Jeewan Yatra

#Dibeties #Sugar #Madhuram
#mealplan
दिन में केवल दो बार खाना (2-Meal Plan) ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए कारगर हो सकता है, अगर दोनों मील संतुलित और पौष्टिक हों। नीचे एक प्रभावी दो बार खाने का शुगर कंट्रोल डाइट चार्ट दिया गया है:

सुबह उठने के बाद (7–8 AM):

1 गिलास गुनगुना पानी + 1 चुटकी दालचीनी

5–10 मिनट वॉक / प्राणायाम
(यदि भूख लगे तो)

4-5 भीगे बादाम + 2 अखरोट

पहला मुख्य भोजन (Brunch – 10:30 AM से 11:30 AM):

2 मल्टीग्रेन रोटी (बाजरा, ज्वार, चना का मिश्रण)

1 कटोरी हरी सब्ज़ी (लो-ऑयल, ताज़ा बनी)

1 कटोरी दाल / पनीर / सोया / अंडा भुर्जी

1 कटोरी दही या छाछ

सलाद भरपूर – खीरा, टमाटर, पत्तागोभी, नींबू
(भोजन के बाद 10-15 मिनट वॉक करें)

दोपहर के बाद (3–4 PM के बीच):

1 कप ग्रीन टी या हर्बल चाय (बिना चीनी)

1 मुट्ठी भुना चना / मखाने / स्प्राउट्स
(यह लाइट स्नैक है, मील नहीं)

दूसरा मुख्य भोजन (Dinner – 6:30 PM से 7:30 PM):

1 कटोरी मूंग दाल खिचड़ी / 2 रोटी + सब्जी

1 कटोरी लो-फैट दही या छाछ

सलाद भरपूर
(भोजन के बाद 15 मिनट टहलना ज़रूरी)

रात में (अगर ज़रूरत महसूस हो):

1 गिलास गुनगुना पानी

(अगर हल्की भूख लगे तो) 1 चुटकी मेथी दाना या दालचीनी पानी

अन्य सुझाव:

सुबह 20–30 मिनट तेज़ वॉक या योगासन करें

स्ट्रेस मैनेजमेंट के लिए ध्यान या प्राणायाम

नींद पूरी लें (7-8 घंटे)

9 months ago | [YT] | 1

Jeewan Yatra

"यात्रा: बाहरी भी और भीतरी भी"

जीवन स्वयं एक यात्रा है — जन्म से मृत्यु तक की, अनुभवों की, भावनाओं की, और आत्मा की। हम जब किसी तीर्थ या स्थान की यात्रा पर निकलते हैं, तो वह केवल जगह बदलने की बात नहीं होती, वह भीतर के परिवर्तन की शुरुआत होती है।

हर यात्रा हमें कुछ नया सिखाती है — धैर्य, सहिष्णुता, कृतज्ञता और कभी-कभी स्वयं से मिलने का अवसर भी। पर्वतों की ऊँचाई हमें हमारी सीमाएँ याद दिलाती है, नदियों की निरंतरता हमें जीवन में बहते रहने का संदेश देती है, और मंदिरों की घंटियाँ हमें भीतर के मौन से जोड़ देती हैं।

लेकिन जीवन की असली यात्रा भीतर की होती है।
जब हम खुद से प्रश्न करते हैं — मैं कौन हूँ? क्यों आया हूँ? मेरा मार्ग क्या है? — तब आत्म-यात्रा शुरू होती है। इसे सँभालने के लिए ज़रूरी है कि हम शांत रहें, हर अनुभव को शिक्षक मानें, और अपने भीतर के 'दर्शन' को जागृत करें।

यात्रा सिर्फ कदमों से नहीं होती, यह दृष्टिकोण से होती है।
हर दिन को एक नई यात्रा मानें, हर संबंध को एक तीर्थ मानें, और हर अनुभव को प्रसाद की तरह स्वीकार करें।

चलते रहिए — बाहर भी, और भीतर भी।
यात्रा में ही जीवन है, और जीवन में ही भगवान।

9 months ago | [YT] | 1

Jeewan Yatra

नमस्तेऽस्तु दाम्ने स्फुरद्-दीप्ति-धाम्ने
त्वदीयोदरायाथ विश्वस्य धाम्ने
नमो राधिकायै त्वदीय-प्रियायै
नमोऽनन्त-लीलाय देवाय तुभ्यम् ॥ ८॥

3 years ago | [YT] | 79

Jeewan Yatra

कुबेरात्मजौ बद्ध-मूर्त्यैव यद्वत्
त्वया मोचितौ भक्ति-भाजौ कृतौ च
तथा प्रेम-भक्तिं स्वकां मे प्रयच्छ
न मोक्षे ग्रहो मेऽस्ति दामोदरेह ॥ ७॥

3 years ago | [YT] | 72

Jeewan Yatra

नमो देव दामोदरानन्त विष्णो
प्रसीद प्रभो दुःख-जालाब्धि-मग्नम्
कृपा-दृष्टि-वृष्ट्याति-दीनं बतानु
गृहाणेष माम् अज्ञम् एध्य् अक्षि-दृश्यः ॥ ६॥

3 years ago | [YT] | 59

Jeewan Yatra

इदं ते मुखाम्भोजम् अत्यन्त-नीलैर्
वृतं कुन्तलैः स्निग्ध-रक्तैश् च गोप्या
मुहुश् चुम्बितं बिम्ब-रक्ताधरं मे
मनस्य् आविरास्ताम् अलं लक्ष-लाभैः ॥ ५॥

3 years ago | [YT] | 70

Jeewan Yatra

वरं देव! मोक्षं न मोक्षावधिं वा
न चान्यं वृणेऽहं वरेशादपीह
इदं ते वपुर्नाथ गोपाल बालं
सदा मे मनस्याविरास्तां किमन्यैः ॥ ४॥

3 years ago | [YT] | 72