झूठे मुकदमों के बोझ से आज देश का पुरुष वर्ग गम्भीर रूप से दबा हुआ है। वैवाहिक विवादों, पारिवारिक मामलों और आपराधिक धाराओं के दुरुपयोग के कारण हज़ारों निर्दोष पुरुष वर्षों तक न्याय का इंतज़ार करते हैं।
इसी विषय को लेकर लीगल रिपोर्टर के एडिटर विप्लव अवस्थी ने केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री, बीजेपी के यूपी अध्यक्ष व 7 बार के सांसद श्री पंकज चौधरी जी से मुलाक़ात कर देश में बढ़ते झूठे मुकदमों की वास्तविक स्थिति, न्यायालयों में लंबित मामलों के आँकड़े और इसके सामाजिक दुष्परिणामों की विस्तृत जानकारी साझा की।
केन्द्रीय मंत्री श्री पंकज चौधरी जी ने इस गम्भीर विषय पर ध्यान देने और उचित स्तर पर विचार का आश्वासन दिया है।
अब समय आ गया है कि संसद पुरुष आयोग के गठन को लेकर ठोस क़ानून लाए, ताकि झूठे मुकदमों पर रोक लगे और निर्दोष नागरिकों को न्याय मिल सके।
आप क्या सोचते हैं?
क्या भारत को पुरुष आयोग की आवश्यकता है? अपनी राय अवश्य दें।
मैट्रीमोनियल विवाद या “पैकेज केस”? आज वैवाहिक विवादों में एक चिंताजनक प्रवृत्ति सामने आ रही है। कई मामलों में पुरुषों और उनके पूरे परिवार के खिलाफ एक साथ कई मुकदमे दर्ज कराए जा रहे हैं— ▪️ IPC 498A ▪️ मारपीट के आरोप ▪️ स्त्रीधन रखने का आरोप ▪️ ससुर, जेठ, देवर पर गलत तरीके से छूने के आरोप ▪️ कुछ मामलों में रेप की कोशिश तक ▪️ DV Act ▪️ Maintenance की मांग सवाल यह नहीं है कि कानून क्यों हैं — सवाल यह है कि कानूनों का उपयोग हो रहा है या दुरुपयोग? क्या हर केस में बिना प्रारंभिक जांच यह मान लेना सही है कि 👉 सभी आरोप स्वतः सत्य हैं? 👉 पूरा परिवार एक साथ अपराधी है? अदालतों में सालों तक चलने वाली इन कार्यवाहियों में 🔹 बुज़ुर्ग माता-पिता 🔹 अविवाहित भाई-बहन 🔹 दूर रहने वाले रिश्तेदार सब एक साथ फँस जाते हैं। क्या न्याय केवल आरोप लगाने से हो जाना चाहिए, या आरोप के पीछे के उद्देश्य को भी देखा जाना चाहिए? यह पोस्ट महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ नहीं, बल्कि न्याय के संतुलन की माँग है। कानून की आत्मा संरक्षण है, लेकिन जब वही कानून दबाव और सौदेबाज़ी का हथियार बन जाए— तो सवाल उठना ज़रूरी है। आप क्या सोचते हैं? क्या अदालतों को इन “पैकेज मुकदमों” के पीछे की मंशा पर भी विचार नहीं करना चाहिए? — विप्लव अवस्थी Advocate & Legal Reporter
498A का झूठा मुकदमा करने वाली IPS का माफीनामा अपने पति और ससुराल वालों के लिए... पूरा पढ़े
2022 बैच की IPS अधिकारी शिवांगी गोयल…जब ये IPS बनी तब मीडिया में शिवांगी ने कहा कि मैं घरेलु उत्पीड़न का शिकार रही हूं उसने मुझे IPS बनने की प्रेरणा दी..लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि घरेलु उत्पीड़न का शिकार वो नहीं थी बल्कि उन्होंने इसके नाम पर अपने पति और उनके माता पिता का उत्पीड़न किया…अब उनको सार्वजनिक माफी अख़बारोमें छपवानी पडी हैं..आइए समझतेहैं क्या मामला है शिवांगी की शादी दिल्ली बेस्ड बिजनेसमैन से 2015 में हो गई. उनका आरोप था कि ससुराल वाले उन्हें प्रताड़ित करते थे. 7 साल की बेटी को लेकर शिवांगी वापस अपने घर आ गईं. पिताजी ने कहा जो करना चाहती हो कर लो. शिवांगी के मन में आया क्यों न फिर से यूपीएससी की तैयारी की जाए. क्या पता मैं आईएएस बन जाऊं. 170वीं रैंक हासिल कर भी ली. पत्रकारों से बात करते हुए शिवांगी ने जो कहा उससे मिसाल बनीं कि प्रताड़ना के बाद भी महिलाएं अपनी पहचान खोज सकती हैं. शिवांगी ने भी अपनी कहानी को वैसा ही प्रेजेंट किया. कहा था कि मैं समाज की उन शादीशुदा महिलाओं को यह संदेश देना चाहती हूं कि यदि उनके साथ ससुराल में कुछ भी गलत हो तो वह डरें नहीं. उन्हें अपने पैरों पर खड़े होकर दिखाना चाहिए. महिलाएं चाहें तो कुछ भी कर सकती हैं. शिवांगी को रोल मॉडल की तरह देखा गया था. लेकिन 3 साल बाद सुप्रीम कोर्ट में जब शिवांगी गोयल का मामला आया तो गजब फजीहत हो गई. दरअसल शिवांगी ने अपने पति और उसके पूरे परिवार पर कुल छह आपराधिक केस किए थे. इनमें गंभीर धाराएं शामिल थीं. जैसे आईपीसी की धारा 498ए, घरेलू हिंसा, 307 यानी हत्या की कोशिश, 376 यानी यौन उत्पीड़न और 406 विश्वासघात. इनसे अलग तीन केस घरेलू हिंसा कानून के तहत और फैमिली कोर्ट में तलाक, भत्ते जैसे मामले भी दायर किए गए थे. इन्हीं मामलों के चलते शिवांगी के पूर्व पति को 109 दिनों के लिए जेल रहना पड़ा और ससुर को 103 दिनों के लिए. समझ यह आया कि महिला आईपीएस, एक अधिकारी ने अपने पूर्व पति और ससुराल वालों को झूठे मुकदमे में फंसाकर जेल भिजवा दिया था..शिवांगी ने यहां तक अपने पिता तुल्य ससुर पर आरोप लगाया कि वो उनके साथ अप्राकृतिक यौन संबंध बनाए..सोचिए इस तरह का आरोप लगाकर शिवांगी को नींद कैसे आती होगी.. वकीलों को भी नमन है कि ऐसे आरोप लगवाते हैं..वो भी बिना जांच के…अब शिवांगी के साथ उन पुलिस पर भी कार्रवाई होनी चाहिए जिसने बिना जांच किए ऐसी धारा लगाई..
Legal Reporter
भारत में पुरुष आयोग की तुरन्त आवश्यकता
झूठे मुकदमों के बोझ से आज देश का पुरुष वर्ग गम्भीर रूप से दबा हुआ है। वैवाहिक विवादों, पारिवारिक मामलों और आपराधिक धाराओं के दुरुपयोग के कारण हज़ारों निर्दोष पुरुष वर्षों तक न्याय का इंतज़ार करते हैं।
इसी विषय को लेकर लीगल रिपोर्टर के एडिटर विप्लव अवस्थी ने केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री, बीजेपी के यूपी अध्यक्ष व 7 बार के सांसद श्री पंकज चौधरी जी से मुलाक़ात कर देश में बढ़ते झूठे मुकदमों की वास्तविक स्थिति, न्यायालयों में लंबित मामलों के आँकड़े और इसके सामाजिक दुष्परिणामों की विस्तृत जानकारी साझा की।
केन्द्रीय मंत्री श्री पंकज चौधरी जी ने इस गम्भीर विषय पर ध्यान देने और उचित स्तर पर विचार का आश्वासन दिया है।
अब समय आ गया है कि संसद पुरुष आयोग के गठन को लेकर ठोस क़ानून लाए, ताकि झूठे मुकदमों पर रोक लगे और निर्दोष नागरिकों को न्याय मिल सके।
आप क्या सोचते हैं?
क्या भारत को पुरुष आयोग की आवश्यकता है?
अपनी राय अवश्य दें।
1 week ago | [YT] | 289
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Legal Reporter
बड़े और लंबे-लंबे फैसले : न्याय या प्रदर्शन?
आज न्याय व्यवस्था में एक गंभीर सवाल खड़ा होता है —
क्या बड़े और अत्यधिक लंबे फैसले वास्तव में न्याय को मजबूत करते हैं?
हकीकत यह है कि
लंबे फैसलों से न तो समाज का कोई ठोस भला होता है
और न ही भविष्य के लिए कोई व्यावहारिक दिशा तय होती है।
अक्सर ऐसे फैसले
केवल न्यायिक बुद्धिमत्ता के प्रदर्शन तक सीमित रह जाते हैं,
जबकि आम नागरिक के लिए
इनका परिणाम सिर्फ़ एक होता है —
मुकदमों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी।
न्याय का उद्देश्य सरल, स्पष्ट और समयबद्ध समाधान होना चाहिए,
न कि ऐसी जटिलता जो न्याय को ही बोझ बना दे।
— Viplava Awasthi
Advocate | Editor | Legal Reporter
2 weeks ago | [YT] | 73
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Legal Reporter
मैट्रीमोनियल विवाद या “पैकेज केस”?
आज वैवाहिक विवादों में एक चिंताजनक प्रवृत्ति सामने आ रही है।
कई मामलों में पुरुषों और उनके पूरे परिवार के खिलाफ एक साथ कई मुकदमे दर्ज कराए जा रहे हैं—
▪️ IPC 498A
▪️ मारपीट के आरोप
▪️ स्त्रीधन रखने का आरोप
▪️ ससुर, जेठ, देवर पर गलत तरीके से छूने के आरोप
▪️ कुछ मामलों में रेप की कोशिश तक
▪️ DV Act
▪️ Maintenance की मांग
सवाल यह नहीं है कि कानून क्यों हैं —
सवाल यह है कि कानूनों का उपयोग हो रहा है या दुरुपयोग?
क्या हर केस में बिना प्रारंभिक जांच यह मान लेना सही है कि
👉 सभी आरोप स्वतः सत्य हैं?
👉 पूरा परिवार एक साथ अपराधी है?
अदालतों में सालों तक चलने वाली इन कार्यवाहियों में
🔹 बुज़ुर्ग माता-पिता
🔹 अविवाहित भाई-बहन
🔹 दूर रहने वाले रिश्तेदार
सब एक साथ फँस जाते हैं।
क्या न्याय केवल आरोप लगाने से हो जाना चाहिए,
या आरोप के पीछे के उद्देश्य को भी देखा जाना चाहिए?
यह पोस्ट महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ नहीं,
बल्कि न्याय के संतुलन की माँग है।
कानून की आत्मा संरक्षण है,
लेकिन जब वही कानून दबाव और सौदेबाज़ी का हथियार बन जाए—
तो सवाल उठना ज़रूरी है।
आप क्या सोचते हैं?
क्या अदालतों को इन “पैकेज मुकदमों” के पीछे की मंशा पर भी विचार नहीं करना चाहिए?
—
विप्लव अवस्थी
Advocate & Legal Reporter
2 weeks ago | [YT] | 71
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Legal Reporter
आप क्या सोचते हैं? कमेंट करके जरुर बताए और अपनी आवाज़ संसद तक पहुंचाएं 🙏
3 weeks ago | [YT] | 244
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Legal Reporter
Happy Advocate Day to all Advocates friends 🎉🎊🎂
2 months ago | [YT] | 9
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Legal Reporter
498A का झूठा मुकदमा करने वाली IPS का माफीनामा अपने पति और ससुराल वालों के लिए... पूरा पढ़े
2022 बैच की IPS अधिकारी शिवांगी गोयल…जब ये IPS बनी तब मीडिया में शिवांगी ने कहा कि मैं घरेलु उत्पीड़न का शिकार रही हूं उसने मुझे IPS बनने की प्रेरणा दी..लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि घरेलु उत्पीड़न का शिकार वो नहीं थी बल्कि उन्होंने इसके नाम पर अपने पति और उनके माता पिता का उत्पीड़न किया…अब उनको सार्वजनिक माफी अख़बारोमें छपवानी पडी हैं..आइए समझतेहैं क्या मामला है
शिवांगी की शादी दिल्ली बेस्ड बिजनेसमैन से 2015 में हो गई. उनका आरोप था कि ससुराल वाले उन्हें प्रताड़ित करते थे. 7 साल की बेटी को लेकर शिवांगी वापस अपने घर आ गईं. पिताजी ने कहा जो करना चाहती हो कर लो. शिवांगी के मन में आया क्यों न फिर से यूपीएससी की तैयारी की जाए. क्या पता मैं आईएएस बन जाऊं. 170वीं रैंक हासिल कर भी ली.
पत्रकारों से बात करते हुए शिवांगी ने जो कहा उससे मिसाल बनीं कि प्रताड़ना के बाद भी महिलाएं अपनी पहचान खोज सकती हैं. शिवांगी ने भी अपनी कहानी को वैसा ही प्रेजेंट किया. कहा था कि मैं समाज की उन शादीशुदा महिलाओं को यह संदेश देना चाहती हूं कि यदि उनके साथ ससुराल में कुछ भी गलत हो तो वह डरें नहीं. उन्हें अपने पैरों पर खड़े होकर दिखाना चाहिए. महिलाएं चाहें तो कुछ भी कर सकती हैं. शिवांगी को रोल मॉडल की तरह देखा गया था.
लेकिन 3 साल बाद सुप्रीम कोर्ट में जब शिवांगी गोयल का मामला आया तो गजब फजीहत हो गई. दरअसल शिवांगी ने अपने पति और उसके पूरे परिवार पर कुल छह आपराधिक केस किए थे. इनमें गंभीर धाराएं शामिल थीं. जैसे आईपीसी की धारा 498ए, घरेलू हिंसा, 307 यानी हत्या की कोशिश, 376 यानी यौन उत्पीड़न और 406 विश्वासघात. इनसे अलग तीन केस घरेलू हिंसा कानून के तहत और फैमिली कोर्ट में तलाक, भत्ते जैसे मामले भी दायर किए गए थे. इन्हीं मामलों के चलते शिवांगी के पूर्व पति को 109 दिनों के लिए जेल रहना पड़ा और ससुर को 103 दिनों के लिए. समझ यह आया कि महिला आईपीएस, एक अधिकारी ने अपने पूर्व पति और ससुराल वालों को झूठे मुकदमे में फंसाकर जेल भिजवा दिया था..शिवांगी ने यहां तक अपने पिता तुल्य ससुर पर आरोप लगाया कि वो उनके साथ अप्राकृतिक यौन संबंध बनाए..सोचिए इस तरह का आरोप लगाकर शिवांगी को नींद कैसे आती होगी.. वकीलों को भी नमन है कि ऐसे आरोप लगवाते हैं..वो भी बिना जांच के…अब शिवांगी के साथ उन पुलिस पर भी कार्रवाई होनी चाहिए जिसने बिना जांच किए ऐसी धारा लगाई..
6 months ago | [YT] | 45
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Legal Reporter
Atul Subhash की पत्नी समेत ससुराल वाले गिरफ्तार 👇👇 जज साहेब का नंबर कब आएगा या वो अपने रसूख से बच जाएंगी? कमेंट करें
1 year ago (edited) | [YT] | 1,063
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Legal Reporter
Tomorrow @10am only on @LegalReporter
1 year ago | [YT] | 8
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Legal Reporter
Legal Reporter ने आपके लिये जो लड़ाई शुरू की है उसमें हम पीछे नहीं होंगे, झूठे मुक़दमों के ख़िलाफ़ हमारा अभियान जारी रहेगा. जयहिन्द, जय संविधान 🙏🙏🙏
1 year ago | [YT] | 55
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Legal Reporter
Maintenance लॉ पर सीनियर वकील योगेश भसीन दे रहे हैं आपके हर सवाल का जवाब, पूरा वीडियो जल्द Legal Reporter चैनल पर। More Info Call 9318428656
1 year ago | [YT] | 50
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