अब तक आपने सुना होगा कि राह चलती लड़की की सुरक्षा हमारा कर्तव्य ही नही धर्म भी है पर वाराणसी में पुलिस को सूचना मिली कि कैंट रेलवे स्टेशन के सामने ओवर ब्रिज के नीचे कुछ महिलाएं आते-जाते राहगीरों से अश्लील इशारे करती हैं उन्हें पास बुलाती हैं। और सूचना पर थाना सिगरा की एंटी रोमियो टीम को एंटी जूलियट टीम बनाकर बनाकर सादा कपड़ों में भेजा गया तो यह दोनों महिलाएं जो बनारस के बाहर की रहने वाली है गिरफ्तार की गई तो आप इस एंटी #जूलियट टीम को बधाई देंगे।#policecommissioneratvaranshi
अभी हाल में ही कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान अराजक तथ्यों पर ध्यान रखने के लिए पहली बार वियरेबल टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया है। इस टेक्नोलॉजी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस युक्त स्मार्ट ग्लासेस और कैमरे लगे चश्मों का उपयोग किया जाता है। एआई टेक्नोलॉजी से युक्त ये स्मार्ट ग्लासेस भीड़ के बीच से संदिग्धों या उपद्रवियों की पहचान करने में सक्षम होते हैं। इन स्मार्ट ग्लासेस में इन-बिल्ट कैमरे और सेंसर लगे होते हैं , जिनकी मदद से पुलिस के अधिकारी बिना किसी बड़े व भारी उपकरणों को उठाए बिना सीधे वीडियो रिकॉर्डिंग और लाइव स्ट्रीमिंग कर सकते हैं. और यह कैमरे संपूर्ण गतिविधियों का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है जिससे घटना की जांच करना आसान हो जाता है
इस तरह के उपकरणों के इस्तेमाल से पुलिस और प्रदर्शनकारियों दोनों की गतिविधियों का डिजिटल रिकॉर्ड रहता है, जिससे बाद में किसी भी विवाद या घटना की जांच करना आसान हो जाता है. शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में अगर कोई हथियार लेकर आता है अथवा कहीं से भी वांटेड है तो उसका चेहरा रिकॉग्निशन के माध्यम से उसकी पहचान की जा सकती है।यह टेक्नोलॉजी पुलिस और प्रर्दशनकारियो दोनों की गतिविधियों का रिकॉर्ड रखती है।
प्रयागराज में मेरे पड़ोसी रहे बांदा के पूर्व सांसद नरैनी के पूर्व विधायक, कौशांबी के पूर्व ब्लाक प्रमुख, पंडित पुरुषोत्तम द्विवेदी स्मृति महाविद्यालय के प्रबंधक समाजसेवी इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र नेता श्री रमेश चंद द्विवेदी की पुत्री इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिवार की सदस्य डाक्टर चारू द्विवेदी डिप्टी एसपी जनपद चंदौली को उनके जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई। DrCharu Dwivedi Himangi Rohit Dwivedi Sunil Dutt Dubey Ramesh Chandra Dubey Rohit Dwivedi UP Police Anoop Singh Parihar Sudhir Singh Cmp Ramesh Chandra Dwivedi
फर्जी अधिकारी, फर्जी वारंट-सम्मन, फर्जी थाने और कोर्ट का सेटअप लगाकर साइबर ठग आपको मनोवैज्ञानिक रूप से भयभीत कर आपको अपने कब्जे में वीडियो कॉल के माध्यम से ले लेते है, सारा खेल ही साइकोलॉजी और भय का है, आप जितना डरे आपके ठगे जाने की संभावना उतनी ही अधिक है या कह सकते है कि 100% आपको साइबर ठगों के जाल में फंसकर लुट ही जाना है* डिजिटल हाउस अरेस्ट घोटाले से खुद को कैसे बचाएं: अनजान नम्बरो से आनी वाली कॉल से बेहद सावधान रहें:काल चाहे नार्मल हो, व्हाट्सएप काल हो या वीडियो कॉल हो बिना सोचे समझें कोई भी कॉल पिक ना करें_ कोई भी भारतीय वैध एजेंसी आपको सम्मन-वारंट-गिरफ्तारी हेतु आपको कभी भी सीधे कॉल नही करेगी इस बात को गांठ बांधकर अपने दिमाग मे फिट कर लें_ यदि आप किसी कॉलर की बात करने के लहजे से प्रभावित हो रहे है या डर रहे है तो तत्काल कॉल कट कर दें_ जिस संस्था(कस्टम, सीबीआई, ईडी, पुलिस , कोर्ट ) के नाम पर आपको डराया जा रहा है या धमकाया जा रहा है उसके आधिकारिक नंबर पर काल करें या तत्काल अपने जनपद के किसी भी पुलिस अधिकारी, साइबर सेल या नजदीकी पुलिस स्टेशन को सूचित कर सहायता लें_
किसी भी हाल में परिस्थिति कोई भी हो अपनी व्यक्तिगत जानकारी कभी साझा न करें
किसी दबाव में आकर कोई निर्णय न लें, कुछ समय के लिए सांस लें और डर के कारण जल्दबाजी में कोई निर्णय न लें
किसी ऐसे व्यक्ति से बात करें जिस पर आपको भरोसा हो(कोई पुलिस अधिकारी, पत्रकार, अधिवक्ता या अन्य कोई विश्वसनीय व्यक्ति)
स्पष्ट दृष्टिकोण प्राप्त करने के लिए किसी मित्र, परिवार के सदस्य या कानून प्रवर्तन अधिकारी से स्थिति पर चर्चा करें
धोखाधड़ी के प्रयास की रिपोर्ट राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर करें
साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें
जानकारी प्राप्त करने के लिए यहां सम्पर्क कर सकतें है
भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम (CERT-In): www.cert-in.or/...
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल: cybercrime.gov/...
राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा गठबंधन: https://staysafeonline...
सतर्क और जागरूक रहकर, आप खुद को इस डिजिटल अरेस्ट घोटाले का शिकार होने से बचा सकते हैं।
डर को किसी भी हाल में अपने निर्णय पर हावी न होने दें - अपने पर नियंत्रण रखें और ऑनलाइन सुरक्षित रहें साइबर अपराधी चर्चित पुलिस अधिकारियों के नाम व पिक यूज करते हैं और इस तरह से आपको अपने जाल में फंसाकर पैसे आनलाइन ट्रांसफर करा लेते हैं। अतः कभी किसी लालच में ना आए। आप खुद सोचे कि कभी भी कोई भी पुलिस अधिकारी अपने एकाउंट में रिश्वत नहीं ले सकता है। अतः किसी भी साइबर अपराधी के फोन आने पर आप किसी भी पुलिस अधिकारी से सलाह ले ले। हर पुलिस अधिकारी का कांटेक्ट नंबर गूगल पर उपलब्ध है। एक रिटायर्ड शिक्षिका से बनारस में साइबर अपराधियों ने साढे तीन करोड रुपए अपने अकाउंट में ट्रांसफर करा लिए कि आपका आधार कार्ड से कोई सिम खरीदा गया है जो मिसयूज हुआ है और आपको गिरफ्तार किया जाएगा और उससे जानकारी लेते रहे बाद में कहा कि आप अपने खाते में जो रुपए है वह इन खातों में ट्रांसफर करिए जांच के बाद आपको वापस मिलेगा और इस तरह उसका पैसा ट्रांसफर करा लिया।#dspsunilduttdubey#cyber#police#cybercrime#cybersecurity#dsp#cybersecurity
मशहूर भजन गायिका बहिन तृप्ति शाक्या जी भक्ति भजन व पार्श्व गायन क्रान्ति की अग्रणी व अहम सारथी रही है। भक्ति गीतों व भजन को सरलता और सफलता से जनमानस के दिल व आम घरों सुदूर ग्रामीण ग्रामीण अंचल में बजने वाली ढ़ोलकों तक में पहुंचाने का बहुत बड़ा श्रेय तृप्ति शाक्या को जाता है। संगीत के क्षेत्र में उनकी मीठी व सुरीली आवाज ने एक विशेष पहचान बनायी है। विभिन्न पॉडकास्ट व कई चैनलों को दिए गए साक्षात्कारों में उन्होंने बताया कि जब से उन्होने होश सँभाला तभी से वे भजन गा रही हूँ। लगता है कि मेरा जन्म ही भगवान के भजन गाने के लिए हुआ है। कभी राम बनके ... कभी श्याम बनके चले जाना भजन को केवल अपने देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी प्रशंसा मिली, टी सीरीज की कैसेट के जमाने में इस भजन ने इतनी लोकप्रियता प्राप्त की कि यह जन-जन के ओठों पर गुनगुनाने जाने लगा। मेरा और तृप्ति शाक्या का जन्म स्थान इटावा जिले में स्थित है और हम दोनों का परिवार तीर्थराज प्रयागराज में आवासित है। तृप्ति शाक्या के माता-पिता चाहते थे वह एक इंजीनियर बने पर उनका रुख हमेशा एक भजन सिंगर बनने का रहा और फिर माता-पिता ने उनको पूरा सहयोग देकर उनके करियर की रहा आसान कर दी और वह भजन व धार्मिक गीतों के क्षेत्र में एक सुपरस्टार बनकर उभरी। उनके अब तक चार हजार एलबम रिलीज हो चुके हैं। सात भाषाओं में उन्होंने भजन गाये। Tripti Shakya Sunil Dutt Dubey Tripti Shakya
मित्रता में संदेह नहीं किया जाता है बल्कि अभिन्न भाव रखकर विश्वास किया जाता क्योंकि मित्रता एक गहरी वहुअयामी फिलिंग्स है जो हम सबके जीवन में सम्बन्धों को ही गहरा नहीं करती है बल्कि जीवन को अर्थ व उद्देश्य भी प्राप्त कराती है। मित्रता एक ऐसी भावना है जो स्नेह, लगाव, देखभाल, विश्वास, और निस्वार्थ भाव से परिपूर्ण होती है। यह किसी व्यक्ति, वस्तु, विचार,या स्थान के प्रति गहरी आत्मीयता और समर्पण का भाव है। मित्रता का संबंध केवल रोमांटिक संबंधों तक सीमित नहीं है; यह प्रेम परिवार, स्वयं, प्रकृति, और यहाँ तक कि जीवन के प्रति भी हो सकता है। मित्रता केवल फीलिंग्स तक ही सीमित नहीं है; यह कार्यों और व्यवहार में भी व्यक्त होती है मित्रता का मतलब है कि हम अपने मित्रों की जरूरत को समझें और उनके साथ दें उनका समय दें उनकी कमियों को दूर करें और उनकी गलतियों पर रूठने की बजाय क्षमा करें। मित्रता एक ऐसी शक्ति है जो मानव जीवन को सुंदर, अर्थपूर्ण, और संतुष्टिदायक बनाती है। यह न केवल व्यक्तिगत संबंधों को मजबूत करती है, बल्कि समाज और विश्व को भी बेहतर बनाती है। #dspsunilduttdubey#vedioviralreel#prayagraj
इलाहाबाद विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा एवं डकैतों और बीहड़ों के लिए मशहूर जनपद इटावा में शिक्षा की अलख जगाने वाले श्री आनंद स्वरूप मिश्रा जी की पुत्री एवं आईएएस की खान कहे जाने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय के ए एन झा हॉस्टल के अंतवासी एवं यूपीएससी की परीक्षा में सफल होकर भारतीय रेलवे में विभिन्न उच्च पदों पर रहे श्री आदित्य बाजपेई जी की पत्नी श्रीमती सुनीता आदित्य जी पूर्व सहायक निदेशक कोषागार प्रयागराज की पोस्ट अनछुए स्पर्श, अनकही बातें... स्मृतियों के बीच साथ साथ... लिया गया ये लेख की शिक्षा और संस्कारों को प्रदर्शित करता है जो आप सबके लिए प्रस्तुत है
नवम्बर का माह शुरू हो गया है.. कोषागारो में पेंशनर्स के जीवित होने के प्रमाण पत्र देने का महीना। सरकार की संवेदनशीलता से अनवरत व्यवस्थाओं में बहुत अच्छी तब्दीली आती जा रही है पर नवम्बर का महीना आते ही स्मृतियों में बहुत से पेंशनर्स और उनसे जुड़े अनुभव याद आने लगते हैं।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अध्यापक और छात्र तो हमेशा से ही मेरे दिल के क़रीब रहते हैं, इलाहाबाद हमारे लिए उपलब्धियों का शहर रहा है, पोस्टिंग कहीं भी रही हो , इलाहाबाद हमेशा दिल की धड़कनों में शामिल बना रहा, शायद इलाहाबाद विश्वविद्यालय का हर छात्र अपने अंदर शहर की जीवंतता समेटे रहता है।
मेरी पोस्टिंग यू.पी भवन , दिल्ली में थी.. दद्दा का फोन आया कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय के उनके प्रोफेसर, जो इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भूतपूर्व कुलपति भी रह चुके थे, की पेंशन का कुछ मसला है, वह अस्वस्थ हैं, मैं देख लूं.. फोन से बात कर लूं.. । सुनते ही मैंने उसी दिन समस्या को समझने के लिहाज़ से सर से बात की । समस्या खास गम्भीर नहीं थी.. ज्यादातर अशक्त, अस्वस्थ पेंशनर्स की वह साझा समस्या हुआ करती थी और अमूमन सभी कोषागार इसका कोई न कोई माकूल विकल्प हमेशा रखते हैं। वह आने में असमर्थ थे.. कुछ पेंशन के रिवीजन का भी मसला था। बहरहाल काम आसान सा ही था, उसी दिन हो भी गया और हमने उनको बता भी दिया ताकि वह निश्चिंत हो सकें। उत्तर प्रदेश भवन में अन्य कोषागारों की तरह कई पेंशनर्स थे जो वार्षिक सत्यापन में नहीं आ पाते थे, कुछ गम्भीर अस्वस्थता के कारण, कुछ दिव्यांग पेंशनर्स भी थे, इन सबके लाइफ सर्टीफिकेट के सत्यापन की, उनके घर से मंगवाने की व्यवस्था हम लोग रखते थे। इसके अलावा उत्तर प्रदेश भवन की अपनी कुछ विशेष स्थितियां भी रहीं, वी वी आई पी कल्चर को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाते रहने के कारण। महत्त्वपूर्ण पदों पर रह चुके कुछेक सेवानिवृत्त अधिकारियों की भी बरसों की अपनी आदत थी कि कोई घर से ही दस्तख़त करा ले.. ये सेवानिवृत्त हो कर भी सेवा की ठसक से अपने को दूर नहीं कर पाये थे..सेवा के समय के अपने भौकाल को बनाए रखने का उनका प्रयास भी बना हुआ था। जो जाये हस्ताक्षर कराने वो भी बाकायदा समय लेकर जाये.. उनकी इस ठसक को पालने पोसने का काम साल दर साल चला आ रहा था। खैर .. सर का कार्य हो चुका था और अब वह आश्वस्त थे। कुछ महीनों के बाद उनका फिर फोन आया कि मिलने आना चाहते हैं, हमारा आग्रह था कि कुछ काम बाकी हो तो फोन पर ही बता दें आने की तकलीफ़ न करें...। एक तो मुझे बिल्कुल भी बुजुर्ग पेंशनर्स का आना पसंद ही नहीं था, हमेशा ख्याल रहता था कि बिना उनके आये ही जो भी नियमों के दायरे में सम्भव हो ,समय से जरूर कर दिया जाये... दूसरे कोषागार की व्यस्तता में उनके आने से व्यवधान भी होता था। किंतु सर का अपना ही आग्रह था जिसे टालना अच्छा नहीं लगा । सर से यह मेरी पहली मुलाकात होनी थी, उनकी कुछ तस्वीरें जरूर देखीं थी, उनके विश्वविद्यालय के दिनों की। वह इलाहाबाद विश्वविद्यालय के साथ साथ कई अन्य विश्व विद्यालयों के भी कुलपति रह चुके थे। बेहद ज़हीन और योग्य अध्यापकों में उनका शुमार था। दद्दा बताते थे कि उनका लैक्चर सुनने के लिए कक्षा के बाहर भी छात्र जमा रहते थे। सर के चैम्बर में घुसते ही मुझे धक्का लगा। विश्व विद्यालय के दिनों के उनके प्रभावी व्यक्तित्व और निर्णायक शैली के किस्से भी हम सुन चुके थे किन्तु मेरे सामने तो पर्किंसन से ग्रस्त , निस्तेज , निढाल , बेहद चिंतित बुजुर्ग खड़े थे। उनकी कमजोर , कम्पित आवाज़ में आभिजात्य और गाम्भीर्य अभी भी था और थके कमजोर चेहरे पर योग्यता के ओज की छाप भी । "आपको आशीर्वाद देना चाहता था, आपकी आंटी को भी मिलवाना था, बहुत सहूलियत हो गई है , आपके रहने से, थेंक्यू सो मच।" वह बहुत सहज लगे.. बिना किसी आडम्बर और बनाबट के सहज और अपने स्वास्थ्य के कारण बेहद चिंतित भी। मुझे आभास होने लगा कि वह मैडम को खास तौर पर मिलवाना चाहते थे। "सर, हम घर आ जाते, आप दद्दा के गुरू जी हैं, मेरे भी पिता समान, आपने बेवजह ही तक़लीफ की।" मैंने कहा। मैडम अपेक्षाकृत स्वस्थ लग रहीं थीं, ठहराव के साथ शांत और गम्भीर सी .. मानों हर हाल में सर को संभालने के लिए सजग हों, उनकी ढाल बन कर । " ये अब अकेले कहीं नहीं आ जा पाते" उन्होंने धीरे से कहा। सर ने घर परिवार सबकी चर्चा की, विशेषकर अरविंद दद्दा , मेरे बड़े भाई की जो उनके प्रिय विद्यार्थियो में से एक थे और हमेशा सम्पर्क में बने रहे। " जरा मेरे कागज़ देख लें.… इनका नाम बगैरा..". मैडम की ओर इशारा करते हुए वह धीमे से बोले । "मेरे न होने पर इनको दिक्कत न हो बस " इस अप्रत्याशित सी बात चीत में मैं निरुत्तर, उलझी सी चुप थी। मेरे लिए क्या, कैसे कहना है यह बड़ा सवाल था... दोनों ही मेरे सामने बैठे थे। वह हमसे विस्तार में समझना चाह रहे थे कि उनके न रहने पर मैडम को क्या करना होगा? प्रक्रिया क्या है, पारिवारिक पेंशन में क्या व्यवस्था है आदि आदि..। मैम भी इस चर्चा में बहुत असहज होने लगीं थीं। हमनें अपने आप को संभाला.. "ईश्वर आप दोनों को स्वस्थ रखें, आप शतायु हों । सर, आप बिल्कुल भी चिंता न करें... " मैंने समझाने की कोशिश तो की, पर शायद मेरे भाव मेरे शब्दों का पूरी तरह साथ नहीं दे पा रहे थे... वह बहुत निराश थे। मेरे दिलो दिमाग में एक नज्म कौंध रही थी.....
"मैंने हर रोज जमाने को रंग बदलते देखा है उम्र के साथ जिन्दगी के ढंग बदलते देखा है। वो जो चलते थे तो शेर के चलने का होता था गुमान उनको भी पाँव उठाने के लिये सहारे के लिये तरसते देखा है। जिनकी नजरों की चमक देख सहम जाते थे लोग उन्ही नजरों को बरसात की तरह रोते हमने देखा है जिनके हाथो के जरा से इशारे से टूट जाते थे पत्थर उन्ही हाथो को पत्तो की तरह थर थर कांपते देखा है"
मेरा मन भर आया , उम्र के उस मुकाम पर जीवनसाथी के लिए इतनी फ़िक्र और हालात देख कर। कूच से पहले की उनकी तैयारी का मैं हिस्सा बन रही थी। जिनकी निगाह विश्व विद्यालय के प्रशासन में निर्णायक रहती थी, आज उस नज़र में असुरक्षा, विवशता और प्रेम का सैलाब उमड़ रहा था.. वह छुपाने का असफल प्रयास कर रहे थे... हम उस प्रयास को अनदेखा करने की कोशिश में उनकी फाइल पर ही अपनी नज़र गड़ाए रहे ...अपने को विशुद्ध प्रोफेशनल दिखाने की कोशिश में..। किसी तरह उन हालात में जो कुछ भी आदर, सम्मान और तसल्ली के मुझसे शब्द बन सके हम उनसे कह भी रहे थे । हम उन दोनों के चेहरों पर किसी हद तक संतोष का भाव लाने में सफल हो सके थे। स्थिति कोई भी हो... ऑफिस से उन्हें और मैडम को कोई परेशानी न आयेगी.. इस विश्वास के साथ वह विदा ले रहे थे... सर और मैडम चलते चलते दोनों ही न जाने कितने आशीर्वाद मुझे दिये जा रहे थे। वह चिंतामुक्त होकर जाएं और उनके सारे आशीर्वचन, उनकी हर दुआ मेरे बच्चों तक पहुंचे , मैं मन ही मन यही प्रार्थना कर रही थी...।
कुछ महीनों के बाद उनके देहावसान की ख़बर मिली...मैडम की पारिवारिक पेंशन बिना किसी परेशानी के शुरू हो गई। सर से हुई यह पहली मुलाकात आखिरी बन मेरी स्मृतियों का चिर हिस्सा बनकर रह गई। सर को पूरी श्रद्धा और आदर के साथ विनम्र श्रद्धांजलि।🙏🏻
हमारे इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र नेता एवं बांदा के पूर्व सांसद व नरैनी विधानसभा के पूर्व विधायक वयोवृद्ध समाजसेवी श्री रमेश चंद्र द्विवेदी की गाड़ी पर सिविल लाइन में अराजक तत्वों द्वारा तोडफ़ोड़ की हम सभी इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिवार के सदस्य गण तीव्र भर्त्सना करते हैं। श्री रमेश चंद्र द्विवेदी छात्र जीवन से भले ही किसी राजनीतिक पार्टी में रहे हो पर वह एक सौम्य सरल व्यक्तित्व के धनी है और हमेशा लोगों के लिए तत्पर रहते हैं मैं व्यक्तिगत तौर पर विश्वविद्यालय जीवन से ही उनका प्रशंसक रहा हूं।
रिश्ते में भरोसा और भरोसे में धोखा। घटना फतेहपुर से सामने आई है जिसने एक बार प्यार के रिश्तों को कलंकित कर दिया है इस घटना ने प्यार धोखा और कत्ल की किताब में एक और अध्याय जोड़ दिया। 28 जून को बीबीपुर रेलवे ट्रैक पर बरामद हुई एक अज्ञात महिला के शव की जब शिनाख्त की गई तो रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया युवती की पहचान 20 वर्षीय पुष्पा के रूप में हुई जो अपने प्रेमी गंगा सागर 48 बर्षीय के साथ लिव इन रिलेशन में रह रही थी। और उसी के प्रेमी गंगा सागर ने अपने पुत्र व दो साथियों के साथ उसकी गला दबाकर हत्या कर दी और साहू को तीन दिन तक घर में रख रहा पर सड़न व बदबू के कारण ट्रैक्टर की मदद से रेलवे ट्रैक पर रख्या और हत्या को हादसा दिखाने के लिए रेलवे ट्रैक पर शव को रख दिया था आरोपी गंगा सागर को पुलिस ने जांच के उपरांत गिरफ्तार कर लिया आरोपी ने बताया कि उसके परिवार के लोग इस रिश्ते का विरोध कर रहे थे और उसने अपनी प्रेमिका पुष्पा को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। हम प्यार के खिलाफ नहीं है पर प्यार के रिश्तों में धोखा और कत्ल अक्सर देखने को मिल रहा है जो कई हंसते खेलते परिवारों की खुशियां नष्ट कर दे रहे हैं।
DSP Sunil Dutt Dubey
अब तक आपने सुना होगा कि राह चलती लड़की की सुरक्षा हमारा कर्तव्य ही नही धर्म भी है पर वाराणसी में पुलिस को सूचना मिली कि कैंट रेलवे स्टेशन के सामने ओवर ब्रिज के नीचे कुछ महिलाएं आते-जाते राहगीरों से अश्लील इशारे करती हैं उन्हें पास बुलाती हैं। और सूचना पर थाना सिगरा की एंटी रोमियो टीम को एंटी जूलियट टीम बनाकर बनाकर सादा कपड़ों में भेजा गया तो यह दोनों महिलाएं जो बनारस के बाहर की रहने वाली है गिरफ्तार की गई तो आप इस एंटी #जूलियट टीम को बधाई देंगे।#policecommissioneratvaranshi
UP Police #antiromio @UPPOLICE
6 hours ago | [YT] | 3
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DSP Sunil Dutt Dubey
अभी हाल में ही कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान अराजक तथ्यों पर ध्यान रखने के लिए पहली बार वियरेबल टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया है।
इस टेक्नोलॉजी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस युक्त स्मार्ट ग्लासेस और कैमरे लगे चश्मों का उपयोग किया जाता है।
एआई टेक्नोलॉजी से युक्त ये स्मार्ट ग्लासेस भीड़ के बीच से संदिग्धों या उपद्रवियों की पहचान करने में सक्षम होते हैं।
इन स्मार्ट ग्लासेस में इन-बिल्ट कैमरे और सेंसर लगे होते हैं , जिनकी मदद से पुलिस के अधिकारी बिना किसी बड़े व भारी उपकरणों को उठाए बिना सीधे वीडियो रिकॉर्डिंग और लाइव स्ट्रीमिंग कर सकते हैं. और यह कैमरे संपूर्ण गतिविधियों का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है जिससे घटना की जांच करना आसान हो जाता है
इस तरह के उपकरणों के इस्तेमाल से पुलिस और प्रदर्शनकारियों दोनों की गतिविधियों का डिजिटल रिकॉर्ड रहता है, जिससे बाद में किसी भी विवाद या घटना की जांच करना आसान हो जाता है.
शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में अगर कोई हथियार लेकर आता है अथवा कहीं से भी वांटेड है तो उसका चेहरा रिकॉग्निशन के माध्यम से उसकी पहचान की जा सकती है।यह टेक्नोलॉजी पुलिस और प्रर्दशनकारियो दोनों की गतिविधियों का रिकॉर्ड रखती है।
7 hours ago | [YT] | 5
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DSP Sunil Dutt Dubey
प्रयागराज में मेरे पड़ोसी रहे बांदा के पूर्व सांसद नरैनी के पूर्व विधायक, कौशांबी के पूर्व ब्लाक प्रमुख, पंडित पुरुषोत्तम द्विवेदी स्मृति महाविद्यालय के प्रबंधक समाजसेवी इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र नेता श्री रमेश चंद द्विवेदी की पुत्री इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिवार की सदस्य डाक्टर चारू द्विवेदी डिप्टी एसपी जनपद चंदौली को उनके जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई। DrCharu Dwivedi Himangi Rohit Dwivedi Sunil Dutt Dubey Ramesh Chandra Dubey Rohit Dwivedi UP Police Anoop Singh Parihar Sudhir Singh Cmp Ramesh Chandra Dwivedi
12 hours ago | [YT] | 10
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DSP Sunil Dutt Dubey
Kargil Vijay Diwas: Saluting Our Heroes
Kargil Vijay Diwas के इस शुभ अवसर पर, हम उन वीर जवानों को नमन करते हैं जिन्होंने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी वीरता और अदम्य साहस हमेशा हमें प्रेरित करता रहेगा। यह दिन हमें उनकी अमर गाथाओं की याद दिलाता है और देश के प्रति समर्पण की भावना को मजबूत करता है। शहीदों को शत-शत नमन!
#lucknow #news #KargilVijayDivas #sunilduttdubey #followersreelsfyp #explorepage #trendingvideo #dspsunilduttdubey #priyankachopra #indianarmy #army #trend #viral #viralvideo #trendingvideo
1 day ago | [YT] | 13
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DSP Sunil Dutt Dubey
फर्जी अधिकारी, फर्जी वारंट-सम्मन, फर्जी थाने और कोर्ट का सेटअप लगाकर साइबर ठग आपको मनोवैज्ञानिक रूप से भयभीत कर आपको अपने कब्जे में वीडियो कॉल के माध्यम से ले लेते है, सारा खेल ही साइकोलॉजी और भय का है, आप जितना डरे आपके ठगे जाने की संभावना उतनी ही अधिक है या कह सकते है कि 100% आपको साइबर ठगों के जाल में फंसकर लुट ही जाना है*
डिजिटल हाउस अरेस्ट घोटाले से खुद को कैसे बचाएं:
अनजान नम्बरो से आनी वाली कॉल से बेहद सावधान रहें:काल चाहे नार्मल हो, व्हाट्सएप काल हो या वीडियो कॉल हो
बिना सोचे समझें कोई भी कॉल पिक ना करें_
कोई भी भारतीय वैध एजेंसी आपको सम्मन-वारंट-गिरफ्तारी हेतु आपको कभी भी सीधे कॉल नही करेगी इस बात को गांठ बांधकर अपने दिमाग मे फिट कर लें_
यदि आप किसी कॉलर की बात करने के लहजे से प्रभावित हो रहे है या डर रहे है तो तत्काल कॉल कट कर दें_
जिस संस्था(कस्टम, सीबीआई, ईडी, पुलिस , कोर्ट ) के नाम पर आपको डराया जा रहा है या धमकाया जा रहा है उसके आधिकारिक नंबर पर काल करें या तत्काल अपने जनपद के किसी भी पुलिस अधिकारी, साइबर सेल या नजदीकी पुलिस स्टेशन को सूचित कर सहायता लें_
किसी भी हाल में परिस्थिति कोई भी हो अपनी व्यक्तिगत जानकारी कभी साझा न करें
किसी दबाव में आकर कोई निर्णय न लें, कुछ समय के लिए सांस लें और डर के कारण जल्दबाजी में कोई निर्णय न लें
किसी ऐसे व्यक्ति से बात करें जिस पर आपको भरोसा हो(कोई पुलिस अधिकारी, पत्रकार, अधिवक्ता या अन्य कोई विश्वसनीय व्यक्ति)
स्पष्ट दृष्टिकोण प्राप्त करने के लिए किसी मित्र, परिवार के सदस्य या कानून प्रवर्तन अधिकारी से स्थिति पर चर्चा करें
धोखाधड़ी के प्रयास की रिपोर्ट राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर करें
साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें
जानकारी प्राप्त करने के लिए यहां सम्पर्क कर सकतें है
भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम (CERT-In): www.cert-in.or/...
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल: cybercrime.gov/...
राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा गठबंधन: https://staysafeonline...
सतर्क और जागरूक रहकर, आप खुद को इस डिजिटल अरेस्ट घोटाले का शिकार होने से बचा सकते हैं।
डर को किसी भी हाल में अपने निर्णय पर हावी न होने दें - अपने पर नियंत्रण रखें और ऑनलाइन सुरक्षित रहें
साइबर अपराधी चर्चित पुलिस अधिकारियों के नाम व पिक यूज करते हैं और इस तरह से आपको अपने जाल में फंसाकर पैसे आनलाइन ट्रांसफर करा लेते हैं। अतः कभी किसी लालच में ना आए। आप खुद सोचे कि कभी भी कोई भी पुलिस अधिकारी अपने एकाउंट में रिश्वत नहीं ले सकता है। अतः किसी भी साइबर अपराधी के फोन आने पर आप किसी भी पुलिस अधिकारी से सलाह ले ले। हर पुलिस अधिकारी का कांटेक्ट नंबर गूगल पर उपलब्ध है। एक रिटायर्ड शिक्षिका से बनारस में साइबर अपराधियों ने साढे तीन करोड रुपए अपने अकाउंट में ट्रांसफर करा लिए कि आपका आधार कार्ड से कोई सिम खरीदा गया है जो मिसयूज हुआ है और आपको गिरफ्तार किया जाएगा और उससे जानकारी लेते रहे बाद में कहा कि आप अपने खाते में जो रुपए है वह इन खातों में ट्रांसफर करिए जांच के बाद आपको वापस मिलेगा और इस तरह उसका पैसा ट्रांसफर करा लिया।#dspsunilduttdubey #cyber #police #cybercrime #cybersecurity#dsp #cybersecurity
1 day ago (edited) | [YT] | 9
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DSP Sunil Dutt Dubey
मशहूर भजन गायिका बहिन तृप्ति शाक्या जी भक्ति भजन व पार्श्व गायन क्रान्ति की अग्रणी व अहम सारथी रही है। भक्ति गीतों व भजन को सरलता और सफलता से जनमानस के दिल व आम घरों सुदूर ग्रामीण ग्रामीण अंचल में बजने वाली ढ़ोलकों तक में पहुंचाने का बहुत बड़ा श्रेय तृप्ति शाक्या को जाता है। संगीत के क्षेत्र में उनकी मीठी व सुरीली आवाज ने एक विशेष पहचान बनायी है।
विभिन्न पॉडकास्ट व कई चैनलों को दिए गए साक्षात्कारों में उन्होंने बताया कि जब से उन्होने होश सँभाला तभी से वे भजन गा रही हूँ। लगता है कि मेरा जन्म ही भगवान के भजन गाने के लिए हुआ है। कभी राम बनके ... कभी श्याम बनके चले जाना भजन को केवल अपने देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी प्रशंसा मिली, टी सीरीज की कैसेट के जमाने में इस भजन ने इतनी लोकप्रियता प्राप्त की कि यह जन-जन के ओठों पर गुनगुनाने जाने लगा। मेरा और तृप्ति शाक्या का जन्म स्थान इटावा जिले में स्थित है और हम दोनों का परिवार तीर्थराज प्रयागराज में आवासित है। तृप्ति शाक्या के माता-पिता चाहते थे वह एक इंजीनियर बने पर उनका रुख हमेशा एक भजन सिंगर बनने का रहा और फिर माता-पिता ने उनको पूरा सहयोग देकर उनके करियर की रहा आसान कर दी और वह भजन व धार्मिक गीतों के क्षेत्र में एक सुपरस्टार बनकर उभरी। उनके अब तक चार हजार एलबम रिलीज हो चुके हैं। सात भाषाओं में उन्होंने भजन गाये।
Tripti Shakya Sunil Dutt Dubey Tripti Shakya
1 day ago | [YT] | 12
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DSP Sunil Dutt Dubey
मित्रता में संदेह नहीं किया जाता है बल्कि अभिन्न भाव रखकर विश्वास किया जाता क्योंकि मित्रता एक गहरी वहुअयामी फिलिंग्स है जो हम सबके जीवन में सम्बन्धों को ही गहरा नहीं करती है बल्कि जीवन को अर्थ व उद्देश्य भी प्राप्त कराती है। मित्रता एक ऐसी भावना है जो स्नेह, लगाव, देखभाल, विश्वास, और निस्वार्थ भाव से परिपूर्ण होती है। यह किसी व्यक्ति, वस्तु, विचार,या स्थान के प्रति गहरी आत्मीयता और समर्पण का भाव है। मित्रता का संबंध केवल रोमांटिक संबंधों तक सीमित नहीं है; यह प्रेम परिवार, स्वयं, प्रकृति, और यहाँ तक कि जीवन के प्रति भी हो सकता है। मित्रता केवल फीलिंग्स तक ही सीमित नहीं है; यह कार्यों और व्यवहार में भी व्यक्त होती है मित्रता का मतलब है कि हम अपने मित्रों की जरूरत को समझें और उनके साथ दें उनका समय दें उनकी कमियों को दूर करें और उनकी गलतियों पर रूठने की बजाय क्षमा करें। मित्रता एक ऐसी शक्ति है जो मानव जीवन को सुंदर, अर्थपूर्ण, और संतुष्टिदायक बनाती है। यह न केवल व्यक्तिगत संबंधों को मजबूत करती है, बल्कि समाज और विश्व को भी बेहतर बनाती है। #dspsunilduttdubey #vedioviralreel #prayagraj
1 day ago | [YT] | 11
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DSP Sunil Dutt Dubey
इलाहाबाद विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा एवं डकैतों और बीहड़ों के लिए मशहूर जनपद इटावा में शिक्षा की अलख जगाने वाले श्री आनंद स्वरूप मिश्रा जी की पुत्री एवं आईएएस की खान कहे जाने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय के ए एन झा हॉस्टल के अंतवासी एवं यूपीएससी की परीक्षा में सफल होकर भारतीय रेलवे में विभिन्न उच्च पदों पर रहे श्री आदित्य बाजपेई जी की पत्नी श्रीमती सुनीता आदित्य जी पूर्व सहायक निदेशक कोषागार प्रयागराज की पोस्ट अनछुए स्पर्श, अनकही बातें... स्मृतियों के बीच साथ साथ... लिया गया ये लेख की शिक्षा और संस्कारों को प्रदर्शित करता है जो आप सबके लिए प्रस्तुत है
नवम्बर का माह शुरू हो गया है.. कोषागारो में पेंशनर्स के जीवित होने के प्रमाण पत्र देने का महीना। सरकार की संवेदनशीलता से अनवरत व्यवस्थाओं में बहुत अच्छी तब्दीली आती जा रही है पर नवम्बर का महीना आते ही स्मृतियों में बहुत से पेंशनर्स और उनसे जुड़े अनुभव याद आने लगते हैं।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अध्यापक और छात्र तो हमेशा से ही मेरे दिल के क़रीब रहते हैं, इलाहाबाद हमारे लिए उपलब्धियों का शहर रहा है, पोस्टिंग कहीं भी रही हो , इलाहाबाद हमेशा दिल की धड़कनों में शामिल बना रहा, शायद इलाहाबाद विश्वविद्यालय का हर छात्र अपने अंदर शहर की जीवंतता समेटे रहता है।
मेरी पोस्टिंग यू.पी भवन , दिल्ली में थी.. दद्दा का फोन आया कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय के उनके प्रोफेसर, जो इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भूतपूर्व कुलपति भी रह चुके थे, की पेंशन का कुछ मसला है, वह अस्वस्थ हैं, मैं देख लूं.. फोन से बात कर लूं.. । सुनते ही मैंने उसी दिन समस्या को समझने के लिहाज़ से सर से बात की । समस्या खास गम्भीर नहीं थी.. ज्यादातर अशक्त, अस्वस्थ पेंशनर्स की वह साझा समस्या हुआ करती थी और अमूमन सभी कोषागार इसका कोई न कोई माकूल विकल्प हमेशा रखते हैं। वह आने में असमर्थ थे.. कुछ पेंशन के रिवीजन का भी मसला था। बहरहाल काम आसान सा ही था, उसी दिन हो भी गया और हमने उनको बता भी दिया ताकि वह निश्चिंत हो सकें।
उत्तर प्रदेश भवन में अन्य कोषागारों की तरह कई पेंशनर्स थे जो वार्षिक सत्यापन में नहीं आ पाते थे, कुछ गम्भीर अस्वस्थता के कारण, कुछ दिव्यांग पेंशनर्स भी थे, इन सबके लाइफ सर्टीफिकेट के सत्यापन की, उनके घर से मंगवाने की व्यवस्था हम लोग रखते थे। इसके अलावा उत्तर प्रदेश भवन की अपनी कुछ विशेष स्थितियां भी रहीं, वी वी आई पी कल्चर को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाते रहने के कारण। महत्त्वपूर्ण पदों पर रह चुके कुछेक सेवानिवृत्त अधिकारियों की भी बरसों की अपनी आदत थी कि कोई घर से ही दस्तख़त करा ले.. ये सेवानिवृत्त हो कर भी सेवा की ठसक से अपने को दूर नहीं कर पाये थे..सेवा के समय के अपने भौकाल को बनाए रखने का उनका प्रयास भी बना हुआ था। जो जाये हस्ताक्षर कराने वो भी बाकायदा समय लेकर जाये.. उनकी इस ठसक को पालने पोसने का काम साल दर साल चला आ रहा था।
खैर .. सर का कार्य हो चुका था और अब वह आश्वस्त थे। कुछ महीनों के बाद उनका फिर फोन आया कि मिलने आना चाहते हैं, हमारा आग्रह था कि कुछ काम बाकी हो तो फोन पर ही बता दें आने की तकलीफ़ न करें...। एक तो मुझे बिल्कुल भी बुजुर्ग पेंशनर्स का आना पसंद ही नहीं था, हमेशा ख्याल रहता था कि बिना उनके आये ही जो भी नियमों के दायरे में सम्भव हो ,समय से जरूर कर दिया जाये... दूसरे कोषागार की व्यस्तता में उनके आने से व्यवधान भी होता था। किंतु सर का अपना ही आग्रह था जिसे टालना अच्छा नहीं लगा ।
सर से यह मेरी पहली मुलाकात होनी थी, उनकी कुछ तस्वीरें जरूर देखीं थी, उनके विश्वविद्यालय के दिनों की। वह इलाहाबाद विश्वविद्यालय के साथ साथ कई अन्य विश्व विद्यालयों के भी कुलपति रह चुके थे। बेहद ज़हीन और योग्य अध्यापकों में उनका शुमार था। दद्दा बताते थे कि उनका लैक्चर सुनने के लिए कक्षा के बाहर भी छात्र जमा रहते थे। सर के चैम्बर में घुसते ही मुझे धक्का लगा। विश्व विद्यालय के दिनों के उनके प्रभावी व्यक्तित्व और निर्णायक शैली के किस्से भी हम सुन चुके थे किन्तु मेरे सामने तो पर्किंसन से ग्रस्त , निस्तेज , निढाल , बेहद चिंतित बुजुर्ग खड़े थे। उनकी कमजोर , कम्पित आवाज़ में आभिजात्य और गाम्भीर्य अभी भी था और थके कमजोर चेहरे पर योग्यता के ओज की छाप भी ।
"आपको आशीर्वाद देना चाहता था, आपकी आंटी को भी मिलवाना था, बहुत सहूलियत हो गई है , आपके रहने से, थेंक्यू सो मच।" वह बहुत सहज लगे.. बिना किसी आडम्बर और बनाबट के सहज और अपने स्वास्थ्य के कारण बेहद चिंतित भी। मुझे आभास होने लगा कि वह मैडम को खास तौर पर मिलवाना चाहते थे।
"सर, हम घर आ जाते, आप दद्दा के गुरू जी हैं, मेरे भी पिता समान, आपने बेवजह ही तक़लीफ की।" मैंने कहा।
मैडम अपेक्षाकृत स्वस्थ लग रहीं थीं, ठहराव के साथ शांत और गम्भीर सी .. मानों हर हाल में सर को संभालने के लिए सजग हों, उनकी ढाल बन कर ।
" ये अब अकेले कहीं नहीं आ जा पाते" उन्होंने धीरे से कहा।
सर ने घर परिवार सबकी चर्चा की, विशेषकर अरविंद दद्दा , मेरे बड़े भाई की जो उनके प्रिय विद्यार्थियो में से एक थे और हमेशा सम्पर्क में बने रहे।
" जरा मेरे कागज़ देख लें.… इनका नाम बगैरा..". मैडम की ओर इशारा करते हुए वह धीमे से बोले । "मेरे न होने पर इनको दिक्कत न हो बस "
इस अप्रत्याशित सी बात चीत में
मैं निरुत्तर, उलझी सी चुप थी। मेरे लिए क्या, कैसे कहना है यह बड़ा सवाल था... दोनों ही मेरे सामने बैठे थे। वह हमसे विस्तार में समझना चाह रहे थे कि उनके न रहने पर मैडम को क्या करना होगा? प्रक्रिया क्या है, पारिवारिक पेंशन में क्या व्यवस्था है आदि आदि..। मैम भी इस चर्चा में बहुत असहज होने लगीं थीं।
हमनें अपने आप को संभाला..
"ईश्वर आप दोनों को स्वस्थ रखें, आप शतायु हों । सर, आप बिल्कुल भी चिंता न करें... " मैंने समझाने की कोशिश तो की, पर शायद मेरे भाव मेरे शब्दों का पूरी तरह साथ नहीं दे पा रहे थे... वह बहुत निराश थे। मेरे दिलो दिमाग में एक नज्म कौंध रही थी.....
"मैंने हर रोज जमाने को रंग बदलते देखा है
उम्र के साथ जिन्दगी के ढंग बदलते देखा है।
वो जो चलते थे तो शेर के चलने का होता था गुमान
उनको भी पाँव उठाने के लिये सहारे के लिये तरसते देखा है।
जिनकी नजरों की चमक देख सहम जाते थे लोग
उन्ही नजरों को बरसात की तरह रोते हमने देखा है
जिनके हाथो के जरा से इशारे से टूट जाते थे पत्थर
उन्ही हाथो को पत्तो की तरह थर थर कांपते देखा है"
मेरा मन भर आया , उम्र के उस मुकाम पर जीवनसाथी के लिए इतनी फ़िक्र और हालात देख कर। कूच से पहले की उनकी तैयारी का मैं हिस्सा बन रही थी। जिनकी निगाह विश्व विद्यालय के प्रशासन में निर्णायक रहती थी, आज उस नज़र में असुरक्षा, विवशता और प्रेम का सैलाब उमड़ रहा था.. वह छुपाने का असफल प्रयास कर रहे थे... हम उस प्रयास को अनदेखा करने की कोशिश में उनकी फाइल पर ही अपनी नज़र गड़ाए रहे ...अपने को विशुद्ध प्रोफेशनल दिखाने की कोशिश में..। किसी तरह उन हालात में जो कुछ भी आदर, सम्मान और तसल्ली के मुझसे शब्द बन सके हम उनसे कह भी रहे थे । हम उन दोनों के चेहरों पर किसी हद तक संतोष का भाव लाने में सफल हो सके थे। स्थिति कोई भी हो... ऑफिस से उन्हें और मैडम को कोई परेशानी न आयेगी.. इस विश्वास के साथ वह विदा ले रहे थे... सर और मैडम चलते चलते दोनों ही न जाने कितने आशीर्वाद मुझे दिये जा रहे थे। वह चिंतामुक्त होकर जाएं और उनके सारे आशीर्वचन, उनकी हर दुआ मेरे बच्चों तक पहुंचे , मैं मन ही मन यही प्रार्थना कर रही थी...।
कुछ महीनों के बाद उनके देहावसान की ख़बर मिली...मैडम की पारिवारिक पेंशन बिना किसी परेशानी के शुरू हो गई। सर से हुई यह पहली मुलाकात आखिरी बन मेरी स्मृतियों का चिर हिस्सा बनकर रह गई।
सर को पूरी श्रद्धा और आदर के साथ विनम्र श्रद्धांजलि।🙏🏻
1 day ago | [YT] | 10
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DSP Sunil Dutt Dubey
हमारे इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र नेता एवं बांदा के पूर्व सांसद व नरैनी विधानसभा के पूर्व विधायक वयोवृद्ध समाजसेवी श्री रमेश चंद्र द्विवेदी की गाड़ी पर सिविल लाइन में अराजक तत्वों द्वारा तोडफ़ोड़ की हम सभी इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिवार के सदस्य गण तीव्र भर्त्सना करते हैं। श्री रमेश चंद्र द्विवेदी छात्र जीवन से भले ही किसी राजनीतिक पार्टी में रहे हो पर वह एक सौम्य सरल व्यक्तित्व के धनी है और हमेशा लोगों के लिए तत्पर रहते हैं मैं व्यक्तिगत तौर पर विश्वविद्यालय जीवन से ही उनका प्रशंसक रहा हूं।
2 days ago | [YT] | 11
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DSP Sunil Dutt Dubey
रिश्ते में भरोसा और भरोसे में धोखा। घटना फतेहपुर से सामने आई है जिसने एक बार प्यार के रिश्तों को कलंकित कर दिया है इस घटना ने प्यार धोखा और कत्ल की किताब में एक और अध्याय जोड़ दिया। 28 जून को बीबीपुर रेलवे ट्रैक पर बरामद हुई एक अज्ञात महिला के शव की जब शिनाख्त की गई तो रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया युवती की पहचान 20 वर्षीय पुष्पा के रूप में हुई जो अपने प्रेमी गंगा सागर 48 बर्षीय के साथ लिव इन रिलेशन में रह रही थी। और उसी के प्रेमी गंगा सागर ने अपने पुत्र व दो साथियों के साथ उसकी गला दबाकर हत्या कर दी और साहू को तीन दिन तक घर में रख रहा पर सड़न व बदबू के कारण ट्रैक्टर की मदद से रेलवे ट्रैक पर रख्या और हत्या को हादसा दिखाने के लिए रेलवे ट्रैक पर शव को रख दिया था आरोपी गंगा सागर को पुलिस ने जांच के उपरांत गिरफ्तार कर लिया आरोपी ने बताया कि उसके परिवार के लोग इस रिश्ते का विरोध कर रहे थे और उसने अपनी प्रेमिका पुष्पा को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। हम प्यार के खिलाफ नहीं है पर प्यार के रिश्तों में धोखा और कत्ल अक्सर देखने को मिल रहा है जो कई हंसते खेलते परिवारों की खुशियां नष्ट कर दे रहे हैं।
2 days ago | [YT] | 12
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