यूपी के जनपद मऊ के घोसी थाने की जीप को डीसीएम द्वारा बनिया पार तिराहे पर टक्कर मारने के कारण मुख्य आरक्षी चालक पवन कुमार यादव की दुखद मृत्यु व SI विनोद कुमार सिंह ,HC प्रीतम कुमार यादव व पीआरडी ओमप्रकाश के गंभीर रूप से घायल होने पर पुलिस विभाग दुखी है।सभी घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हैं। दिवंगत आत्मा को विनम्र श्रद्धांजलि एवं भगवान से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दे और परिवार को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करे ॐ शांति शांति शांति #UPPolice#maupolice#maunews
बचपन से ही मेरा उद्देश्य हमेशा थोड़ा अलग हटकर रहा...जिंदगी जीना स्वयं की निर्धारित शर्तों पर... चाहे परिवार का परिवेश अथवा हॉस्टल की जिंदगी ..... केवल एक ही उद्देश्य.... सामने जरूरतमंद को देखकर उसकी मदद करना ।भले ही कैरियर पर उसका कोई असर पड़ा हो . सिविल सर्विस मुख्य परीक्षा का सुबह पेपर था रात में गर्ल्स हॉस्टल से खबर आई की एक सहपाठिनी की तबीयत खराब हो गई तत्काल लेकर अस्पताल उसके परिजनों के आने का इंतजार करता रहा पेपर खराब हुआ पर कोई अफसोस नहीं... दूसरों की मदद करने के जुनून ने हमें हमेशा एक प्रेरक की तरह गतिशील ही रखा। जनपद इटावा के दस्युग्रस्त बीहड़ में बसे गांव ...जहां पर उस समय...अधिकतर समाज के प्रबुद्ध लोग हमेशा एक दूसरे को उलझाने में ही व्यस्त रहते ...वहां से निकलकर हॉस्टल तक का सफ़र यकीनन आसान तो नही था मेरे लिए। पर वक्त व पारिवारिक पृष्ठभूमि ने कोई रुकावट पैदा नहीं होने दी। पुलिस की सेवा में आने के बाद भी मैंने जनउपयोगी जो भी कार्य किए उसने मुझे समाज में एक प्रसिद्ध तो दिलाई परंतु आलोचकों की एक फौज भी तैयार कर दी जहां मेरी छोटी सी कमी भी दिखती है तो आलोचक आलोचना करने से बाज नहीं आते हैं पहले तो आश्चर्य होता था कि फला व्यक्ति मेरे पीछे क्यों पड़ा है पर अब समझ में आ गया कि अगर आप उन्नति के शिखर पर पहुंच गए तो आलोचक अपने आप पैदा हो जाएंगे। इस वक्त मेरे करीब डेढ़ करोड़ फॉलोअर्स है जो मुझे दिल से चाहते हैं जिनके मैं दिल में हूं और करीब इतने ही मेरे आलोचक भी होंगे जिनके में दिमाग में हूं इस तरह से मैं 3 करोड लोगों के दिलों दिमाग में बसा हूं यही मेरे लिए गौरव की बात है वक्त को सब कुछ सौंप...मैं कर्म और कर्तव्य के बीच सेतु का काम करने वाले अपने सनातन धर्म का हमेशा अनुयायी बना रहा।व्रत-त्यौहार दर्शन पूजन के साथ मेरा हमेशा घनिष्ट सम्बंध बना रहा। अपने हिन्दू-धर्म के सारे अनुष्ठानों के साथ मैं पवित्रता-पूर्वक अपने कर्तव्यों का निर्वहन करता रहा। पिक्चर वाराणसी में नियुक्ति के दौरान ली गई है।
आप कितने भी अच्छे कार्य कर लें पर फिर भी पुलिस के प्रति आमजन के सीने में जो नफरत भर दी गई है उसको कम करना मुश्किल ही नहीं असंभव है क्योंकि पुलिस एक बहुत बड़ा संगठन है और इस संगठन में समाज से ही लोग आते हैं समाज में नैतिकता का अभाव है लोग संस्कार पाने के लिए नहीं नौकरी पाने के लिए शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं डिग्रियों का अम्बार लगा हुआ है पर ज्ञान की निरंतर कमी होती जा गई होती जा रही। डिग्री लेकर नौकरी तो पा जा रहे हैं पर संवेदनशीलता और नैतिकता कहां से आएगी जब उन्होंने उसको सीखा ही नहीं है। भ्रष्टाचार रिश्वतखोरी काम चोरी और असंवेदनशीलता कोई विभाग नहीं सिखाता है न हीं किसी ट्रेनिंग में इसका प्रशिक्षण दिया जाता है यह आपके मां-बाप व गुरु के ही आपको सिखा सकते हैं और ऐसे ही संस्कार विहीन नैतिकता बिन संवेदनशील व्यक्ति पुलिस में आ जाते हैं तो वह पुलिस के लिए एक कोढ़ बन जाते हैं एक उदाहरण बन जाते हैं उनकी वजह से पूरे पुलिस संगठन को जो नफरत का सैलाब झेलना पड़ता है वह बहुत ही कष्ट दायक है और पुलिस में जो अच्छे लोग भी आ जाते हैं तो पुलिस के कार्य ऐसे हैं जो आपको सही काम करते हुए भी प्रशंसा का पात्र नहीं बना सकते हैं क्यो कि इस समाज में प्रत्येक व्यक्ति चाहता है कि उसके हिसाब से कानून बने उसके लाभ के लिए योजनाएं बने और वह जो कह रहा है उसको जो अच्छा लग रहा है वही प्रशासन करें पर पुलिस हर मर्ज की दवा नहीं हो सकती है और उम्मीद पर किसी भी देश की पुलिस खरा नहीं उतर सकती है मैंने अक्सर महसूस किया है की जनसुनवाई में इस तरह के प्रकरण आ जाते हैं इसके समाधान के लिए अगर ब्रह्मा विष्णु महेश के रूप में भगवान भी उतर आए तो भी उन समस्याओं का समाधान उनके बस में नहीं है समाज रुपी समंदर में अगर हम प्रशंसा की मछली ढूंढना चाहते हैं तो आप भ्रम में है क्योंकि यहां लोग तो भगवान के पास भी मिठाई इस आशा में लेकर जाते हैं कि उनसे कुछ मांग लेंगे। गंगा में पाप धुलने के लिए जाते हैं पर गंगा में नहाकर पुनः पाप करने लगते हैं कुछ लोग तो गंगा के तट पर ही शिकार ढूंढने लगते हैं अगर हम इस समाज के लिए अपनी जान निकल कर भी दे देंगे तो वह लोग तब भी मेरी प्रशंसा नहीं करेंगे बल्कि मुझे आर्गन डोनेशन समझ कर मेरी किडनी को बेचकर उसे पैसा कमा लेंगे और फिर इंतजार करेंगे कि यह पुलिस वाले मुझे अपनी दूसरी किडनी भी कब भेंट करेगें जनता से प्रशंसा की उम्मीद करना इस तरह से है जैसे किसी हलवाई से उम्मीद कि वो अपनी दुकान पर 'शुगर-फ्री' लड्डू बेचेगा। या कोई मधुमक्खी आपको काटने के बाद आपसे सॉरी बोलेगी तो हमेशा अलर्ट रहिए जो लोग आज आपको सिंघम और नायक बना रहे हैं वो ही आपकी एक छोटी सी गलती के कारण आपको खलनायक बनाने में कोई कोर कसर नहीं रखेंगे इसलिए कोई अगर आपकी आरती भी उतारे तो देख लीजिए कहीं वह यह तो नहीं देखना चाहता है कि आपके गले में सोने की चेन तो नहीं है। अगर आपने कोई अच्छा सा घर बनवा लिया कोई अच्छी सी गाड़ी खरीद ली या कहीं अपनी पैतृक संपत्ति से कोई व्यवसाय कर लिया तो वह आपकी हैसियत को नहीं समझेंगे उसको रिश्वत का माल समझेंगे। अगर आपने किसी को अपने घर में निमंत्रण खाने के लिए या प्रेम या अपना समझ कर बुला भी लिया तो बाहर जाकर वह यही कहेगा कि पर्दे कितने महंगे थे फर्नीचर कितना शानदार था बाथरूम कितना आलीशान था। और वह आपकी मेहनत आपकी हैसियत अथवा आपकी पैतृक पृष्ठभूमि नहीं देखेगा वह उसको रिश्वत का माल समझेगा इसलिए इन सब चीजों से घबराने की आवश्यकता नहीं है यह समाज है इसके लिए आप कुछ भी करें समाज से आपको कुछ मिलने वाला नहीं है अगर विश्वास ना हो तो इसी मेरी पोस्ट पर लोगों के कमेंट पढ़ सकते हैं। कुछ बस पूर्व मेरी आज तक चैनल की मशहूर एंकर व उप संपादक श्रीमती श्वेता सिंह से विचारों का आदान-प्रदान हुआ था और यह तस्वीर उसी समय की है। #trendingreels#ips#UPPolice Sunil Dutt Dubey Aaj Tak UP Police Harish Singh #viralpost#ancor#shwetasingh#NewsUpdate#dspsunilduttdubey#trend#vedioviralreel#trendingvideo
जनपद महाराजगंज के घुघली थाने के लग्नशील, अनुशासनप्रिय और कर्मठ दीवान जी (हेड कांस्टेबल) सुरेन्द्र शर्मा को प्रोन्नति पाकर दरोगा (सब इंस्पेक्टर) बनने पर हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं।
मध्य प्रदेश के मुरेना की रहने वाली कक्षा 12 में प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली श्रुति तोमर की कहानी सुनकर आपकी आंखें नम हो जाएंगी पर यह अनेकों छात्र-छात्राओं के लिए एक प्रेरणादायक घटना है श्रुति तोमर के चाचा का एक्सीडेंट हुआ और श्रुति के पिता जी दिल्ली में अस्पताल में भर्ती अपने भाई को देखने के लिए जा रहे थे तभी रास्ते में एक भयंकर दुर्घटना ने काल के क्रूर हाथों ने उनको छीन लिया। श्रुति तोमर की मां अपने जीवन में आये अचानक इस अपार दुख को सहन नहीं कर सकी और शव को देखते ही कार्डियक अटैक से उनकी भी मृत्यु हो गई श्रुति तोमर की जिंदगी का एक मात्र सहारा उसकी दादी ही बची थी जिन्हे वक्त ने इतना बड़ा दर्द दिया था जो कभी कम नहीं हो सकता था पर श्रुति ने साहस और मेहनत से वो सफलता पाई है जिसकी कल्पना किसी ने नही की थी श्रुति के माता पिता भी स्वर्ग से देख रहे होंगे तो ईश्वर से यही कह रहे होंगे कि एक पल के लिए बेटी से मिलकर आने की अनुमति दे दो। आज भी दादी की आंखों में आंसू है पर वह दुख के नहीं खुशी के आंसू है। बेटी श्रुति तोमर को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं और दिल से आशीर्वाद। #toppers#highersecondaryschool#mp#morena#viralreelschallenge#shrutitomar#topper
हमारे परम प्रिय अधिकारी जिनका स्नेह हमेशा हमारे साथ रहा है श्री ज्ञान प्रकाश राय सर को अपर पुलिस अधीक्षक फतेहपुर बनने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। UP Police Prayagraj Sunil Dutt Dubey Gyan Prakash Rai Pro Cell Fatehpur #UPPolice#trend#viralreels
बरेली जिला पुलिस ने बरिषठ पुलिस अधीक्षक बरेली द्वारा थाना इंचार्जो के कार्य क्षेत्र में परिवर्तन किया गया है। अच्छी परफॉर्मेंस न देने वाले थाना प्रभारी कम महत्व के स्थानों पर भेजे गये है।
इच्छामृत्यु राणा की खामोश होती सांसें, बेटे को जाते देख टूट रहा पिता का दिल, थम नहीं रहे परिजनों के आंसू। परिवार की बेबसी और उम्मीद की एक ऐसी कहानी का अंत हो गया। यह सिर्फ एक मरीज की कहानी नहीं, बल्कि परिवार की लंबी जद्दोजहद, विज्ञान की सीमाओं और मौत के बाद भी जिंदा रहने वाली उम्मीद की कहानी है। हरीश के माता-पिता ने सालों तक इंतजार किया, लेकिन अब वे भी मान चुके हैं कि यह उनके बेटे के लिए बेहतर है। डॉक्टरों की टीम आखिरी पलों को आसान बनाने में जुटी है। गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा पंजाब यूनिवर्सिटी का टापर था 18 साल की उम्र में हास्टल की छत से गिरने के कारण कामा में चला गया था आज हरीश राणा ने एम्स में अंतिम सांस ली है। भारत में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति पाने वाले पहले व्यक्ति हरीश राणा का मंगलवार को एम्स-दिल्ली में 13 साल से अधिक समय तक कोमा में रहने के बाद निधन हो गया। हरीश राणा की उम्र 31 साल थी। वह 13 साल से कोमा में थे। सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को इच्छामृत्यु की इजाजत दी थी। हरीश राणा को एम्स में पैसिव यूथेनेशिया दिया गया। इस प्रक्रिया का मतलब होता है कि किसी गंभीर रूप से बीमार मरीज को जिंदा रखने के लिए जो बाहरी लाइफ सपोर्ट या इलाज दिया जा रहा है, उसे रोक दिया जाए या हटा लिया जाए, ताकि मरीज की नेचुरल डेथ हो सके। एम्स के इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर अस्पताल (आईआरसीएच) के पैलिएटिव केयर वार्ड में भर्ती गाजियाबाद के हरीश राणा ने आखिरकार दुनिया को अलविदा कह दिया।
यूपीएससी अथवा यूपीपीसीएस में सम्मिलित होने वाले प्रतियोगी छात्र छात्राओं के लिए पुलिस विभाग यानी आईपीएस या पीपीएस सेकंड चॉइस होती थी। पर अब बहुत सारे प्रतियोगी छात्र पुलिस को काफी नीचे रख रहे हैं और अक्सर यह कहा जा रहा है की अगर किसी के पास कोई विकल्प है तो वह पुलिस सेवा का चयन नहीं करना चाहता है और वेहतर विकल्प मिलने पर लोग पुलिस की नौकरी छोड़ रहे हैं — यह एक कड़वी सच्चाई है और इसके पीछे पुलिस की बदलती कार्यप्रणाली है पर उनकी अंतरात्मा के दुखों को सुनने वाला कोई नहीं है आज देशभर के थानों में पुलिस कर्मचारियों के मन में बढ़ती थकान, बेबसी और मोहभंग पर कोई चर्चा नहीं करना चाहता है पुलिस के बारे में अगर चर्चा होती है तो यही कि पुलिस भ्रष्ट है पुलिस कार्य नहीं कर रही है पुलिस किसी की सुनती नहीं है और पुलिस हर व्यक्ति के लिए एक जादू की छड़ी बन गयी है और पुलिस कर्मी अपनी नौकरियां छोड़ रहे या अपने बच्चो को अब पुलिस सेवा आने देना नही चाहते हैं पर ऐसा क्यों हो रहा है? इसको सोचने की किसी ने जरूरी ही नहीं समझा क्योंकि समाज में सरकारी नौकरी हर किसी को चाहिए चाहे वह उसके योग्य हो अथवा न हो पर अगर अच्छे लोग पुलिस में नहीं आएंगे तो धीरे-धीरे पुलिस विभाग में गिरावट आ जाएगी पुलिस में आने वालों में कमी नहीं दिखाई पड़ेगी पर अच्छे लोग दिखाई नहीं देंगे पुलिस के थाने अथवा पुलिस कार्यालय के चारों तरफ नौकरशाही का जाल फैल गया है पुलिस का कार्य जानमाल की सुरक्षा करना होता था पर अब जान माल की सुरक्षा के साथ-साथ पुलिस का कार्य रिपोर्ट तैयार करना फॉर्म भरना और दुनिया भर के डाटाअपलोड करना बन गया है। पूरे दिन फोटो भेजना प्रमाण पत्र देना रिपोर्ट अपलोड करना ” ई- साक्ष्य अपलोड, ऑनलाइन सीडी ,सीसीटीएनएस अपडेशन,ITSSO, eDAR अपलोड रोजमर्रा का कार्य है अब फील्ड में उनकी उपस्थिति उतनी नहीं हो पाती है जितनी स्क्रीन के सामने होती है पुलिस बेसिक पुलिसिंग से हटकर तकनीक पर अत्यधिक निर्भर होती जा रही है हर कार्य में डिजिटल टूल, ऐप्स और स्मार्ट बोर्ड थोपे जा रहे हैं।विषय, कार्य स्थल की परिस्थितियां, सामाजिक संस्कृति, क्षेत्रीय विषमताएं या संदर्भ को बिना समझे आदेश दिए जाते हैं पुलिस कार्य प्रणाली से मानवीय स्पर्श, मूलभूत कार्य अब गायब हो गया है; पुलिस अब मशीन-केंद्रित बन गई है। फील्ड के सीओ इंस्पेक्टर व सब इंस्पेक्टर से लेकर बीट कांस्टेबल अपराधों के अनावरण में बेसिक पुलिसिंग से दूर होकर तकनीक पर निर्भर हो गए हैं सीसीटीवी कैमरा मोबाइल के सीडीआर अगर उपलब्ध नहीं है तो पुलिस के लिए कोई भी केस का अनावरण एक टेढ़ी खीर हो गया है इसके अतिरिक्त पुलिस को अब एक इवेंट मैनेजर की तरह कार्य भी करना पड़ रहा है हर दिन कोई न कोई दिवस मनाना होता है जैसे योग दिवस, राष्ट्रीय एकता दिवस मातृभाषा दिवस, पर्यावरण दिवस आदि और धीरे अब पुलिस में गुणवत्ता नहीं, बल्कि कार्यक्रमों की संख्या और दिखावा ही सफलता का पैमाना बनता जा रहा है पुलिस अधिकारी और कर्मचारी दोनों इस प्रदर्शन संस्कृति के जाल में फंसे हुए हैं। लोगों को जान माल की सुरक्षा के साथ-साथ उन्हे विद्यालयों में आत्म रक्षा प्रशिक्षण, शक्ति मिशन साइबर सुरक्षा अभियान, पॉक्सो एक्ट की जानकारी देना, ऑपरेशन गरिमा, सीएलजी मीटिंग्स, सुरक्षा सखी, ग्राम रक्षा दल, ट्रांसजेंडर लोगो के सम्मेलन करवाने के अलावा भिक्षा वृत्ति उन्मूलन, सड़क सुरक्षा, त्रिनेत्र अभियान कमांड कैमरों की निगरानी करनी पड़ती है। पुलिस को यह बताना है कि आप खुली लावारिस गाड़ी पार्क ना करें सीसीटीवी कैमरा लगवाएं घर को अकेला ना छोड़े किसी पुलिस अधिकारी के नाम से कॉल आने पर उसको पैसा ट्रांसफर ना करें किसी लालच में ना पड़े किसी साइबर अपराधी की कॉल को भली बात चेक कर लें एपीके फाइल डाउनलोड ना करें नौकरी दिलाने के नाम पर किसी को पैसा ना दें। हेलमेट लगाकर चले सीट बेल्ट लगाए ओवरलोडिंग ना करें वाहनो में ज्यादा सवारी ना बैठाये यातायात के नियमों का पालन करे यही सब सलाह देने में पुलिस का आधा समय नष्ट हो जा रहा है और लगातार फिल्मों से सोशल मीडिया पर हो रही आलोचनाओं ने पुलिस कर्मियों का आत्मविश्वास तोड़ दिया है। कहीं भी किसी भी जगह कोई पुलिसकर्मी घूस लेते रिश्वत लेते पकड़ा जाता है तो सोशल मीडिया पर इस तरह की पोस्ट डाली जाती है जैसे लगता है कि पूरा पुलिस विभाग ही भ्रष्ट है जबकि उसको पुलिस विभाग के लोग ही पकडते हैं और यह कोशिश करते हैं कि विभाग में एक संदेश जाए पर किसी अच्छे कार्य को कभी भी किसी सोशल मीडिया पर किसी के द्वारा दिखाया गया हो यह बहुत कम है अच्छे और मानवीय कार्यों को स्वयं ही दिखाना पड़ता है पहले पुलिस के सिपाही एक विश्वसनीय साक्षय होते थे कहा जाता था कि मेरी ना मानो तो सिपहिया से पूछो पर अब तो हर काम का सबूत मांगा जाता है —पुलिस का विश्वास समाप्त हो गया है।तनाव और व्यवहारिक समस्याओं से जूझते-जूझते पुलिस कर्मी भावनात्मक रूप से थक चुके हैं।माता-पिता, परिवार की परवरिश तो दूर मिलने का भी संकट रहता है,सामाजिक कार्यक्रमों में उपस्थिति तो हो ही नहीं पाती है और इसके बावजूद इन सभी की अवास्तविक अपेक्षाएं जिससे हर समय मानसिक दबाव झेलना पड़ता है। भले ही कहा जाता है कि आंकड़े का कोई महत्व नहीं है पर सच यह है कि थाना पर आंकड़े पूरा करने का भारी दबाव रहता है। अपराध के पंजीकरण को बहुत ही सरल बना दिया गया है पर आंकड़े लेकर हर व्यक्ति पुलिस विभाग के पीछे पड़ा हुआ है कोई भी अपराध होने पर संबंधित पुलिस अधिकारी पर इतना दबाव रहता है जैसे लगता है कि उसी ने ही अपराध किया हो अगर फिर ना लिखें तो बवाल फर्जी लिख जाए तो बवाल पुलिस की नौकरी साधारण नौकर एक दुधारू तलवार पर चलने जैसी हो गई है जिसमें तलवार की धार पर चलना भी और कटने से बचाना भी है अनर्गल कार्यों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, चाहे उसकी जरूरत हो या नहीं, चाहे वे पुलिस से संबंधित है या नहीं। बाढ़ आ गई है नहर की पुलिया टूट गई है बिजली नहीं आ रही है लोगों ने अतिक्रमण कर रखा है तेंदुआ गांव में घुस आया है जाम लगा है हर कार्य में पुलिस की उपस्थिति अनिवार्य हो गई है बारात जा रही है सड़क जाम है पुलिस को ही आकर बताना है कि भैय्या बारात किनारे से ले जाएं पुलिस विभाग से अब समाज कल्याण विभाग के कार्य कराये जाने की अपेक्षा सभी ने पाल रखी है। पुलिस की दुखती रग पर कोई हाथ नहीं रखना चाह रहा है बस सभी को पुलिस भ्रष्ट बेईमान अकर्मण्य निकम्मी दिखाई पड़ रही है पुलिस हर व्यक्ति के लिए एक जादू की छड़ी बनी हुई है पति पत्नी का झगड़ा हो शिक्षित युवा लडकी अपनी मर्जी से अपने दोस्त के साथ घर से चली जाएगी पर ढूंढना पुलिस को ही है सड़क पर दुर्घटना हो जाए भीड़ इकट्ठी हो वीडियो बना रहे हैं पर घायलों को अस्पताल भिजवाना तो पुलिस का काम है अगर पुलिस देर से पहुंचे तो आक्रोश पुलिस कोई झेलना पड़ता है भले ही उसकी सूचना देर से मिली हो कोहरे में बसे लड़ जाए पर पुलिस दिल से पहुंची तो सोशल मीडिया पर पुलिस सबको खलनायक लगने लगती है जैसे लगता है कि कोहरे में पुलिस की आंखों में कोई ऐसा लेंस लगा है जो विजिबिलिटी को बढ़ा देगा गांव में आग लग जाए भीड़ है पर आग बुझाने के लिए पुलिस ही आएगी। हर जगह पुलिस पलक झपकते ही पहुंचनी चाहिए अगर जरा भी विलंब हो गया तो समाज का हर व्यक्ति पुलिस की आलोचना करते हुए थकता नहीं है ऐसी परिस्थितियों में तो हम यही राय देंगे कि खेती कर लो व्यापार कर लो भीख मांग लो पर पुलिस की नौकरी में ना आये। अगर आपने अपनी पैतृक जमीन प्याज कर घर बनवा लिया और कहीं उसकी फोटो सोशल मीडिया पर किसी ने डाल दी तो आप सबसे भ्रष्ट अधिकारी हो जाएंगे चाहे आपने जीवन में कभी एक चवन्नी भी रिश्वत में ना ली हो। यह मेरे व्यक्तिगत विचार है किसी भी विभाग अथवा किसी व्यक्ति से इनका कोई लेना देना नहीं है
गोरखपुर से बेहद दुखद खबर… कल गोरखपुर के कुसम्ही जंगल के पास तुर्रा नाले पर भीषण सड़क हादसे में एडीजी गोरखपुर के कार्यालय में तैनात दिवंगत 29 वर्षीय सिपाही विवेक कुमार सिंह की दर्दनाक मौत बेहद पीड़ादायक है विवेक एक कर्तव्यनिष्ठ, मिलनसार युवा अधिकारी थे।ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति दे और शोक संतप्त परिवार को इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति प्रदान करे। #Gorakhpur#कुसम्ही_जंगल#सड़क_हादसा#PoliceNews#UPPolice#VivekKumarSingh #श्रद्धांजलि#दुखद_खबर#BreakingNews#UPPolice UP Police Sunil Dutt Dubey
DSP Sunil Dutt Dubey
यूपी के जनपद मऊ के घोसी थाने की जीप को डीसीएम द्वारा बनिया पार तिराहे पर टक्कर मारने के कारण मुख्य आरक्षी चालक पवन कुमार यादव की दुखद मृत्यु व SI विनोद कुमार सिंह ,HC प्रीतम कुमार यादव व पीआरडी ओमप्रकाश के गंभीर रूप से घायल होने पर पुलिस विभाग दुखी है।सभी घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हैं।
दिवंगत आत्मा को विनम्र श्रद्धांजलि एवं भगवान से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दे और परिवार को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करे ॐ शांति शांति शांति
#UPPolice #maupolice #maunews
8 hours ago | [YT] | 4
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DSP Sunil Dutt Dubey
बचपन से ही मेरा उद्देश्य हमेशा थोड़ा अलग हटकर रहा...जिंदगी जीना स्वयं की निर्धारित शर्तों पर... चाहे परिवार का परिवेश अथवा हॉस्टल की जिंदगी ..... केवल एक ही उद्देश्य.... सामने जरूरतमंद को देखकर उसकी मदद करना ।भले ही कैरियर पर उसका कोई असर पड़ा हो . सिविल सर्विस मुख्य परीक्षा का सुबह पेपर था रात में गर्ल्स हॉस्टल से खबर आई की एक सहपाठिनी की तबीयत खराब हो गई तत्काल लेकर अस्पताल उसके परिजनों के आने का इंतजार करता रहा पेपर खराब हुआ पर कोई अफसोस नहीं... दूसरों की मदद करने के जुनून ने हमें हमेशा एक प्रेरक की तरह गतिशील ही रखा। जनपद इटावा के दस्युग्रस्त बीहड़ में बसे गांव ...जहां पर उस समय...अधिकतर समाज के प्रबुद्ध लोग हमेशा एक दूसरे को उलझाने में ही व्यस्त रहते ...वहां से निकलकर हॉस्टल तक का सफ़र यकीनन आसान तो नही था मेरे लिए। पर वक्त व पारिवारिक पृष्ठभूमि ने कोई रुकावट पैदा नहीं होने दी। पुलिस की सेवा में आने के बाद भी मैंने जनउपयोगी जो भी कार्य किए उसने मुझे समाज में एक प्रसिद्ध तो दिलाई परंतु आलोचकों की एक फौज भी तैयार कर दी जहां मेरी छोटी सी कमी भी दिखती है तो आलोचक आलोचना करने से बाज नहीं आते हैं पहले तो आश्चर्य होता था कि फला व्यक्ति मेरे पीछे क्यों पड़ा है पर अब समझ में आ गया कि अगर आप उन्नति के शिखर पर पहुंच गए तो आलोचक अपने आप पैदा हो जाएंगे। इस वक्त मेरे करीब डेढ़ करोड़ फॉलोअर्स है जो मुझे दिल से चाहते हैं जिनके मैं दिल में हूं और करीब इतने ही मेरे आलोचक भी होंगे जिनके में दिमाग में हूं इस तरह से मैं 3 करोड लोगों के दिलों दिमाग में बसा हूं यही मेरे लिए गौरव की बात है वक्त को सब कुछ सौंप...मैं कर्म और कर्तव्य के बीच सेतु का काम करने वाले अपने सनातन धर्म का हमेशा अनुयायी बना रहा।व्रत-त्यौहार दर्शन पूजन के साथ मेरा हमेशा घनिष्ट सम्बंध बना रहा। अपने हिन्दू-धर्म के सारे अनुष्ठानों के साथ मैं पवित्रता-पूर्वक अपने कर्तव्यों का निर्वहन करता रहा।
पिक्चर वाराणसी में नियुक्ति के दौरान ली गई है।
18 hours ago | [YT] | 14
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DSP Sunil Dutt Dubey
आप कितने भी अच्छे कार्य कर लें पर फिर भी पुलिस के प्रति आमजन के सीने में जो नफरत भर दी गई है उसको कम करना मुश्किल ही नहीं असंभव है क्योंकि पुलिस एक बहुत बड़ा संगठन है और इस संगठन में समाज से ही लोग आते हैं समाज में नैतिकता का अभाव है लोग संस्कार पाने के लिए नहीं नौकरी पाने के लिए शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं डिग्रियों का अम्बार लगा हुआ है पर ज्ञान की निरंतर कमी होती जा गई होती जा रही। डिग्री लेकर नौकरी तो पा जा रहे हैं पर संवेदनशीलता और नैतिकता कहां से आएगी जब उन्होंने उसको सीखा ही नहीं है। भ्रष्टाचार रिश्वतखोरी काम चोरी और असंवेदनशीलता कोई विभाग नहीं सिखाता है न हीं किसी ट्रेनिंग में इसका प्रशिक्षण दिया जाता है यह आपके मां-बाप व गुरु के ही आपको सिखा सकते हैं और ऐसे ही संस्कार विहीन नैतिकता बिन संवेदनशील व्यक्ति पुलिस में आ जाते हैं तो वह पुलिस के लिए एक कोढ़ बन जाते हैं एक उदाहरण बन जाते हैं उनकी वजह से पूरे पुलिस संगठन को जो नफरत का सैलाब झेलना पड़ता है वह बहुत ही कष्ट दायक है और पुलिस में जो अच्छे लोग भी आ जाते हैं तो पुलिस के कार्य ऐसे हैं जो आपको सही काम करते हुए भी प्रशंसा का पात्र नहीं बना सकते हैं क्यो कि इस समाज में प्रत्येक व्यक्ति चाहता है कि उसके हिसाब से कानून बने उसके लाभ के लिए योजनाएं बने और वह जो कह रहा है उसको जो अच्छा लग रहा है वही प्रशासन करें पर पुलिस हर मर्ज की दवा नहीं हो सकती है और उम्मीद पर किसी भी देश की पुलिस खरा नहीं उतर सकती है मैंने अक्सर महसूस किया है की जनसुनवाई में इस तरह के प्रकरण आ जाते हैं इसके समाधान के लिए अगर ब्रह्मा विष्णु महेश के रूप में भगवान भी उतर आए तो भी उन समस्याओं का समाधान उनके बस में नहीं है समाज रुपी समंदर में अगर हम प्रशंसा की मछली ढूंढना चाहते हैं तो आप भ्रम में है क्योंकि यहां लोग तो भगवान के पास भी मिठाई इस आशा में लेकर जाते हैं कि उनसे कुछ मांग लेंगे। गंगा में पाप धुलने के लिए जाते हैं पर गंगा में नहाकर पुनः पाप करने लगते हैं कुछ लोग तो गंगा के तट पर ही शिकार ढूंढने लगते हैं अगर हम इस समाज के लिए अपनी जान निकल कर भी दे देंगे तो वह लोग तब भी मेरी प्रशंसा नहीं करेंगे बल्कि मुझे आर्गन डोनेशन समझ कर मेरी किडनी को बेचकर उसे पैसा कमा लेंगे और फिर इंतजार करेंगे कि यह पुलिस वाले मुझे अपनी दूसरी किडनी भी कब भेंट करेगें जनता से प्रशंसा की उम्मीद करना इस तरह से है जैसे किसी हलवाई से उम्मीद कि वो अपनी दुकान पर 'शुगर-फ्री' लड्डू बेचेगा। या कोई मधुमक्खी आपको काटने के बाद आपसे सॉरी बोलेगी तो हमेशा अलर्ट रहिए जो लोग आज आपको सिंघम और नायक बना रहे हैं वो ही आपकी एक छोटी सी गलती के कारण आपको खलनायक बनाने में कोई कोर कसर नहीं रखेंगे इसलिए कोई अगर आपकी आरती भी उतारे तो देख लीजिए कहीं वह यह तो नहीं देखना चाहता है कि आपके गले में सोने की चेन तो नहीं है। अगर आपने कोई अच्छा सा घर बनवा लिया कोई अच्छी सी गाड़ी खरीद ली या कहीं अपनी पैतृक संपत्ति से कोई व्यवसाय कर लिया तो वह आपकी हैसियत को नहीं समझेंगे उसको रिश्वत का माल समझेंगे। अगर आपने किसी को अपने घर में निमंत्रण खाने के लिए या प्रेम या अपना समझ कर बुला भी लिया तो बाहर जाकर वह यही कहेगा कि पर्दे कितने महंगे थे फर्नीचर कितना शानदार था बाथरूम कितना आलीशान था। और वह आपकी मेहनत आपकी हैसियत अथवा आपकी पैतृक पृष्ठभूमि नहीं देखेगा वह उसको रिश्वत का माल समझेगा इसलिए इन सब चीजों से घबराने की आवश्यकता नहीं है यह समाज है इसके लिए आप कुछ भी करें समाज से आपको कुछ मिलने वाला नहीं है अगर विश्वास ना हो तो इसी मेरी पोस्ट पर लोगों के कमेंट पढ़ सकते हैं। कुछ बस पूर्व मेरी आज तक चैनल की मशहूर एंकर व उप संपादक श्रीमती श्वेता सिंह से विचारों का आदान-प्रदान हुआ था और यह तस्वीर उसी समय की है।
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2 days ago | [YT] | 55
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DSP Sunil Dutt Dubey
जनपद महाराजगंज के घुघली थाने के लग्नशील, अनुशासनप्रिय और कर्मठ दीवान जी (हेड कांस्टेबल) सुरेन्द्र शर्मा को प्रोन्नति पाकर दरोगा (सब इंस्पेक्टर) बनने पर हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं।
1 week ago | [YT] | 30
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DSP Sunil Dutt Dubey
मध्य प्रदेश के मुरेना की रहने वाली कक्षा 12 में प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली श्रुति तोमर की कहानी सुनकर आपकी आंखें नम हो जाएंगी पर यह अनेकों छात्र-छात्राओं के लिए एक प्रेरणादायक घटना है श्रुति तोमर के चाचा का एक्सीडेंट हुआ और श्रुति के पिता जी दिल्ली में अस्पताल में भर्ती अपने भाई को देखने के लिए जा रहे थे तभी रास्ते में एक भयंकर दुर्घटना ने काल के क्रूर हाथों ने उनको छीन लिया। श्रुति तोमर की मां अपने जीवन में आये अचानक इस अपार दुख को सहन नहीं कर सकी और शव को देखते ही कार्डियक अटैक से उनकी भी मृत्यु हो गई श्रुति तोमर की जिंदगी का एक मात्र सहारा उसकी दादी ही बची थी जिन्हे वक्त ने इतना बड़ा दर्द दिया था जो कभी कम नहीं हो सकता था पर श्रुति ने साहस और मेहनत से वो सफलता पाई है जिसकी कल्पना किसी ने नही की थी श्रुति के माता पिता भी स्वर्ग से देख रहे होंगे तो ईश्वर से यही कह रहे होंगे कि एक पल के लिए बेटी से मिलकर आने की अनुमति दे दो। आज भी दादी की आंखों में आंसू है पर वह दुख के नहीं खुशी के आंसू है। बेटी श्रुति तोमर को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं और दिल से आशीर्वाद।
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1 week ago | [YT] | 31
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DSP Sunil Dutt Dubey
हमारे परम प्रिय अधिकारी जिनका स्नेह हमेशा हमारे साथ रहा है श्री ज्ञान प्रकाश राय सर को अपर पुलिस अधीक्षक फतेहपुर बनने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
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2 weeks ago | [YT] | 52
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DSP Sunil Dutt Dubey
बरेली जिला पुलिस ने बरिषठ पुलिस अधीक्षक बरेली द्वारा थाना इंचार्जो के कार्य क्षेत्र में परिवर्तन किया गया है। अच्छी परफॉर्मेंस न देने वाले थाना प्रभारी कम महत्व के स्थानों पर भेजे गये है।
3 weeks ago | [YT] | 22
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DSP Sunil Dutt Dubey
इच्छामृत्यु
राणा की खामोश होती सांसें, बेटे को जाते देख टूट रहा पिता का दिल, थम नहीं रहे परिजनों के आंसू।
परिवार की बेबसी और उम्मीद की एक ऐसी कहानी का अंत हो गया।
यह सिर्फ एक मरीज की कहानी नहीं, बल्कि परिवार की लंबी जद्दोजहद, विज्ञान की सीमाओं और मौत के बाद भी जिंदा रहने वाली उम्मीद की कहानी है। हरीश के माता-पिता ने सालों तक इंतजार किया, लेकिन अब वे भी मान चुके हैं कि यह उनके बेटे के लिए बेहतर है। डॉक्टरों की टीम आखिरी पलों को आसान बनाने में जुटी है।
गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा पंजाब यूनिवर्सिटी का टापर था 18 साल की उम्र में हास्टल की छत से गिरने के कारण कामा में चला गया था आज हरीश राणा ने एम्स में अंतिम सांस ली है। भारत में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति पाने वाले पहले व्यक्ति हरीश राणा का मंगलवार को एम्स-दिल्ली में 13 साल से अधिक समय तक कोमा में रहने के बाद निधन हो गया। हरीश राणा की उम्र 31 साल थी। वह 13 साल से कोमा में थे। सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को इच्छामृत्यु की इजाजत दी थी।
हरीश राणा को एम्स में पैसिव यूथेनेशिया दिया गया। इस प्रक्रिया का मतलब होता है कि किसी गंभीर रूप से बीमार मरीज को जिंदा रखने के लिए जो बाहरी लाइफ सपोर्ट या इलाज दिया जा रहा है, उसे रोक दिया जाए या हटा लिया जाए, ताकि मरीज की नेचुरल डेथ हो सके।
एम्स के इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर अस्पताल (आईआरसीएच) के पैलिएटिव केयर वार्ड में भर्ती गाजियाबाद के हरीश राणा ने आखिरकार दुनिया को अलविदा कह दिया।
1 month ago | [YT] | 23
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DSP Sunil Dutt Dubey
यूपीएससी अथवा यूपीपीसीएस में सम्मिलित होने वाले प्रतियोगी छात्र छात्राओं के लिए पुलिस विभाग यानी आईपीएस या पीपीएस सेकंड चॉइस होती थी। पर अब बहुत सारे प्रतियोगी छात्र पुलिस को काफी नीचे रख रहे हैं और अक्सर यह कहा जा रहा है की अगर किसी के पास कोई विकल्प है तो वह पुलिस सेवा का चयन नहीं करना चाहता है और वेहतर विकल्प मिलने पर लोग पुलिस की नौकरी छोड़ रहे हैं — यह एक कड़वी सच्चाई है और इसके पीछे पुलिस की बदलती कार्यप्रणाली है पर उनकी अंतरात्मा के दुखों को सुनने वाला कोई नहीं है आज देशभर के थानों में पुलिस कर्मचारियों के मन में बढ़ती थकान, बेबसी और मोहभंग पर कोई चर्चा नहीं करना चाहता है पुलिस के बारे में अगर चर्चा होती है तो यही कि पुलिस भ्रष्ट है पुलिस कार्य नहीं कर रही है पुलिस किसी की सुनती नहीं है और पुलिस हर व्यक्ति के लिए एक जादू की छड़ी बन गयी है और पुलिस कर्मी अपनी नौकरियां छोड़ रहे या अपने बच्चो को अब पुलिस सेवा आने देना नही चाहते हैं पर ऐसा क्यों हो रहा है? इसको सोचने की किसी ने जरूरी ही नहीं समझा क्योंकि समाज में सरकारी नौकरी हर किसी को चाहिए चाहे वह उसके योग्य हो अथवा न हो पर अगर अच्छे लोग पुलिस में नहीं आएंगे तो धीरे-धीरे पुलिस विभाग में गिरावट आ जाएगी पुलिस में आने वालों में कमी नहीं दिखाई पड़ेगी पर अच्छे लोग दिखाई नहीं देंगे पुलिस के थाने अथवा पुलिस कार्यालय के चारों तरफ नौकरशाही का जाल फैल गया है पुलिस का कार्य जानमाल की सुरक्षा करना होता था पर अब जान माल की सुरक्षा के साथ-साथ पुलिस का कार्य रिपोर्ट तैयार करना फॉर्म भरना और दुनिया भर के डाटाअपलोड करना बन गया है। पूरे दिन फोटो भेजना प्रमाण पत्र देना रिपोर्ट अपलोड करना ” ई- साक्ष्य अपलोड, ऑनलाइन सीडी ,सीसीटीएनएस अपडेशन,ITSSO, eDAR अपलोड रोजमर्रा का कार्य है
अब फील्ड में उनकी उपस्थिति उतनी नहीं हो पाती है जितनी स्क्रीन के सामने होती है पुलिस बेसिक पुलिसिंग से हटकर तकनीक पर अत्यधिक निर्भर होती जा रही है हर कार्य में डिजिटल टूल, ऐप्स और स्मार्ट बोर्ड थोपे जा रहे हैं।विषय, कार्य स्थल की परिस्थितियां, सामाजिक संस्कृति, क्षेत्रीय विषमताएं या संदर्भ को बिना समझे आदेश दिए जाते हैं पुलिस कार्य प्रणाली से मानवीय स्पर्श, मूलभूत कार्य अब गायब हो गया है; पुलिस अब मशीन-केंद्रित बन गई है। फील्ड के सीओ इंस्पेक्टर व सब इंस्पेक्टर से लेकर बीट कांस्टेबल अपराधों के अनावरण में बेसिक पुलिसिंग से दूर होकर तकनीक पर निर्भर हो गए हैं सीसीटीवी कैमरा मोबाइल के सीडीआर अगर उपलब्ध नहीं है तो पुलिस के लिए कोई भी केस का अनावरण एक टेढ़ी खीर हो गया है इसके अतिरिक्त पुलिस को अब एक इवेंट मैनेजर की तरह कार्य भी करना पड़ रहा है हर दिन कोई न कोई दिवस मनाना होता है जैसे योग दिवस, राष्ट्रीय एकता दिवस मातृभाषा दिवस, पर्यावरण दिवस आदि और धीरे अब पुलिस में गुणवत्ता नहीं, बल्कि कार्यक्रमों की संख्या और दिखावा ही सफलता का पैमाना बनता जा रहा है पुलिस अधिकारी और कर्मचारी दोनों इस प्रदर्शन संस्कृति के जाल में फंसे हुए हैं।
लोगों को जान माल की सुरक्षा के साथ-साथ उन्हे विद्यालयों में आत्म रक्षा प्रशिक्षण, शक्ति मिशन साइबर सुरक्षा अभियान, पॉक्सो एक्ट की जानकारी देना, ऑपरेशन गरिमा, सीएलजी मीटिंग्स, सुरक्षा सखी, ग्राम रक्षा दल, ट्रांसजेंडर लोगो के सम्मेलन करवाने के अलावा भिक्षा वृत्ति उन्मूलन, सड़क सुरक्षा, त्रिनेत्र अभियान कमांड कैमरों की निगरानी करनी पड़ती है। पुलिस को यह बताना है कि आप खुली लावारिस गाड़ी पार्क ना करें सीसीटीवी कैमरा लगवाएं घर को अकेला ना छोड़े किसी पुलिस अधिकारी के नाम से कॉल आने पर उसको पैसा ट्रांसफर ना करें किसी लालच में ना पड़े किसी साइबर अपराधी की कॉल को भली बात चेक कर लें एपीके फाइल डाउनलोड ना करें नौकरी दिलाने के नाम पर किसी को पैसा ना दें। हेलमेट लगाकर चले सीट बेल्ट लगाए ओवरलोडिंग ना करें वाहनो में ज्यादा सवारी ना बैठाये यातायात के नियमों का पालन करे यही सब सलाह देने में पुलिस का आधा समय नष्ट हो जा रहा है और लगातार फिल्मों से सोशल मीडिया पर हो रही आलोचनाओं ने पुलिस कर्मियों का आत्मविश्वास तोड़ दिया है। कहीं भी किसी भी जगह कोई पुलिसकर्मी घूस लेते रिश्वत लेते पकड़ा जाता है तो सोशल मीडिया पर इस तरह की पोस्ट डाली जाती है जैसे लगता है कि पूरा पुलिस विभाग ही भ्रष्ट है जबकि उसको पुलिस विभाग के लोग ही पकडते हैं और यह कोशिश करते हैं कि विभाग में एक संदेश जाए पर किसी अच्छे कार्य को कभी भी किसी सोशल मीडिया पर किसी के द्वारा दिखाया गया हो यह बहुत कम है अच्छे और मानवीय कार्यों को स्वयं ही दिखाना पड़ता है पहले पुलिस के सिपाही एक विश्वसनीय साक्षय होते थे कहा जाता था कि मेरी ना मानो तो सिपहिया से पूछो पर अब तो हर काम का सबूत मांगा जाता है —पुलिस का विश्वास समाप्त हो गया है।तनाव और व्यवहारिक समस्याओं से जूझते-जूझते पुलिस कर्मी भावनात्मक रूप से थक चुके हैं।माता-पिता, परिवार की परवरिश तो दूर मिलने का भी संकट रहता है,सामाजिक कार्यक्रमों में उपस्थिति तो हो ही नहीं पाती है और इसके बावजूद इन सभी की अवास्तविक अपेक्षाएं जिससे हर समय मानसिक दबाव झेलना पड़ता है। भले ही कहा जाता है कि आंकड़े का कोई महत्व नहीं है पर सच यह है कि थाना पर आंकड़े पूरा करने का भारी दबाव रहता है। अपराध के पंजीकरण को बहुत ही सरल बना दिया गया है पर आंकड़े लेकर हर व्यक्ति पुलिस विभाग के पीछे पड़ा हुआ है कोई भी अपराध होने पर संबंधित पुलिस अधिकारी पर इतना दबाव रहता है जैसे लगता है कि उसी ने ही अपराध किया हो अगर फिर ना लिखें तो बवाल फर्जी लिख जाए तो बवाल पुलिस की नौकरी साधारण नौकर एक दुधारू तलवार पर चलने जैसी हो गई है जिसमें तलवार की धार पर चलना भी और कटने से बचाना भी है अनर्गल कार्यों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, चाहे उसकी जरूरत हो या नहीं, चाहे वे पुलिस से संबंधित है या नहीं। बाढ़ आ गई है नहर की पुलिया टूट गई है बिजली नहीं आ रही है लोगों ने अतिक्रमण कर रखा है तेंदुआ गांव में घुस आया है जाम लगा है हर कार्य में पुलिस की उपस्थिति अनिवार्य हो गई है बारात जा रही है सड़क जाम है पुलिस को ही आकर बताना है कि भैय्या बारात किनारे से ले जाएं पुलिस विभाग से अब समाज कल्याण विभाग के कार्य कराये जाने की अपेक्षा सभी ने पाल रखी है। पुलिस की दुखती रग पर कोई हाथ नहीं रखना चाह रहा है बस सभी को पुलिस भ्रष्ट बेईमान अकर्मण्य निकम्मी दिखाई पड़ रही है पुलिस हर व्यक्ति के लिए एक जादू की छड़ी बनी हुई है पति पत्नी का झगड़ा हो शिक्षित युवा लडकी अपनी मर्जी से अपने दोस्त के साथ घर से चली जाएगी पर ढूंढना पुलिस को ही है सड़क पर दुर्घटना हो जाए भीड़ इकट्ठी हो वीडियो बना रहे हैं पर घायलों को अस्पताल भिजवाना तो पुलिस का काम है अगर पुलिस देर से पहुंचे तो आक्रोश पुलिस कोई झेलना पड़ता है भले ही उसकी सूचना देर से मिली हो कोहरे में बसे लड़ जाए पर पुलिस दिल से पहुंची तो सोशल मीडिया पर पुलिस सबको खलनायक लगने लगती है जैसे लगता है कि कोहरे में पुलिस की आंखों में कोई ऐसा लेंस लगा है जो विजिबिलिटी को बढ़ा देगा गांव में आग लग जाए भीड़ है पर आग बुझाने के लिए पुलिस ही आएगी। हर जगह पुलिस पलक झपकते ही पहुंचनी चाहिए अगर जरा भी विलंब हो गया तो समाज का हर व्यक्ति पुलिस की आलोचना करते हुए थकता नहीं है ऐसी परिस्थितियों में तो हम यही राय देंगे कि खेती कर लो व्यापार कर लो भीख मांग लो पर पुलिस की नौकरी में ना आये। अगर आपने अपनी पैतृक जमीन प्याज कर घर बनवा लिया और कहीं उसकी फोटो सोशल मीडिया पर किसी ने डाल दी तो आप सबसे भ्रष्ट अधिकारी हो जाएंगे चाहे आपने जीवन में कभी एक चवन्नी भी रिश्वत में ना ली हो। यह मेरे व्यक्तिगत विचार है किसी भी विभाग अथवा किसी व्यक्ति से इनका कोई लेना देना नहीं है
1 month ago | [YT] | 60
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DSP Sunil Dutt Dubey
गोरखपुर से बेहद दुखद खबर…
कल गोरखपुर के कुसम्ही जंगल के पास तुर्रा नाले पर भीषण सड़क हादसे में एडीजी गोरखपुर के कार्यालय में तैनात दिवंगत 29 वर्षीय सिपाही विवेक कुमार सिंह की दर्दनाक मौत बेहद पीड़ादायक है
विवेक एक कर्तव्यनिष्ठ, मिलनसार युवा अधिकारी थे।ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति दे और शोक संतप्त परिवार को इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति प्रदान करे।
#Gorakhpur #कुसम्ही_जंगल #सड़क_हादसा #PoliceNews #UPPolice #VivekKumarSingh
#श्रद्धांजलि #दुखद_खबर #BreakingNews #UPPolice UP Police Sunil Dutt Dubey
1 month ago | [YT] | 35
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