नैनमूर्ध्वं न तिर्यञ्चं न मध्यमे न परिजग्रभत्। न तस्य प्रतिमा अस्ति यस्य नाम महद्यश:।।
१)भगवान शंकराचार्य के भाष्य के अनुसार प्रतिमा शब्द के लिए लिखते है:- तस्य तस्यैवेश्वर्स्याखण्डसचखानुभवत्वादेताद्रशद्वितीयाभावात्प्रतिमोपमा नास्ति यानि भगवान के जैसा न होने से उनकी कोई प्रतिमा - उपमा नहीं है २) अमरकोश के अनुसार प्रतिमा के अर्थ है- तुलना, मुर्ति। उक्त मंत्रार्थ के संदर्भ में " न कोई भगवान से उपर है, न मध्य और न निचे, न उनके कोई बराबर ही है। इसमें मुर्ति अर्थ तो बैठ नहीं रहा है। ३) एक गीता का श्लोक देखते हैं जिसमें प्रतिमा का अर्थ स्पष्ट किया है- **पितासि लोकस्य चराचरस्य त्वमस्य पूज्यश्च गुरुर्गरीयान् । न त्वत्समोऽस्त्यभ्यधिक: कुतोऽन्यो लोकत्रयेऽप्यप्रतिमप्रभाव ॥** श्रीधर स्वामी गीता का टीका में लिखते है- न विद्यते प्रतिमा उपमा यस्य सोऽप्रतिम:।।
Vivek NoTime Ojha
**आर्यसमाजीयो का खण्डन **
नैनमूर्ध्वं न तिर्यञ्चं न मध्यमे न परिजग्रभत्। न तस्य प्रतिमा अस्ति यस्य नाम महद्यश:।।
१)भगवान शंकराचार्य के भाष्य के अनुसार प्रतिमा शब्द के लिए लिखते है:- तस्य तस्यैवेश्वर्स्याखण्डसचखानुभवत्वादेताद्रशद्वितीयाभावात्प्रतिमोपमा नास्ति यानि भगवान के जैसा न होने से उनकी कोई प्रतिमा - उपमा नहीं है
२) अमरकोश के अनुसार प्रतिमा के अर्थ है- तुलना, मुर्ति।
उक्त मंत्रार्थ के संदर्भ में " न कोई भगवान से उपर है, न मध्य और न निचे, न उनके कोई बराबर ही है।
इसमें मुर्ति अर्थ तो बैठ नहीं रहा है।
३) एक गीता का श्लोक देखते हैं जिसमें प्रतिमा का अर्थ स्पष्ट किया है-
**पितासि लोकस्य चराचरस्य
त्वमस्य पूज्यश्च गुरुर्गरीयान् ।
न त्वत्समोऽस्त्यभ्यधिक: कुतोऽन्यो
लोकत्रयेऽप्यप्रतिमप्रभाव ॥**
श्रीधर स्वामी गीता का टीका में लिखते है- न विद्यते प्रतिमा उपमा यस्य सोऽप्रतिम:।।
अभिषेकदासविरचित: ( श्री वैष्णव)
2 years ago | [YT] | 2
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