ही कहा, तुम जाग कर देखते रहो, जो घटता है घटने दो। गृहस्थी है तो गृहस्थी सही।
और किसी दिन अगर तुम अचानक अपने को हिमालय पर बैठा हुआ पाओ तो वह भी ठीक, जाते हुए पाओ तो वह भी ठीक है।
जो घटे, उसे घटने देना; इच्छापूर्वक अन्यथा मत चाहना। अन्यथा की चाह से मैं संगठित होता है। तुम अपनी कोई चाह न रखो, सर्व की चाह के साथ बहे चले जाओ। यह गंगा जहां जाती है, वहीं चल पड़ो। तुम पतवारें मत उठाना। तुम तो पाल खोल दो, चलने दो हवाओं को, ले चलने दो इस नदी की धार को।
इस समर्पण को मैंने संन्यास कहा है। इस समर्पण में तुम बचते ही नहीं, सिर्फ परमात्मा बचता है। किसी न किसी दिन वह घड़ी आएगी, वह मति आएगी कि हटेंगे बादल, खुला आकाश प्रगट होगा। तब तुम हंसोगे, तब तुम जानोगे कि अष्टावक्र क्या कह रहे है—न कुछ छोड़ने को, न कुछ पकड़ने को। जो भी दिखाई पड़ रहा है, स्वप्नवत है; जो देख रहा है, वही सत्य है।
मकर संक्रांति पर तिल समान हम सभी के मन स्नेहमय हो,गुड़ समान हमारे शब्दों में मिठास हो और जैसे लड्डू में तिल और गुड़ कि प्रबल घनिष्ठता है वैसे हमारे संबंध मधुर बने रहे। पतंग जिस प्रकार आकाश की ऊंचाईयों को छूती है उसी प्रकार आपका जीवन को ऊंचाई प्राप्त हो जमीन से जुड़ी हुई ।।
लोगों से मिलते वक्त इतना मत झुको कि उठते वक्त सहारा लेना पड़े। दुनिया ये नहीं देखती कि तुम पहले क्या थे बल्कि ये देखती है कि तुम अब क्या हो। 🙏🏻जय श्री राधे🙏🏻🌹सुप्रभात🌹 राम राम जी 🚩
Shakuntalam
ॐ असतो मा सद्गमय।
तमसो मा ज्योतिर्गमय।
मां सरस्वती की पूजा के पावन पर्व 'बसंत पंचमी' की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। माँ सरस्वती आपके जीवन में
ज्ञान की ज्योति,
वाणी में मधुरता
और मन में सुकून भर दें..!!
🌼 बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएँ 🌼
5 days ago | [YT] | 4
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Shakuntalam
"वसंतोत्स्व वसंत पंचमी"
नवप्रभात, नवसृजन और नवचेतना के उत्सव का पावन पर्व 'बसंत पंचमी' की समस्त सनातन प्रेमी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं...
वाणी, विद्या और विवेक की अधिष्ठात्री भगवती माँ शारदे से प्रार्थना है कि हम सभी के जीवन में प्रकाश, प्रज्ञा और पवित्र प्रेरणा का संचार करें।
जय माँ शारदे!
6 days ago | [YT] | 1
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Shakuntalam
जीवन में परीक्षाएं दूसरों की मत लेना। और दूसरों की परीक्षाओं से जो तुम्हें मिल भी जाएगा, वह कभी तुम्हारा नहीं होगा। दूसरे के अनुभव कभी तुम्हारे अनुभव नहीं हो सकते। जीवन की आत्यंतिक रहस्यमयता तो उसी के सामने प्रगट होती है, जो अपने को ही अपना परीक्षा—स्थल बना लेता, जो अपने को ही अपनी प्रयोग— भूमि बना लेता।
इसलिए कहता हूं. सोच—विचार से नहीं, प्रयोग से, ध्यान से मति उपलब्ध होगी। और तुमने सदा सुन रखा है. स्वर्ग कहीं ऊपर, नर्क कहीं नीचे। उस भ्रांत धारणा को छोड़ दो। स्वर्ग तुम्हारे भीतर, नर्क तुम्हारे भीतर। स्वर्ग तुम्हारे होने का एक ढंग और नर्क तुम्हारे होने का एक ढंग। मैं से भरे हुए तो नर्क, मैं से मुक्त तो स्वर्ग।
संसार बंधन, और मोक्ष कहीं दूर सिद्ध—शिलाएं हैं जहां मुक्त पुरुष बैठे हैं—ऐसी भ्रांतियां छोड़ दो। अगर मन में चाह है, चाहत है, तो संसार। अगर मन में कोई चाहत नहीं, छोड़ने तक की चाह नहीं, त्याग तक की चाह नहीं, कोई चाह नहीं—ऐसी अचाह की अवस्था मोक्ष।
बाहर मत खोजना स्वर्ग—नरक, संसार—मोक्ष को। ये तुम्हारे होने के ढंग हैं। स्वस्थ होना मोक्ष है, अस्वस्थ होना संसार है। इसलिए? बाहर छोड़ने को भी कुछ नहीं है, भागने को भी कुछ नहीं है। हिमालय पर भी बैठो तो तुम तुम ही रहोगे और बाजार में भी बैठो तो तुम तुम ही रहोगे। इसलिए मैंने तुमसे नहीं कहा है, मेरे संन्यासियों को मैंने नहीं कहा है, तुम कुछ भी छोड़ कर कहीं जाओ। मैंने उनको सिर्फ इतना ही कहा, तुम जाग कर देखते रहो, जो घटता है घटने दो। गृहस्थी है तो गृहस्थी सही।
और किसी दिन अगर तुम अचानक अपने को हिमालय पर बैठा हुआ पाओ तो वह भी ठीक, जाते हुए पाओ तो वह भी ठीक है।
जो घटे, उसे घटने देना; इच्छापूर्वक अन्यथा मत चाहना। अन्यथा की चाह से मैं संगठित होता है। तुम अपनी कोई चाह न रखो, सर्व की चाह के साथ बहे चले जाओ। यह गंगा जहां जाती है, वहीं चल पड़ो। तुम पतवारें मत उठाना। तुम तो पाल खोल दो, चलने दो हवाओं को, ले चलने दो इस नदी की धार को।
इस समर्पण को मैंने संन्यास कहा है। इस समर्पण में तुम बचते ही नहीं, सिर्फ परमात्मा बचता है। किसी न किसी दिन वह घड़ी आएगी, वह मति आएगी कि हटेंगे बादल, खुला आकाश प्रगट होगा। तब तुम हंसोगे, तब तुम जानोगे कि अष्टावक्र क्या कह रहे है—न कुछ छोड़ने को, न कुछ पकड़ने को। जो भी दिखाई पड़ रहा है, स्वप्नवत है; जो देख रहा है, वही सत्य है।
हरि ओंम तत्सत्!
1 week ago | [YT] | 0
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Shakuntalam
जय सियाराम जय गुरुदेव सादर चरण वंदन
1 week ago | [YT] | 4
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Shakuntalam
तिलवत् स्निग्धं मनोऽस्तु वाण्यां गुडवन्माधुर्यम्।
तिलगुडलड्डुकवत् सम्बन्धेऽस्तु सुवृत्तत्वम्।।
मकर संक्रांति पर तिल समान हम सभी के मन स्नेहमय हो,गुड़ समान हमारे शब्दों में मिठास हो और जैसे लड्डू में तिल और गुड़ कि प्रबल घनिष्ठता है वैसे हमारे संबंध मधुर बने रहे। पतंग जिस प्रकार आकाश की ऊंचाईयों को छूती है उसी प्रकार आपका जीवन को ऊंचाई प्राप्त हो जमीन से जुड़ी हुई ।।
#मकर_संक्रांति की हार्दिक बधाई। शुभकामनाए 💐💐💐।
2 weeks ago | [YT] | 0
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Shakuntalam
दुख पीछे देखता है,
चिंता इधर-उधर देखती है...!
..लेकिन..
विश्वास हमेशा आगे देखता है,
..इसलिए..
स्वयं पर विश्वास बनाये रखें...!!
🙏 जय सियाराम 🙏
2 weeks ago | [YT] | 4
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Shakuntalam
लोगों से मिलते वक्त इतना मत झुको कि उठते वक्त सहारा लेना पड़े।
दुनिया ये नहीं देखती कि तुम पहले क्या थे बल्कि ये देखती है कि तुम अब क्या हो।
🙏🏻जय श्री राधे🙏🏻🌹सुप्रभात🌹 राम राम जी 🚩
1 month ago | [YT] | 3
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Shakuntalam
राम राम जी🙏🚩
आशा है आप कुशल मंगल होंगे आपका दिन शुभ रहे
1 month ago | [YT] | 6
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Shakuntalam
*नारायणाय ज्ञानं देहि ; वासुदेवाय बुद्धिं देहि ; तन्नो विष्णुः प्रेरितं कुरु --!! रमा ( रम्भा ) एकादशी की अनन्य शुभकामनाएं --!!* 👏🌹✨🦚
3 months ago | [YT] | 6
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Shakuntalam
अहोई अष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं
3 months ago | [YT] | 1
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