समस्त देवी-देव-सहित-त्रिदेव के दिव्यांश को धारण करनेवाली माँ भगवती, जगत की उद्भव-पालन-प्रलय-कारिणी-महाशक्ति हैं। शरणागत- वत्सला-सदया-सुहृदया- महामाया, महा-मंगला-सुमंगला हैं। अपने आराधकों-साधकों-भक्तों की सम्पूर्ण कामनाओं को पूर्णतः प्राप्त करानेवाली हैं- ‘‘यं यं चिन्तयते कामं, तं तं प्राप्नोति निश्चितम्।’’ इन्हीं अनन्त-अमूल्य-मातृशक्ति-सद्भावना-प्रेरणा से प्रेरित होकर श्रीवैष्णवीमातृभक्त-श्रीयुत डाॅ रंजीत कुमार जी ने भक्तों एवं धर्मावलंबियों के सहयोग से भगवती-श्रीवैष्णवी माता की सुदिव्य-मूर्ति की संस्थापना का सुदृढ़-शुभ संकल्प लिया और ‘राँची’ नगरी-निवासी-भक्तों के लिए, दुर्गम ‘‘देवी-दर्शन’’ को सुगम कर दिया। श्रीवैष्णवी माताजी के दिव्य-दर्शन की सार्वजनिक सुविधा हो गयी। गेतलातु-राँची का ‘‘श्रीवैष्णवी शिवराम सेवा संस्थान’’ - श्रीवैष्णवी धाम बन गया।
विद्या-बुद्धि-समृद्धि दात्राी तथा मनोबांछित फल प्रदायिनी गेतलातु स्थित माता वैष्णवी आपकी समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण करनेवाली हैं। जम्मू-कटरा स्थित माता के भवन से प्राप्त अमूल्य दिव्यांश से निर्मित यह देवी स्थल अतुल्यनीय है।
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