सभी को सादर प्रणाम-नमस्कारकम् जी😌🙏
🔥यह शाश्वत ही तो सनातन हैं..
और सनातन ही सत्य हैं। और सत्य ही तो धर्म हैं |🔥

🙏जय श्री राम 🚩 जय भवानी🦁
🐍🐍हर-हर महादेव 🔱 कृष्णा वंदेजगतगुरुम्🙏😌

आप सभी भाइयों-बहनों का हमारे ' ग्रेट हिन्दू ज्ञान ' में हार्दिक स्वागत हैं।
आप सभी को यहां मिलेगा...
एक संपूर्ण जीवन = धर्म+अर्थ+काम+मोक्ष |
धर्म - (सत्य-परोपकार)
अर्थ - (ज्ञान-विज्ञान)
काम - (आनंद-परमानंद)
और मोक्ष - (भक्ति-अध्यात्म) का ज्ञान |
वेद-उपनिषद, पुराण-शास्त्र का ज्ञान |
सनातन संस्कृति - सनातन धर्म पर गौरवान्वित करने वाला ज्ञान 🤗🤗

तो हमारे सनातन संस्कृति - सनातन धर्म एवं एक सम्पूर्ण मानव जीवन के बारे में जानने के लिए..'GREAT HINDU GYAN' को जरूर
Subscribe (( 🔔)) करें |🔥❣️🚩🙏

👉👁️🚩झूठ और बुराई अपने आप फैलती हैं, फैलाने की जरूरत •अच्छाई और सच्चाई• को पड़ती हैं | 🔥100%♨️

आपका जीवन श्रेष्ठ हो-विशिष्ट हो-मंगलमय हो |
जय हिन्द ✊ वन्देमातरम 🇮🇳🙏
जय जवान 👮 जय किसान 🌾🙏


Great Hindu Gyan

"कण-कण में शंकर"
"सीयाराम मय सब जग जानी, करहु प्रणाम जोरी जुग पानी"
सनातन संस्कृति के इन वाक्यों को वास्तविक करने वाले, हर जीव में ईश्वर समाया हुआ हैं,उनको भी भावों की अनुभूति होती हैं। सनातन हिन्दू धर्म के प्रकृति पूजन को
वैज्ञानिक आधार पर सत्य सिद्ध करने वाले.. भारत के ऐसे महान वैज्ञानिक 'सर जगदीश चन्द्र बोस' जी को उनके पुण्य तिथि पर शत् शत् नमन।🔥❣️💐🇮🇳🚩🙏😌


👉👀जगदीश चन्द्र बोस जी के प्रयोग और सफलता-

जगदीश चंद्र बोस ने सूक्ष्म तरंगों (माइक्रोवेव) के क्षेत्र में वैज्ञानिक कार्य तथा अपवर्तन, विवर्तन और ध्रुवीकरण के विषय में अपने प्रयोग आरंभ कर दिये थे।

लघु तरंगदैर्ध्य, रेडियो तरंगों तथा श्वेत एवं पराबैंगनी प्रकाश दोनों के रिसीवर में गेलेना क्रिस्टल का प्रयोग बोस के द्वारा ही विकसित किया गया था।

मारकोनी के प्रदर्शन से 2 वर्ष पहले ही 1885 में बोस ने रेडियो तरंगों द्वारा बेतार संचार का प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन में जगदीश चंद्र बोस ने दूर से एक घण्टी बजाई और बारूद में विस्फोट कराया था।

आजकल प्रचलित बहुत सारे माइक्रोवेव उपकरण जैसे वेव गाईड, ध्रुवक, परावैद्युत लैंस, विद्युतचुम्बकीय विकिरण के लिये अर्धचालक संसूचक, इन सभी उपकरणों का उन्नींसवी सदी के अंतिम दशक में बोस ने अविष्कार किया और उपयोग किया था।

बोस ने ही सूर्य से आने वाले विद्युत चुम्बकीय विकिरण के अस्तित्व का सुझाव दिया था जिसकी पुष्टि 1944 में हुई।

इसके बाद बोस ने, किसी घटना पर पौधों की प्रतिक्रिया पर अपना ध्यान केंद्रित कर दिया। बोस ने दिखाया कि यांत्रिक, ताप, विद्युत तथा रासायनिक जैसी विभिन्न प्रकार की उत्तेजनाओं में सब्जियों के ऊतक भी प्राणियों के समान विद्युतीय संकेत उत्पन्न करते हैं।

3 years ago | [YT] | 2

Great Hindu Gyan

करतार सिंह सराभा..जिन्हें सिर्फ़ 19 साल की उम्र में ब्रिटिश हुकूमत ने फाँसी के फंदे पर चढ़ा दिया था ।
देश के लिए कुर्बानी देने वाले शहीद ए आज़म भगत सिंह भी करतार सिंह सराभा को अपना गुरु मानते थे |


करतार सिंह सराभा का जन्म 24 मई 1896 को पंजाब के साराभा गाँव में हुआ जो कि लुधियाना जिले में है । उनका जन्म एक समपन्न पंजाबी फैमिली में हुआ था । पर बचपन में ही उनके सर से पिता का साया उठ गया जिसके बाद उनके दादा बदन सिंह ने उनका और उनकी छोटी बहन का पालन पोषण किया ।

उन्होने अपनी नौंवी तक की शिक्षा लुधियाना में ही ली । इसके बाद वो उड़ीसा में अपने चाचा के पास आ गये जो की वहाँ वन विभाग अधिकारी के तौर पर कार्यरत थे ।

आगे की पढ़ाई उन्होने उड़ीसा में अपने चाचा के पास रहकर पूरी की । हाई स्कूल तक पढ़ाई उड़ीसा से करने के बाद 1912 में आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें अमेरिका भेजा गया ।

अच्छे स्कूल्स में पढ़ने और संपन्न परिवार में पलने बढ़ने के बाद करतार सिंह सराभा को कभी एहसास ही नहीं हुआ की उनका देश गुलाम है । पर जैसी ही उन्होने अमेरिका की धरती पर कदम रखा एक घटना ने उन्हें ये एहसास दिला दिया की वो एक गुलाम देश के नागरिक हैं ।

👉👀🚩अमेरिका की धरती पर मिला मकसद

असल में जैसे ही वो जहाज़ से अमेरिका की धरती पर कदम रखते हैं तो उनकी गहन तलाशी ली जाती है । उनसे बहुत पूछताछ होती है और उनके सामान की भी बहुत तलाशी ली जाती है । 

जबकि दूसरे यात्रियों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया जाता । इस पर जब करतार सिंह उन अधिकारियों से इसका कारण पूछते हैं तो उन्हें जवाब मिलता है कि,
तुम भारत से आए है जो की एक गुलाम देश है”

ये शब्द सुनकर करतार सिंह हक्के बक्के रह जाते हैं, क्यूंकी उन्होने कभी इस बारे में सोचा ही नहीं था की वो गुलाम देश के वासी हैं । पर उन अमरीकी अधिकारीयों के ये कुछ शब्द उनके मन पर गहरा असर डालते हैं ।

भारत को हमेशा से एक ग़रीब देश समझा जाता है लेकिन उस समय भी बहुत सारे भारतीय विदेशों में पढ़ाई किया करते थे । पर विदेशों में भारत की गुलामी की वजह से उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं होता था ।

विदेशों में होने वाले उस दुर्व्यवहार के खिलाफ भी भारतीयों ने बहुत सी लड़ाइयाँ लड़ी और आपस में एकजुट होने लगे । विदेशों में पढ़ने वाले भारतीयों ने महसूस किया की अगर विदेशों में उनके साथ ऐसा व्यवहार हो सकता है तो भारत में कमजोर तबके के लोगों के साथ कितना दुर्व्यवहार होता होगा ।

करतार सिंह सराभा के मन में भी भारत को आज़ाद करवाने की भावना जन्म ले चुकी थी । करतार सिंह ने अमेरिका की बार्केली यूनिवर्सिटी में अड्मिशन लिया । यूनिवर्सिटी में वो नालंदा क्लब ऑफ इंडियन स्टूडेंट्स नाम के एक प्लॅटफॉर्म से जुड़े हुए थे ।

1912 में पोर्टलैंड में भारतीयों का एक सम्मेलन हुआ । इस सम्मेलन में सोहन सिंह भकना, हरनाम सिंह और लाला हरदयाल जैसी क्रांतिकारियों ने भाग लिया ।

लाला हरदयाल के भाषण को सुनकर करतार सिंह बहुत प्रभावित हुए और भारत की आज़ादी को ही अपने जीवन का मकसद बना लिया ।

सेन फ्रांसिस्को में लाला हरदयाल के साथ करतार सिंह जगह जगह भाषण देते और नौजवानों को एकजुट होने की अपील करते । लाला हरदयाल, भाई परमानंद और करतार सिंह के प्रयत्नों से अमेरिका में पढ़ने और काम करने आए नौजवान इकठ्ठा होने लगे ।

दूसरी तरफ भारत में नौजवान पहले से ही कॉंग्रेस की नरम नीतियों से खुश नहीं थे । 1907 में हुए सूरत अधिवेशन के बाद कॉंग्रेस दो टुकड़ों में बंट गई,

जिन्हें नरम दल और गरम दल कहा जाता है ।

नौजवान इस पक्ष में थे की हथियारों के बल पर ही आज़ादी हासिल की जा सकती है । 1909 में मदन लाल ढींगरा ने भारत से लंदन जाकर कर्जन वायली की हत्या कर दी ।

ढींगरा को अँग्रेज़ों ने फाँसी पर चढ़ा दिया, लेकिन इससे विदेशों में रहने वाले भारतीयों में क्रांति की ज्वाला और भड़क उठी ।


👉👀🚩ग़दर पार्टी की स्थापना

साल 1913 में अमेरिका में रहने वाले भारतीयों ने गदर पार्टी की स्थापना की ।

इस संगठन का एक ही मकसद था, 1857 की क्रांति की तरह से भारत में एक नयी क्रांति को जन्म देना और देश को आज़ादी दिलाना । माना जाता है की करतार सिंह सराभा और गदर पार्टी की शुरुआत सावरकर के विचारों से भी प्रभावित थी ।

ग़दर की क्रांति
प्रथम विश्व युद्ध के दौरान अँग्रेज़ों के उपर दबाव बहुत बढ़ गया था । उन्हें कई मोर्चों पर लड़ाइयाँ लड़नी पड़ रही थी । उसे जर्मनी के साथ युद्ध लड़ना पड़ रहा था ।

ऐसे में गदर पार्टी के कार्यकर्ताओं का मानना था कि ऐसे समय में अगर भारत में क्रांति हो जाए तो अँग्रेज़ों के लिए उस विद्रोह को दबाना मुश्किल हो जाएगा ।

इसी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए करतार सिंह सराभा जैसी क्रांतिकारियों की अपील पर 8000 के करीब भारतीय विदेशों से भारत की और चल पड़े ।

करतार सिंह श्री लंका के रास्ते भारत पहुँचे और छिपकर क्रांति के लिए काम करने लगे । गदर पार्टी के साथ लोगों को जोड़ने, क्रांति के लिए हथियारों का इंतज़ाम करने के साथ साथ उन्होने बॉम्ब भी बनाए ।

21 फ़रवरी 1915 का दिन पूरे देश में अँग्रेज़ों के खिलाफ गदर के लिए निर्धारित किया गया । लेकिन किसी ने इसकी सूचना अँग्रेज़ों तक पहुँचा दी, जिसके बाद इस तारिक़ को बदल दिया गया ।

पर अँग्रेज़ों तक हर खबर पहले ही पहुच जाती थी । जिसके बाद ब्रिटिश हुकूमत ने गदर पार्टी के लोगों को पकड़ना शुरू कर दिया ।

रासबिहारी बोस भी क्रांति के लिए कोशिशों में लगे थे, लेकिन जब सभी साथी पकड़े जा रहे थे तो वो किसी तरह बचकर लाहौर से कलकत्ता पहुँचे और वहाँ से नकली पासपोर्ट बनवाकर जापान चले गये ।करतार सिंह को भी उन्होने अफ़ग़ानिस्तान भाग जाने की सलाह दी लेकिन करतार सिंह नहीं गये और अभियान के लिए काम करते रहे ।

👉👀🚩 करतार सिंह सराभा की मृत्यु कैसे हुई Kartar Singh Sarabha Death
1857 की क्रांति में जिस तरह सैनिकों ने विद्रोह शुरू किया था उसी तरह से सैनिकों को जागरूक करने के लिए करतार सिंह फ़ौजी छावनियों में जा रहे थे ।

ऐसी ही एक कोशिश के दौरान उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया । करतार सिंह और उनके साथियों पर हत्या, डाका डालने और शासन को उलटने का आरोप लगाया गया ।

उन पर लाहोर षड्यंत्र के नाम से मुक़दमा चलाया गया । करतार सिंह की उमर बहुत कम थी लेकिन उनमें देश के लिए प्रेम अटूट था । भगत सिंह की तरह से ही उनमें देश के लिए जान देने की आतूरता थी ।

उन पर चले मुक़दमें के बाद जज ने उन्हें फाँसी की सज़ा सुनाई और कहा इतनी सी उम्र में ही यह लड़का ब्रिटिश साम्राज्य के लिए बहुत बड़ा खतरा है।

ना जाने करतार सिंह किस मिट्टी के बने थे, कोर्ट केस में आख़िरी सुनवाई के दौरान उन्होने कहा

“मैं चाहता हूँ मुझे फाँसी की सज़ा मिले ताकि में में फिर से भारत में जन्म लूँ और जब तक देश आज़ाद नहीं हो जाता तब तक में भारत में जन्म लेता रहूं”

फाँसी की सज़ा मिलने के बाद उन्हें बहुत खुशी हुई थी । वो एक समपन्न परिवार में पैदा हुए थे फिर भी उन्होने विद्रोह का रास्ता चुना था ।

👉👀🚩 कोर्ट में भी उन्होने कभी अपने बयानो को नर्म नहीं किया और सख़्त से सख़्त ब्यान दिए । इस पर एक बार जेल में उनके दादा जी उनसे मिलने पहुँचे तो उन्होने कहा की

“बेटा तुमने ये क्या किया

सभी रिश्तेदार तुम्हे बेवकूफ़ कह रहे हैं और कह रहे हैं कि तुम्हे क्या कमी थी “

इस पर करतार सिंह ने जवाब दिया था

“उनमें से हर कोई किसी ना किसी बीमारी से मर गया लेकिन देश की खातिर मरने का सोभाग्य सिर्फ़ मुझे मिला है”

इसके बाद 16 नवंबर 1915 को करतार सिंह को उनके 6 साथियों के साथ फाँसी दे दी गई ।


👉👀🚩 करतार सिंह जिस क्रांति की आग को सुलगता हुआ छोड़ गये थे उससे भगत सिंह ने ब्रिटिश हुकूमत की जड़ो को हिला कर रख दिया ।

भगत सिंह हमेशा करतार सिंह की तस्वीर को अपने पास रखते थे । नोजवान भारत सभा नाम का युवा संगठन जिसमें भगत सिंह और उनके साथी मिलकर काम करते थे उनकी हर सभा में करतार सिंह की तस्वीर को मंच पर रखकर उसे पुष्पांजलि दी जाती थी ।

करतार सिंह सराभा ने देश की आज़ादी के लिए हंसते हंसते अपनी जान दे दी । इस आज़ादी को हमे संभाल कर रखना होगा क्यूंकि इसे पाने के लिए हमारे लोगों ने बहुत कुर्बानियां दी हैं ।

3 years ago | [YT] | 5

Great Hindu Gyan

भारत के प्रथम मुख्य न्यायाधीश...

3 years ago | [YT] | 4

Great Hindu Gyan

जिन्होंने प्रकाश का रास्ता मोड़ दिया.. आप्टिकल फाइबर के जनक पद्मविभूषण श्री डॉ. नरिंदर सिंह कपानी जी |

नरिंदर सिंह कपानी (31 अक्टूबर, 1926 - 4 दिसम्बर, 2020) भारतीय मूल के अमेरिकी भौतिक विज्ञानी हैं, जो फाइबर ऑप्टिक्स में अपने काम के लिए जाने जाते हैं।
फॉर्च्यून द्वारा उनके ‘सेंचुरीज़ इशू’ के व्यापारियों (1999) में सात 'अनसंग हीरोज' में से एक के रूप में उन्हें नामित किया गया था। उन्हें 'फाइबर ऑप्टिक्स के पिता' के रूप में भी जाना जाता है। फाइबर ऑप्टिक्स शब्द 1956 में नरिंदर सिंह कपानी कपानी द्वारा गढ़ा गया था। वह एक पूर्व आईओएफ़एस अधिकारी हैं। भारतीय आयुध कारखानों सेवा, भारत सरकार की एक सिविल सेवा है। आईओएफ़एस अधिकारी राजपत्रित रक्षा-नागरिक अधिकारी हैं जो रक्षा मंत्रालय के अधीन होते हैं। वे भारतीय आयुध कारखानों के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार हैं, जो भारत की रक्षा उत्पादन क्षमताओं को प्रदान करते हैं



क्यों खास हैं? ऑप्टिकल फाइबर..
ऑप्टिकल फाइबर का उपयोग विभिन्न उद्योगों और चिकित्सा अनुप्रयोगों में किया जाता है जैसे -

1) चिकित्सा उद्योग - चूंकि ऑप्टिकल फाइबर बहुत पतला और लचीला होता है इसलिए इसका उपयोग शरीर के आंतरिक भाग को देखने के लिए किया जाता है। इसका उपयोग सर्जरी के दौरान इंटीरियर पर प्रकाश संचारित करने के लिए भी किया जाता है। ऑप्टिकल फाइबर दंत चिकित्सा अनुप्रयोग में भी सहायक है।

2) संचार - ऑप्टिकल फाइबर का उपयोग मुख्य रूप से दूरसंचार उद्देश्यों के लिए किया जाता है। तांबे के तारों की तुलना में, यह सिग्नल को अधिक सटीक और अधिक गति से प्रसारित करता है। चूंकि ऑप्टिकल फाइबर प्लास्टिक और कांच से बना होता है, यह वजन में हल्का होता है और अधिक लचीला होता है इसलिए इसे संभालना आसान होता है।

3) रक्षा - जैसा कि हम सभी जानते हैं, रक्षा में डेटा की सुरक्षा अधिक महत्वपूर्ण है। ऑप्टिकल फाइबर इसके लिए सबसे अच्छा है क्योंकि यह अवांछित संस्थाओं को डेटा रिसाव के जोखिम को कम करता है।

4) इंटरनेट - चूंकि ऑप्टिकल फाइबर बहुत तेज गति से बड़ी मात्रा में डेटा ले जा सकता है इसलिए इसका उपयोग इंटरनेट प्रदान करने में किया जा सकता है।

5) कंप्यूटर नेटवर्किंग - यदि हम एक ही भवन में विभिन्न कंप्यूटरों को जोड़ने के लिए ऑप्टिकल फाइबर का उपयोग करते हैं, तो उनके बीच संचार बहुत बढ़ जाता है।

6) ऑटोमोबाइल उद्योग - आधुनिक ऑटोमोबाइल वाहन के अलग-अलग हिस्से होते हैं और इसे ECU द्वारा नियंत्रित किया जाता है। उनके बीच एक तेज संचार प्रणाली स्थापित करने की आवश्यकता है। इस उद्देश्य के लिए ऑप्टिकल फाइबर सबसे उपयुक्त है। यह वाहन की सुरक्षा और सुरक्षा को बढ़ाता है।
प्रकाश और सजावट - चूंकि ऑप्टिकल फाइबर पारदर्शी सामग्री से बना होता है इसलिए यह क्षेत्र को हल्का भी कर सकता है। इस वजह से इसका व्यापक रूप से सजावट उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जाता है।


आप्टिकल फाइबर तकनीक की विशेषता -
1) ऑप्टिकल फाइबर वजन में कम होता हैं।
2) इसमें कम से कम नुकसान होता है इसलिए बिजली की खपत कम होती है।
3) लंबे समय के लिए बहुत कम लागत होना।
4) ऑप्टिकल फाइबर सुरक्षित है और डेटा को निजी रखता हैं।
5) इसमें बड़ी डेटा संचारण क्षमता हैं।
6) इससे कोई चिंगारी या आकस्मिक दुर्घटना नहीं होती हैं।
7) ऑप्टिकल फाइबर से कोई हानिकारक विद्युत चुम्बकीय विकिरण उत्सर्जित नहीं होता हैं।

बचपन की एक घटना से मिला, इस अविष्कार की प्रेरणा..
डॉ. नरिंदर सिंह उत्तर भारत के देहरादून में पले-बढ़े। वहां एक स्कूली बच्चे को एक शिक्षक ने डांटा कि प्रकाश केवल एक सीधी रेखा में यात्रा कर सकता है। नरिंदर सिंह ने असहमति जताई और यथास्थिति को गलत साबित किया। उनके जीवन के काम का परिणाम फाइबर ऑप्टिक्स के निर्माण का कारण था। नरिंदर सिंह कहते हैं, "कोनों के चारों ओर प्रकाश को मोड़ना मेरा जुनून बन गया।"

3 years ago | [YT] | 5

Great Hindu Gyan

देश की स्वतंत्रता के पश्चात सरदार पटेल उप प्रधानमंत्री के साथ प्रथम गृह, सूचना तथा रियासत विभाग के मंत्री भी थे। सरदार पटेल की महानतम देन थी 562 छोटी-बड़ी रियासतों का भारतीय संघ में विलीनीकरण करके भारतीय एकता का निर्माण करना। विश्व के इतिहास में एक भी व्यक्ति ऐसा न हुआ जिसने इतनी बड़ी संख्या में राज्यों का एकीकरण करने का साहस किया हो।

5 जुलाई 1947 को एक रियासत विभाग की स्थापना की गई थी। एक बार उन्होंने सुना कि बस्तर की रियासत में कच्चे सोने का बड़ा भारी क्षेत्र है और इस भूमि को दीर्घकालिक पट्टे पर हैदराबाद की निजाम सरकार खरीदना चाहती है। उसी दिन वे परेशान हो उठे। उन्होंने अपना एक थैला उठाया, वी.पी. मेनन को साथ लिया और चल पड़े। वे उड़ीसा पहुंचे, वहां के 23 राजाओं से कहा, "कुएं के मेढक मत बनो, महासागर में आ जाओ।" उड़ीसा के लोगों की सदियों पुरानी इच्छा कुछ ही घंटों में पूरी हो गई। फिर नागपुर पहुंचे, यहां के 38 राजाओं से मिले। इन्हें सैल्यूट स्टेट कहा जाता था, यानी जब कोई इनसे मिलने जाता तो तोप छोड़कर सलामी दी जाती थी। पटेल ने इन राज्यों की बादशाहत को आखिरी सलामी दी। इसी तरह वे काठियावाड़ पहुंचे। वहां 250 रियासतें थी। कुछ तो केवल 20-20 गांव की रियासतें थीं। सबका एकीकरण किया।

एक शाम मुम्बई पहुंचे। आसपास के राजाओं से बातचीत की और उनकी राजसत्ता अपने थैले में डालकर चल दिए। पटेल पंजाब गये। पटियाला का खजाना देखा तो खाली था। फरीदकोट के राजा ने कुछ आनाकानी की। सरदार पटेल ने फरीदकोट के नक्शे पर अपनी लाल पैंसिल घुमाते हुए केवल इतना पूछा कि "क्या मर्जी है?" राजा कांप उठा। आखिर 15 अगस्त 1947 तक केवल तीन रियासतें-कश्मीर, जूनागढ़ और हैदराबाद छोड़कर उस लौह पुरुष ने सभी रियासतों को भारत में मिला दिया। इन तीन रियासतों में भी जूनागढ़ को 9 नवम्बर 1947 को मिला लिया गया तथा जूनागढ़ का नवाब पाकिस्तान भाग गया। 13 नवम्बर को सरदार पटेल ने सोमनाथ के भग्न मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया, जो पंडित नेहरू के तीव्र विरोध के पश्चात भी बना। 1948 में हैदराबाद भी केवल 4 दिन की पुलिस कार्रवाई द्वारा मिला लिया गया। न कोई बम चला, न कोई क्रांति हुई, जैसा कि डराया जा रहा था।

जहां तक कश्मीर रियासत का प्रश्न है इसे पंडित नेहरू ने स्वयं अपने अधिकार में लिया हुआ था, परंतु यह सत्य है कि सरदार पटेल कश्मीर में जनमत संग्रह तथा कश्मीर के मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र संघ में ले जाने पर बेहद क्षुब्ध थे। नि:संदेह सरदार पटेल द्वारा यह 562 रियासतों का एकीकरण विश्व इतिहास का एक आश्चर्य था। भारत की यह रक्तहीन क्रांति थी।
महात्मा गांधी ने सरदार पटेल को इन रियासतों के बारे में लिखा था, "रियासतों की समस्या इतनी जटिल थी जिसे केवल तुम ही हल कर सकते थे।"

गृहमंत्री के रूप में वे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने भारतीय नागरिक सेवाओं (आई.सी.एस.) का भारतीयकरण कर इन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवाएं (आई.ए.एस.) बनाया। अंग्रेजों की सेवा करने वालों में विश्वास भरकर उन्हें राजभक्ति से देशभक्ति की ओर मोड़ा। यदि सरदार पटेल कुछ वर्ष जीवित रहते तो संभवत: नौकरशाही का पूर्ण कायाकल्प हो जाता।

लंदन टाइम्स ने लिखा था "बिस्मार्क की सफलताएं पटेल के सामने महत्वहीन रह जाती हैं। यदि पटेल के कहने पर चलते तो कश्मीर, चीन, तिब्बत व नेपाल के हालात आज जैसे न होते। पटेल सही मायनों में मनु के शासन की कल्पना थे। उनमें कौटिल्य की कूटनीतिज्ञता तथा महाराज शिवाजी की दूरदर्शिता थी। वे केवल सरदार ही नहीं बल्कि भारतीयों के हृदय के सरदार थे।

सरदार पटेल जी को शत्-शत् 😌कोटि-कोटि प्रणाम 🙏

🇮🇳जय हिन्द ✊ वन्देमातरम 🇮🇳
जय जवान🔥 जय किसान🌾

3 years ago | [YT] | 11

Great Hindu Gyan

'तुम धर्म को नष्ट करना चाहोगे, लोग तुम्हें अपना धर्म बना लेंगे |'

3 years ago | [YT] | 10