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नमस्कार किसान भाइयों और बागवानी प्रेमियों! आज के इस विशेष वीडियो में हम लेकर आए हैं थाईलैंड की सबसे लोकप्रिय सदाबहार कटहल की वैरायटी की पूरी जानकारी – थाई सदाबहार कटहल (Thai Evergreen Jackfruit) की खेती!
यह वैरायटी पूरे साल फल देती है, पर मुख्य रूप से सर्दियों की सीजन में जब मार्केट में और कोई वेराइटी का फल नहीं आता है खासकर देशी वेराइटी का तब मार्केट में यह एक मात्र फल होने के कारण बाजार में अच्छी कीमत में बिक जाता हैं ऑफ सीजन होने के कारण 50 रुपये से लेकर 150 रुपये किलो तक बिकता है और इसकी एक खासियत है कि इसका फल 500 ग्राम से लेकर 1 किलो तक की साइज का होता है जिसे लोग आसानी से खरीद लेते है । और जब गर्मियों में देशी कटहल आता है तब इसके पेड़ को रेस्ट दिया जाता है ताकि अगली सीजन में अच्छी क्वालिटी और अधिक मात्रा में फल दे सके ।। फल का आकार मध्यम आकार (0.500 - 2 किलो), गूदा गाढ़ा सफेद , मीठा, रेशे कम और खुशबूदार होता है। एक पेड पौधा लगाने के मात्र 18-24 महीने में फल आने शुरू हो जाते हैं और एक पेड़ से 20 किलो से 1.5 क्विंटल तक सालाना उत्पादन आसानी से लिया जा सकता है। जैसे जैसे पौधे की उम्र और साइज बढ़ती है वैसे वैसे उत्पादन भी बढ़ता जाता हैं।।
वीडियो में हमने कवर किया है: ✅ सदाबहार कटहल की टॉप वैरायटी।। ✅ अच्छी ग्रोथ के लिए मिट्टी, जलवायु और दूरी।। ✅ बेस्ट नर्सरी से असली एकेड पौधा कैसे चुनें।। ✅ रोपाई से लेकर पहला फल आने तक पूरी केयर।। ✅ खाद, पानी, कीट नियंत्रण और छंटाई के आसान टिप्स।। ✅ साल में बार फल लेने का सही समय।। ✅ बाजार भाव और कमाई का हिसाब।।
अगर आप कम जगह में ज्यादा मुनाफा चाहते हैं तो यह वैरायटी आपके लिए बेस्ट है। अभी पौधा लगाएं और 2 साल में एक अच्छी कमाई शुरू करें!
पौधे चाहिए? नीचे दिए नंबर पर व्हाट्सएप करें 👇 For More Info:- Ramkrishna nursery Mo.:- 7063829428, 9002875504. Village -Beldiha, P. S-Goghat, Dist - Hooghly, West Beangal
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KisanTech India – Agri & Dairy Expo 2026 का भव्य आयोजन सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है! 🚜🌾 Mandphiya, Chittorgarh (Rajasthan) में 31 जनवरी से 2 फरवरी तक चले इस सबसे बड़े Agri, Horticulture & Dairy प्लेटफॉर्म ने कृषि क्षेत्र को नई दिशा दी। 50,000+ किसान, 1,00+ डीलर्स और लीडिंग ब्रांड्स के साथ यह एक्सपो राजस्थान की सबसे बड़ी सफलता साबित हुआ।
इस स्पेशल वीडियो में:- - एक्जिबिटर्स की एनर्जेटिक वीडियो बाइट्स – लेटेस्ट मशीनरी, स्मार्ट फार्मिंग सॉल्यूशंस, डेयरी टेक्नोलॉजी और ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स की लाइव डेमो - विजिटर्स के असली रिएक्शन्स और खुशी – किसान भाइयों का नई तकनीक देखकर जोश और उत्साह - सोशल मीडिया पार्टनर्स के साथ मिलकर बनाई गई जबरदस्त डिजिटल रीच – 1M+ ऑडियंस तक पहुंच - एक्सपो के शानदार शॉट्स – लाइव प्रदर्शन, वर्कशॉप्स, नेटवर्किंग और किसानों-उद्यमियों का मिलन
यह सिर्फ एक प्रदर्शनी नहीं थी, बल्कि भारतीय कृषि को मजबूत और टेक्नोलॉजी से लैस बनाने की दिशा में बड़ा कदम था। सभी 200+ एक्जिबिटर्स, हजारों विजिटर्स, स्पीकर्स, स्टाफ, मीडिया पार्टनर्स और हमारे सोशल मीडिया टीम को दिल से बधाई! आपकी भागीदारी, सपोर्ट और एनर्जी के बिना यह सफलता नामुमकिन थी।
आइए मिलकर आने वाले सालों में और बड़े स्तर पर कृषि क्रांति लाएं। भारतीय किसान सशक्त बने, यही हमारा मकसद है!
पश्चिम बंगाल के प्रगतिशील किसान **किरणदेव** ने **थाई गोल्डन 8** अमरूद की खेती करके एक नया कीर्तिमान रचा है। लगभग 18 महीने पहले उन्होंने अपने एक एकड़ खेत में इस थाईलैंड की नई किस्म के पौधे लगाए। सबसे खास बात यह रही कि पहली बार मात्र **8 महीने** में ही पौधों पर फल लगना शुरू हो गया। लेकिन किसान ने समझदारी दिखाते हुए सिर्फ एक-दो फल छोड़कर बाकी सभी फलों को तोड़ दिया, ताकि पौधे की जड़ें और तना मजबूत होकर अच्छी ग्रोथ कर सके।
अब 18 महीने बाद परिणाम देखते ही बनता है – प्रत्येक पौधा औसतन **15 से 20 किलोग्राम** तक शानदार फल दे रहा है। उन्होंने पौधे से पौधे की दूरी **6 फीट** और लाइन से लाइन **7.5 फीट** रखी है, जिससे बगीचे में पर्याप्त जगह और हवा का संचार बना रहता है। फलों का औसत वजन **300 से 400 ग्राम** तक है, जो आकार और गुणवत्ता में बेहतरीन है। वर्तमान में होलसेल व्यापारी खेत से ही **60 से 80 रुपये प्रति किलोग्राम** की दर से खरीद रहे हैं, जिससे अच्छी कमाई हो रही है।
किरणदेव ने बताया कि सफलता का राज सही देखभाल में छिपा है। पौधों की अच्छी बढ़वार के लिए समय-समय पर **फंगिसाइड** और **इंसेक्टिसाइड** का स्प्रे किया जाता है, जिससे कोई बीमारी नहीं लगती। **प्रूनिंग** के लिए नई कोपलों की तुड़ाई करने से नई फुटान आती है और फ्लावरिंग भी भरपूर होती है। पौधे लगाते समय **देशी गोबर की खाद** और **सरसों की खली** का इस्तेमाल करने से जड़ें मजबूत हुईं और ग्रोथ तेज रही।
किरणदेव ने नया बगीचा लगाने वाले किसान भाइयों के लिए सलाह दी है की अगर नया बगीचा लगाते समय ड्रिप इरिगेशन और मल्चिंग का उपयोग किया जाए तो इससे खरपतवार की समस्या लगभग खत्म हो जाती है, जिससे खरपतवार नियंत्रण पर होने वाला खर्च बचता है। साथ ही, खेत में खरपतवार न होने से कई प्रकार की बीमारियों से छुटकारा मिलता है। ड्रिप से कम पानी में बागवानी संभव होती है और **फर्टिगेशन** (खाद के साथ पानी देना) से सभी पौधों का विकास एक समान होता है।
थाई गोल्डन 8 जैसी उच्च गुणवत्ता वाली थाईलैंड की अमरूद की नई किस्म की खेती आधुनिक तकनीकों के साथ मिलकर किसानों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है। किरणदेव का यह प्रयोग अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत है कि सही प्लानिंग, देखभाल और तकनीक से कम समय में ही अच्छी कमाई संभव है।
### 🌾 सिर्फ ₹100 में 1 एकड़ गेहूं की कटाई + बंडलिंग! Greenland Self Propelled Reaper Binder की लाइव डेमो
किसान भाइयों, आज के समय में गेहूं की कटाई एक बड़ी चुनौती बन गई है। मजदूरों की कमी, महंगी मजदूरी (3000-3500 रुपये प्रति एकड़ तक) और समय की बर्बादी से हर किसान परेशान है। लेकिन अब इसका समाधान है – **Greenland Self Propelled Reaper Binder**! ये कमाल की मशीन न केवल गेहूं काटती है, बल्कि उसी समय परफेक्ट बंडल भी बना देती है। 😲
इस वीडियो में हमने लाइव फील्ड डेमो दिखाया है, जहां ये मशीन 1 एकड़ को सिर्फ 1 घंटे में काटकर बंडल तैयार कर रही है। स्पीड इतनी तेज कि छोटे-मध्यम किसानों के लिए परफेक्ट! डीजल खर्च बेहद कम – करीब 1-1.5 लीटर प्रति एकड़, जिससे कुल लागत आती है मात्र **₹100 प्रति एकड़** (कस्टम हायरिंग पर)। मैनुअल कटाई से हजारों रुपये की बचत!
**मशीन की खासियतें:** - **कटाई + बंडलिंग एक साथ:** मजदूरों की जरूरत खत्म, समय और पैसा दोनों बचत। - **क्षमता:** 1 एकड़ प्रति घंटा, 10 HP डीजल इंजन के साथ। - **फायदे छोटे किसानों के लिए:** आसानी से चलाई जा सकती है, छोटे खेतों में भी परफेक्ट। - **कस्टम हायरिंग का मौका:** मशीन खरीदकर दूसरों के खेत काटें और अच्छी कमाई करें।
आज जहां कॉम्बाइन हार्वेस्टर बड़े किसानों के लिए हैं, वहीं ये रीपर बाइंडर छोटे-मध्यम किसानों की असली साथी है। मजदूरों की टेंशन भूल जाइए, तेज कटाई और साफ बंडल पाइए!
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बत्ती गुल? चिंता नहीं! 😎 अगर रात में खेत की रखवाली करनी हो या घर में अचानक बत्ती गुल हो जाए, तो आपके लिए Globim की Top 5 Agriculture Torches हैं। इस वीडियो में हम दिखाएँगे:
🔦 Top 5 Globim Torches – Raksha, Jugnu, 7700, Mili और Gorkha
Raksha: हल्की और रोज़मर्रा के छोटे-मोटे काम के लिए।
Jugnu: Rechargeable Headlamp, दोनों हाथ फ्री, High Power LED।
7700: Heavy Duty Torch, Shockproof Body, Solar Charging Option।
Mili: High Quality, Long Backup, Solar Panel से चार्ज।
Gorkha: Premium Torch, 7000 mAh Battery, 14–15 घंटे Backup, SOS Blinker और High-Low Function।
💡 Highlights of this video: Battery Backup: 3 से 15 घंटे तक Beam Range: 1000–1500 मीटर Rechargeable & Solar Charging Options Heavy Duty & Shockproof Bodies
किसान भाइयों के लिए खास – खेत और घर दोनों में काम आने वाली टॉर्च! देखिए कौन सी Torch आपके लिए सबसे सही है और अपने खेत/घर की रखवाली आसान बनाइए।
120 साहीवाल गायों के Low Cost Dairy Farm की पूरी कहानी जानिए। इस वीडियो में हम आपको दिखाएंगे कि कैसे कम लागत में इतना बड़ा डेयरी फार्म बनाया जा सकता है और कैसे इससे रोजाना लाखों की कमाई की जा सकती है।
साथ ही, नए किसान भी सीखेंगे कि दूध का व्यवसाय (Dairy Farm) कैसे शुरू करें, किन चीज़ों का ध्यान रखें, और कम लागत में ज़्यादा मुनाफ़ा कैसे कमाएं।
📌 वीडियो में कवर किए गए टॉपिक्स
लो-कॉस्ट डेयरी फार्म का डिज़ाइन
120 साहीवाल गायों की देखभाल और मैनेजमेंट
रोज़ाना 28 हजार रुपये की कमाई का फॉर्मूला
नए किसानों के लिए डेयरी बिज़नेस शुरू करने के टिप्स
फ़ीड, मैनेजमेंट और मार्केटिंग के सीक्रेट्स
🔥 अगर आप भी डेयरी फार्म शुरू करने का सोच रहे हैं, तो ये वीडियो आपके लिए है!
₹45 लाख सालाना कमाई सिर्फ 25 बीघा बागवानी खेती से? जी हाँ! गुजरात के एक प्रगतिशील किसान ने यह कर दिखाया है — और आज हम उसी की असली कहानी लेकर आए हैं।
📍 इस वीडियो में हम बात कर रहे हैं: गुजरात के भावनगर ज़िले के तालाजा क्षेत्र के रहने वाले – दानुभाई रणाभाई सोलंकी की, जिन्होंने 10 साल पहले शतावरी की खेती से अपनी प्रगतिशील यात्रा शुरू की थी।
🪴 धीरे-धीरे उन्होंने… 1 एकड़ में ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की, जिसे बढ़ाकर आज 12,000 से अधिक ड्रैगन फ्रूट प्लांट्स तक पहुँचा दिया है। 5 साल पहले उन्होंने खजूर (डेट पाम) की खेती भी शुरू की, जिसमें 125 प्लांट्स लगाए गए हैं। - इसके साथ ही उन्होंने 2 पॉलीहाउस और 2 नेट हाउस भी स्थापित किए हैं।
🌳 आज वे कुल 25 बीघा भूमि में उन्नत बागवानी खेती कर रहे हैं: - जिसमें शामिल हैं: चंदन, पैशन फ्रूट, मोसंबी, सुपारी, अंजीर, और - 5 साल पहले लगाए गए 50 एवोकाडो के पौधे, जिनसे अब उत्पादन शुरू हो गया है।
🥑 दानुभाई का कहना है: एक एवोकाडो फल की कीमत ₹100 होती है, जिससे किसान बहुत अच्छी कमाई कर सकते हैं।”
🌾 कुल उनके पास 80 बीघा ज़मीन है: - जिसमें वे 30 बीघा में आधुनिक बागवानी खेती - और **50 बीघा में पारंपरिक फसलें** जैसे कपास और मूंगफली की खेती करते हैं।
💰 कमाई का फर्क देखिए: - 50 बीघा पारंपरिक खेती से सालाना मात्र ₹6-7 लाख - जबकि 30 बीघा बागवानी से सालाना ₹40-45 लाख तक की कमाई होती है!
🧊 इसके अलावा उन्होंने सरकार से सब्सिडी लेकर एक **कोल्ड स्टोरेज यूनिट** भी बनवाया है, जिससे वे ड्रैगन फ्रूट को 2 महीने तक स्टोर कर बाजार में अच्छी कीमत पर बेच पाते हैं।
✅ इस वीडियो में जानिए: - किसान का पूरा फार्मिंग मॉडल - ड्रैगन फ्रूट, खजूर और एवोकाडो की तकनीकी जानकारी - सिंचाई और मार्केटिंग की रणनीति - और वह सोच, जिसने उन्हें लाखों की कमाई दिलवाई
🎯 यदि आप भी Orchard Farming या Modern Farming शुरू करने की सोच रहे हैं, तो यह वीडियो आपके लिए एक गाइड की तरह काम करेगा। https://youtu.be/5B5-0kfP4o8?si=waTpP...
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**क्या आपकी कपास की फसल भी खरपतवार से जूझ रही है?** हर किसान की यही चिंता रहती है – संकरी, चौड़ी और जिद्दी खरपतवार जो न सिर्फ फसल का पोषण खा जाते हैं, बल्कि पैदावार को भी 40% तक घटा देते हैं।
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**लक्ष एग्रिएम्प्लिमेंट की ट्रैक्टर चलित स्प्रे मशीन: किसानों के लिए वरदान**
उदयपुर जिले के खेरोदा गांव में स्थित **लक्ष एग्रिएम्प्लिमेंट** किसानों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले कृषि यंत्र बनाने के लिए जाना जाता है। यहाँ सीड ड्रिल, ट्रॉली, टीलर और स्प्रे मशीन जैसे कई यंत्र बनाए जाते हैं। आज हम बात करेंगे उनकी **ट्रैक्टर चलित स्प्रे मशीन** की, जो आधुनिक तकनीक और मजबूती का शानदार नमूना है। इसकी खासियत और फायदों को जानने के लिए हमने फैक्ट्री के मालिक **श्री दिनेश जी जनवा** से बात की, जिनका मुख्य उद्देश्य है किसानों को किफायती और टिकाऊ यंत्र उपलब्ध कराना।
### **मजबूत बनावट और गुणवत्ता** लक्ष एग्रिएम्प्लिमेंट की स्प्रे मशीन की बॉडी बनाने के लिए **टाटा कंपनी का हैवी मेटल** इस्तेमाल किया जाता है, जो इसे लंबे समय तक टिकाऊ बनाता है। मशीन में **नटराज कंपनी का पंप** और खुद के ब्रांड की **1000 फीट तक लंबी नली** दी जाती है। यह नली लंबे क्षेत्र में स्प्रे करने में बेहद कारगर है। मशीन की खासियत है इसका **कंपन-मुक्त डिज़ाइन**, जो इसे इस्तेमाल में आसान और आरामदायक बनाता है।
### **उन्नत तकनीक और विशेषताएँ** इस स्प्रे मशीन में **कपलिंग सिस्टम** और **क्रॉस सिस्टम** का उपयोग किया गया है, जिसके कारण इसे बिना समतल जमीन पर भी आसानी से रखा और चलाया जा सकता है। यह मशीन **200 लीटर और 500 लीटर** की टैंक क्षमता में उपलब्ध है, जो छोटे और मध्यम किसानों के लिए आदर्श है। इसके साथ **बटरफ्लाई और नॉर्मल स्प्रे गन** दी जाती हैं, जो **कॉपर** से बनी होती हैं और जंग-रोधी होती हैं।
### **काम में तेजी और दक्षता** 500 लीटर टैंक वाली स्प्रे मशीन की मदद से किसान **लगभग 3 एकड़ क्षेत्र में 40-50 मिनट** में स्प्रे कर सकते हैं। यह न केवल समय बचाती है, बल्कि मेहनत और लागत को भी कम करती है। मशीन की नली और स्प्रे गन का डिज़ाइन इस तरह है कि दवा का छिड़काव एकसमान होता है, जिससे फसल को पूरा लाभ मिलता है।
### **किसानों के लिए फायदेमंद** दिनेश जी का कहना है कि उनकी प्राथमिकता है किसानों को ऐसी मशीनें देना, जो उनकी जरूरतों को पूरा करें और लंबे समय तक चलें। इस स्प्रे मशीन की कीमत और गुणवत्ता का संतुलन इसे बाजार में खास बनाता है। छोटे और मझोले किसानों के लिए यह मशीन किसी वरदान से कम नहीं है।
लक्ष एग्रिएम्प्लिमेंट की ट्रैक्टर चलित स्प्रे मशीन मजबूती, तकनीक और किफायत का बेहतरीन मिश्रण है। यदि आप एक ऐसी स्प्रे मशीन की तलाश में हैं जो आपके खेती के काम को आसान बनाए, तो यह आपके लिए सही विकल्प हो सकता है। अधिक जानकारी के लिए **लक्ष एग्रिएम्प्लिमेंट, खेरोदा** से संपर्क करें और अपनी खेती को नई ऊँचाइयों तक ले जाएँ।
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**रेड डायमंड वन अमरूद की खेती: एक नई और लाभकारी किस्म**
रेड डायमंड वन अमरूद एक नई और उन्नत किस्म है, जो हाल ही में भारतीय किसानों के बीच लोकप्रिय हो रही है। यह रेड डायमंड अमरूद का एक विशेष प्रकार है, जो अपने अनोखे स्वाद, आकर्षक रंग और उच्च उत्पादन के लिए जाना जाता है। यह लेख रेड डायमंड वन की खेती की जानकारी देगा, जो यूट्यूब वीडियो के लिए उपयुक्त है।
**रेड डायमंड वन की विशेषताएं** रेड डायमंड वन अमरूद अपने गहरे लाल गूदे और नाशपाती (लट्टू) जैसे आकार के फलों के लिए प्रसिद्ध है। इसके फल मध्यम से बड़े, लगभग 400 से 800 ग्राम वजन के होते हैं। फल की त्वचा चिकनी और चमकदार होती है, जबकि गूदा रसदार, मीठा और हल्का खट्टा होता है। यह ताजा खाने, जूस, जैम और जैली बनाने के लिए आदर्श है। इस किस्म में बीज कम होते हैं, और यह सामान्य रेड डायमंड से ज्यादा रसदार और टिकाऊ होता है। रेड डायमंड वन साल में दो से तीन बार फल दे सकता है, जो इसे व्यावसायिक खेती के लिए बेहतरीन बनाता है।
**खेती के लिए जलवायु और मिट्टी** रेड डायमंड वन की खेती के लिए उष्ण और आर्द्र जलवायु उपयुक्त है। यह 25°C से 35°C तापमान में अच्छा विकास करता है। ठंडे तापमान से पौधों को बचाना जरूरी है, क्योंकि इससे विकास प्रभावित हो सकता है। मिट्टी के लिए, अच्छी जल निकासी वाली दोमट या रेतीली मिट्टी, जिसका पीएच 5.5 से 7.0 हो, सर्वोत्तम है। जलभराव से बचने के लिए उचित ड्रेनेज सिस्टम बनाएं।
**रोपण और देखभाल** रेड डायमंड वन के पौधे ग्राफ्टिंग या कलम विधि से तैयार किए जाते हैं, जो तेजी से फलन और रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करते हैं। रोपण के लिए 5x5 मीटर की दूरी पर 1x1x1 फीट के गड्ढे खोदें। इनमें गोबर की खाद, वर्मी कंपोस्ट और जैविक उर्वरक मिलाएं। पौधों को पूर्ण सूर्य प्रकाश में लगाएं, लेकिन शुरुआती महीनों में छाया प्रदान करें। सप्ताह में 2-3 बार सिंचाई करें, खासकर गर्मियों में। कीटों और रोगों से बचाव के लिए नीम का तेल और जैविक कीटनाशकों का उपयोग करें। फलन शुरू होने के बाद नियमित छंटाई करें ताकि हवा और रोशनी का संचार बना रहे।
**लागत और मुनाफा** रेड डायमंड वन 6-8 महीने में फल देना शुरू करता है। एक पौधे से 25-35 किलो फल प्राप्त हो सकते हैं। बाजार में इसके फल 100-120 रुपये प्रति किलो तक बिक सकते हैं। इसकी उच्च मांग और कम आपूर्ति के कारण, यह किसानों के लिए लाभकारी है।
**निष्कर्ष** रेड डायमंड वन अमरूद की खेती अपनी नाशपाती जैसे आकार के फलों, उच्च उत्पादकता और बाजार मांग के कारण किसानों के लिए एक शानदार विकल्प है। सही देखभाल और तकनीक के साथ, यह किस्म आय को कई गुना बढ़ा सकती है।
Trekking Trails
नमस्कार किसान भाइयों और बागवानी प्रेमियों!
आज के इस विशेष वीडियो में हम लेकर आए हैं थाईलैंड की सबसे लोकप्रिय सदाबहार कटहल की वैरायटी की पूरी जानकारी – थाई सदाबहार कटहल (Thai Evergreen Jackfruit) की खेती!
यह वैरायटी पूरे साल फल देती है, पर मुख्य रूप से सर्दियों की सीजन में जब मार्केट में और कोई वेराइटी का फल नहीं आता है खासकर देशी वेराइटी का तब मार्केट में यह एक मात्र फल होने के कारण बाजार में अच्छी कीमत में बिक जाता हैं ऑफ सीजन होने के कारण 50 रुपये से लेकर 150 रुपये किलो तक बिकता है और इसकी एक खासियत है कि इसका फल 500 ग्राम से लेकर 1 किलो तक की साइज का होता है जिसे लोग आसानी से खरीद लेते है । और जब गर्मियों में देशी कटहल आता है तब इसके पेड़ को रेस्ट दिया जाता है ताकि अगली सीजन में अच्छी क्वालिटी और अधिक मात्रा में फल दे सके ।। फल का आकार मध्यम आकार (0.500 - 2 किलो), गूदा गाढ़ा सफेद , मीठा, रेशे कम और खुशबूदार होता है। एक पेड पौधा लगाने के मात्र 18-24 महीने में फल आने शुरू हो जाते हैं और एक पेड़ से 20 किलो से 1.5 क्विंटल तक सालाना उत्पादन आसानी से लिया जा सकता है। जैसे जैसे पौधे की उम्र और साइज बढ़ती है वैसे वैसे उत्पादन भी बढ़ता जाता हैं।।
वीडियो में हमने कवर किया है:
✅ सदाबहार कटहल की टॉप वैरायटी।।
✅ अच्छी ग्रोथ के लिए मिट्टी, जलवायु और दूरी।।
✅ बेस्ट नर्सरी से असली एकेड पौधा कैसे चुनें।।
✅ रोपाई से लेकर पहला फल आने तक पूरी केयर।।
✅ खाद, पानी, कीट नियंत्रण और छंटाई के आसान टिप्स।।
✅ साल में बार फल लेने का सही समय।।
✅ बाजार भाव और कमाई का हिसाब।।
अगर आप कम जगह में ज्यादा मुनाफा चाहते हैं तो यह वैरायटी आपके लिए बेस्ट है। अभी पौधा लगाएं और 2 साल में एक अच्छी कमाई शुरू करें!
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Mo.:- 7063829428, 9002875504.
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Trekking Trails
KisanTech India – Agri & Dairy Expo 2026 का भव्य आयोजन सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है! 🚜🌾
Mandphiya, Chittorgarh (Rajasthan) में 31 जनवरी से 2 फरवरी तक चले इस सबसे बड़े Agri, Horticulture & Dairy प्लेटफॉर्म ने कृषि क्षेत्र को नई दिशा दी। 50,000+ किसान, 1,00+ डीलर्स और लीडिंग ब्रांड्स के साथ यह एक्सपो राजस्थान की सबसे बड़ी सफलता साबित हुआ।
इस स्पेशल वीडियो में:-
- एक्जिबिटर्स की एनर्जेटिक वीडियो बाइट्स – लेटेस्ट मशीनरी, स्मार्ट फार्मिंग सॉल्यूशंस, डेयरी टेक्नोलॉजी और ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स की लाइव डेमो
- विजिटर्स के असली रिएक्शन्स और खुशी – किसान भाइयों का नई तकनीक देखकर जोश और उत्साह
- सोशल मीडिया पार्टनर्स के साथ मिलकर बनाई गई जबरदस्त डिजिटल रीच – 1M+ ऑडियंस तक पहुंच
- एक्सपो के शानदार शॉट्स – लाइव प्रदर्शन, वर्कशॉप्स, नेटवर्किंग और किसानों-उद्यमियों का मिलन
यह सिर्फ एक प्रदर्शनी नहीं थी, बल्कि भारतीय कृषि को मजबूत और टेक्नोलॉजी से लैस बनाने की दिशा में बड़ा कदम था। सभी 200+ एक्जिबिटर्स, हजारों विजिटर्स, स्पीकर्स, स्टाफ, मीडिया पार्टनर्स और हमारे सोशल मीडिया टीम को दिल से बधाई! आपकी भागीदारी, सपोर्ट और एनर्जी के बिना यह सफलता नामुमकिन थी।
आइए मिलकर आने वाले सालों में और बड़े स्तर पर कृषि क्रांति लाएं। भारतीय किसान सशक्त बने, यही हमारा मकसद है!
धन्यवाद और जय जवान, जय किसान! 🇮🇳
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https://youtu.be/np-eNbmuqbo
1 week ago | [YT] | 2
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Trekking Trails
पश्चिम बंगाल के प्रगतिशील किसान **किरणदेव** ने **थाई गोल्डन 8** अमरूद की खेती करके एक नया कीर्तिमान रचा है। लगभग 18 महीने पहले उन्होंने अपने एक एकड़ खेत में इस थाईलैंड की नई किस्म के पौधे लगाए। सबसे खास बात यह रही कि पहली बार मात्र **8 महीने** में ही पौधों पर फल लगना शुरू हो गया। लेकिन किसान ने समझदारी दिखाते हुए सिर्फ एक-दो फल छोड़कर बाकी सभी फलों को तोड़ दिया, ताकि पौधे की जड़ें और तना मजबूत होकर अच्छी ग्रोथ कर सके।
अब 18 महीने बाद परिणाम देखते ही बनता है – प्रत्येक पौधा औसतन **15 से 20 किलोग्राम** तक शानदार फल दे रहा है। उन्होंने पौधे से पौधे की दूरी **6 फीट** और लाइन से लाइन **7.5 फीट** रखी है, जिससे बगीचे में पर्याप्त जगह और हवा का संचार बना रहता है। फलों का औसत वजन **300 से 400 ग्राम** तक है, जो आकार और गुणवत्ता में बेहतरीन है। वर्तमान में होलसेल व्यापारी खेत से ही **60 से 80 रुपये प्रति किलोग्राम** की दर से खरीद रहे हैं, जिससे अच्छी कमाई हो रही है।
किरणदेव ने बताया कि सफलता का राज सही देखभाल में छिपा है। पौधों की अच्छी बढ़वार के लिए समय-समय पर **फंगिसाइड** और **इंसेक्टिसाइड** का स्प्रे किया जाता है, जिससे कोई बीमारी नहीं लगती। **प्रूनिंग** के लिए नई कोपलों की तुड़ाई करने से नई फुटान आती है और फ्लावरिंग भी भरपूर होती है। पौधे लगाते समय **देशी गोबर की खाद** और **सरसों की खली** का इस्तेमाल करने से जड़ें मजबूत हुईं और ग्रोथ तेज रही।
किरणदेव ने नया बगीचा लगाने वाले किसान भाइयों के लिए सलाह दी है की अगर नया बगीचा लगाते समय ड्रिप इरिगेशन और मल्चिंग का उपयोग किया जाए तो इससे खरपतवार की समस्या लगभग खत्म हो जाती है, जिससे खरपतवार नियंत्रण पर होने वाला खर्च बचता है। साथ ही, खेत में खरपतवार न होने से कई प्रकार की बीमारियों से छुटकारा मिलता है। ड्रिप से कम पानी में बागवानी संभव होती है और **फर्टिगेशन** (खाद के साथ पानी देना) से सभी पौधों का विकास एक समान होता है।
थाई गोल्डन 8 जैसी उच्च गुणवत्ता वाली थाईलैंड की अमरूद की नई किस्म की खेती आधुनिक तकनीकों के साथ मिलकर किसानों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है। किरणदेव का यह प्रयोग अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत है कि सही प्लानिंग, देखभाल और तकनीक से कम समय में ही अच्छी कमाई संभव है।
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1 month ago | [YT] | 2
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### 🌾 सिर्फ ₹100 में 1 एकड़ गेहूं की कटाई + बंडलिंग! Greenland Self Propelled Reaper Binder की लाइव डेमो
किसान भाइयों, आज के समय में गेहूं की कटाई एक बड़ी चुनौती बन गई है। मजदूरों की कमी, महंगी मजदूरी (3000-3500 रुपये प्रति एकड़ तक) और समय की बर्बादी से हर किसान परेशान है। लेकिन अब इसका समाधान है – **Greenland Self Propelled Reaper Binder**! ये कमाल की मशीन न केवल गेहूं काटती है, बल्कि उसी समय परफेक्ट बंडल भी बना देती है। 😲
इस वीडियो में हमने लाइव फील्ड डेमो दिखाया है, जहां ये मशीन 1 एकड़ को सिर्फ 1 घंटे में काटकर बंडल तैयार कर रही है। स्पीड इतनी तेज कि छोटे-मध्यम किसानों के लिए परफेक्ट! डीजल खर्च बेहद कम – करीब 1-1.5 लीटर प्रति एकड़, जिससे कुल लागत आती है मात्र **₹100 प्रति एकड़** (कस्टम हायरिंग पर)। मैनुअल कटाई से हजारों रुपये की बचत!
**मशीन की खासियतें:**
- **कटाई + बंडलिंग एक साथ:** मजदूरों की जरूरत खत्म, समय और पैसा दोनों बचत।
- **क्षमता:** 1 एकड़ प्रति घंटा, 10 HP डीजल इंजन के साथ।
- **फायदे छोटे किसानों के लिए:** आसानी से चलाई जा सकती है, छोटे खेतों में भी परफेक्ट।
- **कस्टम हायरिंग का मौका:** मशीन खरीदकर दूसरों के खेत काटें और अच्छी कमाई करें।
आज जहां कॉम्बाइन हार्वेस्टर बड़े किसानों के लिए हैं, वहीं ये रीपर बाइंडर छोटे-मध्यम किसानों की असली साथी है। मजदूरों की टेंशन भूल जाइए, तेज कटाई और साफ बंडल पाइए!
किसान साथियों, अगर ये वीडियो आपको उपयोगी लगा तो लाइक 👍 करें, कमेंट में अपनी राय बताएं और ज्यादा से ज्यादा किसान भाइयों तक शेयर करें। हमारे चैनल को सब्सक्राइब करें और बेल आइकन दबाएं, क्योंकि यहां खेती-किसानी की नई टेक्नोलॉजी और मशीनों के वीडियो आते रहते हैं।
#गेहूंकटाई #ReaperBinder #GreenlandMachine #कृषिमशीन #WheatHarvesting #InnovativeFarmers #किसानभाई #FarmMachinery #SelfPropelledReaper
देखिए और फायदा उठाइए! 🚜🌾
1 month ago | [YT] | 1
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बत्ती गुल? चिंता नहीं! 😎
अगर रात में खेत की रखवाली करनी हो या घर में अचानक बत्ती गुल हो जाए, तो आपके लिए Globim की Top 5 Agriculture Torches हैं। इस वीडियो में हम दिखाएँगे:
🔦 Top 5 Globim Torches – Raksha, Jugnu, 7700, Mili और Gorkha
Raksha: हल्की और रोज़मर्रा के छोटे-मोटे काम के लिए।
Jugnu: Rechargeable Headlamp, दोनों हाथ फ्री, High Power LED।
7700: Heavy Duty Torch, Shockproof Body, Solar Charging Option।
Mili: High Quality, Long Backup, Solar Panel से चार्ज।
Gorkha: Premium Torch, 7000 mAh Battery, 14–15 घंटे Backup, SOS Blinker और High-Low Function।
💡 Highlights of this video:
Battery Backup: 3 से 15 घंटे तक
Beam Range: 1000–1500 मीटर
Rechargeable & Solar Charging Options
Heavy Duty & Shockproof Bodies
किसान भाइयों के लिए खास – खेत और घर दोनों में काम आने वाली टॉर्च!
देखिए कौन सी Torch आपके लिए सबसे सही है और अपने खेत/घर की रखवाली आसान बनाइए।
4 months ago | [YT] | 3
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120 साहीवाल गायों के Low Cost Dairy Farm की पूरी कहानी जानिए। इस वीडियो में हम आपको दिखाएंगे कि कैसे कम लागत में इतना बड़ा डेयरी फार्म बनाया जा सकता है और कैसे इससे रोजाना लाखों की कमाई की जा सकती है।
साथ ही, नए किसान भी सीखेंगे कि दूध का व्यवसाय (Dairy Farm) कैसे शुरू करें, किन चीज़ों का ध्यान रखें, और कम लागत में ज़्यादा मुनाफ़ा कैसे कमाएं।
📌 वीडियो में कवर किए गए टॉपिक्स
लो-कॉस्ट डेयरी फार्म का डिज़ाइन
120 साहीवाल गायों की देखभाल और मैनेजमेंट
रोज़ाना 28 हजार रुपये की कमाई का फॉर्मूला
नए किसानों के लिए डेयरी बिज़नेस शुरू करने के टिप्स
फ़ीड, मैनेजमेंट और मार्केटिंग के सीक्रेट्स
🔥 अगर आप भी डेयरी फार्म शुरू करने का सोच रहे हैं, तो ये वीडियो आपके लिए है!
#LowCostDairyFarm #SahiwalCow #HighProfitFarming #DairyBusiness #InnovativeFarmers #DairyFarmTips #Farmingकिसान
https://youtu.be/wNhzAF2mC04?si=JdauY...
6 months ago | [YT] | 2
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₹45 लाख सालाना कमाई सिर्फ 25 बीघा बागवानी खेती से?
जी हाँ! गुजरात के एक प्रगतिशील किसान ने यह कर दिखाया है — और आज हम उसी की असली कहानी लेकर आए हैं।
📍 इस वीडियो में हम बात कर रहे हैं:
गुजरात के भावनगर ज़िले के तालाजा क्षेत्र के रहने वाले – दानुभाई रणाभाई सोलंकी की,
जिन्होंने 10 साल पहले शतावरी की खेती से अपनी प्रगतिशील यात्रा शुरू की थी।
🪴 धीरे-धीरे उन्होंने…
1 एकड़ में ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की, जिसे बढ़ाकर आज 12,000 से अधिक ड्रैगन फ्रूट प्लांट्स तक पहुँचा दिया है।
5 साल पहले उन्होंने खजूर (डेट पाम) की खेती भी शुरू की, जिसमें 125 प्लांट्स लगाए गए हैं।
- इसके साथ ही उन्होंने 2 पॉलीहाउस और 2 नेट हाउस भी स्थापित किए हैं।
🌳 आज वे कुल 25 बीघा भूमि में उन्नत बागवानी खेती कर रहे हैं:
- जिसमें शामिल हैं: चंदन, पैशन फ्रूट, मोसंबी, सुपारी, अंजीर, और
- 5 साल पहले लगाए गए 50 एवोकाडो के पौधे, जिनसे अब उत्पादन शुरू हो गया है।
🥑 दानुभाई का कहना है:
एक एवोकाडो फल की कीमत ₹100 होती है, जिससे किसान बहुत अच्छी कमाई कर सकते हैं।”
🌾 कुल उनके पास 80 बीघा ज़मीन है:
- जिसमें वे 30 बीघा में आधुनिक बागवानी खेती
- और **50 बीघा में पारंपरिक फसलें** जैसे कपास और मूंगफली की खेती करते हैं।
💰 कमाई का फर्क देखिए:
- 50 बीघा पारंपरिक खेती से सालाना मात्र ₹6-7 लाख
- जबकि 30 बीघा बागवानी से सालाना ₹40-45 लाख तक की कमाई होती है!
🧊 इसके अलावा उन्होंने सरकार से सब्सिडी लेकर एक **कोल्ड स्टोरेज यूनिट** भी बनवाया है,
जिससे वे ड्रैगन फ्रूट को 2 महीने तक स्टोर कर बाजार में अच्छी कीमत पर बेच पाते हैं।
✅ इस वीडियो में जानिए:
- किसान का पूरा फार्मिंग मॉडल
- ड्रैगन फ्रूट, खजूर और एवोकाडो की तकनीकी जानकारी
- सिंचाई और मार्केटिंग की रणनीति
- और वह सोच, जिसने उन्हें लाखों की कमाई दिलवाई
🎯 यदि आप भी Orchard Farming या Modern Farming शुरू करने की सोच रहे हैं,
तो यह वीडियो आपके लिए एक गाइड की तरह काम करेगा।
https://youtu.be/5B5-0kfP4o8?si=waTpP...
6 months ago | [YT] | 1
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**कपास की फसल में खरपतवार सबसे बड़ी चुनौती? अब सिर्फ 1 बोतल से पाएं 3 गुना असर – Hitweed Maxx!**
**क्या आपकी कपास की फसल भी खरपतवार से जूझ रही है?**
हर किसान की यही चिंता रहती है – संकरी, चौड़ी और जिद्दी खरपतवार जो न सिर्फ फसल का पोषण खा जाते हैं, बल्कि पैदावार को भी 40% तक घटा देते हैं।
अब इस समस्या का मिला है **एक आधुनिक, असरदार और प्रमाणित समाधान – Hitweed Maxx**
इस वीडियो में जानिए:
✅ **Hitweed Maxx क्या है और यह क्यों PYNA द्वारा प्रमाणित है?**
✅ **यह कैसे करता है एक साथ तीन तरह के खरपतवारों पर असर – संकरी पत्ती, चौड़ी पत्ती और जिद्दी खरपतवार?**
✅ **छिड़काव का सही समय, मात्रा और तरीका क्या है जिससे आपको 100% परिणाम मिले?**
✅ **कपास की शुरुआती अवस्था में इसे अपनाने से कैसे बचती है आपकी लागत और बढ़ती है उपज?**
✅ **क्यों लाखों किसान अब इसी एक बोतल पर भरोसा कर रहे हैं?**
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6 months ago | [YT] | 1
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**लक्ष एग्रिएम्प्लिमेंट की ट्रैक्टर चलित स्प्रे मशीन: किसानों के लिए वरदान**
उदयपुर जिले के खेरोदा गांव में स्थित **लक्ष एग्रिएम्प्लिमेंट** किसानों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले कृषि यंत्र बनाने के लिए जाना जाता है। यहाँ सीड ड्रिल, ट्रॉली, टीलर और स्प्रे मशीन जैसे कई यंत्र बनाए जाते हैं। आज हम बात करेंगे उनकी **ट्रैक्टर चलित स्प्रे मशीन** की, जो आधुनिक तकनीक और मजबूती का शानदार नमूना है। इसकी खासियत और फायदों को जानने के लिए हमने फैक्ट्री के मालिक **श्री दिनेश जी जनवा** से बात की, जिनका मुख्य उद्देश्य है किसानों को किफायती और टिकाऊ यंत्र उपलब्ध कराना।
### **मजबूत बनावट और गुणवत्ता**
लक्ष एग्रिएम्प्लिमेंट की स्प्रे मशीन की बॉडी बनाने के लिए **टाटा कंपनी का हैवी मेटल** इस्तेमाल किया जाता है, जो इसे लंबे समय तक टिकाऊ बनाता है। मशीन में **नटराज कंपनी का पंप** और खुद के ब्रांड की **1000 फीट तक लंबी नली** दी जाती है। यह नली लंबे क्षेत्र में स्प्रे करने में बेहद कारगर है। मशीन की खासियत है इसका **कंपन-मुक्त डिज़ाइन**, जो इसे इस्तेमाल में आसान और आरामदायक बनाता है।
### **उन्नत तकनीक और विशेषताएँ**
इस स्प्रे मशीन में **कपलिंग सिस्टम** और **क्रॉस सिस्टम** का उपयोग किया गया है, जिसके कारण इसे बिना समतल जमीन पर भी आसानी से रखा और चलाया जा सकता है। यह मशीन **200 लीटर और 500 लीटर** की टैंक क्षमता में उपलब्ध है, जो छोटे और मध्यम किसानों के लिए आदर्श है। इसके साथ **बटरफ्लाई और नॉर्मल स्प्रे गन** दी जाती हैं, जो **कॉपर** से बनी होती हैं और जंग-रोधी होती हैं।
### **काम में तेजी और दक्षता**
500 लीटर टैंक वाली स्प्रे मशीन की मदद से किसान **लगभग 3 एकड़ क्षेत्र में 40-50 मिनट** में स्प्रे कर सकते हैं। यह न केवल समय बचाती है, बल्कि मेहनत और लागत को भी कम करती है। मशीन की नली और स्प्रे गन का डिज़ाइन इस तरह है कि दवा का छिड़काव एकसमान होता है, जिससे फसल को पूरा लाभ मिलता है।
### **किसानों के लिए फायदेमंद**
दिनेश जी का कहना है कि उनकी प्राथमिकता है किसानों को ऐसी मशीनें देना, जो उनकी जरूरतों को पूरा करें और लंबे समय तक चलें। इस स्प्रे मशीन की कीमत और गुणवत्ता का संतुलन इसे बाजार में खास बनाता है। छोटे और मझोले किसानों के लिए यह मशीन किसी वरदान से कम नहीं है।
लक्ष एग्रिएम्प्लिमेंट की ट्रैक्टर चलित स्प्रे मशीन मजबूती, तकनीक और किफायत का बेहतरीन मिश्रण है। यदि आप एक ऐसी स्प्रे मशीन की तलाश में हैं जो आपके खेती के काम को आसान बनाए, तो यह आपके लिए सही विकल्प हो सकता है। अधिक जानकारी के लिए **लक्ष एग्रिएम्प्लिमेंट, खेरोदा** से संपर्क करें और अपनी खेती को नई ऊँचाइयों तक ले जाएँ।
**वीडियो को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करें ताकि ऐसी ही उपयोगी जानकारी आप तक पहुँचती रहे!**
6 months ago | [YT] | 1
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**रेड डायमंड वन अमरूद की खेती: एक नई और लाभकारी किस्म**
रेड डायमंड वन अमरूद एक नई और उन्नत किस्म है, जो हाल ही में भारतीय किसानों के बीच लोकप्रिय हो रही है। यह रेड डायमंड अमरूद का एक विशेष प्रकार है, जो अपने अनोखे स्वाद, आकर्षक रंग और उच्च उत्पादन के लिए जाना जाता है। यह लेख रेड डायमंड वन की खेती की जानकारी देगा, जो यूट्यूब वीडियो के लिए उपयुक्त है।
**रेड डायमंड वन की विशेषताएं**
रेड डायमंड वन अमरूद अपने गहरे लाल गूदे और नाशपाती (लट्टू) जैसे आकार के फलों के लिए प्रसिद्ध है। इसके फल मध्यम से बड़े, लगभग 400 से 800 ग्राम वजन के होते हैं। फल की त्वचा चिकनी और चमकदार होती है, जबकि गूदा रसदार, मीठा और हल्का खट्टा होता है। यह ताजा खाने, जूस, जैम और जैली बनाने के लिए आदर्श है। इस किस्म में बीज कम होते हैं, और यह सामान्य रेड डायमंड से ज्यादा रसदार और टिकाऊ होता है। रेड डायमंड वन साल में दो से तीन बार फल दे सकता है, जो इसे व्यावसायिक खेती के लिए बेहतरीन बनाता है।
**खेती के लिए जलवायु और मिट्टी**
रेड डायमंड वन की खेती के लिए उष्ण और आर्द्र जलवायु उपयुक्त है। यह 25°C से 35°C तापमान में अच्छा विकास करता है। ठंडे तापमान से पौधों को बचाना जरूरी है, क्योंकि इससे विकास प्रभावित हो सकता है। मिट्टी के लिए, अच्छी जल निकासी वाली दोमट या रेतीली मिट्टी, जिसका पीएच 5.5 से 7.0 हो, सर्वोत्तम है। जलभराव से बचने के लिए उचित ड्रेनेज सिस्टम बनाएं।
**रोपण और देखभाल**
रेड डायमंड वन के पौधे ग्राफ्टिंग या कलम विधि से तैयार किए जाते हैं, जो तेजी से फलन और रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करते हैं। रोपण के लिए 5x5 मीटर की दूरी पर 1x1x1 फीट के गड्ढे खोदें। इनमें गोबर की खाद, वर्मी कंपोस्ट और जैविक उर्वरक मिलाएं। पौधों को पूर्ण सूर्य प्रकाश में लगाएं, लेकिन शुरुआती महीनों में छाया प्रदान करें। सप्ताह में 2-3 बार सिंचाई करें, खासकर गर्मियों में। कीटों और रोगों से बचाव के लिए नीम का तेल और जैविक कीटनाशकों का उपयोग करें। फलन शुरू होने के बाद नियमित छंटाई करें ताकि हवा और रोशनी का संचार बना रहे।
**लागत और मुनाफा**
रेड डायमंड वन 6-8 महीने में फल देना शुरू करता है। एक पौधे से 25-35 किलो फल प्राप्त हो सकते हैं। बाजार में इसके फल 100-120 रुपये प्रति किलो तक बिक सकते हैं। इसकी उच्च मांग और कम आपूर्ति के कारण, यह किसानों के लिए लाभकारी है।
**निष्कर्ष**
रेड डायमंड वन अमरूद की खेती अपनी नाशपाती जैसे आकार के फलों, उच्च उत्पादकता और बाजार मांग के कारण किसानों के लिए एक शानदार विकल्प है। सही देखभाल और तकनीक के साथ, यह किस्म आय को कई गुना बढ़ा सकती है।
7 months ago | [YT] | 1
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