जिला कार्यालय समाज कल्याण रायपुर के द्वारा "शासकीय प्रतियोगी परीक्षा शैक्षणिक संस्थान", मठपुरेना रायपुर में प्रारंभ किया गया है।

उक्त संस्था में विशेष रूप से दिव्यांग व उभयलिंगी अभ्यर्थियों को ऑफलाइन व ऑनलाइन दोनों ही माध्यमो से समस्त प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी नि:शुल्क करायी जाती है।

प्रतिदिन कक्षा का यूट्यूब लिंक शेयर किया जाता है, जिससे अभ्यर्थी कक्षा से जुड़ सकते है।
कक्षा का समय – ( सायं 06:00 से 08:00 बजे )

आप सभी से करबद्ध निवेदन है कि आपके जिले के अंतर्गत निवासरत दिव्यांगजनों व तृतीय लिंग के व्यक्तियों को इस सम्बन्ध में अवगत कराये।...धन्यवाद🙏🏻

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GCEEI EDUCATION

सभी विद्यार्थियों को सूचित किया जाता है कि CGPSC 2024 की परीक्षाओं के सफल समापन के बाद अब आपके पास एक महत्वपूर्ण वर्ष का समय है। इस दौरान सभी विषयों की पढ़ाई को आधार से लेकर गहराई तक पुनः शुरू किया जाएगा, ताकि आगामी परीक्षाओं के लिए आपकी तैयारी को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके।

इसके साथ ही, जो भी अन्य छात्र इस अध्ययन कार्यक्रम से जुड़ना चाहते हैं, उनके लिए भी यह सुनहरा अवसर है। कक्षाएं बेसिक से शुरू की जाएंगी, जिससे सभी छात्र शुरू से लेकर अंत तक पूरे पाठ्यक्रम को कवर कर सकेंगे।

सभी शिक्षक हर विषय के लिए समय, सामग्री, और पढ़ाई की रूपरेखा का ध्यान रखते हुए एक विस्तृत योजना बना रहे हैं।
इसलिए, आज कक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। सभी विद्यार्थियों से अनुरोध है कि पहले से पढ़ाए गए विषयों का पुनरावलोकन करें और अपनी तैयारी को और मजबूत करें। जल्द ही पूरे वर्ष के लिए एक व्यवस्थित अध्ययन कार्यक्रम शुरू किया जाएगा

1 year ago | [YT] | 3

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"24 सितंबर को सिविल लाइन सर्किट हाउस, रायपुर में समाज कल्याण विभाग, छत्तीसगढ़ द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस के विशेष कार्यक्रम में सम्मिलित होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मूक-बधिर बच्चों और उनके सशक्तिकरण पर केंद्रित था। छत्तीसगढ़ शासन की कैबिनेट मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े जी के कर-कमलों से हमारे संस्थान को समाज कल्याण विभाग द्वारा सम्मानित किया गया। मूक-बधिर बच्चों की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को और भी विशेष बना दिया, साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले मूक-बधिर व्यक्तियों को भी सम्मानित किया गया।
"यह दिवस हमें यह प्रेरणा देता है कि हर व्यक्ति की आवाज़, चाहे वह किसी भी रूप में हो, समान रूप से महत्वपूर्ण है। संवाद की शक्ति को पहचानते हुए, हमें ऐसे समाज का निर्माण करना चाहिए जहाँ मूक-बधिर बच्चे और व्यक्ति बिना किसी बाधा के अपनी भावनाओं और विचारों को व्यक्त कर सकें। आइए, हम एक ऐसा समावेशी समाज बनाने के लिए प्रतिबद्ध हों, जो हर भाषा और संवाद को समान रूप से महत्व दे और सभी को बराबरी और सम्मान प्रदान करे।"

1 year ago | [YT] | 31

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जब 85 × 87 × 89 × 91× 95 × 96 को 100 से भाग दें, तो शेषफल क्या रहता है ?

2 years ago | [YT] | 2

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भारत सरकार द्वारा 5वीं पंचवर्षीय योजना अवधि में किसी जनजाति को विशेष रुप से पिछड़ी जनजाति (P.V.T.G.) घोषित करने के लिए निम्न में से कौन से मापदण्ड निर्धारित नहीं किये गए हैं ।

2 years ago | [YT] | 3