DSP Sunil Dutt Dubey

Cyber awareness Motivational legal speeches, educational,


DSP Sunil Dutt Dubey

जनपद अंबेडकर नगर में पत्नी से फोन वार्ता के बाद आरक्षी संदीप कुमार ने अपनी जिंदगी खत्म कर ली आरक्षी संदीप कुमार के असामयिक निधन पर पूरे प्रदेश यूपी पुलिस परिवार में शोक की लहर व्याप्त हो गई है।आरक्षी संदीप कुमार को अश्रुपूरित आखों से विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए भगवान से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें और शोकाकुल का परिवार को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करे ॐ शांति शांति शांति
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6 hours ago | [YT] | 5

DSP Sunil Dutt Dubey

नौकरी में आज के हालातों में काम करना कितना मुश्किल है यह मुझसे ज्यादा कोई नहीं समझ सकता। अगर आप अपने सपनों को उड़ान देने के लिए आप किसी खराब अराजक व्यवस्था को बदलना चाहते हैं। तो उससे जुड़े अनेक स्वार्थी लोग आपके विरुद्ध षड्यंत्र का पहाड़ खड़ा करके आपको इतना हतोत्साहित कर देंगे कि शायद आगे आने वाली 100 पीढ़ी भी किसी भी अराजकता पूर्ण व्यवस्था को बदलने की न सोच सके। पर हम अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगे हमें अपनी सनातन संस्कृति का गौरव अक्षुण्ण रखना है मेरे लिए राष्ट्र धर्म सर्वोपरि है। पर यह याद रखना है कि यह लड़ाई बहुत आसान नहीं है।आज की परिस्थितियों को देखकर सच में किसे डर नहीं लगेगा। वर्ष 2022 में मैं महाराजगंज में क्षेत्राधिकारी निचलौल के पद पर तैनात था। वहां कई प्रकरणों में मैंने देखा कि फर्जी गैंगरेप के मुकद्दमे आपसी रंजिश में लिखाए गए थे ।मुझे जब इन्वेस्टिगेशन मिला तो मैंने उन मुकद्दमों को एक्स्पंज (खारिज )किया । मुकदमे के एक्स्पंज होते ही जिले में हड़कंप मच गया मुझे अनेक बार अपनी ही सफाई देनी पड़ी महिला अपराध रोकने के लिए सरकार में कड़े कदम उठाते हुए बहुत ही कठोर कानून बनाए हैं पर अपराधियों ने उनके दुरुपयोग के नए-नए रास्ते निकाल लिए और उनके द्वारा फर्जी गैंगरेप लिखाने के साथ साथ जो एविडेंस बनाए गए थे वह इतनी मजबूत थे कि उन एविडेंसों के चलते मुकदमों को खारिज करना एक दुरुह कार्य था पर मैंने यह कार्य करके दिखाया पर उन मुकदमों में खारिज करने के बाद मुझे जिन समस्याओं का सामना करना पड़ा उसको शायद मेरे जैसा व्यक्ति ही बर्दाश्त कर सकता था पर मैं झुका नही।टूटा नहीं।बिखरा नहीं।मेरे लिए जो संकट खड़े किए गए थे उनका मैंने डटकर सामना किया।मुझे अनेकों तरीके से परेशान किया गया पर मैं हिमालय की तरह अडिग रहा । शायद मैं उन षडयंत्रों व उनसे उत्पन्न होने वाली परेशानियों को लिख नहीं सकता हूं । पर समझ सकता हूं कि हर जनपद में प्रशासनिक वा पुलिस अधिकारियों की लाइफ में भूचाल लाने वाले प्रत्यक्ष नहीं अप्रत्यक्ष रूप से कार्य करते है और वह अधिकारियों से ज्यादा टैलेंटेड होते है पर मैंने यह ठान लिया है कि मैं जोब को छोड़ सकता हूं पर किसी निर्दोष को जेल नहीं भेज सकता हूं यह मेरा व्यक्तिगत संकल्प ही नहीं जुनून रहा है।आज भी कोई भी जांच या इन्वेस्टिगेशन मेरे पास आता है और मैं यह आश्वस्त हो जाता हूं कि यह फर्जी है तो मैं किसी को जेल नहीं भेजता हूं । और मुकदमे को एक्स्पंज ही करता हूं।कभी कभी मुझे इसके लिए अपनी कैरियर को दाव पर लगाना पड़ा हो पर ईश्वर ने मुझे वह शक्ति दी है कि मैं प्रत्येक परिस्थिति का सामना करने को तैयार हो गया हू । मैंने यह अनुभव किया है कि प्रशासनिक सेवा में आने वाले अधिकांश युवा अपने मन में समाज को सत्य व न्याय दिलाने का संकल्प लेकर आते हैं पर यहां आने वाली चुनौतियों से वह इतना घबरा जाते हैं कि बहुत सारे ऐसे कार्य जिसके लिए उनकी आत्मा तैयार नहीं होती पर वे केवल मजबूरी में अपने कैरियर को बचाने के लिए करते हैं। मैं दहिस हत्या की एक मुकदमे का इन्वेस्टिगेशन कर रहा था मैं इन्वेस्टिगेशन के दौरान मैंने पाया की मृत्यु का की नंद कई वर्षों से किसी अन्य शहर में नौकरी की तैयारी कर रही थी पर मृतका के परिजनों द्वारा उसको भी हत्या जैसे गम्भीर अपराध में नामजद कर दिया गया था मैंने पाया कि वह शादी के बाद घर आई ही नहीं थी उसका नाम नाम जग्गी गलत कर दी मृतका के परिजन काफी प्रभावशाली व्यक्ति थे और उन्होंने मेरे खिलाफ अप्रत्यक्ष रूप से इतनी षड्यंत्र किया कि आज तक उनके रस की तपिश को झेल रहा हूं मगर मैं सत्य से डिगा नहीं। लोग फर्जी मुकदमा के लिए पुलिस की आलोचना करते हैं पर उनको ये पता नहीं है कि समाज के लोग ही फर्जी मुकदमे दर्ज कराते हैं और उन मुकद्दमों में निर्दोष लोगों को बचाने के लिए सब कुछ दांव पर लगाना पड़ता है।अगर हम डर कर हिम्मत हार गए तो सब कुछ खत्म हो जाएगा!!!हमें अपने #विश्वास को अडिग करना होगा मजबूत करना होगा तब जाकर हम जीत सकते हैं। एक_नया_सवेरा जरूर आयेगा। पुलिस विभाग में जनता आप को जिन अपराधियों व माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करने पर हीरो बना देती है वही अपराधी व अराजक तत्व आपके खिलाफ तमाम षड्यंत्र लेकर खड़े हो जाते हैं और आपकी कोई भी एक गलती को हाईलाइट कर आपको खलनायक के स्तर तक पहुंचा देती है पर हमें डरना नहीं है कल क्या होगा कैसे होगा यह सोच कर हम डर डर कर बहुत जी लिए ,अब क्यों न जीवन के हर पल को अपनी बाहों को फैलाकर उसमें समेट कर भरपूर आनन्द लिया जाए।
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7 hours ago | [YT] | 12

DSP Sunil Dutt Dubey

आजकल 1980 में आप कैसे दिखते थे ए आई आपको मुफ्त में आपकी फोटो बना रहा है पर यह भी ध्यान रखो कि यह फोटो आपके लिए कहीं मुसीबत का कारण ना बन जाए।
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8 hours ago | [YT] | 4

DSP Sunil Dutt Dubey

आज महिला क्रिकेट एशिया कप चैंपियनशिप के फाइनल मैच में भारत व श्रीलंका की टीमों में कोन सी टीम की जीत की सम्भावना है। आप किस टीम को सपोर्ट करेंगे और भारत की बेटियों की जीत के लिए शुभकामनाएं देगें ।
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1 day ago | [YT] | 3

DSP Sunil Dutt Dubey

पत्नियां भी हो सकती हैं प्रेमिकाएं

पत्नियां भी हो सकती हैं प्रेमिकाएं, बशर्ते पति भी प्रेमी बन सके, जैसे सीता की चाह रखने वाले को राम होना पड़ता है, वैसे ही प्रेमिका की चाह रखने वाले को,प्रेमी होना पड़ता है,
क्योंकि पति का तो अर्थ ही है स्वामी,मालिक ,तो यदि एक मालिक है तो दूसरा तो उसका दास हुआ न,और मालिक दया कर सकता है दास पर, सहानुभूति कर सकता है ,

पर प्रेम? प्रेम नही कर सकता

और वैसे भी पतियों को कब स्वीकार होता है पत्नियों का प्रेमिकाएं बन जाना,क्योंकि प्रेमिकाएं,उन्मुक्त होती हैं, आज़ाद होती हैं, वो दुनियाँ के थोपे गये रवाजो से नही,प्रेम से बंधी होती हैं, उनकी यही उन्मुक्तता, तुमको उनके क़रीब लाती है, तुम डरते हो पुरूष, प्रेमिका को खोने से पर क्या तुम स्वीकार कर पाओगे,पत्नी का यूँ उन्मुक्त और स्वछंद हो जाना,नहीकभी नही,और इसीलिए ,प्रेमिका के पत्नी बनते ही, लाद दिये जाते हैं उस पर ढेर सारे रीति रिवाज ,बदल दिए जाते हैं उसके पहनने ओढ़ने ,उठने बैठने तक के

2 days ago | [YT] | 8

DSP Sunil Dutt Dubey

पत्नियां भी हो सकती हैं प्रेमिकाएं

पत्नियां भी हो सकती हैं प्रेमिकाएं, बशर्ते पति भी प्रेमी बन सके, जैसे सीता की चाह रखने वाले को राम होना पड़ता है, वैसे ही प्रेमिका की चाह रखने वाले को,प्रेमी होना पड़ता है,
क्योंकि पति का तो अर्थ ही है स्वामी,मालिक ,तो यदि एक मालिक है तो दूसरा तो उसका दास हुआ न,और मालिक दया कर सकता है दास पर, सहानुभूति कर सकता है ,

पर प्रेम? प्रेम नही कर सकता

और वैसे भी पतियों को कब स्वीकार होता है पत्नियों का प्रेमिकाएं बन जाना,क्योंकि प्रेमिकाएं,उन्मुक्त होती हैं, आज़ाद होती हैं, वो दुनियाँ के थोपे गये रवाजो से नही,प्रेम से बंधी होती हैं, उनकी यही उन्मुक्तता, तुमको उनके क़रीब लाती है, तुम डरते हो पुरूष, प्रेमिका को खोने से पर क्या तुम स्वीकार कर पाओगे,पत्नी का यूँ उन्मुक्त और स्वछंद हो जाना,नहीकभी नही,और इसीलिए ,प्रेमिका के पत्नी बनते ही, लाद दिये जाते हैं उस पर ढेर सारे रीति रिवाज ,बदल दिए जाते हैं उसके पहनने ओढ़ने ,उठने बैठने तक के ढंग,जो परिवर्तन समय के साथ स्वभाविक है, उसे थोपा जाता है
पत्नियों को आदेशित और निर्देशित किया जाता है , ताकि तुम बन सको, उसके मालिक,उसके पति,उसके स्वामी, ताकि तुष्टि पा सके, तुम्हारा कुंठित पौरुष कभी सोचा है तुमने, वो बेअक्ल, बेशऊर ,बेतरतीब ढंग वाली,वो तुम्हारी पत्नी,किसी की प्रेमिका भी हो सकती है?
क्योंकि वो पुरूष उसका प्रेमी बनता है उसका मालिक नही,
वो तुम्हारी पत्नी तुम्हारी प्रेमिका भी हो सकती थी,पर नही हुई,तो सोचो...... आख़िर क्यों?
किसी को प्रेम करने के लिये,किसी का प्रेम पाने के लिये प्रेम से भी ज्यादा ज़रूरी है,उसका सम्मान करना,

तो सच बताओ पुरूष, क्या तुम वो सम्मान,अपनी पत्नियों को दे पाते हो; जो तुम अपनी प्रेमिका को देते हो?

क्या तुम अपनी पत्नी की मर्ज़ी के लिये ;
अपना दिल इतना बड़ा कर पाते हो;
जितना प्रेमिका के लिए कर लेते हो?
सच बताओ पुरूष, क्या तुम पति बन के प्रेमी बन पाते हो?
नही कदापि नही,और इसीलिए तुम प्रेमिका और पत्नी; दोनों को अलग अलग रखते हो,
जबकि औरत ,पति और प्रेमी,दोनों को एकाकार कर, ख़ुद को सम्पूर्ण करती है

3 days ago | [YT] | 5

DSP Sunil Dutt Dubey

Avoid cyber crime डिजिटलअरेस्ट,एक प्रकार का साइबरअपराध है जिसमें अपराधी ऑनलाइन माध्यम से लोगों को डराते-धमकाते हैं और उनसे पैसे ऐंठने की कोशिश करते हैं. वे खुद को #पुलिस, #सीबीआई या अन्य सरकारी अधिकारियों के रूप में पेश करते हैं और झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देते हैं. साइबर अपराधी फर्जी वीडियो कॉल या ऑडियो कॉल के जरिए लोगों से संपर्क करते हैं.वे पीड़ित को बताते हैं कि वे किसी अपराध में शामिल हैं और उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है.पीड़ित को डराकर, वे उनसे "जमानत", "जुर्माना" या "जांच में सहयोग" के नाम पर पैसे देने के लिए मजबूर करते हैं.अपराधियों द्वारा पुलिस स्टेशन या सरकारी कार्यालयों जैसा दिखने वाला सेटअप बनाया जाता है, ताकि पीड़ित को उन पर विश्वास हो जाए. किसी भी अनजान कॉल या मैसेज पर विश्वास न करें, खासकर यदि वे आपको पैसे देने या जानकारी साझा करने के लिए कह रहे हैं.यदि आपको कोई संदेह है, तो सत्यापित करें कि क्या व्यक्ति वास्तव में एक सरकारी अधिकारी है.यदि आपको लगता है कि आप साइबर अपराध का शिकार हो रहे हैं, तो तुरंत #साइबर_क्राइम_हेल्पलाइन (#1930) या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर शिकायत दर्ज करें. डिजिटलअरेस्ट से बचने के लिए, हमेशा #सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की रिपोर्ट करें.#dspsunilduttdubey #sunilduttdubey #cybercrime #viralpost2025 #CyberSecurity #cyber #cyberpunk2077

3 days ago | [YT] | 12

DSP Sunil Dutt Dubey

ए आई की युग की शुरुआत हो गई है राजनीतिकों से लेकर ब्यूरोक्रेट जेन ए बी सी से लेकर जैन अल्फा जैन जी तक ए आई का प्रयोग कर रहे हैं लोग 1980 को याद कर रहे है तो मुझे भी याद आया जब मेरा बचपन का वह दशक और उत्तर प्रदेश का जिला इटावा 80 से 90 के दशक में कैसा दिखता था वह मैं आपको बताना चाहता हूं आज कैसा दिखता है यह आप बता सकते हैं या जो इटावा के रहने वाले हैं इटावा से संबंधित है वह मुझे बताएंगे क्योंकि इटावा को छोड़े हुए 25 साल से ज्यादा हो गया है कभी कभार वहां जाना होता है पर अब तो सब कुछ बदल गया है 1980 का इटावा चंबल और राजनीति का अखाड़ा था जो शायद आज की इटावा से अलग रहा होगा
80 के दशक का इटावा मतलब चंबल का ख्वाब नाम सुनते ही लोगों के जेहन में कोई दृश्य उभरता था तो वह था चंबल के डाकू एक से एक बढ़कर खौफ पैदा करने वाले डाकू सुल्ताना सिंह दस्यु सुंदरी फूलन देवी मलखान सिंह डाकू रामआसरे फक्कड विक्रम मल्लाह निर्भय गुर्जर और छविनाथ यादव जैसे दर्जनों नाम चंबल के बीहड में सक्रिय थे जो इटावा भिंड मुरैना से अपहरण का उद्योग धंधा चला रहे थे पत्रकारों को खुलेआम इंटरव्यू देते थे गांव के लोग उनको दद्दा कहते थे निर्भय होकर बिचरण करते थे जिस गांव में पहुंच जाते थे उस गांव के मुखिया या सम्मानित लोग खाने-पीने की व्यवस्था करते थे ग्राम प्रधान से लेकर संसदीय चुनावों तक में उनकी उनकी मजबूत पकड़ होती थी और इसीलिए इटावा की राजनीतिक हस्तियां उनको न केवल संरक्षण देती थी बल्कि आर्थिक रूप से मदद भी करती थी माननीय उच्चतम न्यायालय दिल्ली अथवा माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में उनकी पैरवी के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता हमेशा उनके संपर्क में रहते। पर 1982 का टर्निंग पॉइंट भी इलाहाबाद के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है जब अनेकों समाजसेवियों के भागीरथी प्रयास से अनेकों डकैतों ने आत्मसमर्पण कर हथियार डाले पर फिर भी उनका जो ख्वाब था वह खत्म नहीं हुआ छोटे-मोटे डकैतों ने उनका स्थान ले लिया और स्थित वही रही बसों का जल्दी बंद हो जाना हर गांव में एक दहशत का माहौल की कब कौन डकैत कहां आपका अपहरण कर ले और आपसे मोटी फिरौती की रकम मांगे जनता ही नहीं थानों में भी रात में दहशत का माहौल रहता था
पर चंबल के डकैतों के अलावा इटावा शहर का पक्का तालाब, शाही जामा मस्जिद, इटावा का किला भगवान शिव जी का मंदिर और यमुना पुल ही घूमने की जगहें। और भक्ति दर्शन और आशीर्वाद के लिए पीलवा महाराज और बकेवर महेवा के बीच स्थित बाग वाले हनुमान जी शहर विकसित नहीं था आम व्यक्ति के लिए पैदल से चलने वाली हीरो साइकिलें और संपन्न वर्ग के पास बजाज लैंब्रेटा अथवा चेतक स्कूटर या राजदूत मोटरसाइकिल। हाथ की कलाई में बधी एचएमटी घड़ी से ही लोग समझ जाते थे कि घड़ी बांधने वाला संपन्न किसान के साथ नौकरी पैसा वाले घर का भी है रेडियो पर विविध भारती गूंजती थी पर टेप रिकॉर्डर का आविष्कार हो गया था क्योंकि 1973 में मेरी बड़ी बहन की शादी में टेप रिकार्डर दिया गया था। ब्लैक एंड व्हाइट टीवी का जमाना था पर टीवी गांव में दो ही चार लोगों के घर में रहता था। घर में ट्रैक्टर और घर में बंदूक का बड़ा महत्व था अगर आपके पास ट्रैक्टर और बंदूक है तो शादी के निमंत्रण कार्डो से आपका घर भरा रहता था।
इटावा तथा उसके आसपास सैकड़ो गांव के लोगों के लिए वर्ष में एक बार लगने वाली इटावा की नुमाइश आकर्षण का केंद्र थी पर उसके अलावा नौरंगाबाद का बाजार व शास्त्री चौराहा पर लस्सी समोसे की दुकानें रास्ता चलते रहागीरों को अपनी सुगंध से आकर्षित करती रहती थी यमुना-चंबल के बीच दोआब की उपजाऊ मिट्टी में गेहूं चावल सरसों की लहराती खेती और गाय भैंस बकरी चराते हुए बच्चे और गांव में पुलियों पर बैठे हुए लूंगी पहने दुनिया से बेखबर उस युग के जैन जी का एक अलग ही आकर्षण देखने को मिलता था
इटावा शिक्षा और साहित्य की उर्वरा भूमि के रूप में प्रदेश में हमेशा फेमस रहा है इटावा के कस्बा बकेवर में स्थापित जनता कॉलेज वाणिज्य विज्ञान और कृषि की शिक्षा के क्षेत्र में तक्षशिला और नालंदा यूनिवर्सिटी को भी मात देता था साहित्य के क्षेत्र में गोपाल दास नीरज और श्री नारायण चतुर्वेदी जैसे नाम केवल प्रदेश में नहीं संपूर्ण देश में जाने जाते थे। यह कोई मैटा आई की सूचना नहीं है बचपन बचपन में आंखों के सामने गुजरा हुआ इटावा में वर्णित किया है पर आज का इटावा कैसा है यह आप ही बता सकते हैं

3 days ago | [YT] | 6

DSP Sunil Dutt Dubey

आज संडे था सभी विभागों में अवकाश का दिन होता है हम सभी राजपत्रित अधिकारियों का भी घोषित अवकाश रहता है पर पुलिस सेवा में आप कभी संडे का मजा नहीं ले सकते । संडे को कुछ ना कुछ काम हमेशा निकलता ही रहता है ।फॉलोअर्स की संख्या लाखों में पहुंचने के कारण फेसबुक ,इंस्टाग्राम व फेसबुक पेज के मैसेंजर पर हजारों मैसेज समयाभाव के कारण पढ़ नहीं पाता हूं पर जब भी समय मिलता है मैं सभी के मैसेज को जरूर पढ़ता हूं और यथासंभव सब की समस्या के निराकरण का प्रयास भी करता हूं। आज मैसेंजर खोलने पर देखा कि ज्यादातर मैसेज हाईली कॉम्पिटेटिव एग्जाम्स में शामिल हो रहे प्रतियोगी छात्र-छात्राओं के थे ।ज्यादातर हमारे छोटे भाई बहनों ने पूछा है कि यूपीएससी या स्टेट सर्विसेज परीक्षाओं की तैयारी कैसे करें की ।किस सब्जेक्ट को चूज किया जाए तैयारी के लिए सेल्फ स्टडी अच्छी है या कोचिंग की जाए। सभी को अलग-अलग अपने विचारों से अवगत कराना संभव नहीं है तो आज मैंने सोचा कि आप लोगों से हम सामूहिक रूप से अपने विचारों को साझा कर लू। किसी भी हाईली कॉम्पिटेटिव एग्जाम्स के को देने से सर्विस का टारगेट जरुर चूज कर ले कि आपकी स्किल क्या है आप एकेडमिक कैरियरक्या है आपको किस सर्विस में इंटरेस्ट है।अच्छा तो यह है कि आप 12th पास करते ही यह निश्चित कर लें कि मुझे किस क्षेत्र में जाना है ज्यादातर छात्र छात्राओं का उद्देश्य मात्र सरकारी नौकरी पाना होता है और वह कोई फील्ड निश्चित नहीं कर पाते हैं कि उनको किस सर्विस के लिए परीक्षा देनी है उनको कौन सी सर्विस चुनना है।छोटी-छोटी सर्विसेज से लेकर स्टेट सर्विसेज और यूपीएससी तक की सभी परीक्षाएं देते रहते हैं इसलिए सबसे महत्वपूर्ण है कि पहले हम अपने टारगेट को चूज करें उसके उपरांत उस परीक्षा के सिलेबस को देखें और पिछले 10 साल के क्वेश्चंस पेपर देखकर तैयारी का लेवल देखें कि आप उसे लेवल की तैयारी कर सकते हैं या नहीं।जहां तक सब्जेक्ट के चूज करने का प्रश्न है तो मैं कहता हूं कि सभी सब्जेक्ट अच्छे होते हैं आपका इंटरेस्ट किस सब्जेक्ट में है यह आपके स्वयं के ऊपर निर्भर करता है कि आप उस लेवल की तैयारी करने में सक्षम है या नहीं इस बात को आप से अच्छा कोई नहीं समझ सकता है ।आप जो सब्जेक्ट चूज कर रहे हैं उसका ऑनलाइन सिलेबस देखें अगर आप अपने को कंफर्ट महसूस कर रहे हैं तो उसको आप सेलेक्ट कर सकते हैं इस संबंध में आपका सेल्फ मोटिवेशन बहुत महत्वपूर्ण है ।होम स्टडी अथवा कोचिंग के संबंध में यही कहूंगा कि कोई भी कोचिंग आपको सफलता की गारंटी नहीं दे सकती है अगर आपके पास समय कम है रिसोर्सेज का अभाव है तो आप कोचिंग का सहारा ले सकते हैं पर कोचिंग किसी भी परीक्षा की सफलता का आधार बिल्कुल नहीं है। सफलता के लिए सबसे आवश्यक है आप अपनी परिस्थितियों और रिसोर्सेज के आधार पर अपना प्लान स्वयं तैयार करें। समय को आप किस तरह से यूटीलाइज कर सकते हैं इस पर फोकस करें। आपको कितने घंटे पढ़ना है इसका कोई क्राइटेरिया नहीं है।आप अपना प्लान स्वयं करें कि आप उस परीक्षा के लेवल पर कैसे पहुंचे आप स्वयं खुद को मोटिवेट करें और याद करें कि आपने कई परीक्षाओं में कम समय में भी अच्छी सफलता अर्जित की है पर यूपीएससी अथवा स्टेट सर्विसेज में परीक्षा की सफलता के लिए यह आवश्यक है की आप परीक्षा के लिए प्लान खुद बनाएं और यह सफलता की सबसे महत्वपूर्ण चीज है ।आपके पास जो समय है उसे महीने में और महीनों को सप्ताह में सप्ताह को दिनों में और दिनों को घंटे के बाट ले तथा सिलेबस को घंटों में बांट कर अपने टारगेट को जरूर पूरा करें। पढ़ाई की निरंतरता को बनाए रखें एक दिन अपने 15 घंटे पढ़ लिया फिर 3 दिन आप बिल्कुल नहीं पढ़े ऐसा ना करें। पढ़ाई में कभी गैप न करें क्योंकि सफलता हासिल करने के लिए जरूरी नहीं है कि हमेशा दौड़ा ही जाए। सफलता मेहनत की आदत बनाने से भी मिल सकती है। सफलता कभी अंतिम नहीं होती है और सफलता कभी घटक नहीं होती है असफलताओं पर बिखरे नहीं बल्कि सफलता के लिए जिंदगी का गैर अपनी तैयारी का गैर भी चेंज करते रहें यीशु का दर्शन और अच्छे जानकारी मित्रों का मार्गदर्शन हमेशा लेते रहें आप घर पर अपनी स्टडी कर रहे हैं अथवा दिल्ली इलाहाबाद में हॉस्टल अथवा रूम लेकर पढ़ रहे हैं इसका कोई भी इसका सफलता से कोई भी संबंध नहीं है आप अपने घर पर परीक्षाओं के लेवल का सिलेबस और मटेरियल अगर कलेक्ट कर सकते हैं तो आप घर पर भी पढ़ाई करके सफलता प्राप्त कर सकते हैं हॉस्टल सेपरेट रूम अथवा लाइब्रेरी आप की सफलता का आधार बिल्कुल नहीं है सफलता का आधार आपका प्लान है जिससे आप परीक्षा की तैयारी करने से पहले बना लें परीक्षा का सिलेबस व पिछले 10 वर्ष के क्वेश्चन का लेवल प्राप्त करने की कोशिश करें तथा जब आपकी तैयारी उस लेवल की हो जाए तभी आप परीक्षा में सम्मिलित हो जब तक प्रतियोगी परीक्षाओं के लेवल की तैयारी आपकी पूर्ण नहीं हो जाती है तब तक परीक्षा में सम्मिलित न होकर अभी तैयारी पर फोकस करें। कंपटीशन और इंडिविडिलुज्म की भावना से आच्छादित जीवन शैली और प्रकृति से दूर होने के कारण हम मानसिक तनाव का शिकार हो जाते हैं अतः किसी भी परीक्षा में सम्मिलित होने से पहले अच्छा प्लान तैयार करें । सफलता अवश्य मिलेगी कोई संदेह नहीं है। कहते हैं की मेहनत शेरनी का वह दूध है जो परीक्षाओं में आपको दहाड़ना सिखाती है। मेहनत मेहनत से जब सब्जेक्ट पर आपकी कमान होगी तो आपके मन में चिंतन होगा जिज्ञासा होगी अन्वेषण अपने आप पैदा हो जाएंगे। किसी भी परीक्षा में आपके द्वारा बनाया गया प्लान व आपका श्रेष्ठतम प्रदर्शन आपके आत्मविश्वास को बढ़ाता है और आत्मविश्वास से असम्भव देखने वाली चीजें संभव हो जाती है। कभी भी परीक्षाओं को भाग्य के भरोसे मत छोड़िए।ना दरवाजे पर घोड़े की नाल लगाने की जरूरत है न ही किसी मंदिर में नारियल फोड़ने की आवश्यकता है। भगवान हमेशा आपके साथ है कभी भी किसी ज्योतिषी के चक्कर में ना पड़े। जीवन को सालों से नहीं अपने खुशनुमा तरीके से जीने की आदत डालो। कंपटीशन में जल्दबाजी मत करो तीन-चार साल आपने यहां खर्च कर दिए वह आपके अगले 25 सालों का भविष्य निश्चित करेंगे। इसलिए अपनी स्किल अपनी क्षमता और अपनी परिस्थितियों के अनुरूप सर्विस को चुनो। परीक्षा से पहले आप अपना एस्टीमेट कर ले सबसे अच्छा मोटिवेशन सेल्फ मोटिवेशन है। जब तक आपकी तैयारी प्रीलिम्स व मेंस एग्जाम के लेवल की ना हो जाए तब तक अपना अटेम्प्ट खराब ना करें।

4 days ago | [YT] | 10