बचपन से ही मेरा उद्देश्य हमेशा थोड़ा अलग हटकर रहा...जिंदगी जीना स्वयं की निर्धारित शर्तों पर... चाहे परिवार का परिवेश अथवा हॉस्टल की जिंदगी ..... केवल एक ही उद्देश्य.... सामने जरूरतमंद को देखकर उसकी मदद करना ।भले ही कैरियर पर उसका कोई असर पड़ा हो . सिविल सर्विस मुख्य परीक्षा का सुबह पेपर था रात में गर्ल्स हॉस्टल से खबर आई की एक सहपाठिनी की तबीयत खराब हो गई तत्काल लेकर अस्पताल उसके परिजनों के आने का इंतजार करता रहा पेपर खराब हुआ पर कोई अफसोस नहीं... दूसरों की मदद करने के जुनून ने हमें हमेशा एक प्रेरक की तरह गतिशील ही रखा। जनपद इटावा के दस्युग्रस्त बीहड़ में बसे गांव ...जहां पर उस समय...अधिकतर समाज के प्रबुद्ध लोग हमेशा एक दूसरे को उलझाने में ही व्यस्त रहते ...वहां से निकलकर हॉस्टल तक का सफ़र यकीनन आसान तो नही था मेरे लिए। पर वक्त व पारिवारिक पृष्ठभूमि ने कोई रुकावट पैदा नहीं होने दी। पुलिस की सेवा में आने के बाद भी मैंने जनउपयोगी जो भी कार्य किए उसने मुझे समाज में एक प्रसिद्ध तो दिलाई परंतु आलोचकों की एक फौज भी तैयार कर दी ।वक्त को सब कुछ सौंप...मैं कर्म और कर्तव्य के बीच सेतु का काम करने वाले अपने सनातन धर्म का हमेशा अनुयायी बना रहा।व्रत-त्यौहार दर्शन पूजन के साथ मेरा हमेशा घनिष्ट सम्बंध बना रहा। अपने हिन्दू-धर्म के सारे अनुष्ठानों के साथ मैं पवित्रता-पूर्वक अपने कर्तव्य का निर्वहन करता रहा।
वाराणसी में लोगों का निःशुल्क इलाज करने वाले बीएचयू के जाने-माने कार्डियोथोरेसिक सर्जन पद्मश्री से सम्मानित डॉ. टी.के. लहरी (डॉ तपन कुमार लहरी) सचमुच 'धरती के भगवान' जैसे वह चिकित्सक हैं, जो वर्ष 1994 से ही अपनी पूरी तनख्वाह गरीबों को दान करते रहे हैं। अब रिटायरमेंट के बाद उन्हें जो पेंशन मिलती है, उसमें से उतने ही रुपए लेते हैं, जिससे वह दोनो वक्त की रोटी खा सकें। बाकी राशि बीएचयू कोष में इसलिए छोड़ देते हैं कि उससे वहां के गरीबों का इलाज होता रहे।उन्हें किसी भी दिन वाराणसी के अन्नपूर्णा होटल में पच्चीस रुपए की थाली का खाना खाते हुए देखा जा सकता है। इसके साथ ही वह 75 साल की उम्र में भी बीएचयू में अपनी चिकित्सा सेवा निःशुल्क जारी रखे हुए हैं। डॉ लहरी को आज भी एक हाथ में बैग, दूसरे में काली छतरी लिए हुए पैदल घर या बीएचयू हास्पिटल की ओर जाते हुए देखा जा सकता है। वह इतने स्वाभिमानी और अपने पेशे के प्रति इतने समर्पित रहते है कि कभी उन्होंने बीएचयू के बीमार कुलपति को भी उनके घर जाकर देखने से मना कर दिया था। डॉक्टर लहरी जैसे चिकित्सक को ही भगवान का दर्जा दिया जाता है। तमाम चिकित्सकों को मरीजों के लूटने के किस्से तो आए दिन सुनने को मिलते हैं लेकिन डॉ. लहरी देश के ऐसे डॉक्टर हैं, जो मरीजों का निःशुल्क इलाज करते हैं। अपनी इस सेवा के लिए डॉ. लहरी को भारत सरकार द्वारा वर्ष 2016 में चौथे सर्वश्रेष्ठ नागरिक पुरस्कार 'पद्म श्री' से सम्मानित किया जा चुका है। डॉ लहरी ने सन् 1974 में प्रोफेसर के रूप में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में अपना करियर शुरू किया था और आज भी वह बनारस में किसी देवदूत से कम नहीं हैं। बनारस में उन्हें लोग साक्षात भगवान की तरह जानते-मानते हैं। जिस ख्वाब को संजोकर मदन मोहन मालवीय ने बीएचयू की स्थापना की, उसको डॉ लहरी आज भी जिन्दा रखे हुए हैं। वर्ष 2003 में बीएचयू से रिटायरमेंट के बाद से भी उनका नाता वहां से नहीं टूटा है। आज के भौतिक वादी युग में ज्यादातर डॉक्टर चमक-दमक, ऐशोआराम की जिंदगी जी रहे हैं, लंबी-लंबी मंहगी कारों से चलते हैं,भारी भरकम कमीशन के लिए दवा कंपनियों और पैथालॉजी सेंटरों से सांठ-गांठ करते रहते हैं, वही मेडिकल कॉलेज में तीन दशक तक पढ़ा-लिखाकर सैकड़ों डॉक्टर तैयार करने वाले डॉ लहरी के पास खुद के पास कोई कार नहीं है। उनमें जैसी योग्यता है, उनकी जितनी शोहरत और इज्जत है, अगर वो चाहे तो आलीशान हास्पिटल खोलकर करोड़ों की कमाई कर सकते थे लेकिन वह नौकरी से रिटायर होने के बाद भी स्वयं को मात्र चिकित्सक के रूप में गरीब-असहाय मरीजों का सामान्य सेवक बनाए रखना चाहते हैं। वह आज भी अपने आवास से अस्पताल तक पैदल ही आते जाते हैं। उनकी बदौलत आज लाखों ग़रीब मरीजों का दिल धड़क रहा है, जो पैसे के अभाव में महंगा इलाज कराने में लाचार थे। गंभीर हृदय रोगों का शिकार होकर जब तमाम ग़रीब मौत के मुंह में समा रहे थे, तब डॉ. लहरी ने फरिश्ता बनकर उन्हें बचाया। डॉ लहरी जितने अपने पेशे के साथ प्रतिबद्ध हैं, उतने ही अपने समय के पाबंद भी। आज उनकी उम्र लगभग 75 साल हो चुकी है लेकिन उन्हें देखकर बीएचयू के लोग अपनी घड़ी की सूइयां मिलाते हैं। वे हर रोज नियत समय पर बीएचयू आते हैं और जाते हैं। रिटायर्ड होने के बाद विश्वविद्यालय ने उन्हें इमेरिटस प्रोफेसर का दर्जा दिया था। वह वर्ष 2003 से 2011 तक वहाँ इमेरिटस प्रोफेसर रहे। इसके बाद भी उनकी कर्तव्य निष्ठा को देखते हुए उनकी सेवा इमेरिटस प्रोफेसर के तौर पर अब तक ली जा रही है। जिस दौर में लाशों को भी वेंटीलेटर पर रखकर बिल भुनाने से कई डॉक्टर नहीं चूकते, उस दौर में इस देवतुल्य चिकित्सक की कहानी किसी भी व्यक्ति को श्रद्धानत कर सकती है।
रिटायर्ड होने के बाद भी मरीजों के लिए दिलोजान से लगे रहने वाले डॉ. टीके लहरी को ओपन हार्ट सर्जरी में महारत हासिल है। अमेरिका से डॉक्टरी की पढ़ाई करने के बाद 1974 में वह बीएचयू में 250 रुपए महीने पर लेक्चरर नियुक्त हुए थे। गरीब मरीजों की सेवा के लिए उन्होंने शादी तक नहीं की। सन् 1997 से ही उन्होंने वेतन लेना बंद कर दिया था। उस समय उनकी कुल सैलरी एक लाख रुपए से ऊपर थी। रिटायर होने के बाद जो पीएफ मिला, वह भी उन्होंने बीएचयू के लिए छोड़ दिया। डॉ. लहरी बताते हैं कि रिटायरमेंट के बाद उन्हें अमेरिका के कई बड़े हॉस्पिटल्स से ऑफर मिला, लेकिन वह अपने देश के मरीजों की ही जीवन भर सेवा करने के लिए दृढ़ प्रतिज्ञ हैं। वह प्रतिदिन सुबह छह बजे बीएचयू पहुंच जाते हैं और तीन घंटे ड्यूटी करने के बाद वापस घर लौट आते हैं। इसी तरह हर शाम अपनी ड्यूटी बजाते हैं। इसके बदले वह बीएचयू से आवास के अलावा और कोई सुविधा नहीं लेते हैं और इसलिए ही उनको वाराणसी का महान पुरुष कहते हैं लिए उनके लिए एक सेल्यूट तो बनता ही है #viralpost2025#dspsunilduttdubey#sunilduttdubey#viralreelschallenge#viralphotochallenge#UPPolice#viralreelschallenge#viralvideo #vedioviralreel#virals#viralchallenge#viralvideochallenge#viralreelschallenge2025viralreelschallengejaiviralreelschallengeviralreelschallenge#trendingvideo#trend#varanshi
सर्विस की शुरुआत में प्रयागराज में मुझे भरतीय पुलिस सेवा की IPS अफसर अपर्णा कुमार के साथ काम करने का अवसर मिला। उनके कुशल नेतृत्व क्षमता ईमानदारी एवं साहस को देखते हुए उनको लखनऊ का जॉइंट कमिशनर नियुक्त गया है.. वे लखनऊ कमिशनरेट की पहली महिला जवाइंट CP बनी है हैँ.अपर्णा मैम एक कुशल परिश्रमी व साहसी पुलिस अधिकारी के साथ साथ विश्व की सबसे ऊंची चोटियों को फतह करने वाली पहली भारतीय महिला आईपीएस अधिकारी हैं। उन्होंने सात महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों को फतेह किया है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा मैसूर से पूरी की और बाद में बेंगलुरु के नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) से विधि की डिग्री हासिल की। प्रथम प्रयास में ही यूपीएससी परीक्षा पास करके वे 2002 में आईपीएस बनीं। इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) में डीआईजी के पद पर कार्यरत अपर्णा ने उत्तराखंड जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में रेस्क्यू ऑपरेशंस का नेतृत्व भी किया है।पर्वतारोहण की दुनिया में उनका सफर 2013 से शुरू हुआ, जब उन्होंने लद्दाख की स्टोक कांगड़ी (6,151 मीटर) चोटी फतह की और ऐसा करने वाली पहली आईपीएस अधिकारी बनीं। अपर्णा कुमार ने 2019 में माउंट डेनाली (उत्तर अमेरिका) फतह किया ।2019 में अपर्णा ने दक्षिण ध्रुव तक स्कीइंग करके पहुंचकर एक और कीर्तिमान स्थापित किया। वे पहली भारतीय महिला आईपीएस और ITBP अधिकारी बनीं जो दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचीं। निमोनिया से पीड़ित होने के बावजूद उन्होंने यह चुनौती पूरी की। अपर्णा कुमार को 2018 में एडवेंचर स्पोर्ट्स के क्षेत्र में भारत का सर्वोच्च सम्मान तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवॉर्ड से राष्ट्रपति ने उन्हें सम्मानित किया।उन्होंने विश्व की अनेक चोटियों पर भारतीय तिरंगा लहराया। अब उन के अनुभवों का लाभ लखनऊ की पुलिसिंग में दिखेगा... अपर्णा मैम को नये टास्क के लिये बधाई और शुभकामनायें..
पाकिस्तान की सीमा से लगे पंजाब के फिरोजपुर के छोटे से गांव के एक किसान के 10 वर्ष के बेटे श्रवण कुमार ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सैनिकों को रोज चाय बिस्कुट दूध छाछ घर से ले जाकर उनकी सेवा की और उनकी इस अटूट देशभक्ति के जज्बे को देख कर महामहिम राष्ट्रपति महोदया ने उनको प्रधानमंत्री बाल पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया सेना की बहादुरी पर सवाल उठाने वाले इस बच्चे की देशभक्ति के जज्बे को सलाम करेंगे या नहीं। नन्हे वीर सैनिक श्रवण कुमार को शुभकामनाएं एवं बधाई
यशस्वी मुख्यमंत्री माननीय श्री योगी आदित्यनाथ जी ने लखनऊ स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित दो दिवसीय वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सम्मेलन #पुलिस_मंथन -2025 के द्वितीय दिवस में आज सहभाग किया और प्रदेश के कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारियों एवं जवानों को 'मुख्यमंत्री उत्कृष्ट अलंकरण' से सम्मानित भी किया। इस अवसर पर अधिकारियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के 'स्मार्ट पुलिसिंग' तथा 'विजन 2047-विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत' के लक्ष्य को साकार करने हेतु कैसी आधुनिक, संवेदनशील और प्रभावी पुलिस व्यवस्था चाहिए, इस दिशा में पिछले दो दिनों में तैयार किया गया रोडमैप अत्यंत महत्वपूर्ण है।उन्होंने कहा कि इस मंच को हर वर्ष आयोजित कर इसे स्थाई व्यवस्था बनाना चाहिए
11 सत्रों के माध्यम से लगभग 55 वक्ताओं द्वारा प्रस्तुत विचार, अनुभव और सुझाव उत्तर प्रदेश पुलिस को और अधिक आधुनिक, संवेदनशील, तकनीक-सक्षम एवं जनविश्वास-आधारित बनाने में मील का पत्थर सिद्ध होंगे। मुख्यमंत्री जी ने इस सार्थक आयोजन के लिए पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश समेत सम्मेलन में सहभागी सभी पुलिस कार्मिकों को हार्दिक बधाई दी। #viralpost2025#UPPolice#ipS#dspsunilduttdubey#followersreels#policemonthan#पुलिस _मंथन
भारतीय पुलिस सेवा में पदार्पण करने वाली पुलिस परिवार की बेटी आईपीएस कुहू गर्ग को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई। सुश्री कुहू गर्ग उत्तराखंड के पूर्व पुलिस महानिदेशक आदरणीय IPS अशोक कुमार सर की पुत्री हैं, अशोक कुमार सर ने अपनी सर्विस की शुरुआत प्रयागराज से की थी बाद में प्रदेश के विभाजन होने पर वह उत्तराखंड कैडर में चले गए। कुहू गर्ग की माता आदरणीय अलक नंदा पंतनगर विश्वविद्यालय में डीन के रूप में कार्यरत हैं। कुहू एक अंतर्राष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी थी, जहां उन्होंने प्रतिस्पर्धा, अनुशासन और मजबूत मानसिक लचीलापन का प्रदर्शन किया। परंतु प्रतियोगिता के दौरान आई इंजरी ने उनको खेल से दूर कर दिया और यहीं से उनके करियर में यू टर्न आया और अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन प्लेयर से आईपीएस की उड़ान शुरु की। उन्होंने इस दौरान सिविल सेवा की तैयारी की और वर्ष 2023 में यूपीएससी की परीक्षा में सफलता प्राप्त करके 178 th रैंक हासिल कर आईपीएस बनी खेल, शिक्षा और प्रशासन के अनुभवों से समृद्ध, भारतीय पुलिस सेवा में उनका प्रवेश संतुलित, संवेदनशील और सक्षम नेतृत्व के वादे को दर्शाता है। IPS कुहू गर्ग को इस उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल व प्रभावशाली भविष्य की शुभकामनाएं। बैडमिंटन खिलाड़ी से आईपीएस बनी बेटी कुहू सभी समाज की बेटियों के लिए प्रेरणा स्रोत है
DSP Sunil Dutt Dubey
बचपन से ही मेरा उद्देश्य हमेशा थोड़ा अलग हटकर रहा...जिंदगी जीना स्वयं की निर्धारित शर्तों पर... चाहे परिवार का परिवेश अथवा हॉस्टल की जिंदगी ..... केवल एक ही उद्देश्य.... सामने जरूरतमंद को देखकर उसकी मदद करना ।भले ही कैरियर पर उसका कोई असर पड़ा हो . सिविल सर्विस मुख्य परीक्षा का सुबह पेपर था रात में गर्ल्स हॉस्टल से खबर आई की एक सहपाठिनी की तबीयत खराब हो गई तत्काल लेकर अस्पताल उसके परिजनों के आने का इंतजार करता रहा पेपर खराब हुआ पर कोई अफसोस नहीं... दूसरों की मदद करने के जुनून ने हमें हमेशा एक प्रेरक की तरह गतिशील ही रखा। जनपद इटावा के दस्युग्रस्त बीहड़ में बसे गांव ...जहां पर उस समय...अधिकतर समाज के प्रबुद्ध लोग हमेशा एक दूसरे को उलझाने में ही व्यस्त रहते ...वहां से निकलकर हॉस्टल तक का सफ़र यकीनन आसान तो नही था मेरे लिए। पर वक्त व पारिवारिक पृष्ठभूमि ने कोई रुकावट पैदा नहीं होने दी। पुलिस की सेवा में आने के बाद भी मैंने जनउपयोगी जो भी कार्य किए उसने मुझे समाज में एक प्रसिद्ध तो दिलाई परंतु आलोचकों की एक फौज भी तैयार कर दी ।वक्त को सब कुछ सौंप...मैं कर्म और कर्तव्य के बीच सेतु का काम करने वाले अपने सनातन धर्म का हमेशा अनुयायी बना रहा।व्रत-त्यौहार दर्शन पूजन के साथ मेरा हमेशा घनिष्ट सम्बंध बना रहा। अपने हिन्दू-धर्म के सारे अनुष्ठानों के साथ मैं पवित्रता-पूर्वक अपने कर्तव्य का निर्वहन करता रहा।
6 days ago | [YT] | 66
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DSP Sunil Dutt Dubey
वाराणसी में लोगों का निःशुल्क इलाज करने वाले बीएचयू के जाने-माने कार्डियोथोरेसिक सर्जन पद्मश्री से सम्मानित डॉ. टी.के. लहरी (डॉ तपन कुमार लहरी) सचमुच 'धरती के भगवान' जैसे वह चिकित्सक हैं, जो वर्ष 1994 से ही अपनी पूरी तनख्वाह गरीबों को दान करते रहे हैं। अब रिटायरमेंट के बाद उन्हें जो पेंशन मिलती है, उसमें से उतने ही रुपए लेते हैं, जिससे वह दोनो वक्त की रोटी खा सकें। बाकी राशि बीएचयू कोष में इसलिए छोड़ देते हैं कि उससे वहां के गरीबों का इलाज होता रहे।उन्हें किसी भी दिन वाराणसी के अन्नपूर्णा होटल में पच्चीस रुपए की थाली का खाना खाते हुए देखा जा सकता है। इसके साथ ही वह 75 साल की उम्र में भी बीएचयू में अपनी चिकित्सा सेवा निःशुल्क जारी रखे हुए हैं। डॉ लहरी को आज भी एक हाथ में बैग, दूसरे में काली छतरी लिए हुए पैदल घर या बीएचयू हास्पिटल की ओर जाते हुए देखा जा सकता है। वह इतने स्वाभिमानी और अपने पेशे के प्रति इतने समर्पित रहते है कि कभी उन्होंने बीएचयू के बीमार कुलपति को भी उनके घर जाकर देखने से मना कर दिया था। डॉक्टर लहरी जैसे चिकित्सक को ही भगवान का दर्जा दिया जाता है। तमाम चिकित्सकों को मरीजों के लूटने के किस्से तो आए दिन सुनने को मिलते हैं लेकिन डॉ. लहरी देश के ऐसे डॉक्टर हैं, जो मरीजों का निःशुल्क इलाज करते हैं। अपनी इस सेवा के लिए डॉ. लहरी को भारत सरकार द्वारा वर्ष 2016 में चौथे सर्वश्रेष्ठ नागरिक पुरस्कार 'पद्म श्री' से सम्मानित किया जा चुका है। डॉ लहरी ने सन् 1974 में प्रोफेसर के रूप में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में अपना करियर शुरू किया था और आज भी वह बनारस में किसी देवदूत से कम नहीं हैं। बनारस में उन्हें लोग साक्षात भगवान की तरह जानते-मानते हैं। जिस ख्वाब को संजोकर मदन मोहन मालवीय ने बीएचयू की स्थापना की, उसको डॉ लहरी आज भी जिन्दा रखे हुए हैं।
वर्ष 2003 में बीएचयू से रिटायरमेंट के बाद से भी उनका नाता वहां से नहीं टूटा है। आज के भौतिक वादी युग में ज्यादातर डॉक्टर चमक-दमक, ऐशोआराम की जिंदगी जी रहे हैं, लंबी-लंबी मंहगी कारों से चलते हैं,भारी भरकम कमीशन के लिए दवा कंपनियों और पैथालॉजी सेंटरों से सांठ-गांठ करते रहते हैं, वही मेडिकल कॉलेज में तीन दशक तक पढ़ा-लिखाकर सैकड़ों डॉक्टर तैयार करने वाले डॉ लहरी के पास खुद के पास कोई कार नहीं है। उनमें जैसी योग्यता है, उनकी जितनी शोहरत और इज्जत है, अगर वो चाहे तो आलीशान हास्पिटल खोलकर करोड़ों की कमाई कर सकते थे लेकिन वह नौकरी से रिटायर होने के बाद भी स्वयं को मात्र चिकित्सक के रूप में गरीब-असहाय मरीजों का सामान्य सेवक बनाए रखना चाहते हैं। वह आज भी अपने आवास से अस्पताल तक पैदल ही आते जाते हैं। उनकी बदौलत आज लाखों ग़रीब मरीजों का दिल धड़क रहा है, जो पैसे के अभाव में महंगा इलाज कराने में लाचार थे। गंभीर हृदय रोगों का शिकार होकर जब तमाम ग़रीब मौत के मुंह में समा रहे थे, तब डॉ. लहरी ने फरिश्ता बनकर उन्हें बचाया।
डॉ लहरी जितने अपने पेशे के साथ प्रतिबद्ध हैं, उतने ही अपने समय के पाबंद भी। आज उनकी उम्र लगभग 75 साल हो चुकी है लेकिन उन्हें देखकर बीएचयू के लोग अपनी घड़ी की सूइयां मिलाते हैं। वे हर रोज नियत समय पर बीएचयू आते हैं और जाते हैं। रिटायर्ड होने के बाद विश्वविद्यालय ने उन्हें इमेरिटस प्रोफेसर का दर्जा दिया था। वह वर्ष 2003 से 2011 तक वहाँ इमेरिटस प्रोफेसर रहे। इसके बाद भी उनकी कर्तव्य निष्ठा को देखते हुए उनकी सेवा इमेरिटस प्रोफेसर के तौर पर अब तक ली जा रही है। जिस दौर में लाशों को भी वेंटीलेटर पर रखकर बिल भुनाने से कई डॉक्टर नहीं चूकते, उस दौर में इस देवतुल्य चिकित्सक की कहानी किसी भी व्यक्ति को श्रद्धानत कर सकती है।
रिटायर्ड होने के बाद भी मरीजों के लिए दिलोजान से लगे रहने वाले डॉ. टीके लहरी को ओपन हार्ट सर्जरी में महारत हासिल है। अमेरिका से डॉक्टरी की पढ़ाई करने के बाद 1974 में वह बीएचयू में 250 रुपए महीने पर लेक्चरर नियुक्त हुए थे। गरीब मरीजों की सेवा के लिए उन्होंने शादी तक नहीं की। सन् 1997 से ही उन्होंने वेतन लेना बंद कर दिया था। उस समय उनकी कुल सैलरी एक लाख रुपए से ऊपर थी। रिटायर होने के बाद जो पीएफ मिला, वह भी उन्होंने बीएचयू के लिए छोड़ दिया। डॉ. लहरी बताते हैं कि रिटायरमेंट के बाद उन्हें अमेरिका के कई बड़े हॉस्पिटल्स से ऑफर मिला, लेकिन वह अपने देश के मरीजों की ही जीवन भर सेवा करने के लिए दृढ़ प्रतिज्ञ हैं। वह प्रतिदिन सुबह छह बजे बीएचयू पहुंच जाते हैं और तीन घंटे ड्यूटी करने के बाद वापस घर लौट आते हैं। इसी तरह हर शाम अपनी ड्यूटी बजाते हैं। इसके बदले वह बीएचयू से आवास के अलावा और कोई सुविधा नहीं लेते हैं और इसलिए ही उनको वाराणसी का महान पुरुष कहते हैं
लिए उनके लिए एक सेल्यूट तो बनता ही है
#viralpost2025 #dspsunilduttdubey #sunilduttdubey #viralreelschallenge #viralphotochallenge #UPPolice #viralreelschallenge #viralvideo
#vedioviralreel #virals #viralchallenge #viralvideochallenge #viralreelschallenge2025viralreelschallengejaiviralreelschallengeviralreelschallenge #trendingvideo #trend #varanshi
1 week ago | [YT] | 43
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DSP Sunil Dutt Dubey
लखनऊ कमिश्नरेट के 6वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित ‘बड़ा खाना’ में डीजीपी सर श्री राजीव कृष्ण ने स्वयं पुलिसिंग की रीढ़ आरक्षी गण को खाना परोसा और उनसे हैं—को भोजन परोसना एवं उनसे संवाद किया और इसको आत्मीयता और संतुष्टि का क्षण बताया।
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1 week ago | [YT] | 59
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DSP Sunil Dutt Dubey
सर्विस की शुरुआत में प्रयागराज में मुझे भरतीय पुलिस सेवा की IPS अफसर अपर्णा कुमार के साथ काम करने का अवसर मिला। उनके कुशल नेतृत्व क्षमता ईमानदारी एवं साहस को देखते हुए उनको लखनऊ का जॉइंट कमिशनर नियुक्त गया है.. वे लखनऊ कमिशनरेट की पहली महिला जवाइंट CP बनी है हैँ.अपर्णा मैम एक कुशल परिश्रमी व साहसी पुलिस अधिकारी के साथ साथ विश्व की सबसे ऊंची चोटियों को फतह करने वाली पहली भारतीय महिला आईपीएस अधिकारी हैं। उन्होंने सात महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों को फतेह किया है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा मैसूर से पूरी की और बाद में बेंगलुरु के नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) से विधि की डिग्री हासिल की। प्रथम प्रयास में ही यूपीएससी परीक्षा पास करके वे 2002 में आईपीएस बनीं। इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) में डीआईजी के पद पर कार्यरत अपर्णा ने उत्तराखंड जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में रेस्क्यू ऑपरेशंस का नेतृत्व भी किया है।पर्वतारोहण की दुनिया में उनका सफर 2013 से शुरू हुआ, जब उन्होंने लद्दाख की स्टोक कांगड़ी (6,151 मीटर) चोटी फतह की और ऐसा करने वाली पहली आईपीएस अधिकारी बनीं। अपर्णा कुमार ने 2019 में माउंट डेनाली (उत्तर अमेरिका) फतह किया ।2019 में अपर्णा ने दक्षिण ध्रुव तक स्कीइंग करके पहुंचकर एक और कीर्तिमान स्थापित किया। वे पहली भारतीय महिला आईपीएस और ITBP अधिकारी बनीं जो दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचीं। निमोनिया से पीड़ित होने के बावजूद उन्होंने यह चुनौती पूरी की। अपर्णा कुमार को 2018 में एडवेंचर स्पोर्ट्स के क्षेत्र में भारत का सर्वोच्च सम्मान तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवॉर्ड से राष्ट्रपति ने उन्हें सम्मानित किया।उन्होंने विश्व की अनेक चोटियों पर भारतीय तिरंगा लहराया। अब उन के अनुभवों का लाभ लखनऊ की पुलिसिंग में दिखेगा...
अपर्णा मैम को नये टास्क के लिये बधाई और शुभकामनायें..
2 weeks ago | [YT] | 53
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DSP Sunil Dutt Dubey
पाकिस्तान की सीमा से लगे पंजाब के फिरोजपुर के छोटे से गांव के एक किसान के 10 वर्ष के बेटे श्रवण कुमार ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सैनिकों को रोज चाय बिस्कुट दूध छाछ घर से ले जाकर उनकी सेवा की और उनकी इस अटूट देशभक्ति के जज्बे को देख कर महामहिम राष्ट्रपति महोदया ने उनको प्रधानमंत्री बाल पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया सेना की बहादुरी पर सवाल उठाने वाले इस बच्चे की देशभक्ति के जज्बे को सलाम करेंगे या नहीं। नन्हे वीर सैनिक श्रवण कुमार को शुभकामनाएं एवं बधाई
3 weeks ago | [YT] | 37
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DSP Sunil Dutt Dubey
यशस्वी मुख्यमंत्री माननीय श्री योगी आदित्यनाथ जी ने लखनऊ स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित दो दिवसीय वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सम्मेलन #पुलिस_मंथन -2025 के द्वितीय दिवस में आज सहभाग किया और प्रदेश के कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारियों एवं जवानों को 'मुख्यमंत्री उत्कृष्ट अलंकरण' से सम्मानित भी किया।
इस अवसर पर अधिकारियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के 'स्मार्ट पुलिसिंग' तथा 'विजन 2047-विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत' के लक्ष्य को साकार करने हेतु कैसी आधुनिक, संवेदनशील और प्रभावी पुलिस व्यवस्था चाहिए, इस दिशा में पिछले दो दिनों में तैयार किया गया रोडमैप अत्यंत महत्वपूर्ण है।उन्होंने कहा कि इस मंच को हर वर्ष आयोजित कर इसे स्थाई व्यवस्था बनाना चाहिए
11 सत्रों के माध्यम से लगभग 55 वक्ताओं द्वारा प्रस्तुत विचार, अनुभव और सुझाव उत्तर प्रदेश पुलिस को और अधिक आधुनिक, संवेदनशील, तकनीक-सक्षम एवं जनविश्वास-आधारित बनाने में मील का पत्थर सिद्ध होंगे।
मुख्यमंत्री जी ने इस सार्थक आयोजन के लिए पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश समेत सम्मेलन में सहभागी सभी पुलिस कार्मिकों को हार्दिक बधाई दी।
#viralpost2025 #UPPolice #ipS #dspsunilduttdubey #followersreels #policemonthan #पुलिस _मंथन
3 weeks ago | [YT] | 14
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DSP Sunil Dutt Dubey
राजस्थान प्रांत के मूल निवासी यूपी कैडर के आईपीएस एवं वर्तमान में संभल जैसे संवेदनशील जनपद के पुलिस अधीक्षक श्री श्रीकृष्ण बिश्नोई सर के साथ गोरखपुर में मुझे कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ था गोरखपुर में एसपी सिटी के रूप में उनकी पहली पोस्टिंग हुई थी अपने कुशल नेतृत्व के बल पर कार्य करने की क्षमता से भी अधिक अपने अधीनस्थों से कार्य लेने वाले व पुलिस को सक्षम व्यवहार कुशल जन उपयोगी बनाने वाले व्यक्तित्व को आज माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा सम्मानित किए जाने पर हम सभी गौरवान्वित हैं।सर को अनंत शुभकामनाएं व हार्दिक बधाई।भगवान उनकी सफलता की राहे आसान करें।
#dspsunilduttdubey #viralreelschallenge2025viralreelschallengejaiviralreelschallengeviralreelschallengechallenge #prayagraj_official #followersreels #UPPolice #everyonefollowers #sambhalnews #SambhalPolice
3 weeks ago | [YT] | 72
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DSP Sunil Dutt Dubey
मेरी डोक्युमेंटरी का भक्ति गीत रिलीज हो गया है
1 month ago | [YT] | 2
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DSP Sunil Dutt Dubey
भारतीय पुलिस सेवा में पदार्पण करने वाली पुलिस परिवार की बेटी आईपीएस कुहू गर्ग को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई। सुश्री कुहू गर्ग उत्तराखंड के पूर्व पुलिस महानिदेशक आदरणीय IPS अशोक कुमार सर की पुत्री हैं, अशोक कुमार सर ने अपनी सर्विस की शुरुआत प्रयागराज से की थी बाद में प्रदेश के विभाजन होने पर वह उत्तराखंड कैडर में चले गए। कुहू गर्ग की माता आदरणीय अलक नंदा पंतनगर विश्वविद्यालय में डीन के रूप में कार्यरत हैं। कुहू एक अंतर्राष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी थी, जहां उन्होंने प्रतिस्पर्धा, अनुशासन और मजबूत मानसिक लचीलापन का प्रदर्शन किया। परंतु प्रतियोगिता के दौरान आई इंजरी ने उनको खेल से दूर कर दिया और यहीं से उनके करियर में यू टर्न आया और अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन प्लेयर से आईपीएस की उड़ान शुरु की। उन्होंने इस दौरान सिविल सेवा की तैयारी की और वर्ष 2023 में यूपीएससी की परीक्षा में सफलता प्राप्त करके 178 th रैंक हासिल कर आईपीएस बनी खेल, शिक्षा और प्रशासन के अनुभवों से समृद्ध, भारतीय पुलिस सेवा में उनका प्रवेश संतुलित, संवेदनशील और सक्षम नेतृत्व के वादे को दर्शाता है।
IPS कुहू गर्ग को इस उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल व प्रभावशाली भविष्य की शुभकामनाएं। बैडमिंटन खिलाड़ी से आईपीएस बनी बेटी कुहू सभी समाज की बेटियों के लिए प्रेरणा स्रोत है
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1 month ago | [YT] | 59
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DSP Sunil Dutt Dubey
सौ किस्से हैं मिलते-जुलते
एक मज़बूरी ठीक नहीं,
जो कहना है खुल के कह दे
यूँ बात अधूरी ठीक नहीं....
कोई हल कोई बहाना
कोई मुंसिब राह निकाल,
मुझसे ऐसे मिलते रहना
ग़ैर ज़रूरी ठीक नहीं.....
रोज़ मोहब्बत हो जाती है
चलते-फिरते लोंगों से,
गीत अधूरे ख़्वाब अधूरे
ये मज़दूरी ठीक नहीं.....
एक शिकस्त के बदले मुझको
सब-के-सब ईल्ज़ाम न दे,
कुछ-कुछ तेरी सच हैं बातें
लेकिन पूरी ठीक नहीं......
हर महफ़िल में आए जब
वो पीछे जाके बैठ गए,
हमसे दूरी अच्छी है पर
यूँ
इतनी
दूरी
ठीक
नहीं...
1 month ago | [YT] | 65
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