कोई 25 साल की उम्र में कंपनी का मालिक बन गया लेकिन 50 साल की उम्र होते ही उसकी मृत्यु हो गई, वही कोई 50 की उम्र में कंपनी का मालिक बना और 90 साल तक जिया,जहाँ ओबामा ने 50 साल की उम्र में रिटायरमेंट ले लिया वही ट्रम्प ने 70 की उम्र में शुरू की, दुनिया में हर इंसान अपने-अपने टाइम जोन के हिसाब से चल रहा है, आपके आस-पास में कई लोग होंगे जो आपसे आगे है तो कुछ लोग ऐसे भी होंगे जो आपसे पीछे है, सच तो ये है कि हर कोई अपनी-अपनी रेस में दौड़ रहा है, उनसे अपनी तुलाना मत करो तुम अपने हिसाब से एकदम सही समय पर हो, ना तुम ज्यादा जल्दी हो और ना तुम ज्यादा देर हो, तो फालतू का तनाव लेके अपनी वर्तमान जिंदगी को बेकार मत करो
हमारे यहां ‘सबके सामने शर्मिंदा कर देना’ अब सज़ा नहीं, आदत बन चुकी है। स्कूल में, घर में, बाज़ार में — बच्चे जब भी कोई गलती करते हैं, तो उन्हें समझाने के बजाय ‘सुधारने’ की कोशिश की जाती है — डराकर, दबाकर, और तोड़कर।पर क्या कोई बच्चा अपमान से सुधरता है? या वो बस अंदर ही अंदर बुझता जाता है?कृष्णेंदु की मौत हम सबके लिए एक आईना है। एक ऐसा आईना जिसमें हमें अपना चेहरा देखना चाहिए — खासकर तब, जब हम किसी बच्चे से उसकी बात पूछे बिना उसे दोषी ठहरा देते हैं।माता-पिता को, शिक्षकों को, और समाज को यह समझना होगा कि बच्चे केवल अनुशासन नहीं, समझदारी भी चाहते हैं। हर बार सज़ा ही हल नहीं होती 😡
Mb brain
7 months ago | [YT] | 2
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Mb brain
7 months ago | [YT] | 2
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Mb brain
7 months ago | [YT] | 3
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Mb brain
कोई 25 साल की उम्र में कंपनी का मालिक बन गया लेकिन 50 साल की उम्र होते ही उसकी मृत्यु हो गई, वही कोई 50 की उम्र में कंपनी का मालिक बना और 90 साल तक जिया,जहाँ ओबामा ने 50 साल की उम्र में रिटायरमेंट ले लिया वही ट्रम्प ने 70 की उम्र में शुरू की, दुनिया में हर इंसान अपने-अपने टाइम जोन के हिसाब से चल रहा है, आपके आस-पास में कई लोग होंगे जो आपसे आगे है तो कुछ लोग ऐसे भी होंगे जो आपसे पीछे है, सच तो ये है कि हर कोई अपनी-अपनी रेस में दौड़ रहा है, उनसे अपनी तुलाना मत करो तुम अपने हिसाब से एकदम सही समय पर हो, ना तुम ज्यादा जल्दी हो और ना तुम ज्यादा देर हो, तो फालतू का तनाव लेके अपनी वर्तमान जिंदगी को बेकार मत करो
7 months ago | [YT] | 0
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Mb brain
हमारे यहां ‘सबके सामने शर्मिंदा कर देना’ अब सज़ा नहीं, आदत बन चुकी है। स्कूल में, घर में, बाज़ार में — बच्चे जब भी कोई गलती करते हैं, तो उन्हें समझाने के बजाय ‘सुधारने’ की कोशिश की जाती है — डराकर, दबाकर, और तोड़कर।पर क्या कोई बच्चा अपमान से सुधरता है? या वो बस अंदर ही अंदर बुझता जाता है?कृष्णेंदु की मौत हम सबके लिए एक आईना है। एक ऐसा आईना जिसमें हमें अपना चेहरा देखना चाहिए — खासकर तब, जब हम किसी बच्चे से उसकी बात पूछे बिना उसे दोषी ठहरा देते हैं।माता-पिता को, शिक्षकों को, और समाज को यह समझना होगा कि बच्चे केवल अनुशासन नहीं, समझदारी भी चाहते हैं। हर बार सज़ा ही हल नहीं होती 😡
7 months ago | [YT] | 0
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Mb brain
😌
11 months ago | [YT] | 6
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Mb brain
11 months ago | [YT] | 4
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Mb brain
1 year ago | [YT] | 4
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Mb brain
@Mahakumbh
1 year ago | [YT] | 2
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Mb brain
#mahakumbh2025
1 year ago | [YT] | 3
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